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CSIR-NIScPR ने ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया

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सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR), नई दिल्ली ने 4–5 अगस्त 2026 को CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव (फेज-III) के अंतर्गत ‘विज्ञान संचार और उभरते रुझान’ विषय पर दो दिवसीय कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया।

संस्थान के प्रशिक्षण प्रभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों, मीडिया और उद्योग जगत से 30 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण को अनुभव-आधारित (Experiential Learning) बनाया गया, जिसमें विशेषज्ञ व्याख्यान, संवादात्मक चर्चाएं और व्यावहारिक सत्रों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान संचार और उभरती प्रौद्योगिकियों की व्यापक जानकारी दी गई।

विज्ञान संचार में जिम्मेदारी और एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर

कार्यक्रम का उद्घाटन CSIR-NIScPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि संस्थान लंबे समय से देश में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और विज्ञान संचार को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिम्मेदार विज्ञान संचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे वैज्ञानिक जानकारी को अधिक विश्वसनीय, प्रभावी और व्यापक बनाया जा सकता है।

विज्ञान और समाज के बीच सेतु है विज्ञान संचार

CSIR-NIScPR के प्रशिक्षण प्रभाग के प्रमुख मुकेश ए. पुंड ने स्वागत भाषण में कहा कि विज्ञान संचार वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को कम करने का प्रभावी माध्यम बन चुका है।

कार्यक्रम की नोडल प्रधान अन्वेषक (PI) मीताली भारती ने प्रशिक्षण के उद्देश्यों से प्रतिभागियों को अवगत कराया और पूरे कार्यक्रम का संचालन किया। वहीं पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. परमानंद बर्मन ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा शैक्षणिक सत्रों का संचालन किया।

आधुनिक विज्ञान संचार के विभिन्न पहलुओं पर हुआ प्रशिक्षण

दो दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को विज्ञान संचार के विभिन्न समकालीन विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई। इनमें—

  • विज्ञान संचार की मूल अवधारणाएं एवं विभिन्न प्रारूप

  • श्रोताकेंद्रित संचार रणनीतियां

  • व्यवहारिक विज्ञान (Behavioural Insights)

  • सोशल मीडिया प्रबंधन

  • पॉडकास्ट निर्माण

  • इन्फोग्राफिक्स और लघु वीडियो तैयार करना

  • विज्ञान संचार में एआई आधारित ऐप्स का उपयोग

  • नैतिकता एवं पेशेवर जिम्मेदारियां

  • विज्ञान संचार में उभरते करियर अवसर

जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

कार्यक्रम में डॉ. हेमांसी और प्रियंका (अशोका विश्वविद्यालय), डॉ. परमानंद बर्मन, डॉ. वी. वी. बिनॉय (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज़, बेंगलुरु), डॉ. एच. एस. सुधीरा (निदेशक, गुब्बी लैब्स), डॉ. मेहर वान तथा CSIR-NIScPR के संकाय सदस्यों ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।

प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए प्रतिभागियों की अपेक्षाओं, सीखने के परिणामों और अनुभवों का मूल्यांकन पूर्व एवं पश्चात प्रशिक्षण सर्वेक्षण के माध्यम से किया गया।

प्रतिभागियों को प्रदान किए गए प्रमाणपत्र

समापन सत्र में मुकेश ए. पुंड और मीताली भारती ने प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने पर बधाई दी और उनसे अपने-अपने संस्थानों में साक्ष्य-आधारित एवं जिम्मेदार विज्ञान संचार को बढ़ावा देने के लिए अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग करने का आह्वान किया।

CSIR इंटीग्रेटेड स्किल इनिशिएटिव के सह-प्रधान अन्वेषक सलीम अंसारी ने प्रशिक्षण कार्यक्रम का समन्वय किया। कार्यक्रम के सफल समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।


रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को बनायेंगे अधिक सशक्त : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया। 

मुख्यमंत्री साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है। 

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।

कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन हज़्ज़ाज़ मा'अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सुश्री अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सुश्री अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा। 

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

डाक विभाग की नागरिक-केंद्रित सेवाओं और नवाचारों से 2025 में व्यापक प्रभाव

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भारत सरकार के डाक विभाग (Department of Posts) ने वर्ष 2025 के दौरान नागरिक सेवाओं, डिजिटल समावेशन, वित्तीय समावेशन, निर्यात सुविधा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। डाक नेटवर्क को बहुउद्देशीय सेवा मंच के रूप में विकसित करते हुए कई नई पहलें लागू की गईं।

पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (POPSK):

