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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की समीक्षा बैठक में रिकॉर्ड प्रदर्शन, डिजिटल सुधार और वित्तीय समावेशन पर जोर

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वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान उनके परिचालन, वित्तीय और रणनीतिक प्रदर्शन का आकलन किया गया। इस बैठक में DFS के विशेष सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक के अध्यक्ष, सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एमडी एवं सीईओ तथा कार्यकारी निदेशक उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान “आपकी पूँजी, आपका अधिकार (Your Money, Your Right)” शीर्षक से एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। यह पुस्तक देशभर में चलाए गए उस अभियान को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनके अनक्लेम्ड वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और उन्हें वापस प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। इस पहल के तहत बैंकों, वित्तीय संस्थानों, नियामकों और अन्य हितधारकों के सहयोग से पिछले छह महीनों में लगभग ₹6,800 करोड़ की राशि लगभग 29 लाख लाभार्थियों को वापस की गई है।

बैठक में DFS की नवीनीकृत वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया। नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ तैयार यह पोर्टल अधिक सुगमता, सरल नेविगेशन और बेहतर सूचना प्रसार प्रदान करता है। यह वेबसाइट 23 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो समावेशी डिजिटल सेवा वितरण की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समीक्षा के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के व्यवसाय वृद्धि, लाभप्रदता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेशन, डिजिटल बैंकिंग, एमएसएमई ऋण प्रवाह, साइबर सुरक्षा और परिचालन जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत आकलन किया गया। बताया गया कि वित्त वर्ष 2025–26 में PSBs ने मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन किया है। कुल बैंकिंग व्यवसाय लगभग ₹283.3 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जबकि शुद्ध लाभ बढ़कर लगभग ₹1.98 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बैठक में यह भी बताया गया कि सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (GNPA) घटकर 1.93% और शुद्ध NPA घटकर 0.39% के ऐतिहासिक निम्न स्तर पर आ गई है, जो बैंकिंग प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, पीएम मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा और डिजिटल लेंडिंग जैसी वित्तीय समावेशन योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

डिजिटल लोन प्रोसेसिंग, ई-केवाईसी, पेपरलेस सिस्टम और सरकारी प्लेटफॉर्म के एकीकरण जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में एमएसएमई क्षेत्र को ऋण उपलब्धता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और डिजिटल बैंकिंग प्रणाली को और सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया।

अंत में सचिव ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बदलते वैश्विक परिदृश्य में सतर्क रहते हुए दक्षता, पारदर्शिता और ग्राहक सेवा पर विशेष ध्यान देना चाहिए ताकि “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को समर्थन मिल सके।

त्रिपुरा के उदयपुर में क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम: 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित

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26 मई 2026 को त्रिपुरा के गोमती जिले के उदयपुर में एक क्रेडिट आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता वित्तीय सेवा विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय के सचिव एम. नगराजू ने की।

इस कार्यक्रम के दौरान उदयपुर में विभिन्न बैंकों द्वारा 4,577 लाभार्थियों को ₹105.40 करोड़ के ऋण वितरित किए गए। NABARD और SIDBI ने विभिन्न परियोजनाओं के लिए ₹2 करोड़ से अधिक की मंजूरी की घोषणा की। बैंकों ने स्कूलों और आंगनवाड़ियों के बुनियादी ढांचे के सुधार के लिए CSR गतिविधियों के तहत भी सहायता स्वीकृत की। MSME क्षेत्र को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय उधारकर्ताओं को समर्थन देने के लिए उदयपुर में SIDBI की एक क्लस्टर डेवलपमेंट शाखा का उद्घाटन किया गया, जबकि DFS द्वारा “Financial Inclusion 2.0 Vision Document” भी जारी किया गया।

कार्यक्रम में वित्तीय समावेशन पर बोलते हुए सचिव (DFS) ने कहा कि वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। उन्होंने ऋण के उत्पादक उपयोग और उद्यमिता आधारित रोजगार सृजन के महत्व पर जोर दिया और लाभार्थियों से अपील की कि वे ऋण का सही उपयोग करें ताकि उनके खाते NPA (Non-Performing Assets) में न बदलें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी और बैंकिंग योजनाओं के तहत सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों को व्यवहार्य आर्थिक गतिविधियाँ स्थापित करनी चाहिए और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

