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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अमृत उद्यान विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 का उद्घाटन किया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 फरवरी 2026) राष्ट्रपति भवन स्थित अमृत उद्यान के विंटर एनुअल्स संस्करण 2026 के उद्घाटन समारोह की शोभा बढ़ाई।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 3 फरवरी से 31 मार्च 2026 तक खोला जाएगा। उद्यान सप्ताह में छह दिन (मंगलवार से रविवार) सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जिसमें अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे होगा। सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

विशेष श्रेणियों के लिए उद्यान खुलने की तिथियाँ:

  • 3 मार्च – रक्षा कर्मियों के लिए

  • 5 मार्च – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

  • 10 मार्च – महिलाओं एवं जनजातीय महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए

  • 13 मार्च – दिव्यांगजनों के लिए

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, जिसे
पर किया जा सकता है। इस वर्ष ऑन-द-स्पॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। आगंतुकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्लॉट पहले से ऑनलाइन बुक करें। किसी भी तिथि की बुकिंग पिछले दिन सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

प्रवेश एवं आवागमन व्यवस्था:

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति एस्टेट के गेट नंबर 35 से होगा।
आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा हर 30 मिनट में उपलब्ध रहेगी, जो सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगी। अंतिम शटल बस शाम 4:00 बजे रवाना होगी।

दर्शनीय मार्ग:

बल वाटिका – प्लूमेरिया गार्डन – बरगद उद्यान – बोन्साई गार्डन – बाब्लिंग ब्रुक – सेंट्रल लॉन – लॉन्ग गार्डन – सर्कुलर गार्डन।

इस वर्ष ट्यूलिप और विभिन्न प्रजातियों के गुलाबों के साथ-साथ आगंतुक बाब्लिंग ब्रुक (झरनों वाला जल प्रवाह) और रिफ्लेक्सोलॉजी पाथ से युक्त बरगद उद्यान का भी आनंद ले सकेंगे।

आगंतुक मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक चाबियाँ, पर्स/हैंडबैग, पानी की बोतलें तथा शिशुओं के लिए दूध की बोतल साथ ले जा सकते हैं। मार्ग में पेयजल, शौचालय एवं प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध रहेंगी।

अमृत उद्यान के अतिरिक्त, लोग राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन संग्रहालय का भी मंगलवार से रविवार तक भ्रमण कर सकते हैं। साथ ही प्रत्येक शनिवार को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में चेंज-ऑफ-गार्ड समारोह भी देखा जा सकता है। 



राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के लिए खुलेगा

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राष्ट्रपति भवन का अमृत उद्यान आम जनता के दर्शन हेतु 3 फरवरी से 31 मार्च, 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान लोग सप्ताह में छह दिन उद्यान का भ्रमण कर सकेंगे। उद्यान प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अंतिम प्रवेश शाम 5:15 बजे तक होगा।

सोमवार को रखरखाव के कारण तथा 4 मार्च को होली के अवसर पर उद्यान बंद रहेगा।

अमृत उद्यान में प्रवेश और बुकिंग पूर्णतः निःशुल्क है। आगंतुक पहले से ऑनलाइन बुकिंग https://visit.rashtrapatibhavan.gov.in/ पर कर सकते हैं। वहीं, वॉक-इन विज़िटर्स के लिए प्रवेश द्वार के पास सेल्फ-सर्विस विज़िटर रजिस्ट्रेशन कियोस्क की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

सभी आगंतुकों के लिए प्रवेश और निकास राष्ट्रपति भवन परिसर के गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू और राष्ट्रपति भवन के मिलन बिंदु के पास स्थित है।

आगंतुकों की सुविधा के लिए सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से गेट नंबर 35 तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। यह शटल सेवा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक हर 30 मिनट में चलेगी। शटल बसों की पहचान ‘Shuttle Service for Amrit Udyan’ के बैनर से की जा सकेगी।

अमृत उद्यान का यह आयोजन प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण होगा, जहां वे राष्ट्रपति भवन के सुंदर और सुसज्जित उद्यानों का आनंद ले सकेंगे।

राजधानी दिल्ली में साहित्यिक परिचर्चा, विनोद कुमार शुक्ल को किया याद

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साहित्यकारों से साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी संवाद

