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अजा एकादशी आज: ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

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 हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। साल में 24 एकादशी आती हैं, जिनमें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी भी प्रमुख मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।


पंचांग के अनुसार इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। मान्यता है कि विधि-विधान से अजा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

अजा एकादशी पर ऐसे करें पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
  • चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भोग लगाएं।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अजा एकादशी की कथा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
  • परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करें।

पूजा के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार अजा एकादशी के दिन पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। प्रातः संध्या का समय सुबह 6:10 से 7:16 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए विजय मुहूर्त शाम 4 बजे से 4:51 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3:59 बजे से शाम 5:29 बजे तक बताया गया है।

एकादशी माता की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनंद अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया कहावै, विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में, शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैशाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी, अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ़ में जानो, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा, आनंद से रहिए॥

ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इंदिरा आश्विन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती, पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी, दुख-दरिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरुदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

आज देवशयनी एकादशी: चातुर्मास का शुभारंभ, भगवान विष्णु की आराधना में लीन हुए श्रद्धालु

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नई दिल्ली- आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चार माह तक चलने वाले चातुर्मास का शुभारंभ होता है।

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रख रहे हैं तथा सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर विशेष भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग का आयोजन भी किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के देवउठनी एकादशी पर जागृत होने के साथ ही शुभ एवं मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है।

धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं से विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा करने तथा जरूरतमंदों की सहायता एवं दान-पुण्य करने का भी आह्वान किया है।

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