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प्रधानमंत्री का G20 संबोधन: मानव-केंद्रित तकनीक और न्यायपूर्ण वैश्विक विकास की दिशा में भारत का नेतृत्व

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प्रधानमंत्री ने आज G20 शिखर सम्मेलन के तीसरे सत्र को संबोधित किया, जिसका विषय था— “सभी के लिए न्यायपूर्ण एवं समान भविष्य – क्रिटिकल मिनरल्स, सुरक्षित रोजगार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुदाय को यह सुनिश्चित करना होगा कि महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास और उपयोग मानव-केंद्रित हो, वित्त-केंद्रित नहीं; वैश्विक हो, राष्ट्र-केंद्रित नहीं; और ओपन-सोर्स आधारित हो, विशिष्ट मॉडलों पर नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने तकनीकी इकोसिस्टम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है, जिसके कारण अंतरिक्ष तकनीक, एआई और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत की दृष्टि

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की एआई नीति समान अवसर, जन-स्तर कौशल विकास और जिम्मेदार उपयोग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इंडिया-AI मिशन के तहत देशभर में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं ताकि एआई के लाभ सभी नागरिकों को मिल सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई को “ग्लोबल गुड” बनाना आवश्यक है, जिसके लिए एक वैश्विक समझौते की जरूरत है, जिसमें पारदर्शिता, मानव निरीक्षण, ‘सेफ्टी-बाय-डिज़ाइन’ और दुरुपयोग रोकने के सिद्धांत शामिल हों। उन्होंने जोर दिया कि एआई मानव क्षमताओं का विस्तार करे, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार मनुष्यों के पास ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत फरवरी 2026 में AI Impact Summit आयोजित करेगा, जिसका विषय होगा—

‘सर्वजनम् हिताय, सर्वजनम् सुखाय’ (सभी के हित और सभी के सुख के लिए)।
उन्होंने सभी G20 देशों को इसमें भाग लेने का आमंत्रण दिया।

रोजगार से क्षमताओं की ओर बदलाव की आवश्यकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई के दौर में दुनिया को “आज के रोजगार” से “भविष्य की क्षमताओं” की ओर तेजी से बढ़ना होगा। नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन के दौरान टैलेंट मोबिलिटी पर हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता ढांचा (Global Framework for Talent Mobility) तैयार करने का प्रस्ताव रखा।

भारत का वैश्विक संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता दोहराई—

“भारत ऐसे विकास के लिए प्रतिबद्ध है जो टिकाऊ हो; ऐसे व्यापार के लिए जो विश्वसनीय हो; ऐसी वित्तीय व्यवस्था के लिए जो न्यायपूर्ण हो; और ऐसी प्रगति के लिए जिसमें हर कोई समृद्ध हो।”

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