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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे 515 नई पैक्स समितियों का कल करेंगें वर्चुअल शुभारंभ

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सहकारिता से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था- मंत्री केदार कश्यप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में सहकारिता को नई दिशा देने और किसानों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता विभाग द्वारा 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का गठन किया गया है। इन समितियों का वर्चुअल शुभारंभ कल 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटलनगर से किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जबकि सहकारिता मंत्री केदार कश्यप कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता विभाग के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना के स्वागत उद्बोधन से होगा एवं अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए सहकारिता मंत्री केदार कश्यप प्रदेश में सहकारिता विस्तार की रूपरेखा एवं उसके लाभों पर प्रकाश डालेंगे।

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि नई पैक्स समितियों के गठन से किसानों को ऋण, खाद, बीज तथा अन्य कृषि सुविधाएं अब स्थानीय स्तर पर सहज रूप से उपलब्ध होंगी। इससे हमारे अन्नदाता किसानों को अब दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और समय व संसाधनों की बचत भी होगी। साथ ही किसानों को शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि इस पहल से शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा तथा उनका लाभ सीधे ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और गांवों के समग्र विकास को गति मिलेगी। सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार की यह पहल छत्तीसगढ़ में सहकारिता तंत्र को सुदृढ़ करते हुए आत्मनिर्भर ग्रामीण-अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने उद्बोधन में राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों और सहकारिता आधारित विकास मॉडल को रेखांकित करेंगे। छतीसगढ़ के सहकारी जनप्रतिनिधिगण, अपेक्स बैंक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, पैक्स सोसाइटी के प्रतिनिधि, सहकारिता विभाग के सम्भागीय संयुक्त पंजीयक, जिला उप पंजीयक तथा सहायक पंजीयक, अपेक्स बैंक व जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के अधिकारीगण वर्चुअल रूप से सीधे शुभारंभ कार्यक्रम से जुड़ेंगे।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की संकल्पना को साकार करने सहकार से समृद्धि की पहल अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 515 नवीन पैक्स का गठन किया गया है। केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में सहकारिता की योजनाओं को अधिक सुगमता से लोगों में पहुँचाने के लिए बहुउद्देश्यीय पैक्स सोसायटी का पुनर्गठन किया गया है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (पैक्स) का पुनर्गठन कर नवीन 515 पैक्स बनाये गए हैं। यह 515 पैक्स में बहुउद्देश्यीय सेवाएं दी जाएगी। 2058 बहुउद्देशीय पैक्स एवं नवीन गठित 515 पैक्स को मिलाकर छत्तीसगढ़ में कुल 2573 पैक्स सोसायटी हो जाएंगे।

गडकरी ने बायो-बिटुमेन को किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर बताया

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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, नितिन गडकरी ने कृषि अपशिष्ट को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में परिवर्तित करने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बायो-बिटुमेन भारत को विकसित भारत 2047 की दिशा में ले जाने के लिए एक परिवर्तनकारी कदम है। कृषि अपशिष्ट का उपयोग करके यह फसल जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करता है और सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करता है। 15% मिश्रण के साथ, भारत लगभग ₹4,500 करोड़ विदेशी मुद्रा बचा सकता है और आयातित कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता को काफी हद तक कम कर सकता है।

CSIR के “फार्म रिसिड्यू से रोड तक: बायो-बिटुमेन via पायरोलिसिस” तकनीकी हस्तांतरण समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा,

“आज भारत की सड़क अवसंरचना में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है, क्योंकि हमारा देश दुनिया में पहला है, जो व्यावसायिक रूप से बायो-बिटुमेन का उत्पादन कर रहा है।”

केंद्रीय मंत्री गडकरी ने CSIR और इसके समर्पित वैज्ञानिकों को बधाई दी और इस अग्रणी उपलब्धि को हासिल करने में लगातार समर्थन देने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद भी किया।

गडकरी ने आगे कहा कि यह नवाचार किसानों को सशक्त बनाएगा, ग्रामीण आजीविका सृजित करेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। बायो-बिटुमेन, उन्होंने कहा, वास्तव में मोदी सरकार की सतत विकास, आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय जिम्मेदार वृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और एक स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है।



