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वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट का लॉन्च – डिजिटल समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

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भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल समावेशन की आधारशिला बनती जा रही हैं, जो लाखों लोगों को सार्वजनिक सेवाओं, जानकारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच प्रदान कर रही हैं। इसी संदर्भ में 20 फरवरी 2026 को इंडिया AI समिट एक्सपो 2026 में वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च किया गया

यह पहल खुले, समावेशी और जिम्मेदार वॉयस तकनीकों के लिए नीति और व्यवहारिक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

रिपोर्ट और टूलकिट के विकास में सहयोग

यह नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट निम्न संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किए गए:

  • ARTPARK @ IISc

  • Digital Futures Lab

  • Trilegal

इस कार्य को डिजिटल इंडिया भाषिणी (BHASHINI) डिवीजन और FAIR Forward – AI for All पहल (GIZ और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित) का समर्थन प्राप्त हुआ।

भारत में वॉयस तकनीकों का महत्व

भाषाई विविधता वाले देश भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो भाषण आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं।

हालांकि, वॉयस तकनीकों के विकास और उपयोग से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं, जैसे:

  • डेटा शासन

  • समावेशन

  • गुणवत्ता

  • खुलापन

  • जिम्मेदार उपयोग

इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति, तकनीकी अभ्यास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच समन्वय आवश्यक है।

नीति रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

नीति रिपोर्ट भारत में जिम्मेदार और खुले स्पीच सिस्टम के विकास में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करती है और निम्न सुझाव देती है:

  • मूलभूत भाषण डेटा सेट को डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति (Digital Public Goods) के रूप में मान्यता देना

  • मॉडल की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार

  • टिकाऊ सार्वजनिक अवसंरचना में निवेश

  • दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का समावेश

  • नवाचार को सक्षम बनाना

डेवलपर्स टूलकिट की विशेषताएं

डेवलपर्स टूलकिट भारतीय भाषाओं के वॉयस डेटा और अनुप्रयोगों पर काम करने वाले डेवलपर्स की चुनौतियों को उजागर करता है, जैसे:

  • डेटा प्रतिनिधित्व में असमानता

  • गुणवत्ता आश्वासन की कमजोर प्रणालियां

  • सीमित मूल्यांकन अभ्यास

  • खंडित शासन ढांचे

यह टूलकिट AI विकास जीवनचक्र आधारित समावेशी और मजबूत स्पीच AI सिस्टम बनाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

प्रमुख वक्तव्य

अमिताभ नाग, CEO, डिजिटल इंडिया भाषिणी

उन्होंने कहा कि भारत के वॉयस-फर्स्ट डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में बढ़ते कदमों के साथ मजबूत नीति और कार्यान्वयन ढांचे की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वॉयस तकनीकें भारत में भाषा, साक्षरता और डिजिटल विभाजन को पाटने का माध्यम हैं और इसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का आधार बनाना चाहिए।

डॉ. एरियाने हिल्डेब्रांट, जर्मन BMZ

उन्होंने कहा कि वॉयस AI स्थानीय भाषाओं और बोलियों में काम करने पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक भागीदारी के लिए द्वार खोल सकती है।

साझेदार संस्थाओं के बारे में

  • डिजिटल इंडिया भाषिणी: AI आधारित बहुभाषी भाषा अनुवाद और वॉयस समाधान मंच

  • GIZ और FAIR Forward: वैश्विक स्तर पर समावेशी AI को बढ़ावा देने की पहल

  • ARTPARK @ IISc: AI और रोबोटिक्स स्टार्टअप इनक्यूबेशन कार्यक्रम

  • Digital Futures Lab: तकनीक और समाज के अध्ययन पर अनुसंधान संस्था

  • Trilegal: प्रमुख भारतीय लॉ फर्म

  • Nasscom AI: भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने वाली प्रमुख संस्था


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