Media24Media.com: #DigitalRecords

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #DigitalRecords. Show all posts
Showing posts with label #DigitalRecords. Show all posts

संसद ने Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को दी मंजूरी, डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मिलेगी मान्यता

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली: डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में संसद ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने सोमवार को विधेयक को पारित किया, जबकि लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। इसके साथ ही बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने का रास्ता साफ हो गया है।

1891 के पुराने कानून की जगह लेगा नया कानून

यह विधेयक ब्रिटिश काल के Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को बदलने के उद्देश्य से लाया गया है। करीब 135 वर्ष पुराने कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा मुख्य रूप से पारंपरिक दस्तावेजों और खाताबही के संदर्भ में थी। नए कानून में बैंकिंग व्यवस्था में आए तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी स्पष्ट कानूनी आधार दिया गया है। 

डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को मिलेगा कानूनी आधार

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल अथवा क्लाउड आधारित माध्यमों में रखे गए रिकॉर्ड को भी बैंकिंग रिकॉर्ड के दायरे में शामिल किया जा सकेगा।

इसका मतलब है कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से तैयार होने वाले बैंक रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार मिलेगा।

बैंकिंग व्यवस्था में तकनीक के अनुरूप बदलाव

आज बैंकिंग क्षेत्र में अधिकांश लेनदेन डिजिटल माध्यमों से होते हैं। ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट जैसी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानून को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना जरूरी हो गया था।

नया विधेयक इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे डिजिटल रिकॉर्ड की कानूनी स्वीकार्यता को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया में ऐसे रिकॉर्ड के इस्तेमाल के लिए अधिक व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध होगी।

अदालतों में साक्ष्य पेश करने की प्रक्रिया होगी आसान

नए कानूनी ढांचे से बैंकिंग से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। बैंकिंग लेनदेन, खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विधेयक का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड के लिए उपयुक्त प्रमाणन व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है। इससे अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच और स्वीकार्यता की प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। 

डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर

डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के साथ उसकी प्रामाणिकता, सटीकता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित प्रमाणन और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के प्रावधानों पर भी जोर दिया गया है।

संसदीय समिति ने भी डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपायों की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया था। समिति ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाणपत्र की आवश्यकताओं को मजबूत करने की सिफारिश की थी।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

नया कानून बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंक अब बड़ी मात्रा में डेटा डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में सुरक्षित रखते हैं। ऐसे में पारंपरिक कागजी रिकॉर्ड पर आधारित पुराने कानूनी प्रावधानों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बदलना आवश्यक था।

यह बदलाव बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक तकनीक-अनुकूल बनाने और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के साथ कानून के तालमेल को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विधेयक?

Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को केवल बैंकिंग कानून में बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह भारत की तेजी से डिजिटल होती वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इससे:

  • डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की अदालतों में स्वीकार्यता को मजबूती मिलेगी।

  • बैंकिंग मामलों में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक आधुनिक होगी।

  • पुराने कागजी रिकॉर्ड आधारित कानूनी व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप बनाया जाएगा।

  • बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था के बीच तकनीकी तालमेल बेहतर होगा।

डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम

भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसे समय में बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानून का भी डिजिटल युग के अनुरूप होना जरूरी है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 इसी बदलाव को कानूनी रूप देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

संसद से दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक देश की बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड के उपयोग को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कोयला मंत्रालय का विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय सरकार के कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों के निस्तारण के उद्देश्य से विशेष अभियान 5.0 के लिए व्यापक तैयारियाँ कर रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर स्वच्छता बढ़ाना, सतत् प्रथाओं को अपनाना और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है।

वर्तमान में चल रहा तैयारी चरण 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा। इस दौरान 26.08.2025, 04.09.2025 और 19.09.2025 को नोडल व संबंधित अधिकारियों के साथ तीन तैयारी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, ताकि अभियान के उद्देश्यों के प्रति जागरूकता को मजबूत किया जा सके।

मंत्रालय, अपनी सीपीएसई (CPSEs), सीसीओ (CCO) और सीएमपीएफओ (CMPFO) के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान स्थलों की पहचान कर रहा है, कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान कर रहा है, लंबित संदर्भों, शिकायतों और अपीलों का समाधान कर रहा है। इसके साथ ही कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग, अभिलेख प्रबंधन, दक्षता और पारदर्शिता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

18.09.2025 को मंत्रालय अधिकारियों ने लोक नायक भवन स्थित रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। यहाँ फाइलों की व्यापक समीक्षा और व्यवस्थित श्रेणीकरण पर जोर दिया गया। अनुपयोगी और अप्रासंगिक अभिलेखों की समय पर छंटाई की जा रही है, जिससे कार्यालय में उपयोगी स्थान मुक्त होगा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

विशेष अभियान 5.0 के तहत कोयला मंत्रालय व सीपीएसई द्वारा की गई प्रमुख पहलें:

  • सीआईएल (CIL) ने कोलकाता के कुमारटुली में नुक्कड़ नाटक आयोजित किया, जिसका उद्देश्य स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक जिम्मेदारी पर संदेश देना था।

  • एनसीएल (NCL) झिंगुरदा क्षेत्र में सफाई मित्र सुरक्षा शिविर आयोजित हुआ, जिससे सफाई मित्रों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को बढ़ावा मिला।

  • बीसीसीएल (BCCL, झारखंड) के कुसुंडा क्षेत्र, एसईसीएल मुख्यालय (छत्तीसगढ़), डब्ल्यूसीएल (WCL) नागपुर के मंजरी क्षेत्र में रंगोली प्रतियोगिता और मजरी एवं वानी क्षेत्रों में बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। इन रचनात्मक पहलों ने समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दिया और "स्वच्छ भारत" के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

24 सितम्बर 2025 तक की उपलब्धियाँ:

  • स्वच्छता के लिए चिन्हित स्थल – 1165

  • कबाड़ निपटान की मात्रा – 7091 मीट्रिक टन

  • समीक्षा हेतु भौतिक फाइलें – 1,10,026

  • समीक्षा हेतु ई-फाइलें – 28,211

तैयारी चरण 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा, इसलिए इन संख्याओं में और वृद्धि की उम्मीद है।

कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह विशेष अभियान 5.0 के माध्यम से बेहतर स्वच्छता, सुचारु अभिलेख प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.