PM-KUSUM योजना के तहत किसानों और FPOs को मिली बड़ी सफलता

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पीएम-कुसुम योजना एक मांग आधारित योजना है। इसकी क्षमता आवंटन उन राज्यों को प्राप्त मांग और प्रगति के आधार पर किया जाता है। योजना में किसान, किसानों के समूह, किसान उत्पादक संगठन (FPO), जल उपयोगकर्ता संघ (WUA), प्राथमिक कृषि क्रेडिट सोसायटी (PACS) आदि भाग ले सकते हैं।

यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जा रही है। 30 नवंबर 2025 तक राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में योजना की स्थापना प्रगति (Annexure-I) के अनुसार है।

योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या, जिसमें FPO शामिल हैं, Annexure-II में दी गई है।

30 नवंबर 2025 तक PM-KUSUM योजना के सभी घटकों के तहत कुल 10,203 मेगावाट सौर ऊर्जा स्थापित की जा चुकी है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता राज्यों की मांग, SIAs द्वारा रिपोर्ट की गई प्रगति और योजना की दिशानिर्देशों के अनुसार जारी की जाती है। अब तक राज्यों से प्राप्त मांग के अनुसार ₹7,106 करोड़ जारी किए जा चुके हैं।

योजना के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए मंत्रालय ने 17 जनवरी 2024 को व्यापक संशोधित दिशानिर्देश जारी किए।

दिशानिर्देशों के अनुसार लघु और सीमांत किसानों तथा सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का उपयोग करने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाती है।

योजना की पहुंच बढ़ाने के लिए मंत्रालय समय-समय पर व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करता है। इसमें राज्यों के साथ समीक्षा बैठक और मार्गदर्शन भी शामिल हैं।

यह जानकारी संयुक्त राज्य मंत्री, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा श्रिपाद यसो नाइक द्वारा लोकसभा में लिखित उत्तर में दी गई।

Annexure-II: PM-KUSUM योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या (30.11.2025 तक)

  • S.No   राज्य/केंद्र शासित प्रदेश कुल लाभार्थी (FPO सहित)
    Arunachal Pradesh     616
    Assam 151
    Chhattisgarh 9
    Goa 859
    Gujarat 2,28,504
    Haryana 1,80,582
    Himachal Pradesh 1,193
    Jammu & Kashmir 3,601
    Jharkhand 43,693
    Karnataka 60,387
    Kerala 13,489
    Ladakh 102
    Madhya Pradesh 37,689
    Maharashtra 11,21,416
    Manipur 150
    Meghalaya 98
    Mizoram 40
    Nagaland 140
    Odisha 10,113
    Punjab 17,592
    Rajasthan 2,35,924
    Tamil Nadu 4,950
    Tripura 7,061
    Uttar Pradesh 72,417
    Uttarakhand 1,663
    West Bengal 20
  • कुल लाभार्थी: 20,42,459


अमित शाह ने गुजरात में मोतीलाल चौधरी सागर सैनिक स्कूल और सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन किया

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केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री,अमित शाह ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुजरात में  मोतीलाल आर. चौधरी सागर सैनिक स्कूल (MRCSSS) और सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री,भूपेंद्र पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में हाल ही में हुए कार धमाके में अपनी जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि इस आतंकवादी घटना में शामिल सभी अपराधियों को कठोरतम सजा दी जाएगी। गृह मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली कार ब्लास्ट के दोषियों को सजा देने से विश्व को संदेश मिलेगा कि किसी भी आतंकवादी को भारत में ऐसा कायरतापूर्ण कृत्य करने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले 11 वर्षों में भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को पूरी दुनिया ने पहचाना है और प्रधानमंत्री इस लड़ाई का नेतृत्व विश्व स्तर पर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस कायरतापूर्ण घटना में शामिल सभी लोग और इसके पीछे के व्यक्ति कानून के समक्ष लाए जाएंगे और उन्हें कठोरतम सजा दी जाएगी। भारत सरकार और गृह मंत्रालय इस मामले में पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सागर ऑर्गेनिक प्लांट और मोतीलाल चौधरी सागर सैनिक स्कूल के उद्घाटन को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि मोतीलाल काका मंसा के सभी नागरिकों के लिए आदर्श और प्रेरणा हैं। मोतीलाल जी का जीवन महात्मा गांधी के सिद्धांतों—ईमानदारी, पारदर्शिता और समाज में सकारात्मक मूल्य फैलाने के प्रति समर्पण—पर आधारित था। उस समय, गुजरात के डेयरी पालक, किसान और गांवों के लिए समृद्धि के मार्ग खोलने के लिए कई प्रयास किए गए। शाह ने कहा कि आज, अमूल विश्व का नंबर एक सहकारी ब्रांड बन चुका है और इसकी नींव उस समय के महान व्यक्तित्वों ने रखी थी।

