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तालाबीरा II एवं III कोयला खदान: ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और सतत विकास की दिशा में भारत की नई उपलब्धि

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भारत सरकार के घरेलू कोयला उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के प्रयासों को नामित प्राधिकरण (Nominated Authority—NA) के तहत आवंटित और नीलाम की गई कोयला खदानों के माध्यम से और मजबूती मिल रही है। 2 मई 2016 को कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 की अनुसूची III के तहत NLC India Ltd. को आवंटित तालाबीरा II एवं III ओपन कास्ट कोयला खदान ऐसी NA-आवंटित खदानों में शामिल है, जो उत्पादन, डिस्पैच, प्रौद्योगिकी अपनाने, सुरक्षा, पर्यावरण प्रबंधन, रोजगार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में मजबूत प्रदर्शन कर रही है।

ओडिशा के संबलपुर और झारसुगुड़ा जिलों में स्थित यह खदान घरेलू कोयला उपलब्धता में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में तालाबीरा II एवं III ने 19.14 मिलियन टन (MT) का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक कोयला उत्पादन दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.28% की साल-दर-साल वृद्धि है। खदान ने 21 मार्च 2026 को 1,26,138.07 टन का सर्वाधिक दैनिक उत्पादन तथा मार्च 2026 में 3.39 MT का सर्वाधिक मासिक उत्पादन भी दर्ज किया।

उत्पादन के साथ-साथ खदान ने कोयला डिस्पैच में भी मजबूत प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 में खदान ने 17.69 MT का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक डिस्पैच हासिल किया। इसमें लगभग 10.72 MT बिजली क्षेत्र को तथा 6.97 MT गैर-विनियमित क्षेत्र को आपूर्ति किया गया। तालाबीरा II एवं III से प्राप्त कोयला कई राज्यों में स्थित विद्युत उत्पादन संयंत्रों को उपलब्ध कराया जाता है, जिनमें NTPC दर्लीपाली, NTPC गाडरवारा, NTPC खरगोन, NTPC कुडगी तथा ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के अन्य विद्युत संयंत्र शामिल हैं।

उत्पादन शुरू होने के बाद से खदान ने लगातार वृद्धि की है। 14 अगस्त 2026 तक संचयी कोयला उत्पादन 72.23 MT और संचयी डिस्पैच 70.89 MT तक पहुंच गया है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि सरकार के कोयला-ब्लॉक आवंटन ढांचे के तहत आवंटित कोयला संसाधनों को परिचालन में लाकर किस प्रकार ठोस परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिचालन दक्षता

तालाबीरा II एवं III में परिचालन दक्षता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) RFID आधारित वाहन सत्यापन, AI-सक्षम कैमरों तथा तकनीक-सक्षम प्रवेश और निकास द्वारों के माध्यम से कोयला परिवहन एवं डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी सुनिश्चित करता है।

DLMS लागू होने के बाद औसत एंट्री-गेट प्रोसेसिंग समय 1.42 मिनट से घटकर 0.54 मिनट प्रति वाहन हो गया, जबकि टैरे वेटमेंट का समय 1.34 मिनट से घटकर 0.48 मिनट रह गया। खदान में धूल-नियंत्रण प्रणाली से युक्त सरफेस माइनर्स, GPS आधारित फ्लीट मैनेजमेंट और जियो-फेंसिंग, GNSS रिसीवर के साथ 3D टेरेस्ट्रियल लेजर स्कैनिंग, ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, मशीनीकृत ट्रक लोडिंग, निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशन (CAAQMS) और CCTV निगरानी जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है।

तालाबीरा II एवं III OCP में डिजिटल लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम (DLMS) का कार्यान्वयन कोयला परिवहन और डिस्पैच की एंड-टू-एंड डिजिटल निगरानी एवं नियंत्रण के लिए किया गया है।

पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन

खदान के परिचालन प्रदर्शन के साथ जिम्मेदार और पर्यावरण-अनुकूल खनन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। खदान पट्टा क्षेत्र के भीतर 23.43 हेक्टेयर में पौधरोपण किया गया है, जिसमें 64,288 पौधे लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, पट्टा क्षेत्र के बाहर 29.48 हेक्टेयर में 65,202 पौधे लगाए गए हैं।