विदेश मंत्रालय के सहयोग से देशभर में लोकसभा क्षेत्रों में POPSK स्थापित किए जा रहे हैं। 30 नवंबर 2025 तक 452 POPSK संचालित हो चुके हैं। जनवरी–नवंबर 2025 के दौरान 29 लाख से अधिक पासपोर्ट आवेदनों (1.54 लाख PCC सहित) का निपटान हुआ, जिससे डाक विभाग को ₹114.88 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। इसी अवधि में 10 नए POPSK शुरू किए गए।

पोस्ट ऑफिस आधार सेवाएं:

देशभर के डाकघरों में 13,352 आधार केंद्र स्थापित किए गए हैं। मोबाइल/लैपटॉप किट के माध्यम से कैंप मोड में सेवाएं देकर दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुंच बनाई गई। जनवरी–नवंबर 2025 में 2.35 करोड़ से अधिक आधार नामांकन/अपडेट किए गए और ₹129.13 करोड़ का राजस्व अर्जित हुआ। सियाचिन में देश का सबसे ऊंचा आधार केंद्र भी संचालित है।

हर घर तिरंगा अभियान 2025:

डाक विभाग ने हर घर तिरंगा 4.0 के तहत 28.13 लाख राष्ट्रीय ध्वजों का वितरण किया। पोस्ट ऑफिसों और ई-पोस्टऑफिस पोर्टल के माध्यम से बिक्री/वितरण हुआ, साथ ही जनभागीदारी के लिए रैलियां और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

PMEGP इकाइयों का भौतिक सत्यापन:

KVIC के साथ समझौते के तहत जनवरी–नवंबर 2025 में 1.69 लाख PMEGP इकाइयों का सत्यापन किया गया, जिससे लाभार्थियों को समय पर सब्सिडी समायोजन में मदद मिली।

KYC सत्यापन और म्यूचुअल फंड पहल:

डाक विभाग ने UTI, SUUTI, Nippon India MF, SBI MF और AMFI के साथ समझौते कर लगभग 5 लाख KYC सत्यापन पूरे किए। अगस्त 2025 में AMFI के साथ समझौते के बाद डाकघरों के जरिए म्यूचुअल फंड वितरण की नई शुरुआत हुई, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निवेश पहुंच बढ़ी।

BSNL सिम बिक्री व रिचार्ज:

सितंबर 2025 में BSNL के साथ MoU के बाद 1.64 लाख डाकघरों को BSNL सेवाओं के पॉइंट ऑफ सेल के रूप में सक्षम किया गया, जिससे डिजिटल डिवाइड कम करने में मदद मिलेगी।

आगामी पहलें:

  • TRAI के साथ ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी सर्वे

  • MSME उद्यम पंजीकरण सत्यापन

  • SIDBI के साथ उद्यम असिस्ट क्रेडिट पायलट

डिजिटल और वित्तीय सेवाएं:

जनवरी 2025 से आधार-आधारित e-KYC लागू, जिसके तहत 1.09 लाख खाते खुले और 24.45 लाख लेनदेन हुए। साथ ही ATM नेटवर्क का आधुनिकीकरण कर 1,000 एटीएम साइट्स अपग्रेड की गईं।

DIGIPIN – डिजिटल पता प्रणाली:

ISRO और IIT हैदराबाद के सहयोग से विकसित DIGIPIN को मार्च 2025 में लॉन्च किया गया। यह 4×4 मीटर ग्रिड आधारित स्थायी डिजिटल पता है, जिसे कई सरकारी प्लेटफॉर्म्स में एकीकृत किया गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निर्यात:

डाक घर निर्यात केंद्र (DNK) के जरिए 762 जिलों में 1,013 केंद्रों से 12.31 लाख निर्यात शिपमेंट (₹287 करोड़ मूल्य) सुगम बनाए गए। UPU मंचों पर भारत की सक्रिय भूमिका रही और रूस के साथ International Tracked Packet Service समझौता भी हुआ।

डाक टिकट और फिलैटली:

2025 में 42 स्मारक डाक टिकट और 47 कस्टमाइज़्ड ‘माय स्टैम्प’ जारी किए गए, जिनमें राष्ट्रीय उपलब्धियों, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को दर्शाया गया।

कुल मिलाकर, 2025 में डाक विभाग ने नागरिक सुविधा, डिजिटल समावेशन, वित्तीय सशक्तिकरण और वैश्विक सहयोग को मजबूत करते हुए अपनी भूमिका को एक आधुनिक, बहुआयामी सेवा संस्थान के रूप में सुदृढ़ किया है।

प्रधानमंत्री का G20 संबोधन: मानव-केंद्रित तकनीक और न्यायपूर्ण वैश्विक विकास की दिशा में भारत का नेतृत्व

