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72 घंटे के भीतर रायगढ़ जिला प्रशासन की अफीम की खेती पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

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तमनार के बाद लैलूंगा के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में अफीम खेती का भंडाफोड़, आरोपी हिरासत में

जिला प्रशासन की कार्रवाई से संलिप्त लोगों में हड़कंप 

ड्रोन सर्वे से प्रशासन की पैनी नजर, जिले के सभी अनुविभागों में सघन निगरानी और लगातार कार्रवाई जारी

कलेक्टर-एसएसपी ने ली प्रेस वार्ता, गैर कानूनी अफीम की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए की जा रही कार्रवाई की दी जानकारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा लगातार कार्रवाई जारी है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में जिले में चलाए जा रहे अभियान के तहत बीते 72 घंटे में तमनार क्षेत्र के आमाघाट से लेकर लैलूंगा विकासखंड के ग्राम-नवीन घटगांव और मुड़ागांव तक अवैध मादक पदार्थ अफीम के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिससे इस कार्य में जुडे़ संलिप्त लोगों में हड़कंप मच गया है।

इस संबंध में आज प्रशासन द्वारा पुलिस कंट्रोल रुम मे प्रेसवार्ता आयोजित की गई। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में अवैध मादक पदार्थों की खेती पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसके प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशासन द्वारा सभी अनुविभागों में व्यापक ड्रोन सर्वे अभियान संचालित किया गया है। इस अभियान के तहत खरसिया (14 ग्राम), घरघोड़ा (10 ग्राम), तमनार (12 ग्राम), लैलूंगा (4 ग्राम), मुकडेगा (3 ग्राम), रायगढ़ (11 ग्राम), पुसौर (13 ग्राम) एवं धरमजयगढ़ (7 ग्राम) में सफलतापूर्वक सर्वे किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी निगरानी संभव हो सकी है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। 

कलेक्टर ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ सप्ताह से जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों का गहन विश्लेषण और सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान अफीम की खेती के दो मामले सामने आए थे। वहीं, आज दोपहर तीसरा मामला भी प्रकाश में आया है। उन्होंने बताया कि सभी मामलों में संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि मादक पदार्थों की अवैध खेती कानूनन गंभीर अपराध है। इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आगे भी ड्रोन सर्वे, सघन जांच एवं संयुक्त कार्रवाई इसी तरह लगातार जारी रहेगी। 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह ने बताया कि बीते 19 मार्च को मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तमनार क्षेत्र के आमाघाट में छापेमारी की। जांच के दौरान पाया गया कि यहां सब्जी की खेती की आड़ में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान लगभग 60,326 पौधे बरामद किए गए, जिनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 2 करोड़ रुपये आंका गया है। इस मामले में झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लेकर विवेचना की जा रही है। मौके पर पूरी फसल को उखाड़कर जब्त किया गया तथा रोटावेटर और जेसीबी मशीन की सहायता से खेत को पूरी तरह नष्ट कर समतल किया गया। इस कार्रवाई में पुलिस, प्रशासन, कृषि, आबकारी एवं एफएसएल की टीम संयुक्त रूप से उपस्थित रही। 

इसी क्रम में 23 मार्च को फिजिकल एवं ड्रोन सर्वे के दौरान लैलूंगा तहसील के ग्राम नवीन घटगांव में भी अवैध खेती का मामला सामने आया। यहां भूमिस्वामी सादराम नाग द्वारा अपने खेत में साग-भाजी के बीच छोटे क्षेत्र में अफीम की खेती की जा रही थी। पौधों में सफेद फूल आना प्रारंभ हो गया था तथा कुछ डंठल सूख चुके थे। पुलिस ने तत्काल फसल को जब्त कर आरोपी को हिरासत में लिया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम के ही एक अन्य व्यक्ति अभिमन्यु नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल बरामद की गई। टीम के पहुंचने पर आरोपी द्वारा साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा था, जिसे समय रहते विफल करते हुए सामग्री जब्त की गई। लैलूंगा क्षेत्र के मुड़ागांव में तानसिंह नागवंशी से पूछताछ में लगभग 5 डिसमिल क्षेत्र में संदिग्ध फसल की खेती किए जाने की बात सामने आई है। उसके घर से पेड़, पत्तियां एवं तने के सूखे अवशेष प्रशासनिक टीम द्वारा बरामद कर जांच के लिए भेजा गया हैं। पुलिस टीम नारकोटिक्स के अधिकारियों के संपर्क में है, रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अभी तक दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जा रहा है, पूछताछ करने के बाद उनकी भूमिका पूरी तरीके से स्पष्ट हो जाएगी। जिसके बाद नारकोटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन या पुलिस को दें, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की गई कार्रवाई- ग्राम समोदा में हटाई गई अवैध कब्जा