खदान में 11.68 kW की सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई है, जिसमें आसपास के गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और खदान के बुनियादी ढांचे में सौर प्रकाश व्यवस्था शामिल है।

धूल नियंत्रण के लिए वेट ड्रिलिंग, जल छिड़काव, फॉग कैनन, फिक्स्ड स्प्रिंकलिंग सिस्टम, विंड बैरियर, ट्रक-वॉशिंग सिस्टम और मशीनीकृत सड़क सफाई जैसी व्यवस्थाएं अपनाई गई हैं।

सुरक्षा को प्राथमिकता

सुरक्षा खदान के प्रदर्शन का एक प्रमुख हिस्सा है। स्थापना के बाद से यहां कोई घातक दुर्घटना नहीं हुई है। सुरक्षा उपायों में सुरक्षा प्रबंधन योजना, बेहतर हॉल रोड एवं यातायात प्रबंधन, PPE अनुपालन, मजबूत ब्लास्टिंग प्रक्रियाएं, सुरक्षा प्रशिक्षण और ARAN Safety App के माध्यम से नियर-मिस रिपोर्टिंग शामिल हैं।

खदान को Annual Mines Safety Fortnight के तहत कई पुरस्कार एवं मान्यताएं प्राप्त हुई हैं। साथ ही, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक लगातार पांच वर्षों में कोयला मंत्रालय के Star Rating Evaluation के तहत Five-Star Rating हासिल की गई है।

रोजगार और कौशल विकास

खदान का प्रभाव उत्पादन और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है। तालाबीरा II एवं III से 3,277 रोजगार अवसर जुड़े हैं, जिनमें 1,277 प्रत्यक्ष और परिवहन तथा संबद्ध गतिविधियों के माध्यम से लगभग 2,000 अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

5 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (PAPs) को भुवनेश्वर स्थित Skill Development Institute में कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा 101 ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को RSETI तथा PMKVY केंद्रों के माध्यम से सतत आजीविका से जुड़ी पहलों में प्रशिक्षित किया गया है।

सामुदायिक विकास और CSR

सामुदायिक विकास भी परियोजना के व्यापक प्रभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्त वर्ष 2025-26 में ₹5.32 करोड़ का CSR व्यय किया गया, जिसके तहत स्वास्थ्य सेवा, पेयजल, शिक्षा, स्कूल परिवहन, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और सौर प्रकाश व्यवस्था जैसी पहलों को समर्थन दिया गया।

स्वास्थ्य एवं रक्तदान शिविरों से लगभग 1,500 लोगों को लाभ मिला, जबकि टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति से लगभग 10,000 लोग लाभान्वित हुए।

वित्त वर्ष 2026-27 में जुलाई 2026 तक ₹4.20 करोड़ अतिरिक्त खर्च किए जा चुके हैं। इन पहलों में पेयजल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाओं में सहायता, सौर प्रकाश व्यवस्था, स्कूल और आंगनवाड़ी बुनियादी ढांचा, ग्रामीण सड़कें, सामुदायिक सुविधाएं तथा जलाशयों के पुनरुद्धार जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

तालाबीरा II एवं III OCP, NLC India Ltd. द्वारा आयोजित मेगा मेडिकल कैंप।

ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान

2016 में आवंटन से लेकर उच्च क्षमता वाले निरंतर उत्पादन तक, तालाबीरा II एवं III ने यह प्रदर्शित किया है कि परिचालन में लाए गए कोयला संसाधन किस प्रकार घरेलू कोयला उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी आधारित खनन, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार सृजन और स्थानीय विकास में योगदान दे सकते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड उत्पादन और डिस्पैच, 72.23 MT के संचयी उत्पादन, 70.89 MT के संचयी डिस्पैच तथा इसके मापनीय सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय परिणामों के साथ, तालाबीरा II एवं III भारत की ऊर्जा सुरक्षा को आगे बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के व्यापक विजन को समर्थन देने वाले NA-आवंटित कोयला संसाधनों के प्रभाव का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है।

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