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DARPG ने आयोजित किया 36वां राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार, उत्कृष्ट पहलों के प्रसार पर जोर

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प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) को जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस/वेबिनार आयोजित करने के लिए कहा गया था, जिसमें प्रधानमंत्री पुरस्कार (लोक प्रशासन में उत्कृष्टता) के पूर्व विजेताओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि इन पहलों का व्यापक प्रसार और दोहराव सुनिश्चित किया जा सके।

इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में DARPG ने अप्रैल 2022 से अब तक हर महीने एक वेबिनार आयोजित करते हुए कुल 36 राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार आयोजित किए हैं। इन वेबिनारों का उद्देश्य प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार के तहत चयनित पहलों के अनुभवों को साझा करना और उन्हें अन्य स्थानों पर लागू करने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रत्येक वेबिनार में विभिन्न विभागों, राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी भाग लेते हैं।

ये वेबिनार न केवल पहलों के संस्थागतकरण और स्थायित्व की वर्तमान स्थिति को प्रस्तुत करते हैं, बल्कि उनके विस्तार और अन्य क्षेत्रों में लागू किए जाने की संभावनाओं पर भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

27 मार्च 2026 को आयोजित 36वें वेबिनार में ‘जिलों का समग्र विकास’ विषय के अंतर्गत वर्ष 2023 और 2024 के प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों को प्रस्तुत किया गया। इसमें मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले की पहल को डॉ. हरिदास फाटिंग (निदेशक, स्वास्थ्य सेवाएं एवं परियोजना निदेशक, एड्स नियंत्रण सोसायटी) द्वारा तथा ओडिशा के कोरापुट जिले की पहल को वी. कीर्ति वासन (कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, गंजाम) द्वारा प्रस्तुत किया गया।

यह वेबिनार DARPG के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव की अध्यक्षता में आयोजित हुआ और इसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। देशभर के 620 से अधिक स्थानों से राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारी, जिला कलेक्टर और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि इस वेबिनार से जुड़े।

यह पहल देश में सुशासन के सफल मॉडलों के प्रसार और उनके व्यापक क्रियान्वयन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का किया लोकार्पण, कहा— देश सेवा का नया अध्याय शुरू

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में ‘सेवा तीर्थ’ और कर्तव्य भवन-1 व 2 के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज देश एक नए इतिहास के निर्माण का साक्षी बन रहा है। प्रधानमंत्री ने पीएमओ टीम, कैबिनेट सचिवालय और विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को इस ऐतिहासिक परियोजना के लिए बधाई दी और निर्माण कार्य से जुड़े इंजीनियरों व श्रमिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपने संदेश में कहा कि ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होकर सेवा तीर्थ को राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प का प्रतीक है और यह आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा के मार्ग पर प्रेरित करेगा।

गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के लिए बड़े फैसले

प्रधानमंत्री ने बताया कि सेवा तीर्थ परिसर में उन्होंने गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े कई अहम फाइलों पर हस्ताक्षर किए। प्रमुख निर्णय इस प्रकार हैं:

  • पीएम राहत योजना (PM RAHAT Scheme) को मंजूरी, जिसके तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलेगा।

  • लखपति दीदी योजना का लक्ष्य बढ़ाकर 6 करोड़ किया गया, जिससे महिला सशक्तिकरण को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

  • कृषि अवसंरचना निधि का लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये किया गया, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को 10,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ मंजूरी, जिससे स्टार्टअप और डीप-टेक रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा।

स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी

प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन के उद्घाटन अवसर पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी किया। उन्होंने कहा कि ये भवन 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए मजबूत आधार बनेंगे।

गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का अभियान

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों से देश गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने के अभियान में जुटा है। उन्होंने कहा, “स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान, गुलामी से मुक्त निशान” हमारा मंत्र है।

उन्होंने कहा कि कर्तव्य ही इस जीवंत राष्ट्र की प्राण वायु है, जो करोड़ों भारतीयों के सपनों को साकार करने के संकल्प को नई ऊर्जा देगा।



डॉ. जितेंद्र सिंह ने पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक लंच पर किया संवाद

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर पत्रकारों और मीडिया प्रतिनिधियों के लिए एक अनौपचारिक लंच का आयोजन किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह पिछले एक दशक से समय-समय पर अपने आवास पर मीडिया के साथ इस प्रकार की अनौपचारिक बैठकों का आयोजन करते रहे हैं। यह आयोजन पत्रकारों के साथ खुले और सहज संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

इस अवसर पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शासन सुधार और राष्ट्रीय विकास से जुड़े समकालीन विषयों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों ने विभिन्न नीतिगत पहलों, उभरते जनहित के विषयों और समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए तथा अनौपचारिक सुझाव भी दिए।

संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने SHANTI अधिनियम, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) की भूमिका और देश के विभिन्न हिस्सों में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण विधायी और नीतिगत विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और जलवायु प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती रहेगी।

सरकार के सुधार एजेंडे पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि विज्ञान सुधारों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जबकि शासन सुधार तेजी से प्रौद्योगिकी आधारित हो रहे हैं। उन्होंने CPGRAMS जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार तकनीक पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रशासनिक और डिजिटल गवर्नेंस मॉडल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि देखने को मिल रही है, जिसके चलते विदेशी छात्र भारत आकर इन मॉडलों का अध्ययन कर रहे हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) अभियान जैसी नागरिक-केंद्रित पहलों का भी उल्लेख किया, जिससे पेंशनधारकों को बड़ी सुविधा मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसी डिजिटल सुधार पहलें सरकार की “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ वर्किंग” की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में हाल ही में घोषित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) फंड का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा और विचार से प्रभाव तक की यात्रा तेज होगी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहे विकास पर बात करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, कृषि और नेविगेशन जैसे क्षेत्रों में अंतरिक्ष अनुप्रयोगों की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 जैसे आगामी अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी भी साझा की, जो भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमता को और मजबूत करेंगे।

मंत्री ने लैवेंडर क्रांति जैसे विज्ञान आधारित सामाजिक-आर्थिक अभियानों का भी उल्लेख किया, जो ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और स्थानीय उद्यमिता को जोड़कर आजीविका के नए अवसर सृजित कर रहे हैं।

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पूरे संवाद के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने मीडिया के साथ निरंतर संवाद के महत्व पर जोर देते हुए पत्रकारों को जटिल नीतिगत पहलों और वैज्ञानिक उपलब्धियों को आम जनता तक पहुँचाने में सरकार का अहम साझेदार बताया। उन्होंने सूचित जन विमर्श और रचनात्मक प्रतिक्रिया को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका की सराहना की।

यह अनौपचारिक लंच खुले संवाद और आपसी सराहना के माहौल में संपन्न हुआ, जिसने सरकार और मीडिया के बीच पारदर्शिता, सहयोग और राष्ट्र निर्माण के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया।

केंद्रीय क्षेत्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) की क्षमता निर्माण पर भारत परामर्श सम्मेलन का आयोजन

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क्षमता निर्माण आयोग (CBC) ने वित्त मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम विभाग (DPE) के सहयोग से नई दिल्ली में “भारत CPSEs’ Consultative Conclave” का आयोजन किया। इस सम्मेलन का विषय था: “Shaping India’s Growth Story through DAKSH PSEs @2047”, जिसका उद्देश्य CPSEs के लिए एक साझा और संरचित क्षमता निर्माण रोडमैप तैयार करना था। यह रोडमैप मिशन कर्मयोगी—भारत की राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण योजना के अनुरूप था।

सम्मेलन में CPSEs, केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य प्रमुख संस्थागत भागीदारों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। सम्मेलन के माध्यम से CPSEs की नेतृत्व क्षमता, उत्तराधिकार योजना, मानव संसाधन रणनीतियों में सुधार और अच्छे शासन के सिद्धांतों को समेकित करने पर जोर दिया गया।

मुख्य बिंदु और विवरण:

  • डॉ. अलका मित्तल (सदस्य, प्रशासन, CBC) ने CPSEs की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें केवल आर्थिक वृद्धि के इंजन ही नहीं बल्कि सार्वजनिक मूल्यों और दीर्घकालीन संस्थागत क्षमता के संरक्षक बताया।

  • एस. राधा चौहान (अध्यक्ष, CBC) ने दक्षता, नेतृत्व विकास और प्रदर्शन-आधारित सीखने को CPSEs में शामिल करने का महत्व बताया।

  • उद्घाटन भाषण में के. मोसेस चलाई (सचिव, DPE) ने नेतृत्व की आवश्यकता और अच्छे बदलाव को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के डॉ. सी. जयकुमार ने “HR Strategies for Purpose-Driven Leadership” विषयक मुख्य भाषण दिया।

  • अतुल सोबती (DG, SCOPE) ने DAKSH (Development of Aspiration, Knowledge, Succession and Harmony) के तहत CPSEs में नेतृत्व विकास और HR सुधार का ढांचा प्रस्तुत किया।

  • सम्मेलन में CPSEs के बीच नेतृत्व विकास, प्रशिक्षण, उत्तराधिकार योजना, HR नीतियों और शासन सुधार पर राउंडटेबल चर्चाएँ आयोजित की गईं।

भविष्य की योजना और थीमैटिक इवेंट्स:

