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केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता: ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

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केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे सरकार की ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने, किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। बजट के प्रावधानों का मुख्य फोकस उत्पादकता बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य सुधारने और पूरे पशुधन मूल्य श्रृंखला में आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने पर है।

उत्पादकता और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

बजट में नस्ल सुधार कार्यक्रमों, पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और रोग रोकथाम पहलों के लिए अतिरिक्त समर्थन का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों की अमूल्य पशुधन संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

डेयरी क्षेत्र को मज़बूती

डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, डेयरी सहकारी संस्थाओं और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (LFPOs) को विशेष सहयोग देने की बात कही गई है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

“आत्मनिर्भर भारत” के विज़न के अनुरूप बजट में पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, तकनीक के उपयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। चारा विकास, फीड सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु पशुपालन प्रथाओं पर केंद्रित पहलें इस क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगी।

रोजगार और पोषण सुरक्षा

बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी पर बढ़ा हुआ फोकस रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। विभाग ने राज्यों और सभी हितधारकों के साथ मिलकर इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प दोहराया है।

बजट की प्रमुख घोषणाएँ

1. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

पशुधन क्षेत्र कृषि आय में लगभग 16% योगदान देता है, जिसमें गरीब और सीमांत परिवारों की आय भी शामिल है। पशु चिकित्सकों की संख्या 20,000 से अधिक करने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा व पैरा-वेटरनरी कॉलेज, पशु अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

2. पशुपालन उद्यमिता के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी

बजट 2026-27 में पशुपालन उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना प्रस्तावित है। इससे पशुपालक, डेयरी और पोल्ट्री उद्यम आधुनिक उपकरण अपनाकर उत्पादकता बढ़ा सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत मूल्य श्रृंखलाएँ विकसित होंगी।

3. 20,000 पशु चिकित्सकों का प्रशिक्षण

देशभर में पशु चिकित्सा सेवाओं को मज़बूत करने के लिए 20,000 पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है, जिससे डायग्नोस्टिक्स और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।

4. ग्रामीण और संबद्ध कृषि पर व्यापक फोकस

  • पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार

  • AI आधारित कृषि उपकरण, जैसे “भारत विस्तार” प्लेटफॉर्म, जिससे डेयरी और पशुपालकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी

  • डेयरी और पशुपालन किसानों के लिए ऋण और उद्यमिता समर्थन, ताकि ग्रामीण आय में विविधता लाई जा सके

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम साबित होगा।

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा

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मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (NGRA) 2025 के विजेताओं की घोषणा कर दी है। यह पुरस्कार देश के पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।

पुरस्कार वितरण समारोह 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह इन पुरस्कारों को प्रदान करेंगे। राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल एवं जॉर्ज कुरियन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

इस वर्ष कुल 2,081 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से विजेताओं का चयन विभिन्न श्रेणियों में किया गया।

विभागवार विजेताओं की सूची

1. स्वदेशी नस्लों की गाय/भैंस पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st: अरविंद यशवंत पाटील, कोल्हापुर, महाराष्ट्र

  • 2nd: डॉ. कंकनाला कृष्णा रेड्डी, हैदराबाद, तेलंगाना

  • 3rd: हर्षित झूरिया, सीकर, राजस्थान

  • 3rd: कुमारी श्रद्धा सत्यवान धवन, अहमदनगर, महाराष्ट्र

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  • विजय लता, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

  • प्रदीप पांगड़िया, चंपावत, उत्तराखंड

2. सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी/डेयरी FPO

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st: मीनन गाड़ी क्षीरोल्पादक सहकारना संगम लिमिटेड, वायनाड, केरल

  • 2nd: कुनमकट्टुपथी क्षीरोल्पादक सहकारना संघम, पलक्कड़, केरल

  • 2nd: घिनोई दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति, जयपुर, राजस्थान

  • 3rd: TYSPL 37 सेंढुरई मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, अरियालूर, तमिलनाडु

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  • कुल्हा दूध उत्पादक सहकारी समिति, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड

3. सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (AIT)

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st:दिलीप कुमार प्रधान, अनुगुल, ओडिशा

  • 2nd:विकास कुमार, हनुमानगढ़, राजस्थान

  • 3rd: अनुराधा चकाली, नांदयाल, आंध्र प्रदेश

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  •  दिलुवार हसन, बारपेटा, असम

पुरस्कार राशि

(AIT कैटेगरी को छोड़कर):

  • 1st पुरस्कार: ₹5,00,000

  • 2nd पुरस्कार: ₹3,00,000

  • 3rd पुरस्कार: ₹2,00,000

  • NER/हिमालयी विशेष पुरस्कार: ₹2,00,000

AIT श्रेणी में पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र व मोमेंटो दिया जाएगा, कोई नकद पुरस्कार नहीं।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार वर्ष 2021 से प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं। यह पुरस्कार राष्ट्र्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत प्रदान किए जाते हैं, जिसे दिसंबर 2014 में स्वदेशी गोवंश नस्लों के वैज्ञानिक संरक्षण और विकास के लिए शुरू किया गया था।


