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गोवा को मिला अत्याधुनिक ‘कैप्टन ऑफ पोर्ट्स’ टर्मिनल, समुद्री प्रशासन और जल परिवहन को मिलेगी नई मजबूती

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पणजी- केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गोवा में ₹48.87 करोड़ की लागत से निर्मित नए कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक वाटरफ्रंट सुविधा समुद्री प्रशासन को मजबूत बनाने, जहाजों की निगरानी एवं नेविगेशन में सुधार करने और गोवा के सतत समुद्री विकास के विजन को गति देने के उद्देश्य से विकसित की गई है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस नया टर्मिनल

गोवा स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (GSIDC) द्वारा निर्मित यह G+3 भवन 4,405 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैला है। यह भवन पुराने कैप्टन ऑफ पोर्ट्स कार्यालय का स्थान लेगा, जो बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं रह गया था।

मांडवी नदी के किनारे खड़े जहाज की आकृति से प्रेरित इस भवन में आधुनिक यात्री सुविधाएं, डबल-हाइट पब्लिक लॉबी, कॉन्फ्रेंस हॉल, मरीन एवं हाइड्रोग्राफिक कार्यालय, नेविगेशन कंट्रोल सेंटर, रेडियो कम्युनिकेशन सेंटर, सार्वजनिक सुविधाएं, 450 सीटों वाला रूफटॉप एम्फीथिएटर, इनडोर रेस्तरां और ओपन टैरेस जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

समुद्री क्षेत्र में भारत की बड़ी उपलब्धियां

उद्घाटन समारोह में सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह भवन केवल एक सरकारी कार्यालय नहीं, बल्कि गोवा की समुद्री पहचान, आधुनिकीकरण और सतत विकास का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में भारत के समुद्री क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है—

  • बंदरगाहों की क्षमता लगभग दोगुनी हुई।

  • जहाजों का टर्नअराउंड समय 95 घंटे से घटकर 41 घंटे रह गया।

  • भारतीय नाविकों (Seafarers) की संख्या 3.23 लाख से अधिक पहुंच गई।

  • तटीय माल परिवहन दोगुने से अधिक बढ़ा।

  • क्रूज़ यात्रियों की संख्या चार गुना से अधिक हुई।

  • परिचालित राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या 3 से बढ़कर 32 हो गई।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत अब सकल टन भार (Gross Tonnage) के आधार पर दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग देश बन चुका है।

गोवा समुद्री सुधारों में अग्रणी

सोनोवाल ने कहा कि इनलैंड वेसल्स एक्ट, 2021 लागू करने वाला गोवा देश का पहला राज्य है। प्रस्तावित गोवा मैरीटाइम बोर्ड, गोवा शिपबिल्डिंग एवं शिप रिपेयर नीति और मैरीटाइम मास्टर प्लान राज्य के समुद्री क्षेत्र को और मजबूत करेंगे।

गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को मिली प्राथमिकता

केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि प्रस्तावित गोवा वाटर मेट्रो परियोजना को अब फेज-1 में शामिल कर प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना गोवा में पर्यावरण-अनुकूल, तेज और टिकाऊ शहरी जल परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई ऊंचाई देगी।

मोरमुगाओ पोर्ट का तेज विकास

उन्होंने बताया कि मोरमुगाओ पोर्ट अथॉरिटी में वर्ष 2014 से अब तक ₹1,300 करोड़ से अधिक की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि ₹2,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं पर काम जारी है। इनमें बर्थ नंबर-9 का पुनर्विकास, वास्को बे परियोजना, आधुनिक फिशिंग हार्बर, गहरे ड्राफ्ट के लिए ड्रेजिंग और आधुनिक सीफेयरर्स क्लब शामिल हैं।

मोरमुगाओ पोर्ट देश का पहला ग्रीन पोर्ट और ग्रीन शिप इंसेंटिव शुरू करने वाला पहला बंदरगाह भी बन चुका है।

समुद्री शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा

सोनोवाल ने गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम एक्सीलेंस (GIME) की स्थापना का स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्थान समुद्री शिक्षा, अंतर्देशीय जलमार्ग, पोत संचालन, सुरक्षा, वाटर स्पोर्ट्स और कौशल विकास का उत्कृष्ट केंद्र बनेगा।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गोवा को विश्वस्तरीय समुद्री अवसंरचना विकसित करने में हरसंभव सहयोग देती रहेगी। नया कैप्टन ऑफ पोर्ट्स टर्मिनल गोवा की नदी परिवहन व्यवस्था का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बनने के साथ-साथ राज्य की समृद्ध समुद्री विरासत का प्रतीक भी बनेगा। यह परियोजना सागरमाला कार्यक्रम और मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत बंदरगाह आधारित विकास, बेहतर लॉजिस्टिक्स और सतत आर्थिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती देगी।

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