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छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी रफ्तार, अगस्त में 5,943 EV की बिक्री; पिछले साल से करीब 67% ज्यादा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ती नजर आ रही है। राज्य में अगस्त 2026 के दौरान 5,943 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई, जबकि अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 3,550 वाहन था। यानी एक साल में EV बिक्री में करीब 67 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में लोग पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों के साथ-साथ अब इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी तेजी से अपना रहे हैं।

पिछले साल की तुलना में बड़ा उछाल

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में छत्तीसगढ़ में 3,550 इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री हुई थी। एक साल बाद अगस्त 2026 में यह संख्या बढ़कर 5,943 हो गई। इस तरह एक वर्ष में 2,393 अतिरिक्त इलेक्ट्रिक वाहन बिके।

EV बिक्री में इस वृद्धि को राज्य में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति बढ़ते रुझान के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर शहरी क्षेत्रों में दोपहिया और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने की बात सामने आ रही है।

पेट्रोल-डीजल के विकल्प के रूप में बढ़ रही EV की मांग

ईंधन की बढ़ती लागत, कम परिचालन खर्च और पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। इलेक्ट्रिक वाहन सामान्य तौर पर पेट्रोल या डीजल वाहनों की तुलना में चलाने की लागत कम कर सकते हैं, हालांकि वाहन की कीमत, चार्जिंग सुविधा और बैटरी से जुड़े खर्च मॉडल के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की अहम भूमिका

EV की बिक्री बढ़ने के साथ राज्य में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार भी महत्वपूर्ण हो जाता है। शहरों के साथ-साथ प्रमुख राजमार्गों और अंतरशहरी मार्गों पर पर्याप्त चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध होना इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

छत्तीसगढ़ में EV की बढ़ती बिक्री से वाहन बाजार में भी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों की बिक्री का रुझान राज्य की परिवहन व्यवस्था में बदलाव को प्रभावित कर सकता है।

67 फीसदी की बढ़ोतरी का क्या मतलब?

अगस्त 2025 के 3,550 वाहनों से अगस्त 2026 में 5,943 वाहनों तक पहुंचना लगभग 67.4% की साल-दर-साल वृद्धि है। हालांकि, केवल एक महीने के आंकड़े से पूरे साल की बिक्री का रुझान तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए आने वाले महीनों के आंकड़ों को भी देखना जरूरी होगा।

फिलहाल अगस्त के आंकड़े छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग की ओर संकेत करते हैं और बताते हैं कि राज्य के वाहन खरीदारों के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की स्वीकार्यता बढ़ रही है।

विकसित भारत 2047 के लिए भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में 'इलेक्ट्रिक मोबिलिटी : विकसित भारत के लिए भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाना' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य अतिथि के रूप में की। एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (ASSOCHAM) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों ने भाग लिया। सम्मेलन में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को तेजी से अपनाने तथा देश को वैश्विक ईवी विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की रणनीति पर व्यापक चर्चा हुई।

सम्मेलन के दौरान नीति की निरंतरता, मजबूत चार्जिंग अवसंरचना, विनिर्माण के स्थानीयकरण, सुदृढ़ बैटरी आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय सहायता तथा तकनीकी नवाचार को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विस्तार के लिए आवश्यक बताया गया। प्रतिभागियों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप भारत को वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी हब बनाने के लिए इन क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों पर बल दिया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारत का इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण केवल एक तकनीक को दूसरी तकनीक से बदलने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सतत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में कदम है जो विनिर्माण को सशक्त बनाए, हरित रोजगार सृजित करे और प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने में योगदान दे।

उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन के दौरान सरकार का ध्यान हरित विकास, मजबूत अवसंरचना, पारदर्शी प्रशासन और दीर्घकालिक पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने वाली सर्कुलर इकोनॉमी पर केंद्रित है।

 मंत्री यादव ने बताया कि सरकार ने पर्यावरणीय स्वीकृतियों को सरल बनाने, PARIVESH पोर्टल के माध्यम से अनुमोदन प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, अनुपालन आवश्यकताओं के युक्तिकरण तथा पर्यावरणीय सुरक्षा से समझौता किए बिना कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इन सुधारों से निवेश को गति मिलने के साथ जिम्मेदार विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को पारंपरिक 'लेना–बनाना–फेंकना' (Take-Make-Dispose) मॉडल से आगे बढ़कर पुनः उपयोग, पुनर्चक्रण और संसाधनों के सतत प्रबंधन पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में अग्रसर होना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत चार्जिंग नेटवर्क, उन्नत विनिर्माण के स्थानीयकरण, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति, बैटरी रीसाइक्लिंग और संसाधन दक्षता के साथ जोड़ा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने उद्योग, नीति-निर्माताओं और अनुसंधान संस्थानों से मिलकर नवाचार आधारित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का आह्वान किया, जिससे भारत स्वच्छ परिवहन और हरित विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बन सके। उन्होंने कहा, "पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ना होगा। सामूहिक प्रयासों के माध्यम से भारत सतत विनिर्माण, हरित मोबिलिटी और जलवायु-अनुकूल विकास में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है।"

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में ASSOCHAM के अध्यक्ष एवं यूएनओ मिंडा के चेयरमैन निर्मल के. मिंडा, ASSOCHAM राष्ट्रीय ग्रीन मोबिलिटी परिषद के अध्यक्ष एवं जेबीएम समूह के वाइस चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निशांत आर्य, तथा ASSOCHAM के महासचिव सौरभ सान्याल भी उपस्थित रहे।

भारत-यूके सहयोग से EV चार्जिंग में बड़ी पहल, उन्नत तकनीक से बनेगा स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

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नई दिल्ली: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने Scharge Pvt Limited के साथ “Powering EV Charging Innovation” परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना भारत-यूके संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसमें ब्रिटेन की Albright Product Design Limited भी भागीदार है।

⚡ EV चार्जिंग में नई तकनीक

इस परियोजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए अगली पीढ़ी की चार्जिंग प्रणाली विकसित करना है, खासकर:

  • कमर्शियल फ्लीट

  • डिपो ऑपरेशन्स

के लिए।

इसमें Scharge द्वारा विकसित स्मार्ट चार्ज कंट्रोलर और यूके पार्टनर की पेटेंटेड ऑटोमैटेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाएगा।

🚗 क्या है खास?

नई तकनीक में:

  • मोटराइज्ड ओवरहेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम

  • कम मैन्युअल काम

  • केबल की कम टूट-फूट

  • बेहतर सुरक्षा और सुविधा

जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

यह सिस्टम मौजूदा AC Type-2 EV चार्जर्स के साथ भी काम करेगा।

🏭 डिपो में काम होगा आसान

इस समाधान से:

  • चार्जिंग समय कम होगा

  • उपकरण सुरक्षित रहेंगे

  • कार्य प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी

साथ ही केबल डैमेज और अन्य जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

Scharge Pvt Limited इस परियोजना के जरिए:

  • भारत में EV तकनीक को मजबूत करेगा

  • स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करेगा

  • टिकाऊ और बड़े स्तर पर उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा

क्या बोले अधिकारी?

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत-यूके जैसे सहयोगी कार्यक्रम नई और उपयोगी तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। EV चार्जिंग में नवाचार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष

यह परियोजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति देगी। उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए देश में सुरक्षित, स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार EV चार्जिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।

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