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भारत का स्वर्णिम गौरव: मीराबाई चानू ने रचा इतिहास

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भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एक बार फिर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर दिया है। उन्होंने ग्लासगो में आयोजित 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में महिलाओं की 48 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। यह उनके करियर का लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक है।

मीराबाई चानू ने प्रतियोगिता में कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर शानदार प्रदर्शन किया और भारत को इन खेलों का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपना दबदबा कायम रखा, बल्कि एक नया कीर्तिमान भी स्थापित किया।

स्वर्ण पदक जीतने के बाद भावुक मीराबाई ने कहा कि इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, त्याग और उनके परिवार व कोच का अमूल्य योगदान है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता से पहले वजन सीमा बनाए रखने के लिए उन्हें कई कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देशभर से मीराबाई चानू को बधाइयाँ मिल रही हैं। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने करोड़ों भारतीयों को गर्व का अवसर दिया है और युवा खिलाड़ियों के लिए एक नई प्रेरणा प्रस्तुत की है।

मुख्य बातें:

  • 🥇 मीराबाई चानू ने जीता लगातार तीसरा Commonwealth Games स्वर्ण।

  • 🏋️ महिलाओं की 48 किलोग्राम भार वर्ग स्पर्धा में हासिल की जीत।

  • भारत के लिए 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक।

  • 🌟 देशभर में खुशी की लहर, मीराबाई की ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाइयों का दौर।

एचएनएलयू रायपुर ने बैंकॉक में रचा इतिहास

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वैश्विक नवाचार और अनुसंधान के लिए 20 अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के साथ किया महा-समझौता

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर ने वैश्विक शैक्षणिक पटल पर राज्य का गौरव बढ़ाते हुए एक बड़ी रणनीतिक उपलब्धि हासिल की है। थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान, एचएनएलयू ने वैश्विक विश्वविद्यालय नवाचार एवं सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस ऐतिहासिक समझौते पर दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के 20 अग्रणी और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों ने हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम उच्च शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान और सतत विकास के क्षेत्रों में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में भारत की ओर से एक बेहद महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

​बैंकॉक के आईकॉनसियाम में हुआ वैश्विक समागम

यह समझौता 9-10 जुलाई 2026 को बैंकॉक स्थित प्रसिद्ध आईकॉनसियाम कन्वेंशन सेंटर में आयोजित  "AUAP - WURI  इम्पैक्ट समिट 2026" के दौरान हुआ। इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का मुख्य विषय सरकार के साथ साझेदारी में विश्वविद्यालय नवाचार-नीति, तंत्र और प्रभाव था, जिसमें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों के प्रमुखों, नीति-निर्माताओं, नवाचार विशेषज्ञों और जाने-माने शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने  प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल

कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने प्रस्तुत किया 'R-HaS' मॉडल ​शिखर सम्मेलन में एचएनएलयू का प्रतिनिधित्व करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानन्दन ने विश्वविद्यालय के अभिनव रिसर्च हब एंड ​​स्पोक (R-HaS) मॉडल पर आधारित एक केस स्टडी प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने एचएनएलयू के अंतर्विषयी अनुसंधान तंत्र, बाह्य वित्तपोषित (एक्सटर्नली फंडेड) शोध परियोजनाओं तथा समाज के प्रति जवाबदेह एवं प्रभावकारी अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया, जिसकी उपस्थित विशेषज्ञों ने काफी सराहना की।

​इस रणनीतिक कामयाबी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुलपति प्रो. विवेकानन्दन ने कहा कि एचएनएलयू क्षेत्रीय और वैश्विक विश्वविद्यालय संगठनों के साथ सार्थक सहभागिता के माध्यम से अपनी अनुसंधान पहलों को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित और प्रसारित करने की दिशा में प्रभावशाली प्रगति कर रहा है। यह बहुपक्षीय समझौता हमारे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को विस्तार देने की दिशा में एक मील का पत्थर है। सम्मेलन के दौरान AUAP के महासचिव प्रो. डॉ. अनूप स्वरूप तथा कार्यकारी सचिव डॉ. सुपापोर्न चुआंगचिद के साथ संयुक्त सम्मेलन, अनुसंधान परियोजनाओं, संकाय (फैकल्टी) व छात्र विनिमय (एक्सचेंज) कार्यक्रमों पर भी बेहद सार्थक चर्चा हुई है।

​समझौते के तहत इन क्षेत्रों में होगा साझा काम

बहुपक्षीय समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद-3 के तहत सभी 20 सहभागी संस्थान भविष्य में मिलकर काम करेंगे। इसके तहत आपसी सहयोग से वैश्विक महत्व की नवाचार व शोध परियोजनाओं का संचालन, संकाय (फैकल्टी), शोधार्थियों और छात्रों के लिए विनिमय कार्यक्रम,नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का विकास और स्टार्टअप को बढ़ावा देना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलनों, कार्यशालाओं और केस स्टडीज का विकास करना शामिल है।

इन संगठनों के सहयोग से हुआ शिखर सम्मेलन

AUAP (एसोसिएशन ऑफ यूनिवर्सिटीज ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक): यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक बेहद प्रतिष्ठित और पुराना विश्वविद्यालय संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को एक मंच पर लाकर शैक्षणिक सहयोग, नेतृत्व विकास और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा देना है।

WURI (वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स फॉर इनोवेशन) यह एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रणाली है जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन सिर्फ पारंपरिक किताबी या शोध मानकों पर नहीं, बल्कि वास्तविक सामाजिक प्रभाव, उद्योग सहयोग, उद्यमिता और नैतिक नेतृत्व जैसे नवाचारों के आधार पर करती है। एचएनएलयू अपने दूरदर्शी नेतृत्व के कारण इस रैंकिंग में लगातार अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहा है।

हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU), रायपुर देश के अग्रणी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। अपने विशिष्ट 'R-HaS' मॉडल, अनुभवात्मक अधिगम (एक्सपेरिमेंटल लर्निंग) और लोकनीति-उन्मुख अनुसंधान के दम पर यह संस्थान विधि शिक्षा के भविष्य को वैश्विक स्तर पर आकार देने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।

“मन की बात” में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण प्रयासों की सराहना कर बढ़ाया प्रदेश का मान - मुख्यमंत्री साय

जनभागीदारी और नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर मिल रही पहचान उत्साहजनक : "मन की बात”  देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम - मुख्यमंत्री

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है। 

मुख्यमंत्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन, अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में  गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भारत का गौरव: दीपावली अब UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UNESCO द्वारा दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि दीपावली केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि एक सभ्यतात्मक घटना है जो पूरे राष्ट्र को जोड़ती है और विश्वभर में गूंजती है। यह भारत की बहुसांस्कृतिकता, सामाजिक एकता और बहुलवाद का प्रतीक है, साथ ही अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देती है। उन्होंने सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मानवता के लिए इसके सुसंगत संदेश का उत्सव है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी UNESCO की इस घोषणा पर खुशी और गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दीपावली हमारे संस्कृति और जीवन मूल्यों से गहरा जुड़ा हुआ है और यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश और धर्म का प्रतीक है। UNESCO सूची में शामिल होने से दीपावली की वैश्विक लोकप्रियता और बढ़ेगी और इसके आदर्शों को पूरी दुनिया में फैलाने में मदद मिलेगी।

दोनों नेताओं ने यह संदेश साझा किया कि दीपावली का प्रकाश और इसके आदर्श हमें सदैव मार्गदर्शन देते रहें।

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