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उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का किया अनावरण, मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन

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 भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं में से एक मन्नाथु पद्मनाभन की अमर विरासत का ऐतिहासिक उत्सव बताया। उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली को लंबे समय से संजोए गए मन्नम स्मृति मंडपम् के निर्माण के स्वप्न को साकार करने पर बधाई देते हुए कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक ऐसी महान विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसके आदर्श सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रसेवा की भावना को जाति, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठाते हैं।

मन्नाथु पद्मनाभन के जीवन और योगदान का स्मरण करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रख्यात समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन को सामाजिक पुनर्जागरण का सच्चा अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनकी दृष्टि किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कहा, "वे मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान और समान अवसर का अधिकारी है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है, जब न्याय, करुणा और समावेशिता समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत बनें।"

राधाकृष्णन ने कहा कि नायर सर्विस सोसाइटी की उल्लेखनीय प्रगति स्वयं उसके संस्थापक की असाधारण निष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि मन्नाथु पद्मनाभन का विश्वास था कि महान संस्थाएँ धन से नहीं, बल्कि समर्पण से बनती हैं। उन्होंने सामान्य परिवारों के छोटे-छोटे योगदानों से शिक्षा और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की, जिसने अनेक पीढ़ियों के जीवन को बदल दिया।

उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थापना के एक शताब्दी से अधिक समय बाद भी मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्श केरल से कहीं आगे तक फैल चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से एनएसएस दिल्ली द्वारा कलरिपयट्टु, कथकली और मोहिनीयाट्टम जैसी केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों वाले संगठन के रूप में एनएसएस दिल्ली की उल्लेखनीय प्रगति पर भी बधाई दी।

स्मारकों के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "स्मारक केवल पत्थरों पर की गई नक्काशी नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक चेतना पर अंकित अमिट छाप होते हैं। उनका उद्देश्य केवल अतीत का स्मरण करना नहीं, बल्कि भविष्य को प्रेरणा देना भी है।"

उन्होंने नागरिकों से मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, "उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज निर्माण के उनके मिशन को आगे बढ़ाएँ।"

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत मन्नम इंटरनेशनल सेंटर परिसर में एक पौधा भी रोपा।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी, एनएसएस दिल्ली के अध्यक्ष एम. के. जी. पिल्लै, महासचिव एम. डी. जयप्रकाश सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कैबिनेट ने रेलवे मंत्रालय के दो बहुप्रतीक्षित मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्टों को दी मंजूरी, लागत लगभग 2,781 करोड़ रुपये

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने आज रेलवे मंत्रालय के दो प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 2,781 करोड़ रुपये है।

स्वीकृत परियोजनाएँ:

  1. देवभूमि द्वारका (ओखा) – कालानुस डबलिंग – 141 किमी

  2. बदलापुर – कर्जत 3री और 4थी लाइन – 32 किमी

इन परियोजनाओं के माध्यम से रेल मार्ग की क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे यात्री एवं माल परिवहन की दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा। मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव संचालन को सहज बनाएंगे और भीड़भाड़ कम करेंगे।

मुख्य विशेषताएँ और लाभ:

  • ये परियोजनाएँ PM-Gati Shakti राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई हैं, जिसमें मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता पर विशेष ध्यान दिया गया है।

  • महाराष्ट्र और गुजरात के 4 जिलों में फैली इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे का नेटवर्क लगभग 224 किमी बढ़ेगा।

  • करीब 585 गांवों में रहने वाले 32 लाख लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी।

  • कालानुस – ओखा डबलिंग द्वारका के द्वारकाधीश मंदिर सहित क्षेत्र के प्रमुख तीर्थस्थलों से कनेक्टिविटी बढ़ाएगी और सौराष्ट्र क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान देगी।

  • बदलापुर – कर्जत सेक्शन मुंबई उपनगरीय कॉरिडोर का हिस्सा है। 3री और 4थी लाइन यात्री मांग को पूरा करने और दक्षिण भारत से जुड़ने में मदद करेगी।

  • यह मार्ग कोयला, नमक, कंटेनर, सीमेंट, पेट्रोलियम उत्पाद (POL) आदि माल के परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है।

पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ:

  • परियोजनाओं से अतिरिक्त माल परिवहन क्षमता 18 MTPA होगी।

  • रेलवे एक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण मित्र परिवहन माध्यम होने के नाते, यह परियोजना जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने, तील आयात में 3 करोड़ लीटर की बचत और CO2 उत्सर्जन में 16 करोड़ किलोग्राम कमी में मदद करेगी।

  • यह CO2 कमी 64 लाख पेड़ों की रोपण के बराबर है।

ये प्रोजेक्ट न केवल यातायात और माल ढुलाई को गति देंगे बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को भी सशक्त बनाएंगे।

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