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टूटा पुल बना स्कूली बच्चों की पढ़ाई में बाधा, ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर लगाए उपेक्षा के आरोप

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महासमुंद- जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खट्टा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क पर बना जर्जर पुल और क्षतिग्रस्त सड़क बरसात के दिनों में स्कूली बच्चों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी बहने लगता है, जिससे आसपास के छह गांवों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बार बच्चों को स्कूल नहीं पहुंच पाना पड़ता है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

ग्रामीणों के अनुसार यह पुल खट्टा, कोकड़ी, रखमखेड़ा सहित आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रमुख मार्ग है। इसी रास्ते से स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा, खट्टा हाई स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय तथा कोकड़ी शासकीय विद्यालय के छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं।

चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि बरसात के दौरान पुल के ऊपर पानी बहने लगता है, जिससे छात्र-छात्राओं का स्कूल जाना जोखिम भरा हो जाता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बालिकाएं तेज बहाव के बीच पुल पार करने से डरती हैं, जिसके कारण कई बार वे स्कूल नहीं जा पातीं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यही मार्ग गर्भवती महिलाओं, बीमार मरीजों और अन्य ग्रामीणों के लिए अस्पताल एवं आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। पुल पर पानी आने से आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत के सरपंच डॉ. राजकमल पटेल तथा जनपद पंचायत अध्यक्ष दिशा रामस्वरूप दीवान का निवास भी इसी गांव में है और उन्हें भी इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों का दावा है कि लंबे समय से पुल और सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक, सांसद और संबंधित विभाग से मांग की है कि बरसात समाप्त होने की प्रतीक्षा किए बिना पुल की तत्काल मरम्मत अथवा वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण या मरम्मत नहीं कराई गई तो इसका सबसे अधिक असर स्कूली शिक्षा, विशेषकर बालिका शिक्षा पर पड़ेगा। उनका मानना है कि सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना बच्चों के शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में आवश्यक कदम है।

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