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अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का अहम फैसला: भाई की आपत्ति से दूसरे भाई का दावा खारिज नहीं होगा, नगर निगम का आदेश निरस्त

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पिता की मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले बेटे का दावा केवल दूसरे भाई की आपत्ति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। संबंधित विभाग को लागू नियमों और नियुक्ति नीति के अनुसार सभी तथ्यों की जांच करके उचित निर्णय लेना होगा।

जस्टिस बी.डी. गुरु की एकल पीठ ने भिलाई-चरोदा नगर निगम द्वारा 15 अप्रैल 2025 को पारित आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने निगम को मामले में नए सिरे से निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पुराने आदेश के निरस्त होने से याचिकाकर्ता को अपने आप अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला दुर्ग जिले के भिलाई-3 स्थित साउथ वसुंधरा नगर निवासी खिलेश्वर प्रसाद से जुड़ा है। उनके पिता परस राम भिलाई-चरोदा नगर निगम में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कार्यरत थे। 29 सितंबर 2023 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था।

पिता की मृत्यु के बाद परिवार के सामने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाद सामने आया।

29 सितंबर-2023, पिता का निधन

परस राम का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया।

4 दिसंबर-2023, खिलेश्वर ने किया आवेदन

पिता की मृत्यु के बाद खिलेश्वर प्रसाद ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए नगर निगम में आवेदन प्रस्तुत किया।

15 जुलाई-2024, दूसरे भाई ने जताई आपत्ति

दुमेश कुमार टंडन ने खिलेश्वर के आवेदन पर आपत्ति दर्ज कराई और स्वयं भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा प्रस्तुत किया।

15 अप्रैल-2025, नगर निगम ने आवेदन खारिज किया

खिलेश्वर के आवेदन को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

घटनाक्रम प्रकाशित समाचार रिपोर्टों के आधार पर।

हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने क्या दलीलें दीं?

याचिकाकर्ता की ओर से: खिलेश्वर की ओर से दलील दी गई कि दूसरे भाई की आपत्ति मात्र के आधार पर उनके आवेदन को खारिज करना उचित नहीं है। सक्षम प्राधिकारी की जिम्मेदारी थी कि वह लागू नियमों के अनुसार आवेदन पर विचार करता और कारण सहित निर्णय देता।

नगर निगम और दूसरे भाई की ओर से: परिवार में विवाद, सहमति और अनुकंपा नियुक्ति नीति में निर्धारित शर्तों का हवाला दिया गया। दूसरे भाई ने भी स्वयं को बेरोजगार और दिवंगत कर्मचारी पर आश्रित बताते हुए नियुक्ति का दावा किया था।

कोर्ट ने क्या निर्देश दिए?

हाईकोर्ट ने मामले में निम्नलिखित निर्देश दिए:

  1. भिलाई-चरोदा नगर निगम का 15 अप्रैल 2025 का आदेश निरस्त किया जाए।

  2. दोनों भाइयों को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए।

  3. सक्षम प्राधिकारी यह जांच करे कि दूसरे भाई ने भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए अलग से आवेदन दिया है या नहीं।

  4. लागू नीति में दावेदारों की पात्रता और प्राथमिकता के संबंध में क्या प्रावधान हैं, इसकी जांच की जाए।

  5. सभी तथ्यों और नियमों पर विचार करके आठ सप्ताह के भीतर कारण सहित नया निर्णय लिया जाए।

अदालत ने परिवार की विधवा की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत सहमति संबंधी शपथपत्र पर भी विचार करने को कहा। हालांकि, केवल इस सहमति के आधार पर दूसरे पात्र दावेदार का दावा स्वतः समाप्त नहीं माना जा सकता।

क्या अब खिलेश्वर प्रसाद को नौकरी मिल जाएगी?

नहीं, अभी नियुक्ति का अंतिम आदेश नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने नगर निगम के पुराने आदेश को रद्द करके नए सिरे से निर्णय लेने को कहा है। इसका अर्थ यह है कि खिलेश्वर के दावे पर दोबारा विचार होगा, लेकिन नियुक्ति मिलेगी या नहीं, यह लागू नीति और पात्रता की जांच के बाद तय होगा।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति विरासत में मिलने वाला अधिकार नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होने पर उसके परिवार को उत्पन्न आर्थिक कठिनाइयों से राहत देना है।

इस फैसले का क्या महत्व है?

यह फैसला बताता है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में विभाग को पारिवारिक विवाद या किसी दूसरे सदस्य की आपत्ति के आधार पर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए। उसे संबंधित नीति, पात्रता, प्राथमिकता और सभी पक्षों के दस्तावेजों पर विचार करना होगा।

हालांकि, यह फैसला सभी मामलों में नियुक्ति की गारंटी नहीं देता। प्रत्येक मामले का निर्णय संबंधित विभाग पर लागू नियमों और परिस्थितियों के अनुसार ही होगा।


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