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GMADA दफ्तर में ED की 36 घंटे की कार्रवाई, 30 से ज्यादा बैग दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त; AAP का विरोध

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मोहाली- पंजाब के मोहाली स्थित ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) के कार्यालय में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की करीब 36 घंटे चली तलाशी और जांच कार्रवाई गुरुवार को समाप्त हो गई। ED की टीम मंगलवार सुबह GMADA कार्यालय पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों से पूछताछ और विभिन्न रिकॉर्ड की जांच की गई। 

जमीन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी जांच

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ED की कार्रवाई कथित भूमि अधिग्रहण, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव, बकाया राशि में कथित छूट और निजी रियल एस्टेट कंपनियों से जुड़े लेन-देन की जांच का हिस्सा है। जांच में दिल्ली की Tirupati Infraprojects और उससे जुड़ी कंपनियों के लेन-देन का भी उल्लेख किया गया है। ED की जांच में कथित तौर पर GMADA से संबंधित संपत्तियों और निजी डेवलपर्स के बीच हुए लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। 

ED के अनुसार, जांच में कुछ कंपनियों को GMADA की ओर से देय राशि में कथित वित्तीय राहत और इससे सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित नुकसान के आरोपों की जांच शामिल है। यह आरोप जांच का हिस्सा हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। 

30 से ज्यादा बैग दस्तावेज और हार्ड डिस्क ले गई टीम

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 36 घंटे की कार्रवाई के बाद ED टीम गुरुवार सुबह लगभग 11:30 बजे GMADA कार्यालय से बाहर निकली। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि टीम अपने साथ 30 से अधिक बैग में दस्तावेज और स्कैन किए गए रिकॉर्ड की हार्ड डिस्क लेकर गई। अभी तक किसी GMADA अधिकारी की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। 

AAP ने किया विरोध

ED की कार्रवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को GMADA कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और ED के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी परिसर के अंदर जाने की कोशिश करने लगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान ED के एक वाहन को नुकसान पहुंचाने की घटना भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। 

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा समेत AAP नेताओं ने ED की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। यह AAP का आरोप है; ED की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की जांच और उसके कानूनी आधार को अलग से देखा जाना जरूरी है। 

पंजाब सरकार पहुंची हाई कोर्ट

ED की लंबी कार्रवाई के बीच पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया। अदालत ने तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक वारंट अधिकारी नियुक्त किया और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। अदालत की यह कार्रवाई इस मामले में कानूनी निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अब आगे क्या?

ED की टीम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड अपने साथ ले गई है। रिपोर्टों के अनुसार, जब्त सामग्री की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। फिलहाल किसी GMADA अधिकारी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है

CGPSC भर्ती घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CM के OSD चेतन बोरघरिया गिरफ्तार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में OSD रहे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें छह दिन की ED हिरासत में भेजा है।

2020 और 2021 की CGPSC परीक्षाएं जांच के घेरे में

ED के अनुसार, जांच का संबंध CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक, वित्तीय लेन-देन और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया गया था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में बोरघरिया के पद और प्रभाव का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया गया।

3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वसूली

ED का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने 2021 CGPSC परीक्षा के कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम वसूली। एजेंसी के अनुसार, अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था। इन दावों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

170 लेन-देन में 66.64 लाख रुपये की जांच

जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए करीब 66.64 लाख रुपये जमा होने का ED ने दावा किया है। एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और कथित CGPSC नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच कर रही है।

मोबाइल चैट और डिजिटल सबूत भी जांच में

ED ने इससे पहले 1 सितंबर को बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली थी। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत सामने आई, जिसमें वित्तीय लेन-देन तथा रकम के भुगतान या वापसी से संबंधित संदेश होने की बात कही गई है।

ED ने Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की है। एजेंसी को आशंका है कि कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर धन के आवागमन और लेयरिंग के लिए किया गया हो सकता है।

जांच अभी जारी

ED का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से बोरघरिया की कथित भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, ये सभी एजेंसी के जांच संबंधी आरोप और दावे हैं; मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसी कथित धन के स्रोत, उसके लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

शराब घोटाला मामले में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर ED की दबिश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कांग्रेस नेता और छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी की टीम ने धमतरी स्थित उनके आवास के साथ रायपुर में भी कार्रवाई की।

जानकारी के मुताबिक, ED की टीम सुबह धमतरी स्थित अग्रवाल के आवास पहुंची और कई घंटों तक दस्तावेजों तथा अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी की गई थी। कुछ कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और ED की कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया।

शराब घोटाले की जांच से जुड़ी कार्रवाई

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। ED ने इससे पहले 11 अगस्त 2026 को रामगोपाल अग्रवाल को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था। उस समय वह रायपुर सेंट्रल जेल में विचाराधीन बंदी के रूप में निरुद्ध थे। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें ED की हिरासत में भेजा था।

ED का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ के आबकारी तंत्र में कथित अनियमितताओं से करीब ₹3,000 करोड़ की अपराध से अर्जित आय पैदा हुई। जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम के एक हिस्से के नकद लेनदेन में रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका की जांच की जा रही है।

एजेंसी ने अपने आधिकारिक बयान में दावा किया है कि जांच के दौरान ऐसे बयान सामने आए जिनमें कथित नकदी को रायपुर स्थित राजीव भवन तक पहुंचाए जाने का उल्लेख है। हालांकि, ये ED द्वारा लगाए गए आरोप हैं और मामले की जांच अभी जारी है।

आगे भी जारी रहेगी जांच

ED ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। ताजा तलाशी के दौरान बरामद या जांचे गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री के आधार पर एजेंसी आगे की कार्रवाई कर सकती है।

नोट: शराब घोटाले से जुड़े आरोपों और ED के दावों पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही माना जाएगा।

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