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दुर्ग- जिले के जनपद पंचायत दुर्ग के अतंर्गत ग्राम समोदा में जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की गई, अवैध कब्जों पर जेसीबी के माध्यम से शासकीय भूमि रिक्त कराई गई। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यदु द्वारा राजस्व अमले और पुलिस विभाग के सहयोग से ग्राम समोदा राजस्व निरीक्षक मंडल जेवरा सिरसा तहसील व जिला दुर्ग के अतंर्गत शासकीय घास भूमि खसरा नम्बर 778 रकबा 0.13 हेक्टेयर भूमि पर किये गये अवैध पक्का दुकान निर्माण, टीन सेड लगाकर दुकान निर्माण तथा सीमेंट पोल लगाकर किया गया तार घेरा को हटाने की कार्रवाई की गई। 

ग्राम के ही ब्रजेश ताम्रकार पिता गिरजाशंकर ताम्रकार द्वारा उक्त शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य किया गया था। अतिक्रमण हटाने के दौरान राजस्व निरीक्षक रेखा शुक्ला, पटवारी चन्द्रिका प्रसाद खरें, शत्रुहन मिश्रा, अनिता साहू, संदीप देशमुख और पुलिस विभाग के अधिकारी तथा पंचायत जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय ग्रामीणजन मौजूद थे। 




अवैध धान भंडारण पर जिला प्रशासन का बड़ा अभियान, 06 प्रकरणों में 218 क्विंटल धान जप्त

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रायपुर- खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के तहत समर्थन मूल्य पर संचालित धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन द्वारा अवैध धान भंडारण और परिवहन के विरुद्ध निरंतर कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कृषि उपज मंडी बालोद की उड़न दस्ता टीम ने आज विभिन्न गांवों में सघन जांच कर बड़ी मात्रा में अवैध धान जब्त किया।

तहसीलदार आशुतोष शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि उड़न दस्ता दल द्वारा मंडी अधिनियम के तहत अब तक कुल 06 प्रकरण दर्ज कर 218 क्विंटल धान जप्त किया गया है। आज की कार्रवाई में बालोद तहसील अंतर्गत ग्राम लिमोरा से 22 क्विंटल, लोण्डी से 40 क्विंटल, पोण्डी से 99 क्विंटल, भेड़िया नवागांव से 32 क्विंटल तथा बेलमांड़ से 24 क्विंटल धान अवैध भंडारण की स्थिति में पकड़ा गया।

जिला प्रशासन की यह सख्त और निरंतर निगरानी दर्शाती है कि अवैध धान के परिवहन एवं संग्रहण पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।


जल जीवन मिशन (JJM) की अगली दिशा: जिला प्रशासन की भूमिका और डिजिटल नवाचार

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जल जीवन मिशन ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे 15.71 करोड़ (81.17%) ग्रामीण घरों को नल के पानी की सुविधा प्रदान की गई है। अब मिशन अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसका मुख्य फोकस दीर्घकालिक स्थायित्व, कार्यक्षमता और सेवा वितरण पर है। इस संदर्भ में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जिला कलेक्टर नीति और लोगों के बीच सेतु का काम करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर घर न केवल पानी प्राप्त करे बल्कि उसे नियमित और स्थायी रूप से प्राप्त करता रहे।

इसी को ध्यान में रखते हुए, पेयजल संवाद का पहला आयोजन आज पीएम जल शक्ति मंत्रालय, पीने के पानी और स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा किया गया। यह एक राष्ट्रीय संवाद था, जिसका उद्देश्य जिला-आधारित शासन को सशक्त बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना, और जिलों के बीच अनुभव एवं सीख का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना था।

यह आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया और इसका संचालन अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने किया। इसके साथ उपस्थित थे कमल किशोर सौन, अतिरिक्त सचिव और मिशन डायरेक्टर, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM), स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM, साथ ही देश भर के जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन डायरेक्टर और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की मिशन टीमें।

