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छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची

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गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से राज्य की खरीदी में एक वर्ष में 113 प्रतिशत की वृद्धि, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मिले ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹130 करोड़ की बचत

रायपुर- छत्तीसगढ़ को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के 10वें स्थापना दिवस समारोह में ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। GeM के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह की थीम ‘GeM 10: A Decade of Exponential Possibilities’ रही।

राज्य सरकारों के लिए निर्धारित ‘प्रीमियर अवार्ड्स – स्टेट गवर्नमेंट फेलिसिटेशन’ श्रेणी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार GeM के प्रभावी उपयोग तथा इसके माध्यम से शासकीय खरीदी के मूल्य और मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए प्रदान किया गया है।

खुली प्रतिस्पर्धा से ₹130 करोड़ की बचत

GeM प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन को ₹130 करोड़ की बचत हुई है। यह बचत विभागों द्वारा खरीदी के लिए अनुमानित लागत और खुली प्रतिस्पर्धी बोली के बाद प्राप्त वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर से हुई है।

GeM की खुली बोली प्रक्रिया, मानकीकृत विनिर्देश और प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल एवं ऑडिट योग्य रिकॉर्ड शासकीय खरीदी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रतिस्पर्धी खरीदी के माध्यम से राज्य शासन को कुल ₹235 करोड़ की बचत हुई है।

खरीदी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित जांच और निगरानी व्यवस्था लागू है। साथ ही निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विनिर्देशों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे खरीदी की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बनी रहे।

GeM से खरीदी में 113 प्रतिशत की वृद्धि

छत्तीसगढ़ में GeM के माध्यम से शासकीय खरीदी वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 113 प्रतिशत की वृद्धि है।

राज्य शासन द्वारा विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों की खरीदी को एक साझा एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के सुनियोजित प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे अधिकाधिक शासकीय खरीदी खुली प्रतिस्पर्धा के दायरे में आई है और प्रत्येक लेन-देन में प्रतिस्पर्धी दर निर्धारण तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

GeM के व्यापक उपयोग से शासकीय खरीदी में छोटे उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदी 61 प्रतिशत बढ़कर ₹1,800 करोड़ हो गई। यह निर्धारित 25 प्रतिशत MSE खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।

राज्य के प्राथमिकता वाले उद्यमी वर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। महिला उद्यमियों से खरीदी में 97 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों से खरीदी में 108 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं स्टार्टअप से खरीदी में सर्वाधिक 178 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

GeM ने उद्यमियों के लिए खोले शासकीय बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि GeM ने छत्तीसगढ़ के उद्यमियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे शासकीय मांग और बाजार से जुड़ने का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों और स्टार्टअप की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस पारदर्शी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खुला और पारदर्शी डिजिटल मार्केटप्लेस प्रत्येक उद्यमी को समान अवसर प्रदान करता है।  हमारी सरकार का प्रयास है कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्टार्टअप तक पहुंचे। हम पारदर्शी शासकीय खरीदी के साथ स्थानीय उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

बीमारी रोकने की ताक़त आपके पास, संदिग्ध मामलों की सूचना सीधे सरकार तक पहुंचाएं

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किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखें तो IHIP पोर्टल पर दें जानकारी, स्वास्थ्य विभाग करेगा तत्काल जांच

रायपुर- किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में यदि अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले सामने आने लगें, तो यह किसी संभावित रोग प्रकोप (Outbreak) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को ही होती है। अब आम नागरिक भी ऐसी संदिग्ध स्वास्थ्य घटनाओं की सूचना सीधे भारत सरकार के एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (IHIP) पर दर्ज कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग समय रहते जांच कर आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सके।

जनभागीदारी को बढ़ावा देने और रोगों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के अंतर्गत इंटीग्रेटेड हेल्थ इन्फॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पर सामुदायिक आधारित रोग निगरानी (Community Based Surveillance) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने आसपास दिखाई देने वाली किसी असामान्य बीमारी अथवा संभावित रोग प्रकोप की सूचना सीधे ऑनलाइन दर्ज कर सकता है।

