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एनवीडिया का बड़ा एआई कदम: हगिंग फेस को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी

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एनवीडिया (Nvidia) एआई के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी हगिंग फेस (Hugging Face) को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी कर रही है।

यह सौदा पूरा होने पर एआई उद्योग के सबसे बड़े अधिग्रहणों में शामिल हो सकता है। हगिंग फेस एआई मॉडल, मशीन लर्निंग टूल्स और डेवलपर्स के लिए ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के लिए जाना जाता है।

इस संभावित सौदे को एआई के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, तकनीक और प्रतिभाशाली विशेषज्ञों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एनवीडिया पहले से ही एआई चिप्स और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक प्रमुख कंपनी है, जबकि हगिंग फेस का मजबूत आधार एआई डेवलपर्स और ओपन-सोर्स मॉडल समुदाय में है।

अगर यह अधिग्रहण पूरा होता है, तो एनवीडिया को एआई सॉफ्टवेयर, मॉडल और डेवलपर समुदाय में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे एआई तकनीक के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में एनवीडिया की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, हगिंग फेस का संभावित अधिग्रहण यह दिखाता है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां एआई की अगली दौड़ में तकनीक के साथ-साथ एआई प्रतिभा और डेवलपर इकोसिस्टम पर भी बड़ा निवेश कर रही हैं।

अवतार ने लॉन्च किया ‘वार्या’ – भारत का किफायती और स्वदेशी AI वीडियो मॉडल

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AI-नेटिव ट्रांसफॉर्मेशन कंपनी Avataar ने आज ‘वार्या’ (Varya) नामक एक उन्नत AI वीडियो मॉडल लॉन्च किया। यह मॉडल भारत के अगले दौर के उपयोगकर्ताओं के लिए सस्ता, सुलभ और भारतीय संदर्भों के अनुरूप वीडियो AI उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में इस मॉडल का अनावरण किया गया, जिसमें भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन और अवतार की नेतृत्व टीम उपस्थित रही।

भारत की विविधता को समझने वाला AI

वार्या को किसी सामान्य भारतीय अवधारणा के लिए नहीं, बल्कि भारत की विविध वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। यह मॉडल भारत के विभिन्न क्षेत्रों, त्योहारों, समुदायों, भोजन, परिधान, सार्वजनिक स्थानों और दैनिक जीवन से जुड़े सांस्कृतिक संदर्भों को समझने और उनके अनुरूप वीडियो तैयार करने में सक्षम है।

इसके माध्यम से:

  • गांव का शिक्षक दृश्यात्मक पाठ तैयार कर सकता है।

  • MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) अपने उत्पादों के विज्ञापन बना सकते हैं।

  • आम नागरिक वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इंडियाAI मिशन का सहयोग

अवतार उन कंपनियों में शामिल है जिन्हें IndiaAI Mission के तहत स्वदेशी फाउंडेशन AI क्षमताओं के विकास के लिए चुना गया था।

राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग अवसंरचना तक सब्सिडी वाली पहुंच ने वार्या के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दर्शाता है कि सार्वजनिक AI अवसंरचना किस प्रकार घरेलू नवाचार को गति दे सकती है।

सिर्फ 4 चरणों में वीडियो निर्माण

वार्या की सबसे बड़ी विशेषता इसकी डिस्टिलेशन तकनीक है।

जहां सामान्य वीडियो AI मॉडल वीडियो तैयार करने के लिए लगभग 50 चरणों से गुजरते हैं, वहीं वार्या केवल 4 चरणों में समान गुणवत्ता वाला वीडियो तैयार कर सकता है।

कंपनी के अनुसार:

  • वीडियो निर्माण लागत लगभग ₹0.48 प्रति सेकंड है।

  • यह कई प्रमुख वैश्विक वीडियो मॉडलों की तुलना में 10 गुना तक अधिक किफायती है।

“Idea → Video → Story”

वार्या का उपयोग बेहद सरल बनाया गया है।

उपयोगकर्ता:

  1. कोई विचार टाइप कर सकता है,

  2. कोई तस्वीर अपलोड कर सकता है,

  3. वीडियो तैयार कर सकता है,

  4. और आगे नए क्लिप जोड़कर कहानी को जारी रख सकता है।

एक साधारण प्रॉम्प्ट से पाठ, विज्ञापन, मार्गदर्शिका, फिल्म या व्यक्तिगत स्मृति का निर्माण किया जा सकता है।

भारत की AI महत्वाकांक्षा का प्रतीक

लॉन्च के दौरान सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि वार्या भारत की AI यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह स्वदेशी AI क्षमताओं के निर्माण की दिशा में देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फाउंडेशन मॉडल भारत में अनुसंधान-आधारित नवाचार को बढ़ावा देंगे तथा विश्वस्तरीय और जन-सुलभ AI समाधान विकसित करने में मदद करेंगे।

“किफायती AI ही समावेशी AI है”

अवतार के सह-संस्थापक एवं CEO Sravanth Aluru ने कहा कि भारत का AI भविष्य केवल सबसे बड़े मॉडलों से नहीं, बल्कि सबसे अधिक दक्ष मॉडलों से तय होगा।

उनके अनुसार:

"1.4 अरब लोगों के देश में किफायत कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि एक अनिवार्यता है।"

उन्होंने कहा कि AI की अगली पीढ़ी की कहानियां, शिक्षा, विज्ञापन और सेवाएं तभी सफल होंगी जब वे सभी के लिए उपलब्ध हों।

डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन क्या है?

डिस्टिल्ड वीडियो जनरेशन मशीन लर्निंग की एक मॉडल-कम्प्रेशन तकनीक है, जिसमें एक छोटा और तेज़ "स्टूडेंट मॉडल" बड़े और जटिल "टीचर मॉडल" की क्षमताओं को सीखता है।

इस प्रक्रिया से:

  • अनावश्यक गणनाएं कम हो जाती हैं,

  • वीडियो तेजी से तैयार होता है,

  • लागत घटती है,

  • और गुणवत्ता लगभग समान बनी रहती है।

वार्या भारत का पहला ऐसा वीडियो मॉडल माना जा रहा है जिसने इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाकर तेज, किफायती और जन-सुलभ वीडियो AI उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।


भारत में एआई शिक्षा सुधार की बड़ी पहल: उद्योग के साथ मिलकर पाठ्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी

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भारत सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पाठ्यक्रम में व्यापक सुधार की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि छात्रों को उभरती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर रूप से तैयार किया जा सके। इस संबंध में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एआई पाठ्यक्रम टास्कफोर्स के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

मौजूदा पाठ्यक्रम का अध्ययन

टास्कफोर्स ने देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चल रहे बी.टेक (कंप्यूटर साइंस एवं संबंधित शाखाओं) के पाठ्यक्रम का आधारभूत अध्ययन किया। यह अध्ययन उद्योग विशेषज्ञों और नैसकॉम के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि भारत में एआई से जुड़े विषयों का विस्तार हुआ है, लेकिन अभी भी शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचे और व्यावहारिक प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण अंतर मौजूद हैं। विशेष रूप से जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (MLOps) और फाउंडेशन मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता बताई गई।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

टास्कफोर्स ने पाठ्यक्रम सुधार के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  • व्यावहारिक आधारित शिक्षण: पहले सेमेस्टर से ही वास्तविक उद्योग उपयोग मामलों पर आधारित शिक्षा

  • क्रेडिट-आधारित एकीकरण: एआई पाठ्यक्रम को औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट प्रणाली में शामिल करना

  • व्यावहारिक प्रशिक्षण में वृद्धि: 25–30% से बढ़ाकर 40–75% तक व्यावहारिक अनुभव

  • उद्योग-एकीकृत शिक्षण: कैपस्टोन प्रोजेक्ट और एआई समाधान विकास पर जोर

  • जिम्मेदार एआई: सभी सेमेस्टर में एआई गवर्नेंस और नैतिकता का समावेश

  • मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम: प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और उन्नत डिप्लोमा की सुविधा

शिक्षक विकास पर जोर

बैठक में यह भी माना गया कि पाठ्यक्रम सुधार के साथ-साथ शिक्षकों का प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसके लिए निम्न सुझाव दिए गए:

  • ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम

  • मानकीकृत मूल्यांकन ढांचा

  • आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना

  • उद्योग विशेषज्ञों को सहायक शिक्षक के रूप में शामिल करना

साझा एआई अवसंरचना

एक राष्ट्रीय स्तर के साझा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जिसमें सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को GPU कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक तकनीकों तक समान पहुंच मिल सकेगी।

भविष्य की कार्ययोजना

बैठक में निम्नलिखित अगले कदमों पर सहमति बनी:

  • राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों और आवश्यकताओं का आकलन

  • एआईसीटीई के साथ समन्वय कर नए पाठ्यक्रम को लागू करना

  • उद्योग-आधारित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • गैर-तकनीकी विषयों में एआई जागरूकता के लिए अलग कार्ययोजना

यह पहल भारत में एआई शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

DPIIT का प्रस्तावित हाइब्रिड मॉडल: AI डेवलपर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के हितों में संतुलन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और कॉपीराइट कानून के इंटरसेक्शन पर अपने कार्यपत्र का भाग 1 प्रकाशित किया है। यह पेपर 28 अप्रैल 2025 को गठित आठ सदस्यीय समिति (“समिति”) की सिफारिशों को प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य यह आकलन करना था कि मौजूदा कानून जनरेटिव AI से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को संबोधित करने के लिए पर्याप्त है या नहीं, और यदि आवश्यक हो तो कानून में संशोधन के लिए सुझाव देना।

कार्यपत्र में मौजूदा दृष्टिकोणों का मूल्यांकन किया गया है, जिनमें ब्लैंकेट छूट, टेक्स्ट और डेटा-माइनिंग अपवाद (ऑप्ट-आउट अधिकार के साथ या बिना), स्वैच्छिक लाइसेंसिंग, या विस्तारित सामूहिक लाइसेंसिंग शामिल हैं। सभी मॉडलों के उपयुक्तता संबंधी मुद्दों को स्पष्ट करते हुए, कार्यपत्र एक नई नीति ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य सामग्री निर्माताओं के अधिकार और AI नवाचारकों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना है।

जीरो प्राइस लाइसेंस मॉडल को समिति ने अस्वीकार किया, यह तर्क देते हुए कि यह मानव रचनात्मकता के प्रोत्साहन को कमजोर कर सकता है और दीर्घकाल में मानव-निर्मित सामग्री का उत्पादन कम कर सकता है।

वैकल्पिक रूप में, समिति ने एक हाइब्रिड मॉडल प्रस्तावित किया है, जिसके तहत:

  • AI डेवलपर्स को सभी कानूनी रूप से एक्सेस किए गए कंटेंट को प्रशिक्षण के उद्देश्यों के लिए ब्लैंकेट लाइसेंस प्रदान किया जाएगा, जिसमें व्यक्तिगत बातचीत की आवश्यकता नहीं होगी;

  • रॉयल्टी केवल AI टूल्स के वाणिज्यीकरण के समय देय होगी, और दरें सरकार द्वारा नियुक्त समिति द्वारा निर्धारित की जाएंगी। ये दरें न्यायिक समीक्षा के अधीन होंगी;

  • केंद्रीकृत तंत्र रॉयल्टी संग्रह और वितरण संभालेगा, जिससे लेनदेन लागत कम होगी, कानूनी निश्चितता बढ़ेगी और बड़े एवं छोटे AI डेवलपर्स दोनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

कार्यपत्र तैयार करने में डॉ. राघवेंद्र राव का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समिति के सदस्यों को सुश्री डी. श्रीप्रिया, श्री कुशाल वाधवाण और सुश्री प्रियांका अरोड़ा ने भी सहायता प्रदान की।

DPIIT ने इस कार्यपत्र की ड्राफ्ट प्रति जनता और हितधारकों की 30 दिनों की परामर्श अवधि के लिए जारी की है, और जनता से इस प्रस्तावित मॉडल पर प्रतिक्रिया आमंत्रित की है। कार्यपत्र यहाँ देखा जा सकता है:


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