शाह ने कहा कि सागर सैनिक स्कूल, मोतीलाल चौधरी के नाम पर स्थापित, गुजरात के कई जिलों के बच्चों को भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर प्रदान करेगा। यह स्कूल 11 एकड़ में फैला है, ₹50 करोड़ की लागत से निर्मित किया गया है और इसमें स्मार्ट क्लासरूम, छात्रावास, पुस्तकालय और कैंटीन जैसी सुविधाएँ हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत सरकार ने देशभर में PPP मॉडल के तहत 100 नए सैनिक स्कूल स्थापित करने का निर्णय लिया है, और इनमें मोतीलाल चौधरी सैनिक स्कूल निश्चित रूप से मेहसाना के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा।

केंद्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा कि आज सागर ऑर्गेनिक प्लांट का उद्घाटन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्लांट महत्वपूर्ण है ताकि अमूल ब्रांड के भरोसेमंद ऑर्गेनिक उत्पाद देश और दुनिया में पहुँच सकें, और ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को उचित लाभ मिले। इस प्लांट की दैनिक क्षमता लगभग 30 मीट्रिक टन है और यह नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) और APEDA द्वारा प्रमाणित है। APEDA प्रमाणन के कारण, उत्तर गुजरात के प्राकृतिक खेती करने वाले किसान वैश्विक बाजारों तक अपनी उपज पहुँचा पाएंगे। शाह ने कहा कि इस ऑर्गेनिक प्लांट के विस्तार से न केवल देशभर में नागरिकों के स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि ऑर्गेनिक खेती में लगे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

अमित शाह ने सभी ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों और उनके परिवारों से अनुरोध किया कि वे स्वयं ऑर्गेनिक उत्पादों का उपयोग करें ताकि उनके पूरे परिवार का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि 1960 में, दूधसागर डेयरी केवल 3,300 लीटर दूध प्रतिदिन इकट्ठा करती थी, जो अब बढ़कर 35 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। यह डेयरी गुजरात के 1,250 गांवों के डेयरी पालकों और राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के 10 लाख से अधिक दूध उत्पादन समूहों से जुड़ी हुई है। इसका कारोबार ₹8,000 करोड़ तक पहुँच गया है। 8 आधुनिक डेयरियां, 2 मिल्क चिलिंग सेंटर, 2 पशु आहार प्लांट और 1 सीमेंट उत्पादन इकाई के साथ, दूधसागर डेयरी आज गुजरात के व्हाइट रिवॉल्यूशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

शाह ने कहा कि बनासकांठा और दूधसागर डेयरी ने मिलकर डेयरी अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए मॉडल प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि डेयरी की सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए 75,000 नए प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया गया है। मोदी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सहकारी समितियों द्वारा उत्पादित 50% दूध राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचे, जिससे डेयरी पालकों को लाभ हो।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी के लाभ पूरे गुजरात और देश के डेयरी पालकों तक पहुँचाने के लिए मोदी सरकार ने तीन बहु-राज्यीय सहकारी समितियों की स्थापना की है। उन्होंने यह भी बताया कि अमूल के कुल कारोबार का 70% महिलाओं—हमारी माताओं और बहनों—के योगदान से आता है, जो इसके माध्यम से आत्मनिर्भर बनी हैं। शाह ने कहा कि इस वर्ष गुजरात में असामयिक भारी वर्षा हुई, और प्रभावित किसानों की मदद के लिए भूपेंद्र पटेल नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने उदार राहत पैकेज की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने किसानों की सहायता में पीछे नहीं हटने का संकल्प लिया है।


