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आईएमए देहरादून में 157वीं पासिंग आउट परेड सम्पन्न, 525 युवा अधिकारी भारतीय सेना में हुए कमीशन

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आज ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन गर्व, परंपरा और सैन्य वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। यह गौरवपूर्ण अवसर भारतीय सेना में अधिकारी कैडेट्स के कमीशनिंग का साक्षी बना और अकादमी के शाश्वत आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” को साकार करता हुआ कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य जज़्बे की सशक्त मिसाल बना।

थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सैन्य पेशा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र आह्वान है, जिसमें निस्वार्थ सेवा, अटूट समर्पण और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान की अपेक्षा होती है। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी की गौरवशाली परंपरा की सराहना की, जिसने समय-समय पर दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और निर्भीक अधिकारी राष्ट्र को प्रदान किए हैं, जिन्होंने साहस और सम्मान की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखा है।

थल सेनाध्यक्ष ने आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य की गतिशील और बहुआयामी प्रकृति पर प्रकाश डाला, जो अब सैन्य, तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों तक विस्तृत है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युद्ध में कूटनीति और निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बीच निर्बाध समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना निरंतर आधुनिकीकरण और नवाचार के माध्यम से स्वयं को सुदृढ़ कर रही है और नव-नियुक्त अधिकारी इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनिश्चित परिस्थितियों में नेतृत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियाँ स्पष्ट उत्तर नहीं देंगी और अधिकारियों की अनुकूलन क्षमता, विवेक और सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेंगी।

जनरल द्विवेदी ने युवा अधिकारियों से उदाहरण बनकर नेतृत्व करने, नैतिक मूल्यों को बनाए रखने और अपने जवानों के लिए मार्गदर्शक व आदर्श बनने का आह्वान किया। उन्होंने 14 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स को भी प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई दी और कहा कि अकादमी में बनी मित्रताएँ देशों के बीच रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने वाले स्थायी बंधन का प्रतीक हैं। प्रशिक्षकों और स्टाफ की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उनके समर्पण और उत्कृष्टता की प्रशंसा की। साथ ही, गर्वित अभिभावकों को उनके त्याग और विश्वास के लिए धन्यवाद देते हुए राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

चाणक्य के शाश्वत ज्ञान का स्मरण कराते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भौतिक संपत्ति और जीवन क्षणभंगुर हैं, लेकिन धर्म—कर्तव्य और नैतिकता—शाश्वत है। उन्होंने प्रत्येक अधिकारी से राष्ट्र सेवा में सम्मान, निष्ठा और साहस बनाए रखने का आह्वान किया। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने युवा अधिकारियों से सदैव उद्देश्यपूर्ण, सजग और समय से आगे रहने का आग्रह किया, ताकि वे भारत की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा के सच्चे रक्षक बन सकें।

इस अवसर पर 157वें रेगुलर कोर्स, 46वें टेक्निकल एंट्री स्कीम कोर्स, 140वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वें स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्ज़ाम 2023 कोर्स के कुल 525 अधिकारी कैडेट्स, साथ ही 14 मित्र देशों के 34 अधिकारी कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया गया। यह कमीशनिंग न केवल भारत के रक्षा नेतृत्व को सशक्त करती है, बल्कि मित्र राष्ट्रों के साथ स्थायी सैन्य साझेदारियों की निरंतरता का भी प्रतीक है।

समारोह में गर्वित अभिभावक, परिवारजन, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परेड का समापन पारंपरिक ‘अंतिम पग’ के साथ हुआ, जब नव-नियुक्त अधिकारी राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और आदर्शों की रक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़े।

रिव्यूइंग ऑफिसर द्वारा प्रदान किए गए पुरस्कार:

  • स्वॉर्ड ऑफ ऑनर – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • स्वर्ण पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम) – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में द्वितीय) – बटालियन अंडर ऑफिसर बादल यादव

  • कांस्य पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में तृतीय) – सीनियर अंडर ऑफिसर कमलजीत सिंह

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स) – ऑफिसर कैडेट जाधव सुजीत संपत

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल एंट्री स्कीम-46) – विंग कैडेट कैप्टन अभिनव मेहरोत्रा

  • रजत पदक (स्पेशल कमीशंड ऑफिसर) – ऑफिसर कैडेट सुनील कुमार छेत्री

  • पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – विदेशी कैडेट) – जूनियर अंडर ऑफिसर मोहम्मद सफ़ीन अशरफ़ (बांग्लादेश)

  • थल सेनाध्यक्ष बैनर – इंफाल कंपनी (ऑटम टर्म 2025 में 12 कंपनियों में सर्वश्रेष्ठ)

157वां कोर्स जब नेतृत्व और सेवा की अपनी यात्रा आरंभ करता है, तब भारतीय सैन्य अकादमी एक बार फिर यह प्रमाणित करती है कि वह साहस, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से युक्त अधिकारियों को गढ़ने वाली एक अग्रणी संस्था है।

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