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हर विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों की पात्रता परीक्षा हो: गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और सरकारी सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विश्व प्रसिद्ध स्कूल चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी, महासमुंद के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की तर्ज पर प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए भी समय-समय पर पात्रता परीक्षा आयोजित किए जाने की मांग की है।

टीईटी के संबंध में पूछे गए सवाल पर शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उनके अनुसार, सरकारी सेवा में नियुक्ति के बाद भी शिक्षकों का लगातार अपने ज्ञान, कौशल और कार्यप्रणाली को अपडेट करते रहना जरूरी है। बदलती तकनीक, नई शिक्षण पद्धतियां, डिजिटल माध्यम और नवीनतम ज्ञान के दौर में शिक्षकों के लिए निरंतर सीखते रहना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि दुनिया में हर पल बदलाव हो रहा है। ऐसे में शिक्षक यदि वर्षों पुराने तौर-तरीकों तक सीमित रहेंगे तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। उनके अनुसार, टीईटी की तैयारी के कारण शिक्षकों में अध्ययन और पठन-पाठन के प्रति गंभीरता बढ़ी है तथा वे अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करने का प्रयास कर रहे हैं।

केवल शिक्षकों की नहीं, हर विभाग में हो पात्रता परीक्षा

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि यदि शिक्षक पात्रता परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की योग्यता और दक्षता का मूल्यांकन किया जा सकता है, तो इसी प्रकार पुलिस, डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर, पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए भी समय-समय पर पात्रता और दक्षता का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

उन्होंने सुझाव दिया कि हर पांच या छह वर्ष में एक बार पात्रता परीक्षा अथवा दक्षता मूल्यांकन की व्यवस्था की जा सकती है, ताकि सरकारी सेवाओं से जुड़े कर्मचारी और अधिकारी अपने ज्ञान, कौशल, तकनीकी दक्षता तथा कार्यप्रणाली को लगातार बेहतर करते रहें।

जनता के पैसे से वेतन लेने वालों की जवाबदेही जरूरी

कोकडिया ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को वेतन जनता के करों से प्राप्त राजस्व से दिया जाता है। इसलिए प्रत्येक सरकारी कर्मचारी की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वह समय के साथ अपनी पात्रता, दक्षता और कार्यक्षमता प्रमाणित करता रहे।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति सरकारी नौकरी मिलने के बाद वर्षों तक पुराने ढर्रे पर काम करता रहे, नई तकनीक और नई कार्यप्रणाली को न अपनाए तथा उसके कार्य से विभाग और जनता को अपेक्षित लाभ न मिले, तो उसकी कार्यक्षमता का मूल्यांकन क्यों न किया जाए?

उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति जिम्मेदारी है। इसलिए कर्मचारियों और अधिकारियों में निरंतर सीखने, सुधार करने और बेहतर सेवाएं देने की भावना विकसित होना आवश्यक है।

“सुपात्र व्यक्ति पर हर कोई अपना तन-मन-धन लगाना चाहता है”

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि किसी भी संस्था या समाज की प्रगति योग्य और सक्षम लोगों से होती है। उनका कहना है कि “सुपात्र व्यक्ति पर हर कोई अपना तन-मन-धन लगाना चाहता है।” इसलिए सरकारी व्यवस्था में भी पात्रता और दक्षता को निरंतर बनाए रखने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि समय-समय पर पात्रता परीक्षा का उद्देश्य किसी कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि उसे अपडेट, सक्षम और जवाबदेह बनाए रखना होना चाहिए। इससे कर्मचारियों में अध्ययन की आदत, नई तकनीक सीखने की इच्छा और कार्य की गुणवत्ता बढ़ेगी।

विकसित भारत के लिए निरंतर दक्षता जरूरी

कोकडिया के अनुसार, “शिक्षक पात्रता परीक्षा” की अवधारणा को व्यापक बनाकर प्रत्येक सरकारी विभाग में निरंतर दक्षता मूल्यांकन की व्यवस्था विकसित भारत के निर्माण में उपयोगी हो सकती है। बदलती दुनिया और तेजी से विकसित हो रही तकनीक के साथ सरकारी सेवाओं में भी निरंतर कौशल-विकास और ज्ञान-वृद्धि आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि यदि देश को विकसित भारत और विकसित संसार की दिशा में आगे बढ़ना है, तो केवल नई नियुक्तियां करना पर्याप्त नहीं है। पहले से कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों को भी समय के साथ सीखने, स्वयं को अपडेट करने और अपनी कार्यक्षमता प्रमाणित करने के अवसर एवं जिम्मेदारी दोनों दिए जाने चाहिए।

गेंदलाल कोकडिया ने कहा कि पात्रता का निरंतर परीक्षण कर्मचारियों के विरुद्ध नहीं, बल्कि बेहतर प्रशासन, गुणवत्तापूर्ण सेवाओं और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक सुधारात्मक कदम होना चाहिए।

भारतीय सांख्यिकी सेवा, भारतीय कौशल विकास सेवा और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के प्रशिक्षणार्थियों ने राष्ट्रपति से की मुलाकात

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नई दिल्ली– भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS), भारतीय कौशल विकास सेवा (ISDS) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (CES) के प्रशिक्षणार्थियों ने आज (29 सितंबर 2025) राष्ट्रपति प्रतिभागी द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।

भारतीय सांख्यिकी सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सटीक सांख्यिकीय विश्लेषण पर आधारित नीतियों का निर्माण और क्रियान्वयन देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आज के डेटा-संचालित युग में सांख्यिकी का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। उन्होंने अधिकारियों की भूमिका को रेखांकित किया, जो सरकारी डेटा को संकलित और विश्लेषित करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनका कार्य सांख्यिकीय विधियों में विशेषज्ञता की मांग करता है, जिसे वे राष्ट्र की बढ़ती डेटा और सूचना आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए लागू करेंगे।

भारतीय कौशल विकास सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कौशल और ज्ञान किसी भी राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि और सामाजिक प्रगति के असली इंजन हैं। जो देश उच्च दक्षता वाले कार्यबल का विकास करते हैं, वे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने और विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम होते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि जैसे-जैसे भारत तकनीक-आधारित विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, यह आवश्यक है कि युवा उन्नत तकनीकी कौशल को अपनाएँ और अनुकूलित हों। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा ISDS अधिकारी एक विशेषज्ञ कौशल प्रशासनिक मंडल के रूप में उभरेंगे और भविष्य के लिए तैयार कार्यबल के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इंजीनियर किसी राष्ट्र की तकनीकी प्रगति और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार के बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचना विकास पर जोर के साथ, इंजीनियरिंग क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास की संभावना है। उन्होंने CPWD जैसे संगठनों से इन पहलों के लिए तकनीकी आधार प्रदान करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि विकास सतत और पर्यावरण-अनुकूल हो। उन्होंने यह जानकर खुशी जताई कि CPWD पर्यावरण-हितैषी उपायों को अपनाता जा रहा है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल नीति के क्रियान्वयन में ही नहीं, बल्कि प्रभावी फीडबैक के माध्यम से नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। सभी, विशेष रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, देश की प्रगति की गति तय करेगी। उन्होंने आगे कहा कि उत्साह और ईमानदारी के साथ सेवा करके अधिकारी एक अधिक समृद्ध, लचीले और समावेशी राष्ट्र के निर्माण में योगदान कर सकते हैं। उनके समर्पित प्रयासों से भारत विश्व के समक्ष शक्ति और प्रगति का आदर्श राष्ट्र बन सकता है।


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