रायपुर में साहित्य उत्सव 2026 का आयोजन 23 से 25 जनवरी तक

नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली में आयोजित साहित्यिक परिचर्चा में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म और साहित्यिक अवदान को याद किया गया। इस अवसर पर  साहित्य उत्सवों की प्रासंगिकता पर भी गहन संवाद स्थापित किया गया।

रायपुर में 23- 25 जनवरी को आयोजित होने वाले साहित्य उत्सव 2026 के परिप्रेक्ष्य में राजधानी दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में साहित्यिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रायपुर साहित्य उत्सव की वैचारिक दिशा को विस्तार देने के साथ साथ साहित्य से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों पर सार्थक चर्चा की। 

कार्यक्रम में डॉ सच्चिदानंद जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि इतने बड़े साहित्यिक व्यक्तित्व से मिलने की अपेक्षा कुछ और थी, लेकिन जब वे उनसे मिले तो अत्यंत आश्चर्य हुआ कि वे कितने सरल और सहज हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी बातचीत आत्मीयता से भरी होती थी, जिसमें कहीं भी कोई अतिरेक नहीं होता। बिना लाग-लपेट के वे सीधे और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहते यही उनकी व्यक्तित्व और लेखन की सबसे बड़ी विशेषता थी।

छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने विनोद कुमार शुक्ल को याद करते हुए कहा कि युवा उनसे गहराई से आकर्षित रहते थे और उनके यहाँ हमेशा युवाओं की भीड़ लगी रहती थी। 

शर्मा ने कहा कि अपनी एक मुलाकात के दौरान उन्होंने उनसे पूछा कि आपने युवावस्था में अत्यंत गंभीर लेखन किया और अब बाल साहित्य की ओर क्यों आए। इस पर विनोद कुमार शुक्ल ने उत्तर दिया कि उन्हें लगता है वे बहुत गंभीर लेखन कर चुके हैं, लेकिन नई पीढ़ी के साथ शायद न्याय नहीं कर पाए। अब उन्हें लगता है कि नई पीढ़ी के साथ न्याय करने का अवसर उन्हें बाल साहित्य के माध्यम से मिला है।

साहित्यकार अलका जोशी ने विनोद कुमार शुक्ल के रचना-कर्म पर बात करते हुए कहा कि उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि वे मामूली और साधारण स्थितियों में भी सौंदर्य खोज लेते थे।

उन्होंने कहा कि नौकर की कमीज में विनोद कुमार शुक्ल ने अत्यंत सहजता के साथ सत्ता के प्रति रोष को व्यक्त किया है, बिना किसी आडंबर के। उनकी रचनाओं में वह अदृश्य व्यक्ति दिखाई देता है, जो अपने गुम हो जाने से बचने की कोशिश करता है।

अलका जोशी ने कहा कि चाहे नौकर की कमीज हो या एक दीवार में खिड़की रहती है, उनकी रचनाओं में ऐसे दृश्य आते हैं जहाँ पात्र अपनी सीमित परिस्थितियों के भीतर भी हाथी पर सवारी करने जैसा सपना देखता है। उनकी लेखन-खूबसूरती यह थी कि रचनाओं में दृश्य और परिस्थितियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि पाठक धीरे-धीरे उनसे जुड़ता चला जाता था। पाठक की यह इन्वॉल्वमेंट ही उनकी रचनात्मक सफलता का मूल आधार रही।

इसके पहले के सत्र में साहित्य उत्सवों में कितना साहित्य विषय पर अपनी बात रखते हुए लेखक अनंत विजय ने कहा कि साहित्य में गहराई अनिवार्य है। गहराई होगी तभी साहित्य को उसके पाठक मिलेंगे और वही साहित्य समय के साथ अपनी स्थायी छाप छोड़ पाएगा।

उन्होंने साहित्य उत्सवों की संरचना पर जोर देते हुए कहा कि सत्रों की संरचना में ठोस कंटेंट होना चाहिए, तभी श्रोता और पाठक उनसे जुड़ पाएंगे।

अनंत विजय ने यह भी स्पष्ट किया कि रायपुर साहित्य उत्सव पूरी तरह व्यावसायिकता से दूर रहेगा। यदि किसी सत्र में फिल्म जगत से कोई व्यक्ति आमंत्रित किया जाता है, तो उसके साथ मंच पर एक साहित्यकार की उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि साहित्य केंद्र में बना रहे।