पोर्टल पर सूचना दर्ज करते समय सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर, आयु, लिंग, पता तथा व्यवसाय जैसी सामान्य जानकारी के साथ घटना की तिथि, स्थान, बीमारी अथवा स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संक्षिप्त विवरण दर्ज करना होता है। यदि घटना से संबंधित कोई फोटो या अन्य दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उन्हें भी प्रमाण के रूप में अपलोड किया जा सकता है। सभी अनिवार्य जानकारी भरने के बाद मोबाइल पर प्राप्त ओटीपी से सत्यापन करने पर सूचना संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहुंच जाती है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना देने वाले व्यक्ति से भी संपर्क कर सकते हैं।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी संक्रामक बीमारी के फैलाव को रोकने में समय पर सूचना मिलना सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होती है। प्रारंभिक स्तर पर मिली सूचना से स्वास्थ्य विभाग शीघ्र जांच, सैंपल संग्रह, उपचार और आवश्यक नियंत्रण उपाय शुरू कर सकता है, जिससे बीमारी को बड़े प्रकोप या महामारी का रूप लेने से रोका जा सकता है। सामुदायिक निगरानी न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से पूरे समाज की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।

स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सत्य, तथ्यात्मक एवं जिम्मेदारीपूर्ण जानकारी ही पोर्टल पर दर्ज करें। अफवाहों, अपुष्ट सूचनाओं या भ्रामक जानकारी से बचें, ताकि स्वास्थ्य तंत्र वास्तविक घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई कर सके।

यदि आपके आसपास किसी गांव, मोहल्ले या बस्ती में अचानक एक जैसी बीमारी के दो या अधिक मामले दिखाई दें, तो उसकी सूचना https://ihip.mohfw.gov.in/cbs/#/ पर अवश्य दें। आपकी समय पर दी गई एक सूचना अनेक लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है और संभावित महामारी को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मोर गांव-मोर पानी अभियान से ग्रामीण आजीविका को मिली नई उड़ान

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47 आजीविका डबरियां किसानों के लिए बनेंगी संबल, जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी आय

विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत सिंचाई, मत्स्य पालन और कृषि गतिविधियों को मिलेगा नया आधार

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को एक बड़ा जनआंदोलन बना रहा है। इसके तहत सोख्ता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब गहरीकरण और खेत-पोंड जैसी जल संरचनाएं बनाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा रहा है और ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान के तहत 'नवा तरिया आय के जरिया' और अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से भूजल संवर्धन और जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर बढ़ रहे हैं।

कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से किसानों होंगे आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित मोर गांव-मोर पानी अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहा है। विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में आजीविका आधारित जल संरचनाओं का निर्माण कर किसानों को कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।

47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत

जांजगीर-चांपा जिले में अभियान के तहत कुल 47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, जिनमें से 35 डबरियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्षा जल से भर चुकी इन डबरियों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे खेती का रकबा बढ़ने के साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।

14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित

आजीविका डबरियां अब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त स्रोत भी बन रही हैं। वर्तमान में 14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन तथा अन्य फसलों की खेती से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है। जिले में 4 डबरियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। इससे किसान अब वर्षभर कृषि एवं मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं।

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। यह अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।

सफलता की कहानी- तेन्दूपत्ता संग्रहण की नई पहल से अबुझमाड़ के 22 गांवों को मिला लाभ

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गांव के पास खुला फड़, 365 संग्राहकों को मिला सीधा आर्थिक लाभ

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन की नई तेन्दूपत्ता संग्रहण नीति अबुझमाड़ के दूरस्थ गांवों के लिए राहत और रोजगार का नया माध्यम बन गई है। वर्ष 2026 में पहली बार असीमांकित क्षेत्रों में नए तेन्दूपत्ता फड़ खोले गए, जिससे ग्रामीणों को अपने गांव के पास ही तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली।

पहले ग्रामीणों को तेन्दूपत्ता बेचने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। अब गांव के पास फड़ खुलने से उनका समय, श्रम और खर्च बचा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीणों ने इस पहल पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे उनकी आय बढ़ी है और काम करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

राज्य शासन ने वर्ष 2026 के लिए तेन्दूपत्ता की दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा निर्धारित की है। इससे ग्रामीणों में तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रति उत्साह बढ़ा। ग्रामीणों की मांग पर वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार अबुझमाड़ क्षेत्र में नए फड़ खोलने की प्रक्रिया तेज की गई। वन विभाग ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ से अनुमति प्राप्त की और संग्रहण कार्य शुरू कराया।

