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मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा: देश में 7 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित, ₹183.46 करोड़ जारी

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नई दिल्ली- फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देश के सात NIPER संस्थानों में सात उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence – CoEs) स्थापित किए हैं। ये केंद्र PRIP योजना (Promotion of Research & Innovation in MedTech Sector) के तहत स्थापित किए गए हैं।

31 जनवरी 2026 तक इन केंद्रों की स्थापना के लिए कुल ₹183.46 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।

सरकार को उद्योग, स्टार्ट-अप और MSME सेक्टर से कुल 710 शोध परियोजना प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें कई परियोजनाएं प्राथमिकता वाले क्षेत्रों से जुड़ी हैं, जिन्हें PRIP योजना के तहत अधिक वित्तीय सहायता के लिए पात्र माना गया है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने से पहले परियोजनाओं का बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से परीक्षण किया जाता है। इसके बाद पात्र परियोजनाओं को पूर्ण या उच्च वित्तीय सहायता मंजूर की जाती है।

यह जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से दी।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने तिरुवनंतपुरम स्थित चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) का दौरा किया

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भारत के उपराष्ट्रपति,सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तिरुवनंतपुरम स्थित प्रतिष्ठित चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) का दौरा किया। यह संस्थान भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन एक राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है, जो चिकित्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकृत दृष्टिकोण में अपने अग्रणी योगदानों के लिए प्रसिद्ध है।

अपने दौरे के दौरान, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने चित्रा तिरुनाल चिकित्सा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SCTIMST) और उसके स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित चिकित्सा उपकरणों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी अच्युत मेनन स्वास्थ्य विज्ञान अध्ययन केंद्र (AMCHSS), तिरुवनंतपुरम में आयोजित की गई थी।

संस्थान में अपने संबोधन के दौरान, उपराष्ट्रपति ने संस्थान की चिकित्सा विज्ञान और बायोमेडिकल प्रौद्योगिकी के समन्वय से राष्ट्र की सेवा के 40 वर्षों से अधिक की विरासत की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक आदर्श मॉडल है, जिसकी सफलता को देश के अन्य संस्थान अपनाने की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने संस्थान की स्वदेशी चिकित्सा उपकरण विकास में उपलब्धियों की प्रशंसा की — जैसे कम लागत वाली चित्रा हृदय वाल्व, चित्रा ब्लड बैग, और क्षय रोग की त्वरित निदान जांच (spot diagnostic tests for TB), जिन्हें वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई है।

राधाकृष्णन ने संस्थान की पेटेंट आवेदन, डिजाइन पंजीकरण और सफल तकनीकी हस्तांतरण (technology transfer) की सराहना करते हुए कहा कि अनुसंधान और नवाचार (Research & Innovation) भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रमुख स्तंभ हैं, जैसा कि “विकसित भारत @2047” की परिकल्पना में अभिव्यक्त है। उन्होंने शोधकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अपने अनुसंधान का दायरा बढ़ाएँ, ताकि समाज के वंचित वर्गों तक भी इसका लाभ पहुँचे और सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो।

सी. पी. राधाकृष्णन ने हाल ही में उद्घाटित प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत निर्मित नौ-मंजिला अस्पताल ब्लॉक का भी निरीक्षण किया। उन्होंने इस नए अस्पताल भवन की सराहना की, जिसमें उच्च स्तरीय चिकित्सा अवसंरचना जैसे आधुनिक ऑपरेशन थियेटर, कैथ लैब, सीटी स्कैनर और विस्तारित आईसीयू सुविधाएँ सम्मिलित हैं।

इस अवसर पर केरल के राज्यपाल राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी , केरल सरकार के वित्त मंत्री के. एन. बालगोपाल, SCTIMST के निदेशक डॉ. संजय बिहारी, तथा संस्थान के कुलपति, निदेशकगण और वैधानिक निकायों के सदस्य उपस्थित रहे।


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