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प्रधानमंत्री ने आज G20 शिखर सम्मेलन के तीसरे सत्र को संबोधित किया, जिसका विषय था— “सभी के लिए न्यायपूर्ण एवं समान भविष्य – क्रिटिकल मिनरल्स, सुरक्षित रोजगार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक समुदाय को यह सुनिश्चित करना होगा कि महत्वपूर्ण तकनीकों का विकास और उपयोग मानव-केंद्रित हो, वित्त-केंद्रित नहीं; वैश्विक हो, राष्ट्र-केंद्रित नहीं; और ओपन-सोर्स आधारित हो, विशिष्ट मॉडलों पर नहीं। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने तकनीकी इकोसिस्टम में इसी दृष्टिकोण को अपनाया है, जिसके कारण अंतरिक्ष तकनीक, एआई और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर भारत की दृष्टि

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की एआई नीति समान अवसर, जन-स्तर कौशल विकास और जिम्मेदार उपयोग पर आधारित है। उन्होंने बताया कि इंडिया-AI मिशन के तहत देशभर में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं ताकि एआई के लाभ सभी नागरिकों को मिल सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि एआई को “ग्लोबल गुड” बनाना आवश्यक है, जिसके लिए एक वैश्विक समझौते की जरूरत है, जिसमें पारदर्शिता, मानव निरीक्षण, ‘सेफ्टी-बाय-डिज़ाइन’ और दुरुपयोग रोकने के सिद्धांत शामिल हों। उन्होंने जोर दिया कि एआई मानव क्षमताओं का विस्तार करे, लेकिन अंतिम निर्णय का अधिकार मनुष्यों के पास ही होना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि भारत फरवरी 2026 में AI Impact Summit आयोजित करेगा, जिसका विषय होगा—

‘सर्वजनम् हिताय, सर्वजनम् सुखाय’ (सभी के हित और सभी के सुख के लिए)।
उन्होंने सभी G20 देशों को इसमें भाग लेने का आमंत्रण दिया।

रोजगार से क्षमताओं की ओर बदलाव की आवश्यकता

प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई के दौर में दुनिया को “आज के रोजगार” से “भविष्य की क्षमताओं” की ओर तेजी से बढ़ना होगा। नई दिल्ली G20 शिखर सम्मेलन के दौरान टैलेंट मोबिलिटी पर हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए उन्होंने वैश्विक प्रतिभा गतिशीलता ढांचा (Global Framework for Talent Mobility) तैयार करने का प्रस्ताव रखा।

भारत का वैश्विक संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता दोहराई—

“भारत ऐसे विकास के लिए प्रतिबद्ध है जो टिकाऊ हो; ऐसे व्यापार के लिए जो विश्वसनीय हो; ऐसी वित्तीय व्यवस्था के लिए जो न्यायपूर्ण हो; और ऐसी प्रगति के लिए जिसमें हर कोई समृद्ध हो।”

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने WTDC 25 में भारत की डिजिटल नेतृत्व और ITU साझेदारी को रेखांकित किया

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केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज बाकू में WTDC 25 के सत्रों के दौरान आयोजित नेटवर्किंग ब्रेकफास्ट को संबोधित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के साथ भारत की 150 वर्षों से चली आ रही साझेदारी को दोहराया।

अपने संबोधन में मंत्री ने भारत की ठोस उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने एक अरब नागरिकों को इंटरनेट से जोड़ा, 1.4 अरब लोगों को सेवा देने वाली दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बनाई, और अब वैश्विक डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से संचालित करता है। साथ ही, इन प्रणालियों को खुला, सुलभ और किफायती बनाए रखने का भी ध्यान रखा गया।

मंत्री ने भारत के वैश्विक योगदान पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल पहचान, भुगतान और शासन में भारत की नवाचार क्षमताएं अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों को समर्थन प्रदान कर रही हैं। यह योगदान केवल वाणिज्यिक हितों के लिए नहीं, बल्कि यह मान्यता देते हुए किया गया है कि डिजिटल क्षमताओं को साझा किया जाना चाहिए। भारत के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने स्पेक्ट्रम प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन में हजारों पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है। साथ ही, भारत ने हमेशा समान स्पेक्ट्रम आवंटन, किफायती सैटेलाइट ब्रॉडबैंड और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से विकासशील देशों को सशक्त बनाने का समर्थन किया है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने 2027–2030 के लिए ITU काउंसिल में पुन: चुनाव हेतु भारत की उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देगा, तकनीकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण जैसे व्यावहारिक समाधानों का समर्थन करेगा और क्षेत्रों के बीच सहमति बनाने में मदद करेगा। मंत्री ने रेडियो कम्यूनिकेशन ब्यूरो के निदेशक के लिए भारत की नामांकन की भी घोषणा की, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत नवाचार-प्रधान, भविष्य-सक्षम स्पेक्ट्रम शासन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देगा।

अंत में मंत्री ने यह दोहराया कि भारत का समर्थन मांगना सतत कार्रवाई, पारदर्शी सहभागिता और डिजिटल परिवर्तन से गुजर रहे देशों के प्रति वास्तविक एकजुटता पर आधारित है। भारत सभी सदस्य देशों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि कनेक्टिविटी के लाभ हर नागरिक तक पहुँच सकें।

