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6,000 से अधिक बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुँचा मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला का संदेश

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दशहरा अवकाश में 260 से अधिक बच्चों ने सीखा मानवीय मूल्यों का पाठ, हर रविवार जीवन विद्या अध्ययन करने आश्रम आने की जताई इच्छा

महासमुंद- मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही, महासमुंद (छत्तीसगढ़) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन आधारित मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला का संदेश 6,000 से अधिक बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों तक पहुँचा। कार्यशाला में प्रत्यक्ष रूप से 260 से अधिक बच्चों ने सहभागिता की। दशहरा अवकाश के दौरान बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति ने न केवल आयोजकों को गौरवान्वित किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि बच्चे व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों को समझने के प्रति उत्सुक हैं।

मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया के अनुसार, इस कार्यशाला की सबसे विशेष बात यह रही कि बच्चों को यह स्पष्ट रूप से समझ में आया कि मानव व्यवहार सूत्र की बातें केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन और आपसी संबंधों में भी उपयोगी हैं। इसका उद्देश्य स्कूली पाठ्यक्रम, किताबी पढ़ाई या परीक्षा की तैयारी करना नहीं, बल्कि जीवन को समझना और व्यवहार में मानवीय मूल्यों को अपनाना है।

उन्होंने कहा कि बच्चों की सहभागिता इस बात का सकारात्मक संकेत है कि वे जीवन की सच्चाइयों को समझना चाहते हैं। वे न्याय, धर्म और सत्य को जानने के साथ-साथ अपने जीवन में उतारने की जिज्ञासा भी रखते हैं। व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों के अभाव में जीवन में अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए जीवन विद्या का अध्ययन व्यक्ति को स्वयं को समझने, दूसरों के साथ उचित व्यवहार करने और मानवीय संबंधों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हर रविवार आश्रम आने की जताई इच्छा

कार्यशाला में शामिल बच्चों ने आगे भी जीवन विद्या का अध्ययन जारी रखने की इच्छा जताई। बच्चों ने कहा कि वे प्रत्येक रविवार को आश्रम आकर जीवन विद्या का अध्ययन करना चाहेंगे। यह पहल कार्यशाला के प्रति उनकी रुचि और सीखने की निरंतरता बनाए रखने के संकल्प को दर्शाती है।

कार्यशाला का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के प्रयास ने बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच मानव व्यवहार सूत्र के प्रति रुचि पैदा की। आयोजकों की मंशा है कि व्यवहारिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों की समझ घर-घर तक पहुँचे, जिससे एक जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार पीढ़ी का निर्माण हो सके।

कार्यशाला की सफलता में इनका रहा महत्वपूर्ण योगदान

कार्यशाला को सफल बनाने में राखी, रागेश्वर, तन्मय निर्मलकर, योगेश कुमार निर्मलकर (प्रधान अध्यापक, शासकीय विद्यालय सलिहाभांटा), घनश्याम दीवान (प्रधान अध्यापक, शासकीय विद्यालय मानपुर), शंकर खैरवार तथा खैरवार डेरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बच्चों की सक्रिय सहभागिता और जीवन विद्या के अध्ययन को आगे जारी रखने की इच्छा ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान और परीक्षा में सफलता प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि जीवन को समझना, मानवीय मूल्यों को अपनाना और बेहतर इंसान बनना भी है। मानव व्यवहार सूत्र कार्यशाला इसी दिशा में एक सार्थक पहल है।


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