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ग्राम पंचायतों के लिए उपभोक्ता जागरूकता कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू

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नई दिल्ली:- उपभोक्ता मामलों के विभाग (DoCA) ने वर्ष 2024 और 2025 में आयोजित वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की सफलता के बाद, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ग्राम पंचायतों के लिए अपने राष्ट्रीय वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम का दूसरा चरण शुरू किया है। यह श्रृंखला 13 फरवरी 2026 को पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना और संरक्षण तंत्र को मजबूत करना है।

इस पहल के तहत पहली बैठक बिहार, झारखंड और ओडिशा राज्यों के साथ आयोजित की गई, जिसमें 1,011 ऑनलाइन लिंक के माध्यम से हजारों पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र के दौरान प्रतिभागियों को उपभोक्ता अधिकारों, उभरते उपभोक्ता मुद्दों और शिकायत निवारण की संस्थागत व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई। पंचायत प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की समस्याओं पर सीधे सवाल पूछने और स्पष्टीकरण प्राप्त करने का अवसर भी मिला।

पंचायतों की अहम भूमिका पर जोर

सत्र में पंचायतों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया, ताकि वे उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा दें, अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाएं और नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) और ई-जागृति पोर्टल जैसे शिकायत मंचों तक लोगों की पहुंच सुनिश्चित कर सकें।

इससे पहले विभाग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पंचायत प्रतिनिधियों के लिए उपभोक्ता अधिकारों, कर्तव्यों और शिकायत निवारण प्रणाली पर व्यापक जागरूकता सत्र आयोजित किए थे। यह अभियान 20 दिसंबर 2024 को शुरू होकर 22 अगस्त 2025 को समाप्त हुआ था और दिल्ली और चंडीगढ़ को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की पंचायतों को कवर किया गया था।

क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजन

इस कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता क्षेत्रीय भाषाओं में सत्रों का आयोजन रहा, जिससे प्रभावी संवाद, व्यापक भागीदारी और बेहतर समझ सुनिश्चित हुई। संबंधित राज्यों की भाषाओं में दक्ष अधिकारियों ने सत्रों की अध्यक्षता की, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद संभव हुआ।

ग्रामीण उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने की पहल

इस पहल से पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता मजबूत हुई है, जिससे वे अपने समुदायों में उपभोक्ता संरक्षण के संवाहक बन सकें। स्थानीय संस्थाओं को उपभोक्ता अधिकारों और शिकायत निवारण प्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देकर ग्रामीण उपभोक्ताओं को जागरूक और सशक्त बनाने में मदद मिली है।

वर्चुअल कार्यक्रम के फायदे

वर्चुअल प्रारूप ने कम लागत, व्यापक पहुंच और तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित करने के लाभ दिखाए हैं। सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद विभाग ने पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर इस कार्यक्रम को जारी रखने और विस्तार करने का निर्णय लिया है।

निष्कर्ष

इस सतत प्रयास के माध्यम से उपभोक्ता मामलों का विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि उपभोक्ता जागरूकता शासन के हर स्तर तक पहुंचे और विशेष रूप से ग्रामीण नागरिकों को जागरूक निर्णय लेने और समय पर शिकायत निवारण तक पहुंचने में सशक्त बनाया जा सके।


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