“सहकार से समृद्धि” के विज़न को बल — बनास डेयरी और BBSSL के बीच आलू बीज उत्पादन हेतु समझौता

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न “सहकार से समृद्धि” से प्रेरित होकर सहकारिता मंत्रालय द्वारा “सहकारी से सहकारिता के सहयोग” की पहल को आगे बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

यह समझौता बनास डेयरी (अमूल समूह की इकाई एवं एशिया की सबसे बड़ी सहकारी डेयरी) तथा भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) के बीच उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीजों के उत्पादन और वितरण के लिए किया गया।

यह समझौता 10 नवंबर 2025 को अटल अक्षय ऊर्जा भवन, नई दिल्ली में सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूतानी, भारत सरकार की उपस्थिति में, बनास डेयरी के प्रबंध निदेशक संग्राम चौधरी तथा BBSSL के प्रबंध निदेशक चेतन जोशी के बीच हस्ताक्षरित हुआ। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

किसानों की समृद्धि की दिशा में बड़ा कदम

इस अवसर पर सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूतानी ने कहा कि यह साझेदारी किसानों के सशक्तिकरण और समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो मूल्य श्रृंखलाओं को सशक्त बनाकर उत्पादकता को बढ़ावा देगी।

“बीज से बाजार” तक आलू मूल्य श्रृंखला

यह साझेदारी एक सम्पूर्ण “बीज से बाजार” मूल्य श्रृंखला (Seed-to-Market Value Chain) स्थापित करने का लक्ष्य रखती है, जो प्रमाणित एवं रोगमुक्त बीज आलू के उत्पादन के साथ-साथ वैज्ञानिक खेती पद्धतियों, अनुबंधित खेती व्यवस्था और कुशल विपणन तंत्र को प्रोत्साहित करेगी।
तकनीकी नवाचार और सहकारी शक्ति को मिलाकर यह पहल उत्पादकता बढ़ाने, लागत में कमी लाने और आलू उत्पादक किसानों की आय व लचीलापन (resilience) में वृद्धि करने में सहायक होगी।

इस समझौते के तहत BBSSL को बनास डेयरी की टिश्यू कल्चर और एरोपोनिक सुविधाओं का उपयोग करने की अनुमति होगी, जबकि बनास डेयरी तकनीकी और विपणन सहयोग प्रदान करेगी।

संग्राम चौधरी ने बनास डेयरी की “Beyond Dairy” पहल को रेखांकित करते हुए कहा कि डेयरी के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में भी सहकारिता का विस्तार किया जा रहा है।
वहीं चेतन जोशी ने कहा कि यह साझेदारी आलू बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।


ब्लॉक स्तरीय किसान मेला: बहेराडीह के किसान ने छत्तीसगढ़ की 36 भाजियों का लगाया प्रदर्शनी स्टॉल, कृषि सखी और पशु सखी दीदियों की रही उत्साहपूर्ण भागीदारी

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जांजगीर-चाम्पा- छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती वर्ष के अवसर पर प्रदेश के क़ृषि प्रधान जिले के जैविक क़ृषि ब्लॉक बलौदा में क़ृषि क्षेत्र के वैज्ञानिक सोंच को प्रोत्साहित करने और आधुनिक तकनिकों के प्रसार के लिए क़ृषि विभाग परिसर में ब्लॉक स्तरीय किसान मेला का आयोजन किया गया, जिसका प्रमुख उद्देश्य किसानों को विभागीय योजनाओं की देना है. यह मेला एक्सटेंशन रिफार्म्स आत्मा योजना के अंतर्गत क़ृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य, क्रेड़ा विभाग व क़ृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन किया गया, जहां जिले के जैविक क़ृषि ग्राम बहेराडीह में स्थापित देश के पहले वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल के संचालक दीनदयाल यादव, रामाधार देवांगन और उनकी टीम द्वारा छत्तीसगढ़ की 36 प्रमुख भाजियों तथा देशी बीजो एवं जैविक खाद व अन्य उत्पादों का  जीवंत प्रदर्शनीय स्टॉल लगाकर प्रस्तुत किया. इस अवसर में किसान स्कूल के टीम ने ब्लॉक स्तरीय किसान मेले में शामिल किसानों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियो को 10 दिसंबर को वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल परिसर में आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय भाजी महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया. इस मौके पर क़ृषि सखी और पशु सखी दीदियों ने स्टॉल में उद्यान विभाग के अधिकारी प्रियंका सेंगर के साथ खुमरी पहनकर अपनी सेल्फी भी लीं.