  1. वित्तीय प्रबंधन: दीर्घकालीन पूंजी योजना, जोखिम ढांचे, संचालन उत्कृष्टता।

  2. अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार: तकनीकी अपनाने, नवाचार साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन।

  3. CSR, ESG और स्थिरता नेतृत्व: जिम्मेदार व्यवसाय, ESG मापदंड, जलवायु-संबंधी रणनीतियाँ।

  4. इंजीनियरिंग, परियोजना और संपत्ति प्रबंधन उत्कृष्टता।

  5. प्रशिक्षण और विकास प्रणाली: क्षमता सुदृढ़ीकरण, PSEs में ज्ञान साझा करना, शोध-आधारित प्रशिक्षण मॉडल।

सम्मेलन का समापन CBC सचिव एस. पी. रॉय की अंतिम टिप्पणियों और निदेशक नवनीत कौर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

यह भारत CPSE Consultative Conclave CPSEs की नेतृत्व क्षमता, शासन, और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के अनुरूप है।

अबूझमाड़ के जंगलों से निकला सुशासन का उजाला

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कच्चापाल की महिलाओं ने रच दी आत्मनिर्भरता की मिसाल, जैविक बासमती से बदली तकदीर

रायपुर-कभी नक्सल हिंसा और भय के साये में जीवन जीने वाले नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखण्ड के अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कच्चापाल में अब सुशासन और आत्मनिर्भरता की किरणें पहुँच चुकी हैं। यह वही इलाका है जहाँ कभी बम धमाकों की गूँज और बंदूकों की आवाज़ें विकास के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा थीं। सड़क, बिजली, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित यह गांव अब नियद नेल्ला नार योजना के तहत विकास की मुख्यधारा से जुड़ चुका है।

राज्योत्सव के भव्य मंच पर इस परिवर्तन की गूंज सुनाई दी जब कच्चापाल के आश्रित ग्राम ईरकभट्टी की दो महिलाएँ – मांगती गोटा और रेनी पोटाई – अपने हाथों से उगाई गई जैविक बासमती चावल लेकर राजधानी पहुँचीं। ये महिलाएँ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के लालकुंवर स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। कभी शहर का नाम तक न जानने वाली ये महिलाएँ आज अपने गाँव की पहचान बन चुकी हैं।

एरिया कोऑर्डिनेटर सोधरा धुर्वे बताती हैं कि पहले इस क्षेत्र में लाल आतंक के कारण कोई सरकारी योजना पहुँच ही नहीं पाती थी। ग्रामीणों के पास बाजार की जानकारी नहीं थी, और बिचौलिए उनके उत्पादों को औने-पौने दामों पर खरीदकर मुनाफा कमा लेते थे। लेकिन सशस्त्र बलों के कैम्प लगने और शासन की सक्रिय पहल से जब ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के तहत बिहान समूहों का गठन हुआ, तो हालात बदलने लगे। महिलाओं में बचत की आदत और आत्मनिर्भरता का भाव बढ़ा।

मांगती गोटा बताती हैं, “हम हमेशा से बिना रासायनिक खाद के जैविक तरीके से बासमती चावल उगाते रहे हैं। पहले बिचौलिए हमसे 15–20 रुपये किलो में चावल ले जाते थे। लेकिन बिहान योजना से जुड़ने और प्रशिक्षण मिलने के बाद हमें असली कीमत का पता चला। आज राज्योत्सव में हमारे चावल की कीमत 120 रुपये किलो मिल रही है। लोग इसे शुद्ध और जैविक जानकर बहुत उत्साह से खरीद रहे हैं।”

रेनी पोटाई बताती हैं कि उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी हमारे गाँव आये थे तो हमारी समूह की महिलाओं को प्रोत्साहित किया था। “इस बार हमने सिर्फ चावल नहीं, बल्कि बाँस की टोकनी और झाड़ू भी तैयार किए हैं। हमारे समूह ने इस साल 40 क्विंटल जैविक बासमती चावल का उत्पादन किया है,” उन्होंने मुस्कराते हुए बताया।

आज कच्चापाल और उसके आसपास के ग्रामों में महिलाओं की मेहनत और शासन की योजनाओं का फल साफ दिखाई दे रहा है। नक्सल प्रभावित इलाका अब आत्मनिर्भरता, रोजगार और शांति का प्रतीक बन चुका है। कभी अंधेरे में डूबे इन ग्रामों में अब सुशासन का सवेरा सचमुच उतर आया है — और यह कहानी है उस परिवर्तन की, जो भय से विश्वास और गरीबी से समृद्धि तक का सफर तय कर रही है।कच्चापाल की महिलाओं के साहस, स्वावलंबन और नवछत्तीसगढ़ की नई सुबह की यह सच्ची कहानी अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही है।

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