भारत का AVGC-XR सेक्टर: वैश्विक क्रिएटिव इकोनॉमी में नया मुकाम

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प्रमुख बिंदु (Key Takeaways)

  • भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर एक उभरता हुआ उद्योग है, जो डिजिटल नवाचार और क्रिएटिव-टेक विकास से संचालित होकर 2030 तक USD 100 बिलियन पार करने का अनुमान है।

  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) वैश्विक साझेदारी जैसे Netflix, Google, Microsoft, NVIDIA आदि के माध्यम से रचनात्मक शिक्षा को नया आकार दे रहा है, और विश्व-स्तरीय टैलेंट इकोसिस्टम तैयार कर रहा है।

  • भारतीय VFX और एनीमेशन स्टूडियो अब वैश्विक सिनेमा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जैसे Avatar, Thor: The Dark World, Game of Thrones।

भारत की क्रिएटिव इकॉनमी का उत्कर्ष

भारत का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर देश के सबसे तेजी से बढ़ते उद्योगों में से एक बन गया है। यह डिजिटल नवाचार, युवा-प्रेरित मांग, और क्रिएटिव उद्यमिता में वृद्धि से संचालित है। सरकार ने इसे सेवा अर्थव्यवस्था के उच्च संभावित क्षेत्रों में मान्यता दी है।

  • यह सेक्टर लगभग 7% वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ रहा है और 2027 तक लगभग ₹3,067 अरब तक पहुँचने का अनुमान है।

  • राष्ट्रीय दृष्टिकोण इसे 2030 तक USD 100 बिलियन तक बढ़ाने की योजना रखता है, जिससे भारत एक कंटेंट उपभोक्ता से वैश्विक क्रिएटर और आईपी निर्यातक में बदल सके।

मुख्य स्तंभ:

  1. एनिमेशन, VFX, गेमिंग, और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) में घरेलू क्षमता को मजबूत करना।

  2. प्रशिक्षण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार-चालित संस्थानों में निवेश।

  3. क्षेत्रीय और भाषाई सीमाओं के पार समान भागीदारी सुनिश्चित करना।

आर्थिक योगदान

  • मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर ने वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

  • भारत में एनिमेशन और VFX सेवाओं में 40-60% लागत लाभ है, जो बड़ी संख्या में कुशल श्रमिकों द्वारा समर्थित है।

  • लगभग 25% भारतीय OTT सामग्री का व्यूअरशिप विदेशों से आता है, जो भारत की वैश्विक सांस्कृतिक और वाणिज्यिक उपस्थिति को दर्शाता है।

AVGC-XR क्रांति

AVGC-XR सेक्टर (Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality) में तकनीक, कहानी और नवाचार का संगम भारत की मीडिया और एंटरटेनमेंट वृद्धि के अगले अध्याय को परिभाषित कर रहा है।

संस्थागत ढांचा और IICT

  • AVGC-XR सेक्टर को राष्ट्रीय विकास का प्रमुख चालक मानते हुए 2022 में AVGC प्रोमोशन टास्क फोर्स का गठन किया गया।

  • टास्क फोर्स ने राष्ट्रीय AVGC-XR मिशन की स्थापना की सिफारिश की और भारत को डिजिटल कंटेंट क्रिएशन के लिए वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा।

  • इस सेक्टर में अगले दस वर्षों में लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

IICT की प्रमुख उपलब्धियाँ:

  • मई 2025: IICT को सेक्शन 8 कंपनी के रूप में औपचारिक रूप दिया गया।

  • मई 2025: Google, YouTube, Meta, Adobe, Microsoft, NVIDIA, Wacom, और JioStar के साथ साझेदारी।

  • जुलाई 2025: प्रथम शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश शुरू।

  • जुलाई 18, 2025: मुंबई के NFDC कॉम्प्लेक्स में पहला IICT कैंपस उद्घाटित।

  • अगस्त 30, 2025: WaveX Media-Tech स्टार्टअप इनक्यूबेटर लॉन्च।

  • अक्टूबर 7, 2025: FICCI और Netflix के साथ MoU, ग्लोबल कंटेंट विशेषज्ञता को शिक्षा प्रणाली में जोड़ने हेतु।

राष्ट्रीय AVGC-XR सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (NCoE):

  • 2024 में सरकार द्वारा मंजूरी।

  • प्रशिक्षण, शोध, और उद्योग सहयोग के लिए apex बॉडी।

राज्य-स्तरीय पहल

  • कर्नाटक AVGC-XR नीति 2024–2029: स्किलिंग, इनक्यूबेशन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर केंद्रित।

  • महाराष्ट्र AVGC-XR नीति 2025: ₹3,268 करोड़ बजट के साथ, लंबी अवधि का रोडमैप 2050 तक।

