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सफलता की कहानी -अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना से श्रमिक परिवारों के बच्चों को मिली नई उड़ान

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बीजापुर के मेधावी विद्यार्थियों का प्रतिष्ठित विद्यालयों में चयन, बेहतर शिक्षा से साकार हो रहे सपने

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के माध्यम से मेधावी विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है, जिससे उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

जिला बीजापुर के विभिन्न विकासखंडों के कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का इस योजना के तहत चयन हुआ है। विकासखंड उसूर के ग्राम बसागुड़ा की छात्रा सान्वी संगम का चयन दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है। वहीं विकासखंड भोपालपटनम के ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा परिधि कावटी, विकासखंड बीजापुर के ग्राम सागमेटा के छात्र देवांश जनगम तथा ग्राम गुल्लागुड़ा की छात्रा निहारिका नीकुरी का चयन हम एकेडमी, जगदलपुर में हुआ है। विकासखंड भैरमगढ़ के ग्राम छोटे गोगला के छात्र आदित्य कोरसा का चयन भी दिल्ली पब्लिक स्कूल, राजनांदगांव में हुआ है।

चयनित विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि वे श्रमिक परिवार से हैं और सीमित आय के कारण बच्चों को अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ाना उनके लिए संभव नहीं था। श्रम विभाग में पंजीयन कराने के बाद उन्हें अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आवेदन किया और बच्चों की प्रतिभा के आधार पर उनका चयन हो गया।

अब इन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, आधुनिक सुविधाएँ, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

कलेक्टर विश्वदीप ने चयनित विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से मुलाकात कर बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अपने माता-पिता, समाज और देश का नाम रोशन करने तथा उज्ज्वल भविष्य बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अभिभावकों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी और बच्चों के चयन पर शुभकामनाएँ दीं।

अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना केवल शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह श्रमिक परिवारों के बच्चों को समान अवसर देकर उनके सपनों को नई पहचान देने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह योजना सामाजिक समावेशन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

हड़ताल का मुख्य कारण मानवीय मूल्यों की समझ का अभाव, बच्चों की पढ़ाई बाधित होना चिंता का विषय: गेंदलाल कोकड़िया

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रायपुर- प्रदेश में शिक्षकों की हड़ताल को लेकर सामाजिक चिंतन सामने आया है। समाजसेवी गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि शिक्षकों का सबसे बड़ा दायित्व बच्चों के भविष्य का निर्माण करना है। ऐसे में लंबे समय तक विद्यालय बंद रहने से सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य को होता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकीय पेशा केवल रोजगार या व्यवसाय नहीं, बल्कि सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है। एक शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना का भी विकास करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का निर्वहन सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ करना चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मानवीय मूल्यों की समझ और जीवन दृष्टि की कमी के कारण टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि शिक्षकों को 'जीवन विद्या' जैसे मानवीय मूल्यों पर आधारित अध्ययन और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए, तो उनकी सोच में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि विद्यालयों का बंद होना बच्चों के साथ अन्याय है। इससे पढ़ाई प्रभावित होती है, परीक्षाओं की तैयारी बाधित होती है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक विकास रुक जाता है। सरकार और शिक्षक संगठनों को आपसी संवाद के माध्यम से शीघ्र समाधान निकालना चाहिए ताकि बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई शिक्षक लगातार अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करता है और समाधान के सभी प्रयासों के बाद भी शिक्षा व्यवस्था को बाधित करता है, तो सरकार को नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का अधिकार है। हालांकि, प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान को दी जानी चाहिए।

गेंदलाल कोकड़िया ने अंत में कहा कि "एक शिक्षक उपकार का कार्य करता है। उसका योगदान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था को हर परिस्थिति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।"

नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

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राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

शाला प्रवेश उत्सव में गूंजा शिक्षा का उत्साह, मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवप्रवेशी बच्चों का किया आत्मीय स्वागत

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हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, शिक्षा ही समृद्ध भविष्य की सबसे मजबूत नींव है — राजेश अग्रवाल

रायपुर- पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने आज स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय 'शाला प्रवेश उत्सव' में सहभागिता कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नवीन शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत कराई तथा अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की।

इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अपने सपनों को साकार कर सके।"

उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, नियमित विद्यालय आने तथा जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन शैक्षणिक सत्र के अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता, हाईकोर्ट ने कैदी को NEET परीक्षा देने की दी अनुमति

