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इंडियाAI मिशन और NHA ने AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया

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इंडियाAI मिशन ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु के सहयोग से 9 मई 2026 को IISc बेंगलुरु में AB PM-JAY ऑटो-एडजुडिकेशन हैकाथॉन शोकेस 2026 के विजेताओं को सम्मानित किया। यह आयोजन दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर के शोकेस का समापन था, जिसमें सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को प्रदर्शित किया गया।

यह हैकाथॉन NHA और IISc बेंगलुरु के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य दावों (क्लेम्स) के निपटान की प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और सटीक बनाना तथा धोखाधड़ी (फ्रॉड) की पहचान को मजबूत करना था।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ सुनील कुमार बर्नवाल, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के महानिदेशक अभिषेक सिंह, NHA की संयुक्त सचिव ज्योति यादव तथा MeitY की संयुक्त निदेशक शिखा दहिया ने उन नवप्रवर्तकों को सम्मानित किया, जिनके समाधान AI आधारित क्लेम प्रोसेसिंग को बदलने की क्षमता रखते हैं।

यह हैकाथॉन आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत तीन प्रमुख समस्या क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य बीमा योजनाओं में से एक है। इस योजना के तहत प्रतिदिन 1900+ उपचार पैकेजों के लिए बड़ी संख्या में क्लेम प्रोसेस किए जाते हैं।

हैकाथॉन विजेता

समस्या विवरण 1: क्लिनिकल डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन एवं STG अनुपालन

अलग-अलग गुणवत्ता वाले मेडिकल दस्तावेजों को पढ़कर महत्वपूर्ण डेटा निकालना, आवश्यक विज़ुअल तत्वों की पहचान करना और NHA द्वारा निर्धारित स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट गाइडलाइंस (STG) के अनुपालन की जांच करना।

  • विजेता: विनय बाबू उल्ली

  • रनर-अप:  खुशी सिंह

  • द्वितीय रनर-अप: विजय बालाजी

समस्या विवरण 2: रेडियोलॉजिकल इमेज आधारित रोग पहचान एवं रिपोर्ट मिलान

एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचों की इमेज का विश्लेषण कर उन्हें रिपोर्ट से मिलाकर सही तरीके से क्लेम का सत्यापन करना।

  • विजेता: हरीश कुमार

  • रनर-अप:  भरत वर्मा संगाराजू

  • द्वितीय रनर-अप: अर्नोल्ड सचित

समस्या विवरण 3: डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा एवं डीपफेक पहचान

फर्जी या AI-जनरेटेड दस्तावेजों, जैसे कि नकली डिस्चार्ज समरी, बिल में छेड़छाड़ और फर्जी पहचान की पहचान करना।

  • विजेता: प्रवीण श्रीधर

  • रनर-अप: निकिलेश्वर राव सुलाके

  • द्वितीय रनर-अप: सुमंत नायडू माथिरेड्डी

विजेता टीमों को क्रमशः ₹5 लाख, ₹3 लाख और ₹2 लाख की नकद राशि प्रदान की गई। अधिकारियों ने बताया कि चयनित समाधान भविष्य में AB PM-JAY प्रणाली में लागू किए जा सकते हैं।

राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के तहत IISc बेंगलुरु और C-MET हैदराबाद को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में मान्यता

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खनिज मंत्रालय ने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (National Critical Mineral Mission - NCMM) के तहत दो और संस्थानों — भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और सेंटर फॉर मटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी (C-MET), हैदराबाद — को उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence - CoE) के रूप में मान्यता प्रदान की है। इससे पहले 7 अन्य संस्थानों को CoE के रूप में मान्यता दी जा चुकी थी। यह निर्णय 24 अक्टूबर 2025 को हुई परियोजना अनुमोदन और सलाहकार समिति (PAAC) की बैठक में लिया गया, जिसकी सह-अध्यक्षता खनिज मंत्रालय के सचिव पीयूष गोयल और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर ने की।

महत्वपूर्ण कच्चे खनिज (Critical Raw Materials) स्वच्छ ऊर्जा, गतिशीलता परिवर्तन, उन्नत प्रौद्योगिकी, रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में संपूर्ण प्रणाली दृष्टिकोण (end-to-end systems approach) अपनाने, प्रौद्योगिकी विकसित करने, प्रदर्शित करने और लागू करने के लिए अनुसंधान एवं विकास (R&D) आवश्यक है, ताकि तकनीकी तत्परता स्तर (Technology Readiness Level – TRL) को TRL 7/8 के पायलट संयंत्र और प्री-कमर्शियल प्रदर्शन तक बढ़ाया जा सके।

ये उत्कृष्टता केंद्र देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षमता को महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सशक्त और उन्नत बनाने के लिए नवोन्मेषी और परिवर्तनकारी अनुसंधान करेंगे।

प्रत्येक उत्कृष्टता केंद्र ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ (Hub & Spoke Model) पर कार्य करेगा, जिसके तहत विभिन्न संस्थानों की अनुसंधान क्षमताओं और विशेषज्ञताओं को एक मंच पर लाया जाएगा। CoE (हब संस्थान) को दिशानिर्देशों के अनुसार कम से कम दो उद्योग साझेदार और दो अनुसंधान/शैक्षणिक साझेदारों को अपने संघ (consortium) में शामिल करना अनिवार्य है।

अब तक मान्यता प्राप्त 9 उत्कृष्टता केंद्रों ने सामूहिक रूप से लगभग 90 उद्योग, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों को अपने ‘स्पोक्स’ के रूप में जोड़ा है।

यह पहल भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और औद्योगिक सहयोग को भी सुदृढ़ करेगी।

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