नीति सुधार और बुनियादी ढांचा

  1. Cinematograph (Amendment) Act, 2023: डिजिटल पायरेसी रोकने के लिए सख्त प्रावधान।

  2. National Broadcasting Policy: आधुनिक, समावेशी और विकासोन्मुख ढांचा।

  3. India Cine Hub: फिल्म निर्माण प्रक्रिया में एकल-खिड़की सुविधा।

WAVES – ग्लोबल प्लेटफ़ॉर्म

  • World Audio Visual and Entertainment Summit (WAVES) 1–4 मई 2025, मुंबई।

  • PM द्वारा उद्घाटन।

  • WAVES Declaration on Global Media Cooperation अपनाई गई।

  • ₹1,328 करोड़ का बिज़नेस पाइपलाइन और ₹50 करोड़ का निवेश पूल स्टार्टअप्स के लिए।

उपलब्धियाँ और प्रभाव

  • भारतीय VFX और एनीमेशन स्टूडियो Avatar, Thor, Game of Thrones, RRR जैसे वैश्विक प्रोजेक्ट्स में शामिल।

  • गेमिंग इंडस्ट्री: BGMI, FAU-G।

  • कॉमिक्स और लोककथाएँ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर।

  • स्टार्टअप्स और नए IPs के माध्यम से स्वदेशी नवाचार बढ़ा।

अकादमिक–इंडस्ट्री इंटीग्रेशन

  • AVGC हब और IICT ने लंबे समय तक शिक्षा–उद्योग सहयोग को संभव बनाया।

  • WaveX Media-Tech स्टार्टअप एक्सेलेरेटर और T-Hub, हैदराबाद ने नवाचार हब स्थापित किया।

भारत की AVGC-XR सेक्टर के लिए रोडमैप

  1. एनिमेशन और VFX: Centres of Excellence और वित्तीय प्रोत्साहन।

  2. गेमिंग और eSports: संरचित इकोसिस्टम, स्टार्टअप्स और निवेश।

  3. XR और उभरती तकनीकें: शिक्षा, पर्यटन, रक्षा और स्वास्थ्य में अनुप्रयोग।

  4. कॉमिक्स और डिजिटल IPs: भारतीय कथाओं का डिजिटलीकरण और ट्रांसमीडिया फ्रेंचाइजी।

  5. रणनीतिक प्राथमिकताएँ: शिक्षा में AVGC-XR को एकीकृत करना, IP सुरक्षा, ग्लोबल मार्केट तक पहुँच।

इस पूरे ढांचे का उद्देश्य भारत को वैश्विक AVGC-XR पावरहाउस के रूप में स्थापित करना है, जो प्रतिभा, तकनीक और रचनात्मक उद्यमिता द्वारा संचालित हो।


उत्तराखंड AI इम्पैक्ट समिट 2025: भारत की वैश्विक AI नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करता एक महत्वपूर्ण मंच

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देहरादून-उत्तराखंड सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के इंडिया AI मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सहयोग से उत्तराखंड AI इम्पैक्ट समिट 2025 का आयोजन किया गया। यह समिट India – AI Impact Summit 2026 का आधिकारिक प्री-सम्मिट इवेंट है, जो 19-20 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है।

इस समिट का उद्घाटन जितिन प्रसाद, राज्यमंत्री (MeitY) ने किया। अन्य प्रमुख उपस्थितियों में शामिल थे:

  •  नितेश कुमार झा, सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी, उत्तराखंड सरकार

  • मोहम्मद वाई. सफिरुल्ला, निदेशक, इंडिया AI मिशन, MeitY

  • डॉ. दुर्गेश पंत, महानिदेशक, UCOST

  • प्रो. राम शर्मा, कुलपति, UPES, देहरादून

  •  संजय गुप्ता, SIO, NIC

  • शर्मिष्ठा दास, DDG & HOG, AI Division, NIC HQ

मुख्य अंश और उद्घाटन भाषण:

जितिन प्रसाद ने कहा, “जैसे परमाणु प्रौद्योगिकी पिछली सदी में महत्वपूर्ण थी, वैसे ही AI इस सदी में है। इस बार भारत सुनिश्चित कर रहा है कि यह अवसर सभी के लिए हो। हम विश्व-स्तरीय कंप्यूटिंग शक्ति को कम लागत में उपलब्ध करा रहे हैं, जिससे शोध, नवाचार और सामाजिक लाभ के लिए AI का उपयोग संभव हो। कुम्भ का प्रबंधन हो या शिक्षा और शासन में परिवर्तन, भारत दिखा रहा है कि जो कभी असंभव था, अब संभव है। यह है नया भारत—आत्मविश्वासी, सक्षम और तकनीक के उपयोग में अग्रणी।”