इस पहल के तहत कलमानार, ओकपाड़, कुतुल, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, टेकानार, बांहकेर और रायनार में कुल 10 नए तेन्दूपत्ता फड़ स्थापित किए गए। इन फड़ों के माध्यम से 22 गांवों के 365 संग्राहकों ने 161.254 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।

संग्राहकों को तेन्दूपत्ता के बदले 8 लाख 86 हजार 897 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई। समय पर और पारदर्शी भुगतान मिलने से ग्रामीणों का शासन पर भरोसा और मजबूत हुआ है।


इस योजना से कलमानार, पिड़का, ब्रेहबेड़ा, कंदाड़ी, किशकाल, ओकपाड़, कुतुल, आलबेड़ा, निरामेटा, कोडकानार, कानागांव, कच्चापाल, ताड़ोकुर, टेकानार, नयापारा, मकसोली, हिकपुला, बांहकेर, झोरीगांव, रेंगाबेड़ा, कोकोड़ी और रायनार सहित कुल 22 गांवों के ग्रामीण लाभान्वित हुए हैं।

छत्तीसगढ़ शासन की यह पहल केवल तेन्दूपत्ता संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को स्थानीय रोजगार, बेहतर आय और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अबुझमाड़ के ग्रामीणों के लिए यह पहल आत्मनिर्भरता और विकास की नई उम्मीद बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

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डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति,नीति बनाने समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने अधोसंरचना विकास निगम (CIDC) के अंतर्गत आने वाले विघटित परिवहन निगम के दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों के हित में एक बड़ा और संवेदनशील निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर, इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने के लिए एक नई नीति बनाने का निर्णय लिया गया है। इस नीति के निर्धारण के लिए राज्य शासन द्वारा सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में 07 सदस्यीय अंतर्विभागीय समिति का गठन किया गया है, जिसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अनुसार, पूर्व में इन दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को शिक्षाकर्मी वर्ग-तीन के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जाती थी। लेकिन शिक्षाकर्मी पद समाप्त होने के बाद जल संसाधन विभाग ने 13 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी कर सीआईडीसी ((CIDC) के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान किया था। सीआईडीसी में पद रिक्त न होने के कारण अनुकंपा नियुक्ति के कई महत्वपूर्ण प्रकरण लंबे समय से लंबित हो गए थे। इसके चलते आश्रित परिवारों को गंभीर आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर समिति गठित, 1 माह में सौंपनी होगी रिपोर्ट

मामले की संवेदनशीलता, उच्च न्यायालय के निर्देशों और कर्मचारी हित को सर्वाेपरि रखते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नई नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। गठित की गई 7 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति को अपनी विस्तृत रिपोर्ट एक माह के भीतर शासन को सौंपनी होगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट (मंत्रि-परिषद्) से अंतिम अनुमोदन लिया जाएगा, जिसके बाद नई नीति को विधिवत अधिसूचित कर दिया जाएगा।

शासन का मुख्य उद्देश्य

राज्य शासन का स्पष्ट उद्देश्य है कि दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। इस नई नीति के लागू होने से वर्षों से लंबित प्रकरणों का तेजी से निपटारा होगा और पीड़ित परिवारों को जल्द से जल्द अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार व आर्थिक संबल मिल सकेगा।

छत्तीसगढ़ में NSS गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार,उच्च शिक्षा विभाग ने 29 अंशकालीन जिला संगठकों की सूची की जारी

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​रायपुर- छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों को और अधिक सुचारू, प्रभावी और गतिशील बनाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 29 अंशकालीन जिला संगठकों  की नियुक्ति की गई है, जिसमें संबंधित प्राध्यापकों व व्याख्याताओं को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ आगामी 02 वर्षों के लिए जिला संगठक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।  

कलेक्टरों के समन्वय से गठित होगी 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति'

उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में राज्य के सभी प्रमुख जिलों और अंचलों को शामिल किया गया है। सभी नवनियुक्त जिला संगठकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के कलेक्टर से तत्काल संपर्क स्थापित कर 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति' का गठन सुनिश्चित करें और नियमानुसार बैठकों का आयोजन करें। सभी संगठकों को हर महीने अपना दौरा कार्यक्रम, कार्यों का संकलित प्रतिवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संबंधित विश्वविद्यालयीन रासेयो प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।  

जिला संगठक अपने क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के रासेयो इकाईयों, जिसमें कृषि व तकनीकी शिक्षा से संबंधित इकाईयां भी शामिल हैं,के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित विश्वविद्यालयीन प्रकोष्ठ को देंगे।

