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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर) में अत्याधुनिक लिनियर एक्सेलेरेटर का शुभारंभ

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Army Hospital (Research & Referral) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 25 मई 2026 को एक अत्याधुनिक रिंग गैन्ट्री-आधारित लिनियर एक्सेलेरेटर (Linear Accelerator) का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।

यह उन्नत तकनीक Army Hospital (R&R) में कैंसर उपचार सेवाओं को और मजबूत करेगी तथा सेवारत सैन्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को आधुनिक रेडियोथेरेपी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी। इससे अस्पताल में बढ़ते मरीजों के उपचार की क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

यह लिनियर एक्सेलेरेटर आधुनिक रेडियोथेरेपी तकनीकों जैसे —

  • वॉल्यूमेट्रिक मॉड्यूलेटेड आर्क थेरेपी (VMAT)

  • इंटेंसिटी-मॉड्यूलेटेड रेडिएशन थेरेपी (IMRT)

  • इमेज-गाइडेड रेडिएशन थेरेपी (IGRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडिएशन थेरेपी (SBRT)

  • स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS)

को संचालित करने में सक्षम है।

यह तकनीक ट्यूमर वाले हिस्सों पर अत्यंत सटीक तरीके से रेडिएशन पहुंचाती है, जबकि आसपास के सामान्य ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है। इससे उपचार के परिणाम बेहतर होने और मरीजों की देखभाल की गुणवत्ता बढ़ने में मदद मिलेगी।

सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (AFMS) के अंतर्गत इस नए लिनियर एक्सेलेरेटर की खरीद, पहले इस्तेमाल किए जा रहे उपकरण की तुलना में एक बड़ा तकनीकी उन्नयन है, जिसे अब सेवा से हटा दिया गया है। यह कदम AFMS के ऑन्कोलॉजी सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AFMS के अन्य कैंसर उपचार केंद्रों को भी चरणबद्ध तरीके से उन्नत किया जा रहा है।

इस अवसर पर DG AFMS Arti Sarin, Armed Forces Medical Services के वरिष्ठ अधिकारी तथा अविनाश दास सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए DGR की योजनाएँ और लाभ

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वित्त वर्ष 2024–25 के लिए संकलित आंकड़ों के अनुसार, कुल 28,31,109 पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen, ESM) हैं। निदेशालय सामान्य पुनर्वास (DGR) पूर्व सैनिकों के लिए विभिन्न पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना संचालित करता है, जिनका विवरण निम्नलिखित है।

DGR द्वारा संचालित योजनाएँ

  1. DGR प्रायोजित सुरक्षा एजेंसी योजना:

    DGR, पूर्व सैनिकों द्वारा संचालित निजी सुरक्षा एजेंसियों और राज्य ESM कॉर्पोरेशनों को सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (CPSEs) और निजी क्षेत्र की कंपनियों/उद्योगों को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के लिए प्रायोजित करता है।

  2. DGR तकनीकी सेवा योजना:

    DGR, पूर्व सैनिकों को तकनीकी सेवाओं के लिए सरकारी प्रतिष्ठानों/कंप्लेक्स में नियुक्त करता है।

  3. ESM कोयला लोडिंग और परिवहन योजना (केवल अधिकारियों के लिए):

    यह योजना कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और DGR के बीच MoU के आधार पर संचालित होती है। वर्तमान में यह योजना CIL द्वारा 2013 के MoU से एकतरफा वापसी के कारण सुबज्यूडी है।

  4. कोयला टिपर अटैचमेंट योजना (JCOs/OR के लिए):

    यह योजना ESM कोयला लोडिंग और परिवहन योजना से जुड़ी है।

  5. विधवाओं और विकलांग सैनिकों के लिए टिपर अटैचमेंट योजना:

    65 वर्ष तक की विधवाओं और 50% या अधिक विकलांगता वाले सैनिकों के लिए यह योजना उपलब्ध है।

  6. LPG/रिटेल आउटलेट (पेट्रोल/डीज़ल) वितरण के लिए DGR पात्रता प्रमाण पत्र जारी करना:

    ESM, युद्ध विधवाएँ, युद्ध में मृत या घायल सैनिकों के आश्रित, और शांति में युद्ध से संबंधित कारणों से विकलांग पूर्व सैनिक पात्र हैं।

  7. COCO रिटेल आउटलेट प्रबंधन:

    इच्छुक ESM (अधिकारी और JCOs) को COCO आउटलेट के लिए प्रायोजित किया जाता है, यदि उन्होंने किसी अन्य सरकारी/ DGR लाभ का उपयोग नहीं किया है।

  8. CNG स्टेशन प्रबंधन (NCR/पुणे में):

    इच्छुक ESM को IGL (नई दिल्ली एवं NCR) और MNGL (पुणे/नासिक) की आवश्यकता पर नामांकित किया जाता है।

  9. मदर डेयरी मिल्क बूथ और फलों एवं सब्ज़ियों (SAFAL) की दुकानें (NCR में):

    ESM को 60 वर्ष तक Milk/SAFAL बूथ चलाने के लिए नामांकित किया जाता है। वे इन आउटलेट्स के संचालन से अपने जीवनयापन और उद्यमिता कौशल को बढ़ाते हैं।

  10. प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि योजना (PMBJP) में पूर्व सैनिकों का समावेशन:

    PMBJP के तहत देशभर में जेनेरिक मेडिसिन फार्मेसियाँ स्थापित की जाती हैं। यह योजना जून 2023 में DGR द्वारा लॉन्च की गई।

  11. पुनर्वास प्रशिक्षण/कौशल विकास कोर्स:

    DGR का प्रशिक्षण निदेशालय भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त/सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के लिए प्रशिक्षण/कौशल विकास कोर्स आयोजित करता है।

    • अधिकारी: 60% कोर्स फीस MoD/DGR द्वारा और 40% व्यक्तिगत अधिकारी द्वारा। विधवाएँ भी पात्र हैं।

    • JCOs/OR & समकक्ष: 100% कोर्स फीस MoD/DGR द्वारा। विधवाएँ भी पात्र हैं।

लाभार्थी विवरण

  • कुल 67,316 पूर्व सैनिक DGR की रोजगार/स्वरोजगार योजनाओं से लाभान्वित हुए।

  • FY 2024–25 में कुल 11,589 सेवानिवृत्त और रिटायर्ड अधिकारी/JCOs/OR को DGR की कौशल विकास योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

स्वास्थ्य सुविधाएँ (ECHS)

  • पूर्व सैनिक अनुदानित स्वास्थ्य योजना (ECHS) ने 2024–25 में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान की।

  • 427 पॉलिक्लिनिक भारत भर में और नेपाल में 6 पॉलिक्लिनिक के माध्यम से सेवा दी गई।

  • ECHS के तहत स्वास्थ्य सुविधाएँ उन पाँच जिलों में भी बढ़ाई गई, जहां पॉलिक्लिनिक नहीं थे।

  • सरकार ने 21 नई ECHS पॉलिक्लिनिक भारतभर में स्वीकृत कीं; जिनमें से पाँच नए जिलों के लिए हैं।


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