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अमेरिकी फेड ने तीन साल बाद बढ़ाई ब्याज दर, वैश्विक बाजारों पर दिखा असर

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वॉशिंगटन- अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने तीन साल से अधिक समय बाद ब्याज दर में बढ़ोतरी की है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) ने 16 सितंबर को प्रमुख फेडरल फंड्स रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 3.75 से 4 प्रतिशत के दायरे में कर दिया।

फेड ने यह फैसला महंगाई के अब भी ऊंचे स्तर पर बने रहने और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती को देखते हुए लिया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य महंगाई को उसके 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर समयबद्ध तरीके से वापस लाना है।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बदलाव

फेड के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की खासकर छोटी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजारों ने फेड के आगे भी सख्त मौद्रिक रुख के संकेतों पर प्रतिक्रिया दी।

शेयर बाजारों में भी हलचल

फेड के फैसले के बाद शेयर बाजारों में शुरुआती तेजी के बाद दबाव देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में डाउ जोंस और एसएंडपी 500 में गिरावट दर्ज की गई, जबकि वैश्विक बाजारों में भी निवेशकों ने ब्याज

वैश्विक बाजारों की नजर केंद्रीय बैंकों और महंगाई के आंकड़ों पर

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दुनियाभर के वित्तीय बाजार इस समय प्रमुख केंद्रीय बैंकों के अधिकारियों के भाषणों और आने वाले महंगाई (इन्फ्लेशन) के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि इन संकेतों से भविष्य में ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण फैसलों का अंदाजा मिलेगा।

निवेशकों का ध्यान विशेष रूप से Federal Reserve, European Central Bank और Bank of England जैसे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर है। हाल के आर्थिक आंकड़ों ने मिश्रित संकेत दिए हैं, जिसके कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महंगाई के आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखेंगे या फिर उनमें कटौती की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है। वहीं, महंगाई में कमी आने पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।

इस अनिश्चितता के बीच वैश्विक शेयर बाजार, बॉन्ड बाजार और मुद्रा बाजारों में सतर्क कारोबार देखने को मिल रहा है। निवेशक हर नए आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंक अधिकारियों की टिप्पणियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े फैसले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों की दिशा तय करेंगे।

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