कृत्रिम पैर से बबीता के जीवन को मिली नई दिशा, प्रशासन की संवेदनशील पहल बनी सहारा

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वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की तत्परता से दो लाख रुपये की सहायता, आधुनिक कृत्रिम पैर लगने से लौटी आत्मनिर्भरता

अब आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहीं बबीता यादव, शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार

रायपुर- संवेदनशील प्रशासन और समय पर मिली सहायता ने रायगढ़ जिले की 27 वर्षीय बबीता यादव के जीवन में नई उम्मीद का संचार किया है। एक गंभीर दुर्घटना के बाद अपना बायां पैर गंवाने वाली बबीता अब आधुनिक कृत्रिम पैर की सहायता से आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के प्रयास और जिला प्रशासन की त्वरित पहल से उन्हें दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका कृत्रिम पैर लगवाया जा सका।



रायगढ़ जिले के ग्राम मुरालपाली निवासी बबीता यादव के साथ वर्ष 2025 में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उनके बाएं पैर में गंभीर संक्रमण हो गया। संक्रमण हड्डियों तक फैल जाने के कारण चिकित्सकों को 27 जनवरी 2025 को उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना के बाद बबीता के सामने शारीरिक, मानसिक और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गईं और उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया।

विपरीत परिस्थितियों में भी बबीता ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओ.पी. चौधरी तथा कलेक्टर से कृत्रिम पैर लगवाने के लिए सहायता की मांग की। उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने तत्काल दो लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की और संबंधित अधिकारियों को शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला प्रशासन के समन्वय से रायपुर स्थित इंडो लाइट्स संस्थान में बबीता को आधुनिक कृत्रिम पैर लगाया गया। कृत्रिम पैर लगने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे सहज रूप से चल-फिर रही हैं, अपने दैनिक कार्य स्वयं कर रही हैं तथा आत्मनिर्भर होकर पहले की तरह सामान्य जीवन व्यतीत कर रही हैं।

बबीता यादव ने कहा कि कृत्रिम पैर मिलने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उनका जीवन फिर से पटरी पर लौट आया हो। उन्होंने इस मानवीय सहयोग और संवेदनशील पहल के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, राज्य शासन तथा जिला प्रशासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपर कलेक्टर से भेंट कर भी इस सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता ने उन्हें नया जीवन और नई उम्मीद प्रदान की है।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव

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“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मानित करना है। “दीदी के गोठ” ने बीते एक वर्ष में महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री एव पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा द्वारा की जाएगी।

कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएँ एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित होकर इस सफल यात्रा के साक्षी बनेंगे।

विदित हो कि “दीदी के गोठ” के प्रथम एपिसोड का प्रसारण अगस्त 2025 में हुआ था, जो “लखपति दीदी” विषय पर केंद्रित था। इसके उपरांत प्रत्येक माह के द्वितीय गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों की समूह की महिलाओं द्वारा ड्रोन दीदी, एफपीसी, जेंडर, सरस मेला, वित्तीय जागरूकता, साइबर सुरक्षा, सरस मेला तथा “छत्तीसकला” ब्रांड जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सफलता की प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं। “दीदी के गोठ” की एकवर्षीय सफल यात्रा का विशेष प्रसारण 09 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

“दीदी के गोठ” ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। यह मंच न केवल संवाद का माध्यम बना है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बनकर उभरा है।

कार्यक्रम में वर्षभर की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण, “दीदी के गोठ” में प्रतिभागिता करने वाली महिलाओं का सम्मान तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन- बिहान द्वारा सभी नागरिकों ,संबंधित हितधारकों, स्व सहायता समूहों, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

स्वेच्छानुदान मद से सुदूर वनांचल स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल, मांझीगुडा को 10 कंप्यूटर प्रदत्त

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए अपने स्वेच्छानुदान मद से बस्तर जिले के विकासखंड दरभा के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा चिंगपाल को 10 कंप्यूटर प्रदान किए। इसके लिए राज्यपाल द्वारा पूर्व में स्वीकृति प्रदान की गई थी।

लोक भवन  में आज राज्यपाल ने विद्यालय के लिए कंप्यूटरों का औपचारिक रूप से हस्तांतरण किया। इन कंप्यूटरों के माध्यम से सुदूर वनांचल क्षेत्र के विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके ज्ञान और कौशल का विकास होगा। 