प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र को दी बड़ी बढ़त, ₹947 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और ₹219 करोड़ के नए प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी

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नई दिल्ली में 11 अक्टूबर, 2025 को भारत के पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ₹947 करोड़ के परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और ₹219 करोड़ के अतिरिक्त प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई। ये पहल कृषि और सहायक क्षेत्र में बड़े निवेश पैकेज का हिस्सा हैं और इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया।

साथ ही दो बड़े कृषि योजनाओं — प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और पल्सेस में आत्मनिर्भरता मिशन — का शुभारंभ भी किया गया, जो ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने और भारत को कृषि-सहायक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पशुपालन, मत्स्य पालन और सहायक गतिविधियाँ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा,

"PM Dhan-Dhanya Krishi Yojana हमारे पशुपालन पर भी केंद्रित है। 125 करोड़ से अधिक टीके मुफ्त दिए जा चुके हैं, जिनसे जानवरों को रोगों जैसे फ़ुट एंड माउथ डिज़ीज़ से बचाया गया है। इससे जानवर स्वस्थ हुए हैं और किसानों की चिंताएँ भी कम हुई हैं। इस योजना के तहत पशु स्वास्थ्य से जुड़ी अभियानों का स्थानीय स्तर पर आयोजन किया जाएगा।"

प्रधानमंत्री ने ग्रामीण समृद्धि के लिए विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा,

"जहाँ खेती संभव नहीं है, वहां पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के अलावा विकल्प दिए जा रहे हैं। इसलिए पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे छोटे किसानों और भूमि रहित परिवारों को भी सशक्त बनाया जा रहा है।"

उल्लेखनीय परियोजनाएँ और निवेश

  • राष्ट्रीय गोपाल मिशन (RGM) के तहत गुवाहाटी, असम में पहला IVF लैब: ₹28.93 करोड़ की निवेश राशि के साथ, यह अत्याधुनिक सुविधा पूर्वोत्तर राज्यों में दुग्ध विकास और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी।

  • राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत प्रमुख डेयरी परियोजनाएँ:

    • मेहसाणा मिल्क यूनियन: 120 MT/दिन मिल्क पाउडर प्लांट और 3.5 लाख लीटर/दिन UHT प्लांट, ₹460 करोड़

    • इंदौर मिल्क यूनियन: 30 MT/दिन मिल्क पाउडर प्लांट, ₹76.50 करोड़

    • भिलवाड़ा मिल्क यूनियन: 25,000 लीटर/दिन UHT प्लांट, ₹46.82 करोड़

    • नुसुलापुर, करीमनगर, तेलंगाना: ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट, ₹25.45 करोड़

    • आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कप्पम मंडल में एक इंटीग्रेटेड डेयरी प्लांट और 200 TPD कैटल फीड प्लांट की आधारशिला, ₹219 करोड़

  • Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF) के तहत 10 परियोजनाएँ: ₹303.81 करोड़ में विभिन्न राज्यों में इन्वेस्टमेंट, जिससे फीड, दूध और पशु उत्पाद प्रसंस्करण क्षमता मजबूत होगी।

  • MAITRI (Multipurpose Artificial Insemination Technicians in Rural India) प्रशिक्षण: उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से 2,000 प्रशिक्षित MAITRIs को प्रमाणपत्र दिए गए। भारत में अब कुल 38,000+ MAITRIs शामिल किए गए हैं, जो कृत्रिम प्रजनन कवरेज और पशुपालन नस्ल सुधार में मील का पत्थर हैं।

ये पहलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार कृषि-सहायक क्षेत्रों के एकीकृत और सतत विकास के माध्यम से किसानों के लिए अवसर बढ़ाने, आर्थिक सुरक्षा और पोषण संबंधी कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन (Mission for Aatmanirbharta in Pulses) का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मछली पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि यह पहलें अभिसरण, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से देश के कृषि प्रधान जिलों में परिवर्तन लाएंगी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पशुपालन क्षेत्र में ₹947 करोड़ की 16 प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन किया तथा ₹219 करोड़ की एक परियोजना की आधारशिला रखी। इसके साथ ही मत्स्य क्षेत्र में ₹572 करोड़ की 7 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी और ₹121 करोड़ की 9 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

ललन सिंह ने कहा कि 2019 में मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की स्थापना के बाद इन क्षेत्रों को समर्पित नीति समर्थन मिला जिससे विकास में तीव्र गति आई। आज ये क्षेत्र 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का स्रोत हैं, जिनमें 70% से अधिक महिलाएं डेयरी क्षेत्र से जुड़ी हैं, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि का सच्चा प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) जैसी योजनाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक ढांचे — जैसे फिशिंग हार्बर, हैचरी, फीड मिल, और कोल्ड चेन — के निर्माण को बढ़ावा मिला है। भारत अब मछली उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है, जिसमें 2013–14 के 96 लाख टन से बढ़कर 2024–25 में 195 लाख टन तक की 104% वृद्धि हुई है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर ₹693 करोड़ से अधिक की 16 प्रमुख मत्स्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है जो उत्पादन, निर्यात और रोजगार को और बढ़ावा देंगी।

