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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार

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नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं पुरस्कार देश के प्रख्यात कलाकारों को प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सम्मानित कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा के संवाहक हैं तथा देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की सांस्कृतिक दृष्टि के निर्माता हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज सम्मानित किए गए कलाकार मिलकर भारत का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जो इस मिट्टी से जुड़ी कहानियों और गीतों से बुना गया है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के नृत्य, लोक उत्सव, भाषाएं और बोलियां शामिल हैं, जिन्हें पीढ़ियों ने अपनी कला और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखा है।

उन्होंने कहा कि भारत में संगीत की असंख्य परंपराएं, विभिन्न नृत्य शैलियां और लोक रंगमंच के अनेक रूप मौजूद हैं। भारतीय संस्कृति की जड़ें प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं। देश की विविध पाक परंपराओं, पहनावे, नृत्य और संगीत में प्रकृति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। कलाकार पक्षियों की चहचहाहट, झरनों की कल-कल, पेड़-पौधों, बादलों और नदियों से प्रेरणा लेकर अपनी कला को अभिव्यक्त करते हैं।

गुरु-शिष्य परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने भारतीय कला परंपराओं के संरक्षण में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में गुरु सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक के समान होते हैं, जिनसे ज्ञान और अनुभव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तेजी से बदलते समय में देश की कई लोक कलाएं विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। ऐसे में केवल इन कलाओं का दस्तावेजीकरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी द्वारा संचालित ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से आग्रह किया कि वे अगली पीढ़ी के कलाकारों को तैयार करने और पारंपरिक कलाओं के ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए व्यवस्थित प्रयास करें।

लोक और जनजातीय कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन को कला के मूल्यों और संवेदनाओं से समृद्ध करने का सबसे स्वाभाविक प्रशिक्षण स्थल है। लोक एवं जनजातीय कलाएं जीवन के प्रति सहज उत्साह और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। इन कलाओं में समुदाय की स्मृतियां और सामूहिक चेतना स्वतः अभिव्यक्त होती हैं। यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मानित कलाकार भारतीय परंपराओं के वाहक होने के साथ-साथ देश की सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षक भी हैं। उनकी कला वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई सांस्कृतिक दिशा तैयार करती है।

भारत की सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण केंद्र है संगीत नाटक अकादमी

राष्ट्रपति ने कहा कि संगीत नाटक अकादमी भारत की सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारतीय कला और संस्कृति की ऊर्जा को पूरी दुनिया तक पहुंचाने तथा समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं और भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन में उनके योगदान की सराहना की।


लोक कलाओं के संरक्षण और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में संस्कृति विभाग की महत्वपूर्ण पहल

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मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के लिए आवेदन आमंत्रित

चयनित कलाकारों को मिलेंगे प्रतिवर्ष 12 से 24 हजार रुपये तक प्रोत्साहन राशि

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय द्वारा मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के अंतर्गत प्रदेश के लोक कलाकारों से प्रविष्टियां आमंत्रित की गई हैं। योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करना, कलाकारों का सम्मान बढ़ाना तथा कला दलों के सतत विकास को नई गति प्रदान करना है।

योजना के अंतर्गत नृत्य-संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, छत्तीसगढ़ी पाक कला (पारंपरिक व्यंजन) तथा छत्तीसगढ़ी सौंदर्यकला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजे जाएंगे। आवेदन प्रपत्र विभाग की वेबसाइट www.cgculture.in पर उपलब्ध हैं तथा संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर स्थित कार्यालय से भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

योजना के तहत पात्र कलाकारों का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। चयनित कलाकारों को प्रतिवर्ष न्यूनतम 12 हजार रुपये से अधिकतम 24 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि ई-पेमेंट के माध्यम से प्रदान की जाएगी। यह राशि एक वित्तीय वर्ष में एक बार प्रदान की जाएगी।

योजना का लाभ केवल ऐसे कलाकारों को मिलेगा जिनकी सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपये से अधिक नहीं है। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आय प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ बैंक खाते का विवरण, आईएफएससी कोड तथा पैन कार्ड की छायाप्रति भी प्रस्तुत करनी होगी।

प्रविष्टियां भेजने का पता –

संचालक, संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय,

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, व्यावसायिक परिसर,

द्वितीय तल, सेक्टर-27, नया रायपुर, अटल नगर (छत्तीसगढ़) – 492018

प्रविष्टियां प्राप्त होने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। आवेदन भेजते समय लिफाफे पर "मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026" स्पष्ट रूप से अंकित करना आवश्यक होगा। प्राप्त प्रविष्टियों का परीक्षण समिति द्वारा किया जाएगा तथा समिति का निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना प्रदेश की समृद्ध लोक कला परंपराओं के संरक्षण, कलाकारों के सम्मान और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि अपनी कला को व्यापक पहचान दिलाने और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी प्राप्त होगा।

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