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उप सचिव निधि साहू तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मांझीगुडा (जिला बस्तर) के प्राचार्य उपस्थित थे।


चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल गवर्नेंस, उभरती तकनीकों, कृषि समृद्धि और नेतृत्व विकास पर मंथन

पिछले चिंतन शिविरों के परिणामस्वरूप ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए साकार

रायपुर- चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने "इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़" विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र "कृषि से समृद्धि" में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत

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वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से अब अल्पावधि ऋण सुविधा उपलब्ध

ई-कोष से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों को मिलेगा त्वरित, पारदर्शी एवं सुरक्षित ऋण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों के लिए अल्पावधि ऋण (Short Term Credit) की सुविधा प्रारंभ की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को आकस्मिक वित्तीय आवश्यकताओं के समय त्वरित, सरल एवं पारदर्शी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें असुविधाजनक अथवा अनौपचारिक वित्तीय स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े।

यह सुविधा राज्य शासन की ई-कोष (e-Kosh) प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार शासकीय कर्मचारियों के कल्याण और उनकी आर्थिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आवश्यकता के समय कर्मचारियों को त्वरित, सरल और पारदर्शी वित्तीय सहायता उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से अल्पावधि ऋण सुविधा प्रारंभ की गई है। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह सुविधा सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होगी। हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से कर्मचारियों के हितों को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों के संरक्षण और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह अल्पावधि ऋण सुविधा कर्मचारियों को आवश्यकता के समय त्वरित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी तथा उन्हें सम्मानजनक एवं सुविधाजनक वित्तीय विकल्प प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं सुरक्षित है। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर (Employee Corner) के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। ऋण से संबंधित सभी शर्तें, ब्याज दर, ईएमआई, शुल्क तथा की फैक्ट स्टेटमेंट (Key Fact Statement-KFS) जैसी आवश्यक जानकारियां पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि कर्मचारी पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के उपरांत ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण तथा सहमति (Consent) की प्रक्रिया पूर्ण होने पर ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की जाएगी। ऋण की मासिक किस्तों का भुगतान वेतन से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता एवं डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन किया जाएगा। कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग केवल उनकी सहमति से किया जाएगा तथा सभी लेन-देन सुरक्षित डिजिटल माध्यम से संपन्न होंगे।

इस पहल से कर्मचारियों को आकस्मिक चिकित्सा, शिक्षा, पारिवारिक अथवा अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी। इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच और अधिक सुगम बनेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त विभाग की यह पहल कर्मचारी हितैषी शासन, सुशासन और डिजिटल प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सफलता की कहानी- पीडिया में 21 साल बाद गूंजी स्कूल की घंटी, 539 बच्चों के जीवन में लौटी शिक्षा की नई उम्मीद

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कभी बंद पड़े स्कूलों में फिर लौटी रौनक, बदलते बस्तर की नई तस्वीर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर में विकास और सुशासन का नया दौर शुरू हुआ है। इसका प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले का पीडिया क्षेत्र है, जहां 21 वर्षों बाद बंद पड़े 11 स्कूलों का दोबारा संचालन शुरू हुआ है। अब 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है। यह बदलाव केवल स्कूल खुलने तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र में विश्वास, विकास और नई उम्मीद की वापसी का प्रतीक है।

प्रवेशोत्सव में बच्चों का हुआ आत्मीय स्वागत

पीडिया में आयोजित प्रवेशोत्सव कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष जानकी कोरसा ने मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षादूतों को रजिस्टर और शिक्षण सामग्री प्रदान की गई। वहीं बच्चों को स्कूल बैग, कॉपी, पेन और स्लेट वितरित कर उनका विद्यालय में प्रवेश कराया गया।

बच्चों का तिलक लगाकर, मिठाई खिलाकर और शुभकामनाओं के साथ स्वागत किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई

माओवादी हिंसा के कारण वर्षों पहले बंद हुए पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल अब फिर से संचालित होने लगे हैं। इससे बच्चों को अब पढ़ाई के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में नहीं जाना पड़ेगा।

इस वर्ष 37 स्कूलों का हुआ पुनः संचालन

जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पांडे ने बताया कि जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय, कुल 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इन स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाएं भी विकसित की जा रही हैं।

हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है लक्ष्य

कलेक्टर विश्वदीप ने कहा कि जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब शांति और सामान्य स्थिति स्थापित हुई है, वहां बंद स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू किया जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