नितेश कुमार झा ने कहा, “हम नियमित रूप से AI का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार का बड़ा उद्देश्य सिर्फ AI का उपयोग नहीं, बल्कि AI का निर्माण करना है। हमने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और पहला Drone Applications Centre स्थापित किया है, जहां AI को ड्रोन प्रौद्योगिकी में एकीकृत किया जा रहा है। इसके लिए हमें इस वर्ष प्रधानमंत्री से राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।”

समिट की विशेषताएँ:

  • इस प्री-सम्मिट इवेंट में IIT Roorkee, IIM Kashipur, Tony Blair Institute for Global Change, UPES और STPI Dehradun जैसी प्रमुख संस्थाएँ शामिल हुईं।

  • AI-स्टार्टअप्स ने शासन, उद्यमिता और सामाजिक प्रभाव में AI के व्यावहारिक उपयोगों पर प्रस्तुतियाँ दीं।

  • पैनल चर्चा में स्मार्ट शिक्षा और नवाचार पर जोर, युवा प्रतिभाओं में रचनात्मकता और समस्या समाधान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर चर्चा हुई। पैनल का संचालन श्री विवेक अग्रवाल, कंट्री डायरेक्टर, Tony Blair Institute ने किया।

India – AI Impact Summit 2026 की रूपरेखा:

  • 19-20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाला यह वैश्विक मंच AI के सामाजिक समावेशन, नवाचार और सार्वजनिक सेवा में योगदान को प्रदर्शित करेगा।

  • यह समिट “AI for All” की भारत की दृष्टि को साकार करेगा और AI को समान, टिकाऊ और लोगों-केंद्रित बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

तीन सूत्र (Sutras):

  1. People: AI सभी के लिए हो, सांस्कृतिक पहचान और गरिमा का सम्मान करे।

  2. Planet: AI विकास संसाधन-कुशल और पर्यावरणीय संरक्षण के अनुकूल हो।

  3. Progress: AI के लाभ समान रूप से वितरित हों; शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और शासन में लागू हों।

सात चक्र (Chakras):

  1. मानव संसाधन—रोजगार, कौशल विकास और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए तैयार करना।

  2. सामाजिक सशक्तिकरण—भाषा, संस्कृति और पहचान के अनुसार AI को समावेशी बनाना।

  3. सुरक्षित और भरोसेमंद AI—पारदर्शिता, ऑडिट और सुरक्षा परीक्षण।

  4. नवाचार और दक्षता—स्थानीय वास्तविकताओं के अनुसार हल्का और अनुकूल AI।

  5. विज्ञान—जिम्मेदार AI का उपयोग शोध और खोज में बढ़ावा देना।

  6. AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण—डेटा, कंप्यूटिंग और मॉडल्स तक समान पहुँच।

  7. आर्थिक विकास और सामाजिक लाभ—सार्वजनिक हित वाले क्षेत्रों में AI अनुप्रयोगों को बढ़ावा।

समाप्ति:

उत्तराखंड AI इम्पैक्ट समिट 2025 ने भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को प्रदर्शित किया और 2026 के India – AI Impact Summit के लिए मंच तैयार किया। यह समिट वैश्विक दक्षिण देशों में AI के समान, टिकाऊ और सामाजिक रूप से लाभकारी उपयोग को प्रोत्साहित करने का संदेश देती है।

जल जीवन मिशन (JJM) की अगली दिशा: जिला प्रशासन की भूमिका और डिजिटल नवाचार

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जल जीवन मिशन ने एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है, जिससे 15.71 करोड़ (81.17%) ग्रामीण घरों को नल के पानी की सुविधा प्रदान की गई है। अब मिशन अपने अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसका मुख्य फोकस दीर्घकालिक स्थायित्व, कार्यक्षमता और सेवा वितरण पर है। इस संदर्भ में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। जिला कलेक्टर नीति और लोगों के बीच सेतु का काम करते हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि हर घर न केवल पानी प्राप्त करे बल्कि उसे नियमित और स्थायी रूप से प्राप्त करता रहे।

इसी को ध्यान में रखते हुए, पेयजल संवाद का पहला आयोजन आज पीएम जल शक्ति मंत्रालय, पीने के पानी और स्वच्छता विभाग (DDWS) द्वारा किया गया। यह एक राष्ट्रीय संवाद था, जिसका उद्देश्य जिला-आधारित शासन को सशक्त बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना, और जिलों के बीच अनुभव एवं सीख का आदान-प्रदान सुनिश्चित करना था।

यह आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित किया गया और इसका संचालन अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने किया। इसके साथ उपस्थित थे कमल किशोर सौन, अतिरिक्त सचिव और मिशन डायरेक्टर, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM), स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM, साथ ही देश भर के जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट, मिशन डायरेक्टर और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की मिशन टीमें।

