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ध्यान से ही शांत और विकसित विश्व की नींव: उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भारत मंडपम में “ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेडिटेशन लीडर्स – मेडिटेशन फॉर होलिस्टिक लिविंग एंड ए पीसफुल वर्ल्ड” को संबोधित किया। इस सम्मेलन का आयोजन पिरामिड स्पिरिचुअल सोसायटीज़ मूवमेंट और बुद्धा-CEO क्वांटम फाउंडेशन द्वारा किया गया था।

आयोजकों, वक्ताओं, ध्यान गुरुओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने समग्र जीवन और वैश्विक शांति के मार्ग के रूप में ध्यान को बढ़ावा देने के उनके समर्पण की सराहना की।

प्रसिद्ध तमिल संत तिरुमूलर की शिक्षाओं को याद करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि ध्यान एक आंतरिक दीपक जलाने के समान है, जो अज्ञानता को दूर कर सत्य और शांति की ओर ले जाता है। उन्होंने बताया कि तिरुमूलर ने मानव शरीर को एक मंदिर और ध्यान को भीतर स्थित दिव्यता के साक्षात्कार का माध्यम बताया है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया कई चुनौतियों से जूझ रही है और संघर्ष केवल बाहरी ही नहीं, बल्कि लोगों के भीतर भी मौजूद है। इस संदर्भ में उन्होंने जोर दिया कि ध्यान शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण लाकर परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है तथा दूसरों को सुनने और समझने की क्षमता को बढ़ाता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान की वास्तविक शक्ति मानव के भीतर परिवर्तन लाने में निहित है। उन्होंने बताया कि ध्यान तनाव को कम करता है, एकाग्रता बढ़ाता है, भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है और अधिक सोचने तथा अत्यधिक काम करने जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि केवल भौतिक सफलता की अंधी दौड़ में सार्थक जीवन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धन सुविधा दे सकता है, लेकिन जीवन से अधिक महत्वपूर्ण नहीं होना चाहिए। ध्यान सोच को बेहतर बनाता है और संतुलित तथा संतोषजनक जीवन जीने में मदद करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ध्यान केवल आध्यात्मिक लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के लिए है।

2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के साथ मानसिक स्वास्थ्य का विकास भी उतना ही आवश्यक है। ध्यान आंतरिक शांति, भावनात्मक संतुलन और स्पष्ट सोच विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो एक प्रगतिशील राष्ट्र के लिए जरूरी हैं।

नशा मुक्ति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने 2004 में किए गए अपने पदयात्रा का उल्लेख किया। युवाओं में बढ़ते नशे पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव, चिंता और दिशाहीनता को दूर कर नशे की समस्या से लड़ने में सहायक हो सकता है।

दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “बिना मूल्यांकन के अवलोकन करने की क्षमता ही सर्वोच्च बुद्धिमत्ता है।” उन्होंने कहा कि ध्यान व्यक्ति को अपने विचारों को बिना किसी निर्णय के देखने की क्षमता देता है, जिससे आत्मिक परिवर्तन संभव होता है। यह परिवर्तन समझदार व्यक्तियों, सामंजस्यपूर्ण समाज, संवेदनशील नेतृत्व और मानवीय संस्थाओं के निर्माण में मदद करता है।

अंत में उन्होंने कहा कि बेहतर दुनिया बनाने के लिए पहले बेहतर और शांत मन का निर्माण जरूरी है, और ध्यान इस यात्रा की शुरुआत है।

इस अवसर पर सीबीआई और सीआरपीएफ के पूर्व निदेशक डी.आर. कार्तिकेयन, परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश के अध्यक्ष और आध्यात्मिक प्रमुख स्वामी चिदानंद सरस्वती, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष डॉ. न्यूटन कोंडावेटी, बुद्धा-CEO क्वांटम फाउंडेशन के संस्थापक चंद्र पुलमारासेट्टी, पिरामिड स्पिरिचुअल ट्रस्ट (हैदराबाद) के अध्यक्ष श्री विजय भास्कर रेड्डी सहित कई ध्यान गुरु, नीति निर्माता और विद्वान उपस्थित रहे।


बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS 2026) का आयोजन, वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी

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बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के जे.एन. टाटा ऑडिटोरियम में 13–14 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS 2026) का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) फेज-II और फेज-III के तहत आयोजित किया गया है।

सम्मेलन का आयोजन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग (जल शक्ति मंत्रालय) और कर्नाटक सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा केंद्रीय जल आयोग (CWC), IISc बेंगलुरु और विश्व बैंक के सहयोग से किया गया है।

सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, विश्व बैंक के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जोहान्स ज़ुट, ICOLD के अध्यक्ष डी.के. शर्मा सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पुराने बांधों, जलवायु जोखिम और सतत विकास की चुनौतियों को देखते हुए बांध सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय है, जिसके लिए विज्ञान आधारित और सहयोगात्मक प्रयास जरूरी हैं। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बांध सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए पारदर्शी नीतियों और सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।

सम्मेलन में DAMCHAT नामक एआई आधारित प्लेटफॉर्म और जल शक्ति डेटा प्रबंधन प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया। साथ ही बांध डिजाइन और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण दिशानिर्देश और प्रकाशन जारी किए गए।

ICDS 2026 में 12 देशों के 750 से अधिक प्रतिनिधि, इंजीनियर, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में बांध सुरक्षा नियम, संरचनात्मक निगरानी, पुनर्वास तकनीक, जलाशय प्रबंधन, जोखिम आधारित निर्णय प्रणाली और बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।

यह सम्मेलन भारत की बांध सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, जलवायु सहनशीलता बढ़ाने और आधुनिक जल अवसंरचना विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


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