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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर राष्ट्र के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और अदम्य पराक्रम का गौरवपूर्ण प्रतीक है, जो देशवासियों के हृदय में गर्व और कृतज्ञता का भाव जाग्रत करता है।

मुख्यमंत्री साय ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों ने असाधारण साहस, त्याग और बलिदान का परिचय देकर देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। उनके पराक्रम से न केवल भारत की सैन्य शक्ति विश्व मंच पर स्थापित हुई, बल्कि मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की मिसाल भी प्रस्तुत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की अमर प्रेरणा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, अनुशासन और एकता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलना, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना और देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना ही विजय दिवस पर उन्हें सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।

संसद पर 2001 के आतंकी हमले की बरसी पर शहीदों को राष्ट्र की भावभीनी श्रद्धांजलि

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भारत ने आज वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकवादी हमले की बरसी पर राष्ट्र की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रीगण, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, संसद सदस्य, पूर्व सांसद एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह, राज्यसभा के महासचिव पी. सी. मोदी तथा शहीदों के परिजनों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

इससे पहले दिन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स (X) पर एक संदेश साझा करते हुए कहा:

“वर्ष 2001 में भारत की संसद पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में शहीद हुए हमारे वीर सुरक्षा कर्मियों और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों के सर्वोच्च बलिदान को नमन।

लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था—हमारी संसद—की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले नायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ। राष्ट्र के प्रति उनकी अद्वितीय निष्ठा और समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

अमर शहीदों ने जिस वीरता और साहस के साथ आतंकवादियों का सामना किया, वह कर्तव्यनिष्ठा के साथ-साथ लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत की अडिग प्रतिबद्धता का प्रतीक है। भारत हमेशा आतंकवाद के विरुद्ध दृढ़ता से खड़ा रहा है। राष्ट्र की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं, बल्कि यह एक सशक्त संदेश है कि भारत किसी भी प्रकार की आतंकवादी मंशा के सामने कभी नहीं झुकेगा।

यह अनुपम बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, निस्वार्थता और कर्तव्यपरायणता की प्रेरणा बना रहेगा।”

राष्ट्र स्मरण करता है कि 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकवादी हमले को विफल करते हुए राज्यसभा सचिवालय के सुरक्षा सहायक जगदीश प्रसाद यादव और मटबर सिंह नेगी; केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की कांस्टेबल कमलेश कुमारी; दिल्ली पुलिस के सहायक उपनिरीक्षक नानक चंद और रामपाल; दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल ओम प्रकाश, बिजेंद्र सिंह और घनश्याम; तथा केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के माली देशराज ने वीरगति प्राप्त की।

उनकी असाधारण वीरता के सम्मान में जगदीश प्रसाद यादव,  मटबर सिंह नेगी और कमलेश कुमारी को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया, जबकि नानक चंद, रामपाल, ओम प्रकाश, बिजेंद्र सिंह और  घनश्याम को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया गया।


संसद पर आतंकी हमले में शहीद सुरक्षा कर्मियों को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहयोगिता मंत्री अमित शाह ने आज 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुए आतंकवादी हमले में आतंकवादियों को कड़ा जवाब देते हुए शहीद हुए सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

एक्स (X) पर अपने पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा:

"आज का दिन हमें फिर से याद दिलाता है कि हमारे सुरक्षा बलों का आतंकवाद के खिलाफ अदम्य साहस और शौर्य, जब उन्होंने 2001 में दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के मंदिर—संसद भवन—पर हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले को अपने उत्साह और समर्पण से विफल किया। मैं उन सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ जिन्होंने आतंकवादियों को कड़ा जवाब देते हुए शहीदता प्राप्त की। यह राष्ट्र हमेशा इन वीर योद्धाओं के बलिदान और शहादत का ऋणी रहेगा।"

संसद पर आतंकी हमले के शहीदों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भावभीनी श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुए जघन्य आतंकवादी हमले के दौरान देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सुरक्षा कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र उन सभी वीर जवानों को गहरे सम्मान के साथ स्मरण करता है, जिन्होंने कर्तव्य पालन करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर खतरे की घड़ी में उनका साहस, सतर्कता और अटूट कर्तव्यनिष्ठा प्रत्येक नागरिक के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

एक्स (X) पर एक पोस्ट में मोदी ने लिखा:

“आज के दिन हमारा राष्ट्र 2001 में संसद पर हुए जघन्य हमले के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को स्मरण करता है। गंभीर खतरे के समय उनका साहस, सतर्कता और अटूट कर्तव्यनिष्ठा अद्वितीय थी। भारत उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए सदैव कृतज्ञ रहेगा।”




मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जयस्तंभ चौक में किया शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग और संघर्ष का स्मरण

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जननायक अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अनुपम मिसाल है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध शहीद वीर नारायण सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया, वह छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विरासत का स्वर्णिम अध्याय है। मातृभूमि की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनकी निष्ठा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी शहीद वीर नारायण सिंह का हृदय सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के दुःख-संघर्ष से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से व्याकुल थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए अनाज गोदाम का अनाज ज़रूरतमंदों में बाँटकर करुणा, त्याग और साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण और असमानताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक उद्घोष था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और जनप्रतिरोध की जीवंत प्रेरणा हैं। गरीबों, किसानों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन-संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव न्याय, मानवता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों और उनके सपनों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने लचित बोड़फुकन को याद कर कहा—साहस और देशभक्ति के अमर प्रतीक

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लचित दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज असम के महान सेनानी लचित बोड़फुकन को याद करते हुए उन्हें साहस, देशभक्ति और सच्चे नेतृत्व का प्रतीक बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लचित बोड़फुकन का वीरता भरा इतिहास आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने इस महान योद्धा की उस महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया, जिसके चलते असम की समृद्ध और अद्वितीय संस्कृति संरक्षित रह सकी और एकता व दृढ़ता के मूल्यों को मजबूती मिली।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर अपने संदेश में कहा:

“लचित दिवस पर हम लचित बोड़फुकन को याद करते हैं, जो साहस, देशभक्ति और सच्चे नेतृत्व के प्रतीक हैं। उनकी वीरता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। असम की अनुकरणीय संस्कृति की रक्षा में उन्होंने अहम भूमिका निभाई।”

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