जिला नेतृत्व और नवाचार

यह पहल ग्रामीण जल प्रबंधन में जिलाओं और स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए की जा रही सतत सुधार योजनाओं पर आधारित है। पिछले कुछ महीनों में, DDWS ने 729 जिला कलेक्टरों के साथ व्यक्तिगत और वर्चुअल संवाद किए हैं, JJM-IMIS जिला/ DWSM डैशबोर्ड और पंचायत डैशबोर्ड विकसित किए हैं, जो ई-ग्राम स्वराज से जुड़ा है। इसके अलावा, QCI के साथ मिलकर 80,000 से अधिक सरपंचों को सरपंच संवाद मोबाइल ऐप के माध्यम से जोड़ा गया, जिससे स्थानीय स्वामित्व और जवाबदेही बढ़ी।

नागरिकों के लिए WQMIS और सिटिजन कॉर्नर जैसे उपकरण और PM गति शक्ति के माध्यम से स्थानिक नक्शांकन ने एक पारदर्शी, डेटा-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जहां जिला नेतृत्व नवाचार, सर्वोत्तम प्रथाओं और समुदाय-आधारित शासन मॉडल साझा कर सकता है।

मुख्य भाषण

अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि जल जीवन मिशन, 81% ग्रामीण कवर के बाद, अब संस्थागत समेकन, जवाबदेही और स्थायित्व पर केंद्रित अगले चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि हर जिला अपनी स्थानीय वास्तविकताओं और नेतृत्व के अनुसार अद्वितीय समाधान, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं के उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा, “हमें स्थानीय संस्थाओं को ग्रामीण जल सेवाओं की रीढ़ बनाना होगा, जहां निर्णय डेटा-आधारित हों, संचालन जवाबदेह हों, और समुदायों को बनाए गए संसाधनों को स्थायी रूप से संचालित करने का अधिकार हो।”

इसके बाद पूर्वी खासी हिल्स (मेघालय), गंजाम (ओडिशा), रत्नागिरी (महाराष्ट्र), चरैडियो (असम), धम्तारी (छत्तीसगढ़), उत्तर त्रिपुरा (त्रिपुरा) के जिला कलेक्टरों ने अपनी सफल पहलों पर प्रस्तुति दी। मुख्य पहलों में स्रोत संरक्षण, मजबूत निगरानी तंत्र, स्वयं सहायता समूहों द्वारा रखरखाव और शुल्क संग्रह, तकनीक-सक्षम शिकायत निवारण और समूह जल आपूर्ति मॉडल शामिल थे।

डिजिटल रूपांतरण: RPWSS आईडी मॉड्यूल

स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM ने डिजिटल रूपांतरण के महत्व और RPWSS आईडी मॉड्यूल के माध्यम से ग्रामीण जल सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की रूपरेखा पेश की।

RPWSS आईडी मॉड्यूल हर जल आपूर्ति योजना को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान देता है, जिससे वास्तविक समय में ट्रैकिंग, पूर्वानुमानित रखरखाव और पारदर्शी निगरानी संभव होती है। यह PM गति शक्ति से जुड़ा है और विकास कार्यक्रमों के समेकन और डेटा-संचालित निर्णयों का समर्थन करता है।

जिला प्रशासन के लिए इसका मतलब है सशक्त निगरानी, समन्वय और डेटा आधारित निर्णय, जबकि ग्राम पंचायतों के लिए यह दिन-प्रतिदिन रखरखाव, जल्दी क्षति पहचान और निवारक कार्रवाई में मदद करता है। नागरिकों के लिए, यह पारदर्शिता और तेज़ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।

भविष्य की दिशा: स्थायी जल शासन

कमल किशोर सौन, AS&MD-NJJM ने कहा कि JJM अब केवल अवसंरचना निर्माण योजना नहीं बल्कि शासन सुधार, विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी की एक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद को एक नियमित राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने मिशन का सार संक्षेप में बताया — “जल बचेगा, तो जल रहेगा और अगर जल रहेगा तो जल मिलेगा।”


निष्कर्ष

जल जीवन मिशन अब केवल हर घर जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्त, डिजिटल और समुदाय-आधारित ग्रामीण जल शासन की नई दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के हर गांव में जल स्थायित्व, गरिमा और साझा उत्तरदायित्व के साथ उपलब्ध हो।


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