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पेयजल संकट दूर करने रीवा में जल प्रबंधन पर महामंथन आज,एसडीएम और भूगर्भ वैज्ञानिक देंगे संरक्षण के गुर

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आरंग- ग्राम पंचायत रीवा में गहराते पेयजल संकट से निपटने के लिए आज सोमवार को जल प्रबंधन एवं संरक्षण विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होगा। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन और समस्त ग्रामवासियों के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रशासनिक अफसर, विशेषज्ञ और ग्रामीण एक मंच पर जुटेंगे। फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि गांव में पानी की विकट समस्या को देखते हुए साल 2025 से यह कार्यशाला लगातार आयोजित की जा रही है, जिसके अब तक बेहद सकारात्मक परिणाम मिले हैं। कार्यशाला में मुख्य रूप से आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा, जनपद सीईओ अभिषेक बेनर्जी, पीएचई विभाग से ईई अनिल बच्चन, एसडीओ शुभ्रा बघेल, इंजीनियर रानू दिनकर और जिओ हाइड्रोलॉजिस्ट घनश्याम वर्मा,देवव्रत साहू शामिल होकर ग्रामीणों को वाटर रिचार्जिंग व जल सहेजने की तकनीक सिखाएंगे। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य वतन चंद्राकर, जनपद सदस्य कृष्णा महेश साहू, सरपंच घंसियाराम साहू और फाउंडेशन के संरक्षक आनंदराम पत्रकारश्री,अध्यक्ष दूजेराम धीवर, शिक्षाविद मुरली मनोहर देवांगन, समाजसेवी पायलेट ओ के तिवारी,सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे।




रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

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पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


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