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भारत-मॉरीशस सहयोग: ‘ब्लू इकोनॉमी’ और समुद्री तकनीक में साझेदारी को बढ़ावा

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आज नई दिल्ली में मॉरीशस के वरिष्ठ नौकरशाहों के एक समूह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोनों देशों के बीच ‘ब्लू इकोनॉमी’ में साझा हितों को रेखांकित किया।

मंत्री ने मत्स्य पालन, समुद्री तकनीक और जल शोधन (Desalination) जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत-मॉरीशस सहयोग को गहरा करने का आह्वान किया, जिन्हें दोनों समुद्री राष्ट्रों के लिए “सतत विकास और पारस्परिक समृद्धि के नए क्षेत्र” के रूप में वर्णित किया।

राष्ट्रीय उत्कृष्ट शासन केंद्र (NCGG) में 14 मॉरीशस मंत्रालयों के 17 वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत का समुद्री संसाधन प्रबंधन और समुद्र आधारित तकनीकों में विशाल अनुभव मॉरीशस के विकास लक्ष्यों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत के “डीप ओशन मिशन” जैसी पहलों के माध्यम से समुद्री संसाधनों के उपयोग में सफलता का उल्लेख किया और मॉरीशस को ताजा पानी की कमी जैसी चुनौतियों के समाधान में भारत की जल शोधन तकनीक अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, “पानी हर जगह है, पीने के लिए पर्याप्त नहीं—इस विरोधाभास का समाधान तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है।”

मंत्री ने मॉरीशस के अधिकारियों को ब्लू इकोनॉमी और समुद्री अनुसंधान में सहयोगी परियोजनाओं की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया और सुझाव दिया कि भारत के पृथ्वी विज्ञान संस्थान और संबंधित एजेंसियाँ मॉरीशस के समकक्षों के साथ मिलकर अगले दस वर्षों के लिए समुद्री अर्थव्यवस्था के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार कर सकती हैं।

यह कार्यक्रम 10 से 15 नवंबर तक NCGG में आयोजित किया जा रहा है और भारत-मॉरीशस के बीच मार्च 2025 में हस्ताक्षरित दीर्घकालिक सहयोग ढांचे का हिस्सा है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में 500 मॉरीशस सिविल सर्वेंट्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। वर्तमान प्रतिनिधिमंडल डॉ. धनंजय कावोल के नेतृत्व में है और यह इस पहल के तहत भारत आने वाले सबसे वरिष्ठ समूहों में से एक है।

मॉरीशस के प्रतिभागियों ने भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा और शासन सुधारों में सहयोग की सराहना की, जिसमें फोरेंसिक साइंस लैब का निर्माण, तैरते हुए सोलर पैनल जैसे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं और शिक्षा व सामाजिक सुरक्षा में डिजिटलाइजेशन शामिल हैं। उन्होंने प्रदर्शन-आधारित बजटिंग, वित्तीय जवाबदेही और सार्वजनिक सेवा दक्षता के लिए भारत की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने में रुचि व्यक्त की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि “तकनीक पारदर्शिता का मार्ग प्रशस्त करती है और पारदर्शिता परिवर्तन को जन्म देती है।” उन्होंने भारत के डिजिटल शासन के दशकभर के अनुभव को साझा किया।

भारत और मॉरीशस के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय संबंध हैं, लगभग 70 प्रतिशत मॉरीशस के लोग भारतवंशी हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग बुनियादी ढांचे, शिक्षा, समुद्री सुरक्षा और कौशल विकास में विस्तृत है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सिविल सेवा क्षमता निर्माण में यह सहयोग “भविष्य के शासन में लाभकारी निवेश” है।

कार्यक्रम के दौरान दोनों पक्ष ब्लू इकोनॉमी, नवीकरणीय ऊर्जा और जल शोधन तकनीक में संभावित परियोजनाओं की खोज जारी रखेंगे, जो आने वाले दशक में भारत-मॉरीशस साझेदारी की दिशा तय कर सकते हैं।

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