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चिप्स टू स्टार्ट-अप कार्यक्रम से भारत की सेमीकंडक्टर उड़ान: स्वदेशी चिप डिजाइन में नया कीर्तिमान

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भारत अपने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूती देने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा संचालित चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम ने देश में स्वदेशी चिप डिजाइन, कौशल विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति दी है। यह कार्यक्रम भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर एक सशक्त भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर बन रहा है।

एक लाख से अधिक युवाओं को चिप डिजाइन प्रशिक्षण

अब तक देशभर में 1 लाख से अधिक छात्र, शोधकर्ता और पेशेवर चिप डिजाइन प्रशिक्षण से जुड़ चुके हैं, जिनमें से लगभग 67,000 को सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया जा चुका है। 400 से अधिक संस्थानों की भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर कौशल को लोकतांत्रिक बना रहा है।

ChipIN Centre और SCL से मिला ‘डिजाइन से सिलिकॉन’ तक का अनुभव

C-DAC बेंगलुरु स्थित ChipIN Centre के माध्यम से अब तक 6 साझा वेफर रन आयोजित किए गए, जिनमें 46 संस्थानों से 122 चिप डिजाइन सबमिशन प्राप्त हुए। इनमें से 56 छात्र-डिज़ाइन चिप्स को सफलतापूर्वक सेमी-कंडक्टर लैबोरेटरी (SCL), मोहाली में फैब्रिकेट, पैकेज और डिलीवर किया गया। यह छात्रों के लिए वास्तविक सिलिकॉन पर अपने डिज़ाइन को देखने का ऐतिहासिक अवसर है।

उद्योग-अकादमिक सहयोग से नवाचार को बढ़ावा

कार्यक्रम के तहत 265 से अधिक उद्योग-आधारित प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। परिणामस्वरूप, भागीदार संस्थानों द्वारा 75 से अधिक पेटेंट दायर किए गए हैं और 500 से अधिक IP कोर, ASIC और SoC डिज़ाइन विकसित किए जा रहे हैं, जिनका उपयोग रक्षा, दूरसंचार, ऑटोमोटिव, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाएगा।

राष्ट्रीय अवसंरचना से सशक्त प्रशिक्षण

छात्रों और संस्थानों को अत्याधुनिक EDA टूल्स, FPGA बोर्ड्स, PARAM उत्कर्ष सुपरकंप्यूटर की हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सुविधा और स्मार्ट लैब्स का लाभ दिया गया। इससे चिप डिजाइन, परीक्षण और प्रोटोटाइपिंग का व्यावहारिक अनुभव सुनिश्चित हुआ।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

₹250 करोड़ के परिव्यय वाला C2S कार्यक्रम न केवल 85,000 उद्योग-तैयार पेशेवर तैयार करने की दिशा में अग्रसर है, बल्कि स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा, तकनीक हस्तांतरण और अनुसंधान को भी सशक्त कर रहा है। यह पहल भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन में आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने की मजबूत नींव रखती है।

निष्कर्ष

चिप्स टू स्टार्ट-अप कार्यक्रम भारत की युवा प्रतिभा, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है। बड़े पैमाने पर कौशल विकास, वास्तविक चिप फैब्रिकेशन अनुभव और राष्ट्रीय अवसंरचना तक पहुंच के साथ यह कार्यक्रम भारत को भविष्य की सेमीकंडक्टर तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार कर रहा है।

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