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IGI Airport पर भारत की पहली SkyCast प्रणाली का उद्घाटन, विमानन सुरक्षा और मौसम पूर्वानुमान में नई क्रांति

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) पर भारत की पहली “SkyCast System” का उद्घाटन किया और इसे भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत बताया।

मंत्री ने बताया कि इस तरह की केवल 18 उन्नत प्रणालियाँ अभी तक विश्वभर में स्थापित हैं, और भारत अब 19वाँ देश बन गया है जिसने विमानन मौसम निगरानी के लिए इस एकीकृत एटमॉस्फेरिक रिमोट सेंसिंग सिस्टम को अपनाया है। IGI एयरपोर्ट के बाद ऐसी दूसरी सुविधा जेवर एयरपोर्ट पर स्थापित की जाएगी और इसके बाद इसे देश के अन्य हवाई अड्डों पर भी विस्तारित किया जाएगा।

उद्घाटन समारोह में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, IMD, IITM, GMR और विमानन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्काईकास्ट सिस्टम और फॉग ऑब्जर्वेटरी सुविधा का उद्घाटन किया, जिसके बाद IITM के वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी प्रस्तुति और डेमो दिया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि “मिशन मौसम” के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच ने इस प्रकार की उन्नत मौसम अवसंरचना को संभव बनाया है। उन्होंने कहा कि स्काईकास्ट विमानन सुरक्षा में बड़ा बदलाव लाएगा और गंभीर मौसम स्थितियों में रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली यात्रियों के लिए उड़ानों में देरी, डायवर्जन और रद्दीकरण को काफी हद तक कम करने में मदद करेगी, क्योंकि यह पायलटों को लगभग तीन घंटे पहले तक सटीक चेतावनी दे सकेगी।

स्काईकास्ट प्रणाली में अत्याधुनिक एटमॉस्फेरिक तकनीकें शामिल हैं, जैसे रडार विंड प्रोफाइलर, SODAR, माइक्रोवेव रेडियोमीटर, ग्राउंड-बेस्ड फॉग एरोसोल स्पेक्ट्रोमीटर (GFAS) और CL61 LiDAR आधारित सीलामीटर। यह सिस्टम धुंध, टर्बुलेंस, दृश्यता और मौसम संबंधी रीयल-टाइम डेटा प्रदान करता है।

मंत्री ने बताया कि इसका मुख्य घटक रडार विंड प्रोफाइलर है, जो लगभग 3 किलोमीटर ऊंचाई तक हवा की गति, दिशा और टर्बुलेंस की निगरानी करता है, जिससे लैंडिंग और टेकऑफ अधिक सुरक्षित हो सकें।

फॉग मॉनिटरिंग सिस्टम विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रदूषण और धुंध की परस्पर क्रिया दृश्यता को प्रभावित करती है।

उन्होंने कहा कि यह प्रणाली विमानन सुरक्षा, मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती प्रदान करेगी।

डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि इस प्रकार की तकनीकें भारत की मौसम पूर्वानुमान क्षमता को और अधिक सटीक बनाएंगी और मिशन मौसम के तहत देशभर में ऐसी प्रणालियाँ विस्तारित की जाएंगी।

स्काईकास्ट प्रणाली भारत की “वेदर-स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर” दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीक-संचालित विमानन सेवाओं की ओर देश को आगे ले जाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘मिशन मौसम’ की प्रगति की उच्च-स्तरीय समीक्षा की

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मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य महत्वाकांक्षी ‘मिशन मौसम’ पहल के अंतर्गत चल रही खरीद और स्थापना से संबंधित प्रगति की समीक्षा करना था।

मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समयसीमा में तेजी लाएँ, विशेषकर इसलिए क्योंकि यह एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है जिसकी घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की है।

बैठक में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रवीचंद्रन सहित मंत्रालय और IMD के वरिष्ठ अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे। अधिकारियों ने देश भर में लगाए जा रहे विभिन्न प्रेक्षण एवं रडार प्रणालियों की खरीद, बुनियादी ढाँचे की उपलब्धता और तेज की गई स्थापना समयसीमा की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्र को समर्पित मिशन मौसम, भारत की मौसम पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी क्षमताओं में एक बड़ा सुधार है। उन्होंने कहा कि खरीद और स्थापना गतिविधियों का समय पर निष्पादन प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, आपदा तैयारी को बढ़ाने और अधिक सटीक, स्थान-विशिष्ट मौसम पूर्वानुमान प्रदान करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

मंत्री ने IMD और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिया कि खरीद प्रक्रियाएँ पारदर्शी, कुशल और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप हों। उन्होंने प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में स्थापना कार्यों को तेज करने और फील्ड-स्तर की प्रगति पर नज़र रखने के लिए उन्नत ट्रैकिंग प्रणालियाँ अपनाने पर भी बल दिया।

डॉ. सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IMD और मंत्रालय के बीच समन्वित प्रयासों से मिशन मौसम के तहत निर्धारित लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर ही प्राप्त कर लिए जाएंगे।

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