Media24Media.com: #ElectricityForAll

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #ElectricityForAll. Show all posts
Showing posts with label #ElectricityForAll. Show all posts

बस्तर के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की पहल, केंद्र से विशेष सहायता का आग्रह

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की मुलाकात

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत बस्तर संभाग के 7 जिलों के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए कहा कि जिन गांवों में वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण विकास नहीं पहुंच सका, वहां अब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार से तीन वित्तीय वर्षों में सहायता मांगी गई है।

वर्ष 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये, यानी कुल 435 करोड़ रुपये केंद्र से अपेक्षित हैं, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि बस्तर के दूर-दराज़ गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही उस पर तत्काल स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए धनराशि की कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी और केंद्र सरकार बस्तर के विकास के लिए पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नई संभावनाओं की पहचान बन रहा है। इन 461 गांवों तक बिजली पहुंचना उसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

​दशकों का अंधेरा छँटा: 'नियद नेल्लानार योजना' से जगमगाए नारायणपुर के वनांचल गांव

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल में बसे नारायणपुर जिले के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों के लिए साल 2026 की यह गर्मियां एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आईं। दशकों से लालटेन और ढिबरी की मद्धम रोशनी में जिंदगी गुजार रहे इन आदिवासी बाहुल्य गांवों में जब पहली बार बिजली का बल्ब जला, तो ग्रामीणों की आंखें खुशी से छलक उठीं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'नियद नेल्लानार (आपका अच्छा गांव) योजना' ने इन दुर्गम इलाकों में विकास का नया सवेरा ला दिया है।

​दुर्गम राहें, दृढ़ संकल्प और सफलता

घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ग्राम मोहन्दी के मिचिंगपारा, कोडियारपारा व बीचपारा और ग्राम मसपुर के गुडरापारा तक बिजली पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।

कलेक्टर के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) की टीम और निर्माण एजेंसी एम/एस माँ शारदा ने युद्धस्तर पर काम करते हुए समय-सीमा के भीतर इस चुनौतीपूर्ण विद्युत लाइन विस्तार कार्य को सफलता पूर्वक पूरा किया।

लाखों का निवेश, परिवारों के जीवन में उजाला

वनांचल के इन गांवों को रोशन करने के लिए सरकार ने दिल खोलकर बजट स्वीकृत किया। जिसमें ​ग्राम मोहन्दी में लगभग 61.79 लाख रूपए की लागत से तीनों पाराओं में बिजली का विस्तार किया गया, जिससे सीधे 40 परिवारों को पहली बार बिजली मिली। ​ग्राम मसपुर गुडरापारा 22.42 लाख रूपए की लागत से कार्य पूर्ण कर 5 परिवारों के घरों को विद्युत कनेक्शन से जोड़ा गया।

बदलेगी गांवों की तस्वीर: शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका को नई उड़ान

बिजली पहुंचने से वनांचल के इन गांवों में अब विकास की रफ्तार तेज होने वाली है। अब रात के अंधेरे में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी। बेहतर रोशनी मिलने से बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग, पंखे और अन्य आवश्यक बिजली उपकरणों के उपयोग से ग्रामीणों की दैनिक जीवनशैली बेहद सुगम हो गई है। बिजली की उपलब्धता से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य केंद्रों और जीवन रक्षक चिकित्सा उपकरणों का संचालन अब बेहतर ढंग से हो सकेगा। ग्रामीणों में अब स्वरोजगार को लेकर नया उत्साह है। सिलाई, कुटीर उद्योग और छोटे व्यवसायों के शुरू होने से गांवों में आजीविका के नए साधन विकसित होंगे।

सपना हुआ साकार, ग्रामीणों ने जताया आभार

​वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अपने घरों को रोशनी से जगमगाता देख ग्रामीणों के चेहरों पर आत्मसंतुष्टि और खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बदलाव उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के लिए राज्य शासन, जिला प्रशासन और विद्युत विभाग के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

​'नियद नेल्लानार योजना' सिर्फ गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि वनांचल के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक सशक्त मुहीम बन चुकी है। प्रशासन का लक्ष्य अब जिले के अन्य वंचित गांवों में भी इसी तरह चरणबद्ध तरीके से विकास की रोशनी पहुंचाना है।

दशकों का अँधेरा टूटा, अबूझमाड़ के ईरपानार गाँव में पहली बार पहुँची बिजली

No comments Document Thumbnail

रायपुर- कभी नक्शे पर नाम भर रह गया ईरपानार आज उम्मीदों की नई पहचान बन गया है। अबूझमाड़ के गहरे जंगलों, ऊंचे पहाड़ों और दुर्गम पगडंडियों के बीच बसे इस छोटे से गांव में पहली बार बिजली पहुँची है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन गुजारने वाले ग्रामीणों के घरों में जब पहली बार बल्ब जले, तो गांव ने सिर्फ उजाला नहीं देखा, बल्कि विकास को महसूस किया।