जिला नेतृत्व और नवाचार

यह पहल ग्रामीण जल प्रबंधन में जिलाओं और स्थानीय संस्थाओं को सशक्त बनाने के लिए की जा रही सतत सुधार योजनाओं पर आधारित है। पिछले कुछ महीनों में, DDWS ने 729 जिला कलेक्टरों के साथ व्यक्तिगत और वर्चुअल संवाद किए हैं, JJM-IMIS जिला/ DWSM डैशबोर्ड और पंचायत डैशबोर्ड विकसित किए हैं, जो ई-ग्राम स्वराज से जुड़ा है। इसके अलावा, QCI के साथ मिलकर 80,000 से अधिक सरपंचों को सरपंच संवाद मोबाइल ऐप के माध्यम से जोड़ा गया, जिससे स्थानीय स्वामित्व और जवाबदेही बढ़ी।

नागरिकों के लिए WQMIS और सिटिजन कॉर्नर जैसे उपकरण और PM गति शक्ति के माध्यम से स्थानिक नक्शांकन ने एक पारदर्शी, डेटा-संचालित पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है, जहां जिला नेतृत्व नवाचार, सर्वोत्तम प्रथाओं और समुदाय-आधारित शासन मॉडल साझा कर सकता है।

मुख्य भाषण

अशोक के. के. मीणा, सचिव, DDWS ने अपने मुख्य भाषण में कहा कि जल जीवन मिशन, 81% ग्रामीण कवर के बाद, अब संस्थागत समेकन, जवाबदेही और स्थायित्व पर केंद्रित अगले चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि हर जिला अपनी स्थानीय वास्तविकताओं और नेतृत्व के अनुसार अद्वितीय समाधान, नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं के उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा, “हमें स्थानीय संस्थाओं को ग्रामीण जल सेवाओं की रीढ़ बनाना होगा, जहां निर्णय डेटा-आधारित हों, संचालन जवाबदेह हों, और समुदायों को बनाए गए संसाधनों को स्थायी रूप से संचालित करने का अधिकार हो।”

इसके बाद पूर्वी खासी हिल्स (मेघालय), गंजाम (ओडिशा), रत्नागिरी (महाराष्ट्र), चरैडियो (असम), धम्तारी (छत्तीसगढ़), उत्तर त्रिपुरा (त्रिपुरा) के जिला कलेक्टरों ने अपनी सफल पहलों पर प्रस्तुति दी। मुख्य पहलों में स्रोत संरक्षण, मजबूत निगरानी तंत्र, स्वयं सहायता समूहों द्वारा रखरखाव और शुल्क संग्रह, तकनीक-सक्षम शिकायत निवारण और समूह जल आपूर्ति मॉडल शामिल थे।

डिजिटल रूपांतरण: RPWSS आईडी मॉड्यूल

स्मृति स्वाती मीणा नाइक, संयुक्त सचिव, NJJM ने डिजिटल रूपांतरण के महत्व और RPWSS आईडी मॉड्यूल के माध्यम से ग्रामीण जल सेवाओं की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने की रूपरेखा पेश की।

RPWSS आईडी मॉड्यूल हर जल आपूर्ति योजना को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान देता है, जिससे वास्तविक समय में ट्रैकिंग, पूर्वानुमानित रखरखाव और पारदर्शी निगरानी संभव होती है। यह PM गति शक्ति से जुड़ा है और विकास कार्यक्रमों के समेकन और डेटा-संचालित निर्णयों का समर्थन करता है।

जिला प्रशासन के लिए इसका मतलब है सशक्त निगरानी, समन्वय और डेटा आधारित निर्णय, जबकि ग्राम पंचायतों के लिए यह दिन-प्रतिदिन रखरखाव, जल्दी क्षति पहचान और निवारक कार्रवाई में मदद करता है। नागरिकों के लिए, यह पारदर्शिता और तेज़ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करता है।

भविष्य की दिशा: स्थायी जल शासन

कमल किशोर सौन, AS&MD-NJJM ने कहा कि JJM अब केवल अवसंरचना निर्माण योजना नहीं बल्कि शासन सुधार, विकेंद्रीकरण और जनभागीदारी की एक आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद को एक नियमित राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित किया जाएगा।

उन्होंने मिशन का सार संक्षेप में बताया — “जल बचेगा, तो जल रहेगा और अगर जल रहेगा तो जल मिलेगा।”


निष्कर्ष

जल जीवन मिशन अब केवल हर घर जल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्त, डिजिटल और समुदाय-आधारित ग्रामीण जल शासन की नई दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत के हर गांव में जल स्थायित्व, गरिमा और साझा उत्तरदायित्व के साथ उपलब्ध हो।


रोबोटिक्स फॉर गुड यूथ चैलेंज इंडिया 2025 का समापन, युवा नवप्रवर्तकों की प्रतिभा का जश्न

