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भारत के मत्स्य क्षेत्र को मिला अब तक का सबसे बड़ा बजट, उत्पादन में 106% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए मत्स्य क्षेत्र को ₹2,761.80 करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटित किया है। यह कदम देश की ब्लू इकॉनमी को मजबूत करने और करोड़ों मछुआरों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

सरकार की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) इस क्षेत्र के विकास की मुख्य धुरी बनी हुई है, जिसके लिए इस वर्ष ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

उत्पादन और निर्यात में बड़ी छलांग

पिछले एक दशक में भारत के मत्स्य क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
वित्त वर्ष 2013-14 में जहां मछली उत्पादन 95.79 लाख टन था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 197.75 लाख टन हो गया है, जो 106% की वृद्धि दर्शाता है।

इसके साथ ही समुद्री उत्पादों का निर्यात भी बढ़कर ₹62,408 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें जमे हुए झींगे (Frozen Shrimp) का बड़ा योगदान है।

मछुआरों को मिल रहा सीधा लाभ

सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मछुआरों तक पहुंच रहा है:

  • 4.39 लाख मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • 33 लाख लोगों को बीमा सुरक्षा

  • 7.44 लाख परिवारों को आजीविका सहायता

इन पहलों से मछुआरों की आय स्थिर हुई है और जोखिम कम हुआ है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक पर जोर

सरकार ने मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:

  • कोल्ड स्टोरेज, फिश मार्केट और प्रोसेसिंग यूनिट का विकास

  • RAS और Biofloc जैसी नई तकनीकों को बढ़ावा

  • 2,195 फिशर प्रोड्यूसर संगठन (FFPOs) का गठन

इसके अलावा, FIDF योजना के तहत 225 परियोजनाओं में ₹6,685 करोड़ का निवेश किया गया है, जिससे रोजगार और उत्पादन दोनों बढ़े हैं।

 डिजिटल इंडिया से जुड़ा मत्स्य क्षेत्र

सरकार ने नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) लॉन्च किया है, जिसमें अब तक 30 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। यह प्लेटफॉर्म मछुआरों को:

  • लोन

  • बीमा

  • बाजार से जुड़ाव

जैसी सुविधाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है।

सतत विकास और भविष्य की दिशा

सरकार ने 2025 में समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए उत्पादन बढ़ाया जा सके।

भारत, जो पहले से ही दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है, अब वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

मत्स्य क्षेत्र में बढ़ता निवेश, नई तकनीक, और डिजिटल पहलें भारत को एक मजबूत और टिकाऊ ब्लू इकॉनमी की ओर ले जा रही हैं। यह क्षेत्र न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार भी बनेगा।

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