ईरपानार नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है, लेकिन यह दूरी सामान्य रास्ते जैसी नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग, पहाड़ी चढ़ाई, घने वन क्षेत्र और कई स्थानों पर पैदल सफर करना पड़ता है। बरसात के मौसम में संपर्क और भी कठिन हो जाता है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड, नारायणपुर संभाग ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को प्राथमिकता से पूरा किया। कार्यपालन अभियंता सहित विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद मिशन मोड में काम कर सफलता हासिल की।

घने जंगलों के बीच चला विकास अभियान 

कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना सामान्य तकनीकी कार्य नहीं था। कई हिस्सों में बिजली खंभे, तार और सामग्री पहुंचाने के लिए कठिन श्रम करना पड़ा। टीम को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों, जंगलों और सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ा। कई स्थानों पर मशीनों की बजाय मानव श्रम और स्थानीय सहयोग से सामग्री पहुंचाई गई।बिजली लाइन विस्तार, पोल स्थापना और कनेक्शन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कर विभागीय टीम ने मिसाल पेश की है।

₹56.11 लाख की लागत, लेकिन असर पीढ़ियों तक

ग्राम ईरपानार के विद्युतीकरण कार्य पर कुल ₹56.11 लाख की लागत आई। इस परियोजना के तहत गांव के परिवारों को पहली बार विद्युत कनेक्शन प्रदान किया गया , एवं उस सोच का प्रतीक है जिसमें अंतिम छोर पर बसे परिवार को भी विकास का समान अधिकार दिया जा रहा है।

अब बच्चों के सपनों को मिलेगा उजाला

बिजली आने से अब गांव के बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए रोशनी मिलेगी। मोबाइल चार्जिंग जैसी सामान्य सुविधा, जो शहरों में सहज है, अब यहां भी उपलब्ध होगी। पंखे, लाइट और छोटे घरेलू उपकरणों से जीवन आसान होगा।

भविष्य में डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, संचार सुविधाओं और छोटे व्यवसायों के अवसर भी विकसित हो सकते हैं।

ग्रामीणों की आंखों में दिखी खुशी 

जब पहली बार गांव में बल्ब जले, तो बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर चेहरे पर उत्साह दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने अपने घरों में पहली बार स्थायी रोशनी देखी है। वर्षों से लालटेन, लकड़ी और सीमित साधनों पर निर्भर जीवन अब बदलने लगा है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और बिजली विभाग की टीम के प्रति आभार जताया। लोगों ने इसे गांव के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।

अबूझमाड़ में बदलाव की नई शुरुआत 

ईरपानार जैसे अन्य दूरस्थ गांवों को भी प्राथमिकता के आधार पर बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।

भारत के राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने रचा इतिहास: 5 लाख सर्किट किलोमीटर का आँकड़ा पार

No comments Document Thumbnail

भारत का राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 5,00,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) से अधिक की उच्च वोल्टेज (220 kV और उससे ऊपर) ट्रांसमिशन लाइनों के साथ-साथ 1,407 GVA से अधिक की परिवर्तन क्षमता (220 kV और उससे ऊपर) भी प्राप्त कर ली है।

विश्व के सबसे बड़े सिंक-क्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी 2026 को राजस्थान के भडला II से सीकर II सबस्टेशन तक 765 kV क्षमता वाली 628 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन के संचालन से हासिल की। यह लाइन राजस्थान के भडला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स के नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली को कुशलतापूर्वक ग्रिड में भेजने में सक्षम बनाएगी।

ट्रांसमिशन नेटवर्क का विकास

  • अप्रैल 2014 से अब तक भारत के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6% वृद्धि हुई है।

  • इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण हुआ है।

  • ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में 876 GVA का इजाफा हुआ है।

अब इंटर-रीजनल पावर ट्रांसफर कैपेसिटी 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे देश भर में बिजली के निर्बाध आदान–प्रदान को साकार करते हुए “एक राष्ट्र—एक ग्रिड—एक आवृत्ति” के विजन को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

आगामी ट्रांसमिशन परियोजनाएँ

वर्तमान में कई Interstate Transmission परियोजनाएँ प्रगति पर हैं, जिनसे अनुमानित 40,000 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 399 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में और वृद्धि होगी। इसके अलावा Intra-State Transmission परियोजनाएँ भी लगभग 27,500 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 134 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को जोड़ेंगी। ये परियोजनाएँ ग्रिड की विश्वसनीयता और पावर निकासी क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।

नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को समर्थन

ये क्षमता वृद्धि विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से इंटीग्रेशन का समर्थन करेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

यह 5,00,000 सर्किट किलोमीटर का माइलस्टोन भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और सतत निवेश का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में भरोसेमंद, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से जोड़ना भी है।


विद्युत मंत्रालय ने जारी की ‘ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026’, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को मिलेगा बल

No comments Document Thumbnail

विद्युत मंत्रालय ने आज नई ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 जारी करने की घोषणा की। यह नीति देश के बिजली क्षेत्र को सशक्त और आधुनिक बनाने के साथ-साथ विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अंतिम रूप से लागू होने के बाद यह नीति वर्ष 2005 में अधिसूचित मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति का स्थान लेगी।

फरवरी 2005 में अधिसूचित पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति का उद्देश्य बिजली क्षेत्र की बुनियादी चुनौतियों—जैसे मांग-आपूर्ति में कमी, सीमित बिजली पहुंच और कमजोर अवसंरचना—का समाधान करना था। इसके बाद भारत के विद्युत क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। देश की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता चार गुना बढ़ी है, मार्च 2021 तक सार्वभौमिक विद्युतीकरण हासिल किया गया, दिसंबर 2013 में एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड अस्तित्व में आया और वर्ष 2024–25 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1,460 यूनिट (kWh) तक पहुंच गई। इसके साथ ही पावर मार्केट और एक्सचेंजों से बिजली खरीद में लचीलापन और दक्षता बढ़ी है।

हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद वितरण क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उच्च एटीएंडसी (AT&C) हानियां, बढ़ता कर्ज, गैर-लागत आधारित टैरिफ और अधिक क्रॉस-सब्सिडी के कारण औद्योगिक बिजली दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।

इसी पृष्ठभूमि में ड्राफ्ट NEP 2026 को तैयार किया गया है। इस नीति के तहत वर्ष 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट और वर्ष 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिसमें 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य शामिल है।

ड्राफ्ट NEP 2026 के प्रमुख प्रावधान:

संसाधन पर्याप्तता (Resource Adequacy):

डिस्कॉम और एसएलडीसी को राज्य स्तर पर अग्रिम योजना बनानी होगी, जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार करेगा।

वित्तीय स्थिरता एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा:

  • टैरिफ का स्वत: वार्षिक संशोधन उपयुक्त सूचकांक से जोड़ा जाएगा।

  • फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली डिमांड चार्ज के माध्यम से की जाएगी ताकि क्रॉस-सब्सिडी कम हो।

  • मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी व सरचार्ज से छूट।

  • 1 मेगावाट या उससे अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट का प्रावधान।

  • विवाद समाधान तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण:

  • बाजार आधारित तंत्र से आरई क्षमता में वृद्धि।

  • छोटे उपभोक्ताओं के लिए डिस्कॉम द्वारा ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था।

  • पी2पी (P2P) और एग्रीगेटर के माध्यम से अतिरिक्त ऊर्जा का व्यापार।

  • 2030 तक नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा के लिए समान शेड्यूलिंग व्यवस्था।

  • बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज को बढ़ावा।

थर्मल, न्यूक्लियर और हाइड्रो ऊर्जा:

  • थर्मल प्लांट्स में स्टोरेज का एकीकरण और पुराने यूनिट्स का पुन: उपयोग।

  • SHANTI अधिनियम 2025 के अनुरूप उन्नत परमाणु तकनीक, स्मॉल और मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य।

  • भंडारण आधारित जलविद्युत परियोजनाओं का तेज विकास।

पावर मार्केट, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन:

  • बाजार में निगरानी और नियंत्रण के लिए सशक्त नियामक ढांचा।

  • राइट ऑफ वे (RoW) समस्याओं के समाधान हेतु नई तकनीक और मुआवजा।

  • सिंगल-डिजिट AT&C हानियों का लक्ष्य।

  • साझा वितरण नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर (DSO) की स्थापना।

ग्रिड संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीक:

  • एसटीयू का फंक्शनल अनबंडलिंग और स्वतंत्र एसएलडीसी का गठन।

  • मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा और डेटा को भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य।

  • 2030 तक स्वदेशी SCADA सिस्टम और घरेलू सॉफ्टवेयर समाधान का विकास।

कुल मिलाकर, ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 एक भविष्य-उन्मुख, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और पर्यावरण के अनुकूल बिजली क्षेत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसका उद्देश्य देश को सस्ती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को हासिल करना है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.