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नई दिल्ली में यशोभूमि, इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में कल शाम को Robotics for Good Youth Challenge India 2025 का समापन हुआ। इस कार्यक्रम ने नवाचार, रचनात्मकता और युवा नेतृत्व वाली तकनीकी प्रगति का प्रेरक समापन किया।

यह राष्ट्रीय चैलेंज इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) की AI for Good Impact Initiative के तहत आयोजित किया गया, I-Hub Foundation for Cobotics (IHFC), IIT दिल्ली के सहयोग से और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन (DoT), भारत सरकार के समर्थन से संपन्न हुआ। इस प्रतियोगिता में युवा नवप्रवर्तकों ने खाद्य सुरक्षा और सतत विकास से जुड़ी रोबोटिक्स आधारित समस्याओं के समाधान प्रस्तुत किए।

पुरस्कार विजेताओं की घोषणा

प्रतियोगिता में जूनियर और सीनियर दो श्रेणियाँ थीं, जिनमें पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के साथ-साथ Most Innovative Robot का विशेष पुरस्कार भी दिया गया।

जूनियर श्रेणी:

  • विजेता: टीम हेयांश, Playto Labs, बेंगलुरु – भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड (जुलाई 2026) में ग्रैंड फिनाले में चयनित।

  • प्रथम रनर-अप: टीम रोबो नाइट्स जूनियर, DPS R.K. पुरम, नई दिल्ली

  • द्वितीय रनर-अप: टीम नैतिक, Playto Labs, बेंगलुरु

  • Most Innovative & Original Robot: टीम हेयांश, Playto Labs, बेंगलुरु



    सीनियर श्रेणी:

  • विजेता: टीम द एंबिशियस एवेंजर्स, सन्त अतुलानंद कॉन्वेंट स्कूल, कोइराजपुर, वाराणसी – लगातार दूसरे वर्ष विजेता, जिनेवा, जुलाई 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

  • प्रथम रनर-अप: टीम आरव, Playto Labs, बेंगलुरु

  • द्वितीय रनर-अप: टीम कोड, लोटस वैली इंटरनेशनल स्कूल, नोएडा एक्सप्रेसवे

  • Most Innovative & Creative Robot: टीम आरव, Playto Labs, बेंगलुरु

विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

पुरस्कार वितरण समारोह में प्रमुख अतिथियों के रूप में उपस्थित थे:

  • देब कुमार चक्रवर्ती, मेंबर (सर्विसेज), डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन, DoT

  •  पराग अग्रवाल, उप निदेशक (टेलिकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड), DoT

  • अशुतोष शर्मा, CEO, IHFC, IIT दिल्ली

  • प्रो. सुनील झा, प्रोफेसर, मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग, IIT दिल्ली

  • गुलेम मार्टिनेज रौरा, AI & Robotics Programme Officer, ITU

सभी अतिथियों ने विजेताओं को बधाई दी और प्रतिभागियों को नवाचार और सीखने की यात्रा जारी रखने की शुभकामनाएँ दी।

डिजिटल सुरक्षा जागरूकता सत्र

“Digital Safety for Youth” शीर्षक से Ms. दीक्षा धिमान, ADET (AI & DIU), DoT द्वारा एक विशेष प्रस्तुति दी गई। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षा, जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार और तकनीक का नैतिक उपयोग समझाना था। इस सत्र ने आठ राज्यों के प्रतिभागियों द्वारा सराहना प्राप्त की।

युवा प्रतिभा और वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ

इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में 55 टीमों के 271 प्रतिभागी शामिल हुए, जिन्होंने रचनात्मकता, टीम वर्क और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया। जूनियर विजेता टीम हेयांश और सीनियर विजेता टीम एंबिशियस एवेंजर्स अब भारत का प्रतिनिधित्व जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड (7–10 जुलाई 2026) में ग्रैंड फिनाले में करेंगे।

अतिथियों ने ITU, DoT और IHFC–IIT दिल्ली के बीच सहयोग की सराहना की और प्रतिभागियों को नवाचार में नैतिक जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और भारत मोबाइल कांग्रेस 2025 में भूमिका

  • Robotics for Good Youth Challenge ITU के AI for Good कार्यक्रम की प्रमुख पहल है, जिसका लक्ष्य युवाओं को रोबोटिक्स और AI के माध्यम से सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) तक पहुँचाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

  • India Mobile Congress (IMC) 2025, एशिया का सबसे बड़ा तकनीकी मंच, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशन और COAI द्वारा आयोजित, इस पहल को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व और नवाचार के संदर्भ में प्रस्तुत करता है।

प्रतियोगिता ने छात्रों को AI और रोबोटिक्स आधारित समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित किया, विशेषकर कृषि और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में। भारतीय टीमों ने नवाचार, कौशल और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया।



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