डेयरी और पशुपालन क्षेत्रों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए ललन  सिंह ने कहा कि दूध उत्पादन में 63% की वृद्धि (2014–15 में 146 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 239 मिलियन टन) हुई है, और भारत दुनिया में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। पशुधन की उत्पादकता में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो विश्व में सबसे तेज दर है।

उन्होंने कहा कि देशभर में 125 करोड़ से अधिक टीके मुफ्त लगाए गए हैं — जैसे मुंह-खुर रोग (FMD), ब्रुसेलोसिस, PPR आदि के खिलाफ। 9 राज्य अब FMD-मुक्त दर्जे की ओर तेजी से अग्रसर हैं, जिससे भारत के दूध निर्यात को और मजबूती मिलेगी।

ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को साकार करती है जिसके तहत किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, और मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करना शामिल है।

अंत में, उन्होंने “ग्रामीण समृद्धि से राष्ट्रीय समृद्धि” के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि तकनीकी आधारित विकास, बेहतर आजीविका, और सभी के लिए पोषण सुरक्षा इस दिशा में प्रमुख लक्ष्य होंगे।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रोहतक (हरियाणा) में साबर डेयरी प्लांट का किया उद्घाटन

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रोहतक- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज रोहतक (हरियाणा) में साबर डेयरी प्लांट का उद्घाटन किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय राज्य मंत्री (सहकारिता)कृष्णपाल गुर्जर, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों की दशकों पुरानी मांग पूरी करते हुए अलग सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की है, जिसके लिए पूरा देश उनका आभारी है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर सहकारी संस्थाओं की नींव को मजबूत करने का काम किया है। शाह ने विश्वास जताया कि साल 2029 तक देश की हर पंचायत में एक सहकारी समिति होगी।

अमित शाह ने कहा कि लगभग ₹350 करोड़ की लागत से तैयार हुआ यह देश का सबसे बड़ा दही, छाछ और योगर्ट उत्पादन प्लांट है, जो दुग्ध उत्पादकों के कल्याण के लिए समर्पित है। उन्होंने बताया कि हरियाणा से ही दिल्ली-एनसीआर की डेयरी उत्पादों की पूरी मांग पूरी होगी। गुजरात के साबरकांठा जिले से शुरू हुई साबर डेयरी आज 9 राज्यों के दूध उत्पादकों को अवसर दे रही है। गुजरात की सहकारी डेयरी से जुड़कर आज 35 लाख महिलाएँ ₹85,000 करोड़ का वार्षिक कारोबार कर रही हैं।

साबर प्लांट में प्रतिदिन 150 मीट्रिक टन दही, 10 मीट्रिक टन योगर्ट, 3 लाख लीटर छाछ और 10,000 किलो मिठाइयों का उत्पादन होगा। शाह ने कहा कि आज साबर डेयरी राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की भी सेवा कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि अमूल के नेतृत्व में गुजरात में एंब्रियो ट्रांसफर, सेक्स-डिटरमिनेशन, बायोगैस, मधुमक्खी पालन और ऑर्गेनिक खेती जैसे वैज्ञानिक प्रयोग सफल रहे हैं और इन्हें हरियाणा में भी लागू करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत का दुग्ध क्षेत्र 70% बढ़ा है, जिससे यह दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता डेयरी सेक्टर बन गया है। 2014-15 में देश में 86 मिलियन दुधारू पशु थे, जो अब बढ़कर 112 मिलियन हो गए हैं। दूध उत्पादन भी 146 मिलियन टन से बढ़कर 239 मिलियन टन हो गया है। देश में आज 8 करोड़ किसान दुग्ध क्षेत्र से जुड़े हैं और दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 124 ग्राम से बढ़कर 471 ग्राम हो चुकी है।

अमित शाह ने बताया कि हरियाणा हमेशा प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में शीर्ष तीन राज्यों में रहता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनकर गर्व से खड़ा है। व्हाइट रिवोल्यूशन 2.0 के तहत जल्द ही 75,000 से अधिक नई डेयरी समितियाँ बनाई जाएंगी और 46,000 सहकारी समितियों को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दूध प्रोसेसिंग क्षमता 660 लाख लीटर प्रतिदिन है, जिसे बढ़ाकर 1000 लाख लीटर प्रतिदिन (2028-29 तक) करने का लक्ष्य है। इससे सीधा लाभ दूध उत्पादन करने वाली माताओं और बहनों को मिलेगा।

अमित शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने हाल ही में पशु चारा उत्पादन, गोबर प्रबंधन और मृत पशुओं के अवशेषों के उपयोग के लिए तीन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं की स्थापना की है। इसके अलावा, सरकार ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुपालन अवसंरचना विकास कोष और राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत डेयरी प्लांट निर्माण में आत्मनिर्भर बनेगा और अनुसंधान एवं विकास को तीन गुना बढ़ाकर डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।



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