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ओडिशा के मुंडाली में CISF के 57वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए गृह मंत्री अमित शाह, जवानों की भूमिका की सराहना

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ओडिशा के मुंडाली में आयोजित केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 57वें स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने CISF के तीन आवासीय परिसरों—कामरूप, नासिक और सीहोर—का शिलान्यास किया, जिनका निर्माण लगभग 890 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। साथ ही राजारहाट और दिल्ली में बने दो आवासीय परिसरों का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में धर्मेंद्र प्रधान,मोहन चरण माझी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। 

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि 56 वर्षों की यात्रा में CISF ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है, जो बल की समर्पण, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की कहानी है। उन्होंने कहा कि भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए औद्योगिक विकास आवश्यक है, और औद्योगिक विकास के लिए मजबूत औद्योगिक सुरक्षा बल की आवश्यकता होती है।

उन्होंने बताया कि CISF ने समय के साथ हर चुनौती से सीखते हुए खुद को आधुनिक बनाया है, जबकि अपनी परंपराओं को भी जीवित रखा है। आधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस होकर CISF हर प्रकार की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।

गृह मंत्री ने कहा कि भारत के औद्योगिक विकास की कल्पना CISF के बिना संभव नहीं है, क्योंकि यह बल हमेशा देश की सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ा रहा है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने हाल ही में देश के सभी बंदरगाहों की सुरक्षा भी CISF को सौंपने का निर्णय लिया है।

अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो महत्वपूर्ण संकल्पों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना और 2027 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना लक्ष्य है, जिसमें CISF एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि CISF के जवानों के बलिदान ने देश की आर्थिक मजबूती में बड़ा योगदान दिया है। पिछले 56 वर्षों में बल को 13,693 से अधिक वीरता और विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त हुए हैं, जो इसकी दक्षता और समर्पण का प्रमाण हैं।

गृह मंत्री ने बताया कि आज CISF देश के 70 हवाई अड्डों और 361 महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा कर रहा है। इसके अलावा ड्रोन सुरक्षा के लिए भी CISF को नोडल एजेंसी बनाया गया है। हाल के समय में कार्तव्य भवन, सेवा तीर्थ, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नवी मुंबई एयरपोर्ट, लेंगपुई एयरपोर्ट, जवाहरपुर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और भाखड़ा डैम जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा भी CISF को सौंपी गई है।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में नक्सल विरोधी अभियानों में CISF ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जल्द ही देश पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त होगा और सुरक्षा बल देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। 

यह समारोह CISF की गौरवशाली परंपरा, आधुनिक क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उसके अटूट समर्पण का प्रतीक रहा। 


वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान 2026 का आयोजन, भारत की समुद्री सोच पर जोर

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16 फरवरी 2026 को नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF), नई दिल्ली के 21वें स्थापना दिवस के अवसर पर वाइस एडमिरल के.के. नय्यर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह वार्षिक व्याख्यान भारत में समुद्री रणनीतिक सोच को बढ़ावा देने वाले वाइस एडमिरल नय्यर की विरासत को सम्मानित करता है।

कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल करंबीर सिंह के उद्घाटन संबोधन से हुई। इसके बाद वर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत की समुद्री जागरूकता और राष्ट्रीय विकास में नौसेना की भूमिका पर प्रकाश डाला।

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना की दोहरी जिम्मेदारी है—

  • गार्डियनशिप: वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों से निपटना

  • स्टूवर्डशिप: भविष्य की रणनीतिक जरूरतों के लिए तैयारी

उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका, अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR), MILAN अभ्यास और IONS सम्मेलन का भी उल्लेख किया।

इस वर्ष का स्मृति व्याख्यान इन्फोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने ‘A Salute to a Life of Service’ विषय पर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य समुद्रों से जुड़ा है और भारतीय नौसेना देश की सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की रक्षा करती है। उन्होंने AI, स्वायत्त प्रणालियों और साइबर क्षमताओं जैसी उभरती तकनीकों के महत्व पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक, रणनीतिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और वाइस एडमिरल नय्यर के परिवारजन उपस्थित रहे। NMF भारत में समुद्री जागरूकता और नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।


गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) 21 फरवरी को, हिंद महासागर क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा पर होगा मंथन

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गोवा- गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC-26) का पांचवां संस्करण 21 फरवरी 2026 को नेवल वॉर कॉलेज, गोवा में आयोजित किया जाएगा। भारतीय नौसेना की प्रमुख रणनीतिक पहल के तहत आयोजित यह सम्मेलन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों और नौसैनिक नेतृत्व को एक मंच पर लाता है, जहां समकालीन समुद्री चुनौतियों के लिए व्यावहारिक समाधान और रणनीतियां तैयार की जाती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री होंगे मुख्य अतिथि

इस सम्मेलन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी 14 देशों के नौसेना प्रमुखों और समुद्री बलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की मेजबानी करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने वाले देशों में बांग्लादेश, कोमोरोस, इंडोनेशिया, केन्या, मेडागास्कर, मलेशिया, मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और तंजानिया शामिल हैं।

सम्मेलन की थीम

इस वर्ष सम्मेलन की थीम है:

“हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री सुरक्षा चुनौतियां — IUU फिशिंग और अन्य अवैध समुद्री गतिविधियों जैसी गतिशील चुनौतियों से निपटने के प्रयास”।
इसका उद्देश्य समुद्री देशों के बीच सहयोग, समन्वय और तालमेल को मजबूत करना है।

MAHASAGAR विज़न के अनुरूप पहल

गोवा मैरीटाइम सिम्पोजियम (GMS) और गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव (GMC) की शुरुआत 2016 और 2017 में की गई थी, जो MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विज़न के अनुरूप हैं। यह मंच समुद्री पड़ोसी देशों के साथ सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों की पहचान और क्षमता निर्माण की दिशा तय करता है।

समुद्री सुरक्षा की प्रमुख चुनौतियां

हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री आतंकवाद, तस्करी, अवैध मछली पकड़ना (IUU Fishing), समुद्री डकैती, सशस्त्र लूट और अवैध प्रवासन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, साइबर खतरे और डार्क शिपिंग जैसी नई चुनौतियां भी क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर रही हैं।

विशेषज्ञों के विचार और मुख्य भाषण

सम्मेलन में समुद्री जानकारी के वास्तविक समय आदान-प्रदान और संयुक्त क्षमता निर्माण पर विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा। पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश (सेवानिवृत्त) मुख्य भाषण देंगे।

गोवा मैरीटाइम कॉन्क्लेव हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए सहयोगात्मक समाधान तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच बना हुआ है।


नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में एक और निर्णायक कदम : चार इनामी माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

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सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयास, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार रहा है सिमट - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- किस्टाराम क्षेत्र में 8 लाख रुपये के इनामी चार सक्रिय माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय बस्तर में बढ़ते विश्वास, सुरक्षा और विकास के वातावरण का स्पष्ट प्रमाण है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि “नक्सल मुक्त बस्तर – सुरक्षित छत्तीसगढ़” का संकल्प अब जमीनी स्तर पर साकार होता दिखाई दे रहा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों, सुदृढ़ कैम्प व्यवस्था, प्रभावी क्षेत्रीय उपस्थिति तथा बेहतर सड़क और संचार कनेक्टिविटी का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन प्रयासों से माओवादी प्रभाव क्षेत्र लगातार सिमट रहा है और उनका सामाजिक आधार कमजोर हो रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति है कि जो लोग हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें अवसर, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। बस्तर में शांति, विश्वास और विकास की यह यात्रा आगे भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगी।

प्रधानमंत्री 29-30 नवंबर को रायपुर में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लेंगे

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सम्मेलन का विषय: 'विकसित भारत: सुरक्षा आयाम'

  1. सम्मेलन में अब तक की प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी और 'सुरक्षित भारत' के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप तैयार की जाएगी
  2. वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद का मुकाबला, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिसिंग में फोरेंसिक विज्ञान तथा एआई के उपयोग जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी
  3. प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे

रायपुर- प्रधानमंत्री 29-30 नवंबर, 2025 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर, छत्तीसगढ़ में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के अखिल भारतीय सम्मेलन के 60वें संस्करण में भाग लेंगे।

यह सम्मेलन 28 से 30 नवंबर तक चलेगा। इसका उद्देश्य अब तक प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा करना और 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप 'सुरक्षित भारत' के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा तैयार करना है।

'विकसित भारत: सुरक्षा आयाम' विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद निरोध, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान एवं एआई के उपयोग जैसे प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे।

यह सम्मेलन देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर खुले और सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण संवादात्मक मंच प्रदान करता है। यह पुलिस बलों के सामने आने वाली परिचालन, अवसंरचनात्मक और कल्याण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के साथ-साथ अपराध से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पेशेवर प्रथाओं के निर्माण और साझाकरण को भी सुगम बनाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस वार्षिक सम्मेलन में निरंतर गहरी रुचि दिखाई है, और स्पष्ट चर्चाओं को प्रोत्साहित किया है। उन्‍होंने एक ऐसा माहौल तैयार किया है जहां पुलिस व्यवस्था पर नए विचार उभर सकें। व्यावसायिक सत्र, विस्तृत बातचीत और विषयगत चर्चाएं प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा और नीतिगत मामलों पर सीधे प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में इस सम्मेलन के स्वरूप में निरंतर सुधार हुआ है, जिसमें देश भर के विभिन्न स्थानों पर इसका आयोजन भी शामिल है। यह सम्मेलन गुवाहाटी (असम), कच्छ के रण (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), टेकनपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, गुजरात), पुणे (महाराष्ट्र), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), नई दिल्ली, जयपुर (राजस्थान) और भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित किया जा चुका है। इसी परंपरा को जारी रखते हुए, इस वर्ष 60वां पुलिस महानिदेशक/पुलिस महानिरीक्षक सम्मेलन रायपुर, छत्तीसगढ़ में आयोजित किया जा रहा है।

इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख भाग लेंगे। नए और अभिनव विचारों को सामने लाने के लिए, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभाग के प्रमुख और डीआईजी तथा एसपी स्तर के कुछ चुनिंदा पुलिस अधिकारी भी इस वर्ष सम्मेलन में भाग लेंगे।

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