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए एक विचाराधीन कैदी को NEET-2026 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित अभ्यर्थी को 21 जून को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में पुलिस सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र ले जाया जाए, ताकि उसकी शिक्षा प्रभावित न हो और सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह अभी विचाराधीन कैदी है और उसके खिलाफ मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में उसे शिक्षा और भविष्य निर्माण के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है, विशेषकर तब जब वह अभी दोषी साबित नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि परीक्षा के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं तथा अभ्यर्थी को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया दोनों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।

इस फैसले को शिक्षा के अधिकार और न्यायिक संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो किसी कारणवश न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखना चाहते हैं।

NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला शिक्षा के महत्व और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्कूलों में बच्चों का हुआ अभिनंदन,प्राचार्य पुष्पा ने की संकुल के स्कूलों का निरीक्षण

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आरंग- मंगलवार को स्कूल खुलने से स्कूलों में रौनकता आई। प्रथम दिवस स्कूलों में साफ सफाई, मध्यान्ह भोजन और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता का विशेष रूप से ध्यान रखा गया। नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा,आरती और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। वहीं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में नवप्रवेशीय बच्चों की पूजा आरती कर और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। साथ ही मिठाई और चाकलेट वितरण कर बच्चों का उत्साह वर्धन किया। बच्चों में भी स्कूल खुलने से काफी उत्साह दिखा। वहीं भिलाई हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ नई प्राचार्य पुष्पा निषाद, समन्वयक जीतेंद्र शुक्ला, व्याख्याता सीएल साहू ने संकुल के  स्कूलों पहुंचकर स्कूलों का निरीक्षण किया। जिसमें बच्चों व शिक्षको की उपस्थिति,साफ सफाई ,मध्यान्ह भोजन व अन्य भौतिक संसाधनों का अवलोकन कर आवश्यक निर्देश दी।इस अवसर पर संस्था प्रमुख सहित सभी शिक्षकों व बड़ी संख्या में बच्चों की उपस्थिति रही।



चरौदा में विज्ञान मॉडल एवं रंगोली प्रदर्शनी का आयोजन

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ऐसे आयोजनों से बच्चों में जागृत होती है वैज्ञानिक सोच — डॉ. दिलीप साहू

आरंग- शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी एवं रंगोली के माध्यम से विज्ञान विषयक चित्रकारी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर जनपद पंचायत फिंगेश्वर (जिला गरियाबंद) के सभापति डॉ. दिलीप साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक एवं समाजसेवी पारसनाथ साहू विद्यालय पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

डॉ. दिलीप साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित होती है तथा उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिलता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग है और ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ती है। उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित मॉडल प्रदर्शनी, रंगोली के माध्यम से विज्ञान आधारित चित्रकारी, अनुशासन व्यवस्था एवं स्वच्छता के लिए विद्यालय प्रबंधन की सराहना की।

समाजसेवी पारसनाथ साहू एवं बागबाहरा कसेकेरा प्रकल्प से विज्ञान परिषद के अध्यक्ष विमल साहू ने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडलों का अवलोकन कर उनके उद्देश्यों की जानकारी ली तथा बच्चों को प्रोत्साहित किया।

मॉडल प्रदर्शनी कार्यक्रम का मंच संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। आयोजन एवं संयोजन में संस्था प्रमुख के.के. परमाल, शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू तथा शिक्षिका संगीता पाटले की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों की उपस्थिति एवं सक्रिय सहभागिता रही।


बाल दिवस की तैयारी में उत्साह, चरौदा स्कूल में बच्चों की बाल कैबिनेट की बैठक

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आरंग-शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में शनिवार को ‘सुरक्षित शनिवार’ के तहत विविध गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने योगाभ्यास, इमला लेखन और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों में भाग लिया।इस अवसर पर बाल कैबिनेट प्रभारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल के मार्गदर्शन में बाल कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी बाल मंत्रियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यालय में अनुशासन, साफ-सफाई, नियमित उपस्थिति और बाल दिवस के आयोजन पर विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान बच्चों ने सर्वसम्मति से बाल दिवस को हर्षोल्लास से मनाने का निर्णय लिया।बैठक में संस्था प्रमुख के. के. परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र पटेल, सूर्यकांत चन्द्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर प्रसाद साहू और शिक्षिका संगीता पाटले उपस्थित थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।



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