उन्होंने कहा कि सेल्फी संस्कृति साहित्य की दुश्मन है। कई बार साहित्य उत्सवों में फिल्मी हस्तियों को केवल इसलिए बुलाया जाता है ताकि लोग उनके साथ सेल्फी लेने आएं, जबकि इससे साहित्य का मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है।

वहीं, साहित्यकार अनिल जोशी ने भी इस विषय पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी एक बार फिर किताबों और साहित्य से जुड़ रही है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि साहित्य उत्सवों की उपयोगिता अत्यधिक हो सकती है, बशर्ते उनके उद्देश्य स्पष्ट हों।

अनिल जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी साहित्य सम्मेलन की शुरुआत से पहले उसकी प्रासंगिकता पर गंभीर विचार किया जाना चाहिए। साथ ही आयोजन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि साहित्य केंद्र में रहे और आवश्यक सावधानियों व मूल्यों का पालन हो, ताकि ऐसे उत्सव वास्तव में साहित्य-संवाद को समृद्ध कर सकें।

विनोद कुमार शुक्ल पर बोलते हुए अनिल जोशी ने कहा उनकी लेखनी एब्स्ट्रैक्ट पेंटिंग की तरह है, जिसे समझने के लिए पाठक को ठहरकर देखना और महसूस करना पड़ता है।

कार्यक्रम में नई शैली के लेखन पर टिप्पणी करते हुए पूर्व संपादक एवं लेखक प्रताप सोमवंशी ने कहा कि समय के साथ लेखन के स्वरूप में बदलाव आया है और आज नई शैली में साहित्य रचा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही पारंपरिक शैली में लेखन भी निरंतर हो रहा है, जिसे पाठक आज भी पसंद कर रहे हैं और वह समान रूप से पढ़ा जा रहा है।

इस अवसर पर रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य एवं मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा, रायपुर साहित्य उत्सव समिति के सदस्य संजीव सिन्हा सहित देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकार और विचारक शामिल हुए।

उपराष्ट्रपति ने मनोरमा न्यूज़ न्यूज़मेकर अवॉर्ड 2024 प्रदान किया, मंत्री सुरेश गोपी को मिला सम्मान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित मनोरमा न्यूज़ न्यूज़मेकर अवॉर्ड 2024 समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पर्यटन तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री और प्रख्यात फिल्म अभिनेता सुरेश गोपी को प्रदान किया।

अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने सिनेमा और राजनीति के विशिष्ट चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरेश गोपी ने दोनों क्षेत्रों में असाधारण सफलता अर्जित की है। उन्होंने फातिमा माता कॉलेज, कोल्लम की अपनी हालिया यात्रा को भी याद किया — जो कि सुरेश गोपी, कॉलेज के पूर्व छात्र, के निमंत्रण पर हुई थी। उन्होंने कहा कि यह gesture मंत्री के अपने मूल से गहरे संबंध को दर्शाता है।

उन्होंने राष्ट्र में सकारात्मक विकासों को उजागर करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, ताकि युवा पीढ़ी प्रेरित हो सके। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पत्रकारिता की जिम्मेदारी है कि वह वंचितों और कमजोरों की आवाज बने। उन्होंने नशा-मुक्त समाज बनाने में मीडिया की अहम भूमिका को रेखांकित किया, यह बताते हुए कि जन-जागरूकता और जिम्मेदार जन-चर्चा को बढ़ावा देने में मीडिया अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक्स के इस युग में सच्चाई और फेक न्यूज़ में अंतर करना बेहद कठिन होता जा रहा है, ऐसे में प्रेस और मीडिया को लोकतंत्र में अत्यंत जिम्मेदार भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने तमिल कवि तिरुवल्लुवर के अमर वचनों को उद्धृत किया: “यदि कोई व्यक्ति शुद्ध हृदय से सत्य बोलता है, तो वह उन लोगों से भी बढ़कर है जो जीवनभर तपस्या करते हैं या अरबों दान में देते हैं।” उन्होंने प्रेस से आग्रह किया कि वे तिरुवल्लुवर की इन अनंत ज्ञान की बातों का पालन करें।

मनोरमा समूह की गौरवशाली विरासत का उल्लेख करते हुए, सी. पी. राधाकृष्णन ने भाषा, सत्य, संस्कृति और मलयालम साहित्य एवं मीडिया में इसके अमूल्य योगदान के प्रति इसके समर्पण की सराहना की। उन्होंने मनोरमा न्यूज़ की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वर्षों से केरल की प्रमुख जनमत-निर्माता और एक विश्वसनीय आवाज़ रही है, जो जनता की नब्ज़ को प्रतिबिंबित करती है।


भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला: 14 नवंबर से दिल्ली में बिखरेगी छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा

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  • छत्तीसगढ़ में पर्यटन-संस्कृति के साथ उद्योगों-कृषि आधारित उद्योगों की संभावनाओं का होगा प्रदर्शन
  • वनोपज उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ मिलेट कैफे भी लगेगा

रायपुर-नईदिल्ली के भारत मण्डपम में 14 नवंबर से छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास की छटा बिखरेगी। यहां 27 नवंबर तक भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस मेले में एक भारत-श्रेष्ठ भारत की थीम पर छत्तीसगढ़ का आकर्षक पवेलियन बनाया जा रहा है। इस मेले में देश के सभी राज्यों सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर के उद्योगपति और निवेशक भी आयेंगे। मेले में बने छत्तीसगढ़ पवेलियन में राज्य के औद्योगिक विकास की झलक दिखाई जायेगी। यहां छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था, उद्योगों के लिए व्यापक अनुकूल माहौल और व्यवस्थाऐं तथा नई औद्योगिक नीति के बारे में आगंतुकों को पूरी जानकरी दी जायेगी। इस मेले में राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में उपलब्ध निवेश प्रोत्साहन, सुक्ष्म लघु एवं मध्यम ईकाईयों की स्थापना, उनके उत्पादों से संबंधित जानकारियों का भी प्रदर्शन किया जायेगा। मेला अवधि में छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए निवेशेकों के साथ बैठकें, इन्वेस्टर कनेक्ट आदि भी किये जायेंगे।  


इस अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और पर्यटन की संभावना का भी प्रदर्शन किया जायेगा, ताकि संस्कृति और पर्यटन पर आधारित रोजगार मूलक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। मेले में बने पवेलियन में छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प, वनोपज उत्पादों, खादी ग्रामोद्योग क्षेत्र में उद्योग शुरू करने की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। पवेलियन में बस्तर क्षेत्र को फोकस करते हुए डिजिटल तकनीकों से सुसज्जित प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। 

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले के दौरान 24 नवंबर को भारत मण्डपम दिल्ली में छत्तीसगढ़ दिवस भी मनाया जायेगा। शाम 6 बजे शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में राज्यपाल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रीमण्डल के सदस्य भी शामिल होंगे। यह आयोजन संस्कृति विभाग द्वारा किया जायेगा। छत्तीसगढ़ पवेलियन में हर दिन राज्य की सांस्कृतिक छटा का प्रदर्शन नृतक दलों के माध्यम से किया जायेगा।  यहां छत्तीसगढ़ के ग्रामोद्योग हस्तकला, हथकरघा, चरखा आदि का जीवंत प्रदर्शन, उत्कृष्ट उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की भी व्यवस्था रहेगी।

छत्तीसगढ़ पवेलियन में मिलेट से संबंधी उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ मिलेट कैफे भी लगाया जायेगा। इससे लोगों को छत्तीसगढ़ में उगाये जाने वाले लघु धान्यों कोदो, कुटकी, रागी, संवा आदि के उत्पादन, उनके व्यवसाय के लिये आकर्षित किया जा सकेगा। इस मेले में छत्तीसगढ़ में उपलब्ध जैविक और एक्जॉटिक खाद्यन्नों का भी प्रदर्शन होगा, ताकि इन उत्पादकों राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिल सके। लघु वनोपज संघ के द्वारा अपने वनोपजों से बने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री भी कि जायेगी। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एफएमसीजी कंपनियों के माध्यम से इन उत्पादों की मार्केटिंग करने की व्यवस्था का प्रयास किया जायेगा। पवेलियन में छत्तीसगढ़ के आकर्षक पर्यटन स्थलों, उपलब्ध अधोसंरचना और ईको-टूरिज्म के बारे में भी जानकारी दी जायेगी। ताकि अधिक से अधिक लोग छत्तीसगढ़ के बारे में जान सके।

साहित्य अकादमी का बाल साहित्य पुरस्कार 2025 समारोह 14 नवंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा

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साहित्य अकादमी द्वारा बाल साहित्य की श्रेणी में दिए जाने वाले वार्षिक “बाल साहित्य पुरस्कार 2025” का आयोजन शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को त्रिवेणी सभागार, तानसेन मार्ग, नई दिल्ली में किया जाएगा। यह पुरस्कार साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक द्वारा प्रदान किए जाएंगे।