बदलते बस्तर की नई पहचान

पीडिया में 21 वर्षों बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत करता है। जिन गांवों में कभी भय का माहौल था, वहां आज बच्चों की मुस्कान, पाठशालाओं की चहल-पहल और शिक्षा का उजाला दिखाई दे रहा है। यह सफलता बताती है कि सरकार के सतत प्रयासों से अब बस्तर शिक्षा, विकास और उज्ज्वल भविष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

​सुशासन की नई मिसाल: सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'सुशासन तिहार' बना लाचारों का मजबूत सहारा

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​मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अंतिम छोर के व्यक्ति तक पहुँच रही योजनाएँ

शिविरों के माध्यम से समाज कल्याण विभाग ने 169 को दिए सहायक उपकरण, 248 को दी नई पेंशन की सौगात

रायपुर- राज्य शासन की मंशानुसार जब प्रशासनिक तंत्र संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो सुशासन की परिभाषा ज़मीनी हकीकत में बदल जाती है। कुछ ऐसा ही अभूतपूर्व नज़ारा छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ में देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के विजन और कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित ‘सुशासन तिहार 2026’ ने जिले के सैकड़ों दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और निराश्रितों के जीवन में उम्मीद का एक नया सवेरा लाया है।

मई से 10 जून तक जिले के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों में सजे विभागों के स्टॉल सिर्फ शिकायतें दर्ज करने के केंद्र नहीं, बल्कि आमजन की समस्याओं के त्वरित और मौके पर समाधान का माध्यम बने।

​आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम: 169 को मिले सहायक उपकरण

शिविरों के दौरान समाज कल्याण विभाग ने सेवा और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की। विभाग द्वारा आवेदनों की स्क्रूटनी कर अत्यंत कम समय में 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरण वितरित किए गए।​इनमें प्रमुख रूप से ​11 वृद्धजनों को सहारा देने वाली वॉकिंग स्टिक (छड़ी),​04 दिव्यांगजनों को नई व्हीलचेयर,​03 दिव्यांगजनों को गति देने वाली ट्राइसाइकिल,​02 हितग्राहियों को बैशाखी,​01 हितग्राही को दुनिया की आवाज़ सुनने के लिए श्रवण यंत्र (हियरिंग एड)  शामिल हैं।

इन उपकरणों की मदद से अब बुजुर्ग और दिव्यांगजन बिना किसी दूसरे पर निर्भर रहे अपने दैनिक कार्यों को सहजता से पूरा कर पा रहे हैं। उनके चेहरे की मुस्कान शासन के प्रयासों की सफलता को बयां कर रही है।

​आर्थिक सुरक्षा का कवच: 248 नवीन पेंशनों को तत्काल स्वीकृति

सुशासन तिहार का सबसे बड़ा असर सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर दिखा। शिविरों में आए आवेदनों का ऑन-द-स्पॉट परीक्षण कर 248 पात्र हितग्राहियों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन की स्वीकृति जारी की गई। अब इन वृद्ध, बेसहारा और दिव्यांग नागरिकों को हर महीने नियमित आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे।

सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित इन विशेष शिविरों में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के आपसी समन्वय से उल्लेखनीय सफलता हासिल हुई है। मई महीने से शुरू होकर 10 जून 2026 तक चले इस अभियान के दौरान ज़मीनी स्तर पर बड़े फैसले लिए गए। इसके तहत जहाँ एक ओर 169 जरूरतमंद हितग्राहियों को उनके जीवन को सुगम बनाने के लिए विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए गए, वहीं दूसरी ओर 248 पात्र नागरिकों के लिए नवीन सामाजिक सुरक्षा पेंशन को भी तत्काल स्वीकृति दी गई, जिससे अब उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल सकेगा।

"योजनाएं अब कागजों पर नहीं, हमारे हाथों में हैं"

प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय कार्यप्रणाली से अभिभूत होकर लाभांवित हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों का कहना है कि यह 'सुशासन तिहार' उनके लिए राहत और अटूट विश्वास का केंद्र बनकर उभरा है। साय सरकार का सुशासन केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को सुगम और गरिमामय बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहा है।

147 बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिलेंगे निःशुल्क कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण

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​रायपुर- जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में  जिला दिव्यांगजन पुनर्वास केन्द्र में एक विशेष पहल की गई। कलेक्टर के मार्गदर्शन में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण उपलब्ध कराने हेतु पंजीयन, चिन्हांकन एवं मापन शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन को सुगम बनाना है।

​एलिम्को के विशेषज्ञों ने किया परीक्षण

शिविर में भारत सरकार के मिनीरत्न उपक्रम, भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), कानपुर के तकनीकी विशेषज्ञों ने अपनी सेवाएं दीं। जनपद पंचायत धमतरी, कुरूद सहित नगर पालिक निगम धमतरी और विभिन्न नगर पंचायतों (कुरूद, आमदी, भखारा) से बड़ी संख्या में लोग जांच के लिए पहुंचे।

​विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से किए गए परीक्षण और मापन के बाद कुल 147 हितग्राहियों को पात्र पाया गया, जिन्हें आने वाले दिनों में निःशुल्क कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बांटे जाएंगे। इसके साथ ही मौके पर ही 16 दिव्यांगजनों के यूडीआईडी (UDID) कार्ड भी बनाए गए।

नशामुक्त समाज के निर्माण का लिया संकल्प

सहायक उपकरणों के मापन के साथ-साथ शिविर में सामाजिक जागरूकता का संदेश भी दिया गया। समाज कल्याण विभाग की उपसंचालक ने उपस्थित सभी लोगों को जीवनभर नशामुक्त रहने की शपथ दिलाई। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास बेहद जरूरी हैं। दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

​शिविर में एलिम्को की तकनीकी टीम, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण व नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा और मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने किया सीएम हेल्पलाइन 1076 एवं सेवा सेतु की कार्यप्रणाली का विस्तृत अवलोकन

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सुशासन, पारदर्शिता और जनसुविधा की दिशा में बताया महत्वपूर्ण पहल

कहा -  तकनीक के माध्यम से शासन को नागरिकों के और निकट ला रही है राज्य सरकार

रायपुर- मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने आज सीएम हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु की कार्यप्रणाली का विस्तृत अवलोकन किया। इस दौरान सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल,सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। अधिकारियों ने दोनों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा तकनीक आधारित जनसुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासन को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु इसी सोच के सशक्त उदाहरण हैं, जो शासन और नागरिकों के बीच संवाद तथा सेवाओं की उपलब्धता को सरल और प्रभावी बना रहे हैं।

अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने स्वयं सीएम हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव लिया तथा सेंटर की कार्यप्रणाली, शिकायत पंजीयन की प्रक्रिया और समाधान की व्यवस्था का जायजा लिया।  उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान के लिए विकसित यह व्यवस्था शासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों को अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे शासन तक पहुंचाने का सुलभ माध्यम उपलब्ध करा रही है। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए एक सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शिकायतों की निगरानी, समीक्षा और समाधान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक प्रत्येक चरण को तकनीक आधारित प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान का सशक्त मंच बनकर उभर रही है। शिकायतों के निराकरण के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जिससे विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है और समस्या के समाधान की निरंतर निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को राहत प्रदान करना और शासन के प्रति उनका विश्वास मजबूत करना है।

अधिकारियों ने सेवा सेतु की जानकारी देते हुए बताया कि यह राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाना है। इसके माध्यम से नागरिक अनेक आवश्यक प्रमाण-पत्रों एवं सेवाओं के लिए घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। सेवा सेतु के जरिए शासकीय प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है, जिससे लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि सेवा सेतु के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा है। नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है तथा उन्हें मोबाइल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से भी सुलभ बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी शासन की सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। भविष्य में और अधिक सेवाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने सीएम हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित विकास दृष्टि को साकार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के उपयोग से नागरिकों का शासन पर विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण और शिकायतों के प्रभावी निराकरण की दिशा में किया जा रहा यह कार्य विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जैविक खेती, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की आय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन हेतु हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

रायपुर- किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है।

किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर

कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया।

कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया।

औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीरमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ

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अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

फरसाबहार में मिली सफलता के बाद जिले के सभी विकासखंडों में होगा विस्तार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो?

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ।

ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है।

बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।

डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।

बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही।

डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला।

260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षतापायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

“साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

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जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार

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विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल

पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।

पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म

पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

एक ही छत के नीचे जांच और दवा

​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।

​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।

​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना

प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है।

परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम

इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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