ब्लॉक स्तरीय क़ृषि मेला को सफल बनाने में चारपारा कलस्टर के पशु सखी दुर्गा अनंत, क़ृषि सखी काजल डहरिया डोंगरी समेत धनेश्वरी भारद्वाज, मनीषा तिवारी कोरबी, लक्ष्मीन बरेठ, सुन्दर बाई कंवर बछोद, कविता यादव, माहेश्वरी यादव जूनाडीह, अनुपा बैनर्जी, अनू बैनर्जी हरदी विशाल, पहरिया कलस्टर से देवकुमारी खूंटे, रामबाई साहू पहरिया, लक्ष्मीन यादव, बचन बाई केवट बोकरामुड़ा, उषा यादव, कला बाई यादव पूरेना, अनुपा बर्मन, सविता कश्यप परसदा, संतोषी केवट, ममता कुम्भकार पंतोरा, जर्वे ब कलस्टर से दूरपती केवट, त्रिवेणी पटेल औराईकला, पूजा यादव,किरण सराफ जर्वे ब, रेखा साहू, फेकन बाई बिंझवार करमन्दा, शिवरात्रि मिलन, राजेश्वरी राठौर पोंच, गायत्री खांडेय, लता यादव नवगंवा, कुरदा कलस्टर से पुष्पा यादव बहेराडीह, शशि कर्ष जाटा, रुखमणि पाण्डेय सिवनी आदि क़ृषि सखी और पशु सखी दीदियों का सराहनीय योगदान रहा.



एग्रीस्टैक पोर्टल बनेगा किसानों की डिजिटल पहचान, धान खरीदी सहित अन्य योजनाओं के लाभ हेतु 31 अक्टूबर तक पंजीयन अनिवार्य

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रायपुर-राज्य शासन द्वारा किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब सभी किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य किया गया है। सहायक आयुक्त सहकारिता ने बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर निर्धारित की गई है, जो किसान पंजीयन से छूटे हों, वे शीघ्र ही अपना पंजीयन करा सकते हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक डिजिटल इकोसिस्टम है, जिसे भारतीय सरकार ने विकसित किया है। जिसका उद्देश्य किसानों के लिए एक संपूर्ण डेटाबेस बनाना है, जिसमें उनकी पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, ऋण, फसल की जानकारी और बीमा इतिहास के बारे में जानकारी शामिल है। एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन कराने से किसानों को धान खरीदी सहित शासन की अन्य योजनाओं का लाभ मिलेगा।

एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन के फायदे

एग्रीस्टैक पोर्टल पर किसान आईडी बनवाने से किसानों को धान खरीदी, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, किसान क्रेडिट कार्ड, उर्वरक अनुदान, प्रधानमंत्री किसान सिंचाई योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, कृषि मशीनीकरण योजना एवं मुख्यमंत्री किसान सहायता योजना जैसी अनेक केंद्र एवं राज्य शासन की योजनाओं का लाभ सीधे प्राप्त होगा। कलेक्टर कुन्दन कुमार ने जिले के सभी किसानों से अपील की है, कि वे शीघ्रता से एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन कराएँ, ताकि किसी भी योजना का लाभ लेने में उन्हें कठिनाई न हो। उन्होंने बताया कि किसान स्वयं मोबाइल ऐप से ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं। साथ ही, स्थानीय सीएससी सेंटर, सेवा सहकारी समिति एवं पटवारी कार्यालयों के माध्यम से भी निःशुल्क पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही https://cgfr.agristack.gov.in/पर भी पंजीयन किया जा सकता है। 


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