इस अवसर पर प्रख्यात गुजराती लेखिका डॉ. वर्षा दास मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी, जबकि साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करेंगी। स्वागत भाषण साहित्य अकादमी की सचिव पल्लवी प्रशांत होलकर द्वारा दिया जाएगा।

पुरस्कार प्राप्त कृतियाँ एवं लेखक निम्नलिखित हैं —

  • असमिया: मैन्हांतार पद्या (कविता) – सुरेंद्र मोहन दास

  • बंगाली: एक्होनो गाये कांता दाये (कहानी) – त्रिदिब कुमार चट्टोपाध्याय

  • बोडो: खांथी बोसोन आरो आखु दानाई (कहानी) – बिनय कुमार ब्रह्मा

  • डोगरी: नन्ही तोर (कविता) – पी.एल. परिहार ‘शौक’

  • अंग्रेजी: Dakshin: South Indian Myths and Fables Retold (कहानी) – नितिन कुशलप्पा एम.पी.

  • गुजराती: टिंचक (कविता) – कीर्तिदा ब्रह्मभट्ट

  • हिंदी: एक बाते बारह (गैर-कथात्मक एवं संस्मरण) – सुशील शुक्ल

  • कन्नड़: Notebook (कहानी) – के. शिवलिंगप्पा हंडीहल

  • कश्मीरी: शुरे ते छुुरे ग्युष (कहानी) – इजहार मुबाशिर

  • कोंकणी: बेलाबाइचो शंकर आनी हेर कण्यो (कहानी) – नयना आदरकर

  • मैथिली: चुक्का (कहानी) – मुन्नी कांत

  • मलयालम: पेंग्विनुकालुड़े वंकाराविल (उपन्यास) – श्रीजित मूथेदथ

  • मणिपुरी: अंगंगशिंग-गी शननाबुंगशिदा (नाटक) – शांतों एम.

  • मराठी: अभैमाया (कविता) – सुरेश गोविंदराव सावंत

  • नेपाली: शांति वन (उपन्यास) – संगमु लेपचा

  • ओड़िया: केत फुला फूटिची (कविता) – राजकिशोर पार्ही

  • पंजाबी: जद्दू पत्ता (उपन्यास) – पाली खादिम (अमृत पाल सिंह)

  • राजस्थानी: पंखेरू नी पीड़ा (नाटक) – भोगीलाल पाटीदार

  • संस्कृत: बालविश्वम् (कविता) – प्रीति आर. पुजारा

  • संथाली: सोना मिरू-आग संदेश (कविता) – हरलाल मुर्मू

  • सिंधी: आस्मानी परी (कविता) – हीना अगनानी ‘हीर’

  • तमिल: ओत्त्रै सिरागु ओविया (उपन्यास) – विष्णुपुरम सरवनन

  • तेलुगु: कबुर्ला देवथा (कहानी) – गंगिसेट्टी शिवकुमार

  • उर्दू: कौमी सितारे (लेख) – ग़ज़नफ़र इक़बाल

प्रत्येक विजेता को ₹50,000 की राशि और कांस्य प्रतिमा प्रदान की जाएगी।

अगले दिन, यानी 15 नवंबर 2025, साहित्य अकादमी भवन (रवींद्र भवन, फिरोजशाह रोड, नई दिल्ली) में “पुरस्कार विजेता परिचर्चा” आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा करेंगी। इस कार्यक्रम में सभी पुरस्कार विजेता लेखक अपने रचनात्मक अनुभव साझा करेंगे।


दिल्ली में 'UDGAAR 2025' कार्यक्रम के लिए यातायात प्रतिबंध लागू

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दिल्ली में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम के आसपास आयोजित होने वाले 'UDGAAR 2025' कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने यातायात को नियंत्रित करने के लिए विशेष कदम उठाए हैं।

शहर यातायात पुलिस ने जानकारी दी कि सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक प्रमुख सड़कों पर यातायात डायवर्जन और पार्किंग प्रतिबंध लागू किए गए हैं। इस दौरान जनता से अनुरोध किया गया है कि वे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और क्षेत्र में आने-जाने से बचें, ताकि कार्यक्रम सुचारू रूप से संपन्न हो सके।

पुलिस अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि नियमों का पालन न करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है

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