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श्रम मंत्रालय की बड़ी पहल: जागरूकता, सुलह और त्वरित कार्रवाई से श्रमिकों को मिला करोड़ों का लाभ

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) [CLC(C)] संगठन देशभर में श्रमिक कल्याण, औद्योगिक सौहार्द और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। जबलपुर, भुवनेश्वर, रायपुर और कानपुर में हाल ही में की गई पहलें इस दिशा में संगठन की सक्रिय भूमिका को दर्शाती हैं।

मंत्रालय के अनुसार, इन प्रयासों का उद्देश्य श्रम संहिताओं (Labour Codes) को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना, श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना, श्रम कानूनों का अनुपालन सुनिश्चित करना तथा शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है।

जबलपुर में सामाजिक सुरक्षा संहिता पर जागरूकता कार्यक्रम

जबलपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय द्वारा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थानों के प्रबंधन प्रतिनिधियों, मानव संसाधन (HR) अधिकारियों और कर्मचारियों को संहिता के तहत उनके अधिकारों और दायित्वों की जानकारी दी गई। विशेष रूप से कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकार, मातृत्व लाभ, सुरक्षित कार्य वातावरण और क्रेच सुविधा संबंधी प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई।

भुवनेश्वर में 81 संविदा श्रमिकों को मिले ₹51.27 लाख

भुवनेश्वर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गेल (GAIL) से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले का सफल समाधान किया। सुलह प्रक्रिया के बाद 81 संविदा श्रमिकों को बकाया वेतन, अवकाश वेतन और बोनस सहित कुल ₹51.27 लाख का भुगतान कराया गया। इस पहल से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई।

रायपुर में सात श्रमिकों को मिला ग्रेच्युटी का भुगतान

रायपुर स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने बैकोंठ सीमेंट वर्क्स में कार्यरत पूर्व संविदा श्रमिकों की ग्रेच्युटी भुगतान संबंधी शिकायत का समाधान किया। समय पर हस्तक्षेप और ठेकेदार तथा प्रधान नियोक्ता के बीच समन्वय स्थापित कर सात पात्र श्रमिकों को कुल ₹3.31 लाख की ग्रेच्युटी दिलाई गई। यह कार्रवाई श्रमिकों को उनके वैधानिक लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

कानपुर में बीमार श्रमिक को घर पहुंचकर मिला ₹20.32 लाख का भुगतान

कानपुर में क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय ने गंभीर रूप से बीमार और बिस्तर पर पड़े एक श्रमिक से जुड़े औद्योगिक विवाद का मानवीय संवेदनशीलता के साथ समाधान किया। सुलह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित श्रमिक को ₹20.32 लाख की अंतिम भुगतान राशि उसके घर जाकर सौंपी गई, जिससे अनावश्यक प्रशासनिक देरी से बचते हुए उसे समय पर न्याय मिल सका।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) संगठन जागरूकता कार्यक्रमों, प्रभावी सुलह प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, जिम्मेदार रोजगार प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा देशभर में श्रम कानूनों के प्रभावी अनुपालन के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।


एआईआईएमएस ऋषिकेश के कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु विशेष शिविर का आयोजन

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श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के अधीन उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून के कार्यालय द्वारा भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 (Payment of Gratuity Act, 1972) के प्रावधानों के तहत एक विशेष शिविर (कैंप सिटिंग) का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), ऋषिकेश के कर्मचारियों से संबंधित लंबे समय से लंबित ग्रेच्युटी मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण करना था।

इस विशेष शिविर की अध्यक्षता उप मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), देहरादून ने अधिनियम के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी (Appellate Authority) के रूप में की। दिनभर चली सुनवाई के दौरान एआईआईएमएस ऋषिकेश से संबंधित लगभग नौ माह से लंबित 169 अपीलों पर सुनवाई की गई।

सुनवाई के उपरांत 46 अपीलों का कर्मचारियों के पक्ष में सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया, जिससे संबंधित कर्मचारियों को लगभग 40 लाख रुपये की वैधानिक ग्रेच्युटी राशि का तत्काल लाभ सुनिश्चित हुआ। यह विशेष अभियान मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) संगठन की उस सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिसके माध्यम से श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा तथा उनके दावों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित किया जा रहा है।

कार्यवाही के दौरान संबंधित ठेकेदार एवं उसके प्रतिनिधियों मैसर्स प्रिंसिपल सिक्योरिटी एंड एलाइड सर्विसेज को भुगतान उपदान अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनिवार्य अनुपालन के संबंध में सख्त निर्देश एवं जागरूकता प्रदान की गई। अपीलीय प्राधिकारी ने समय पर ग्रेच्युटी का भुगतान, वैधानिक अभिलेखों का समुचित संधारण तथा श्रमिकों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।

इस पर ठेकेदार ने प्राधिकरण को आश्वासन दिया कि अधिनियम के सभी प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने तथा पात्र कर्मचारियों के सभी दावों का समयबद्ध निस्तारण करने के लिए तत्काल आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।


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