इस कार्यक्रम में त्रिपुरा के वित्त सचिव प्रशांत गोयल, SBI के MD अश्विनी कुमार तिवारी, PNB के ED एम. परमसिवम, NABARD के DMD जी. रावत सहित DFS, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैंक भर्ती प्रक्रिया में सुधार: DFS ने परिणाम घोषणा का नया क्रम और पारदर्शिता उपाय लागू किए

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वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएँ विभाग (DFS) ने भर्ती परीक्षाओं और उनके परिणामों की घोषणा की समय-सीमा को सुव्यवस्थित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। इसमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI), राष्ट्रीयकृत बैंकों (NBs) और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) की भर्ती शामिल है। साथ ही, इन पहलों का उद्देश्य भारतीय बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाना भी है।

SBI, NBs और RRBs में भर्ती IBPS प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है, जो संबंधित बैंकों के अधिदेश के अनुसार होती है। आमतौर पर RRB की परीक्षाएँ सबसे पहले आयोजित की जाती हैं, उसके बाद NBs और अंत में SBI की परीक्षाएँ होती हैं। परिणाम भी इसी क्रम में घोषित किए जाते हैं। हालाँकि, एक महत्वपूर्ण प्रवृत्ति सामने आई है कि नए चयनित उम्मीदवार अक्सर RRBs से NBs और फिर SBI में स्थानांतरित हो जाते हैं। इस तरह के लगातार स्थानांतरण से बैंकों में उच्च त्याग दर (attrition) देखने को मिली है, जिससे संचालन संबंधी चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं।

इस समस्या को ध्यान में रखते हुए, DFS ने भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया और परिणामों की घोषणा के पैटर्न की समीक्षा की तथा भारतीय बैंक संघ (IBA) को सभी तीन श्रेणियों के बैंकों के लिए परिणाम घोषणा का एक मानकीकृत और तार्किक क्रम लागू करने की सलाह दी। इसके परिणामस्वरूप एक नया ढाँचा तैयार किया गया है, जिसके तहत अब सबसे पहले SBI के परिणाम घोषित होंगे, उसके बाद NBs और अंत में RRBs के। इसके अलावा, अधिकारी स्तर की सभी परीक्षाओं के परिणाम पहले घोषित किए जाएंगे और इसके बाद सहायक (क्लेरिकल) स्तर की परीक्षाओं के परिणाम उसी क्रम में जारी होंगे।

यह व्यवस्थित क्रम उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट करने और सूचित निर्णय लेने में सहायता करेगा। इससे उम्मीदवारों के लिए प्रक्रिया अधिक पूर्वानुमानित होगी, भर्ती प्रणाली में स्थिरता आएगी, बैंकिंग क्षेत्र में त्याग दर कम होगी और बैंक बेहतर ढंग से मानव संसाधन योजना बना सकेंगे।

पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए, IBPS आगामी 2026-27 कॉमन रिक्रूटमेंट प्रोसेस चक्र से उम्मीदवारों को उनके response sheets और answer keys लॉगिन के माध्यम से उपलब्ध कराएगा। यह कदम सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को और मजबूत करेगा।

दिल्ली में ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान के मेगा कैंप को संबोधित किया गया

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नई दिल्ली- दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने आज नई दिल्ली में आयोजित ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान के मेगा कैंप को संबोधित किया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली बहुत मजबूत है और लोगों ने वर्षों से बैंकिंग सिस्टम पर विश्वास किया है। उन्होंने कहा कि बैंकिंग प्रशासन और सेवाओं का डिजिटलीकरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की विशेष प्राथमिकता रही है।

उन्होंने बताया कि 2014 से वित्तीय समावेशन और डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी पर विशेष ध्यान दिया गया है। डिजिटलीकरण ने न केवल लेनदेन के तरीके बदले हैं बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना को भी बदल दिया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सरकार अब नागरिकों की अनक्लेम्ड संपत्तियों को डिजिटल माध्यम से लौटाने की जिम्मेदारी ले रही है। इस पहल के तहत दिल्ली सरकार भी समर्थन देगी और वित्त मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगी कि ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ के तहत कैंप आयोजित किए जाएं।

मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, पॉलिसी, शेयर या म्यूचुअल फंड्स के बारे में जानकारी जांचें और अपने फंड्स का दावा करने के लिए इन कैंपों में उपस्थित हों। उन्होंने कहा, “यह केवल धन की वापसी नहीं है, बल्कि अधिकारों की बहाली, न्याय की पूर्ति और आपके हक की पुष्टि है। अब तक लगभग 850 करोड़ रुपये उनके असली मालिकों को लौटाए जा चुके हैं।”

केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, “आज मुझे इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होकर गर्व हो रहा है। यह पहल सरकार की उस सोच को दर्शाती है जो हमेशा नागरिक को केंद्र में रखती है।” उन्होंने बताया कि ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान के तहत अक्टूबर से दिसंबर के तीन महीनों में देश के हर जिले में कैंप आयोजित किए जाएंगे ताकि कोई भी नागरिक अपनी पुरानी जमा पूंजी से वंचित न रहे।

चौधरी ने बताया कि यह अभियान केवल पैसे के बारे में नहीं है, बल्कि यह विश्वास, सम्मान और नागरिकों के अधिकारों के बारे में है। उन्होंने कई योजनाओं का उल्लेख किया जो वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती हैं, जिनमें PMJDY, PMJJBY, PMSBY, APY, PMMY और PM SVANidhi शामिल हैं।

वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम. नगराजू ने कहा, “हमने इस अभियान के लिए 3A फ़्रेमवर्क – Awareness, Accessibility और Action अपनाया है। इससे हर नागरिक आसानी से प्रक्रिया को समझ सके और अपने फंड्स का दावा कर सके।” उन्होंने बताया कि अब तक देशभर में 272 जिलों में मेगा कैंप आयोजित किए जा चुके हैं और अगले चरण में 102 अतिरिक्त कैंप आयोजित किए जाएंगे।

नगराजू ने कहा कि इन सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप केवल दो महीनों में ही ₹18.87 अरब से अधिक राशि नागरिकों को वापस की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में डिपॉजिटेड एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड के तहत लंबित राशि 31 अगस्त, 2025 तक केवल ₹3,210.84 करोड़ है।

यह अभियान वित्त मंत्रालय, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), IRDAI, SEBI, IEPFA, PFRDA और राज्य स्तर के बैंकर्स कमेटी के सहयोग से आयोजित किया गया है। मेगा कैंप में नागरिकों को अपने अनक्लेम्ड वित्तीय संपत्तियों जैसे कि बैंक जमा, बीमा पॉलिसी, शेयर, डिविडेंड और म्यूचुअल फंड्स के दावे करने की प्रक्रिया के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

इस अभियान का उद्घाटन 4 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुजरात के गांधीनगर से किया गया था।

‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ अभियान न केवल नागरिकों के धन को लौटाने का माध्यम है, बल्कि यह वित्तीय जागरूकता, डिजिटल समावेशन और सरकार द्वारा सेवाओं की पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


लंबित IBC मामलों की समीक्षा के लिए वित्त सेवा विभाग ने की बैठक; बैंकों को CIRP प्रक्रिया में तेजी लाने की दी सलाह

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वित्त सेवा विभाग (DFS) के सचिव एम. नागराजू ने आज लंबित IBC मामलों से संबंधित मुद्दों पर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में DFS के वरिष्ठ अधिकारी, भारत की दिवालियापन और दिवालियापन बोर्ड (Insolvency and Bankruptcy Board of India) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का शीर्ष प्रबंधन शामिल हुआ।

बैठक में NCLT में दर्ज मामलों, NCLT में हल किए गए मामलों और IBC के बाहर निपटाए गए मामलों की प्रगति पर चर्चा की गई। NCLT बेंचों पर प्रवेश और समाधान की प्रतीक्षा कर रहे प्रमुख मामलों की समीक्षा की गई। सचिव (DFS) ने जोर दिया कि कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) आवेदन के प्रवेश और मामलों के समाधान में समयसीमा का पालन किया जाना चाहिए।

जिन मामलों में Resolution Plans समिति ऑफ़ क्रेडिटर्स (CoC) के पास लंबित हैं, उन पर विचार करते हुए बैंकों को अंतिम निर्णय लेने के लिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी गई।

बैंकों को अपने काउंसल्स के माध्यम से लंबित मामलों के शीघ्र प्रवेश के लिए कार्रवाई करने को कहा गया, ताकि समाधान प्रक्रिया अधिक प्रभावी और कुशल हो सके और CIRP आवेदन दाखिल करने में देरी को कम किया जा सके।

बैंकों को 4 नवंबर, 2025 की IBBI परिपत्र का ध्यान रखने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई कि Resolution Professionals विशेष PMLA कोर्ट में प्रवर्तित संपत्तियों की वापसी के लिए आवश्यक प्रतिज्ञा दाखिल करें।

CIRP के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए हितधारकों के साथ सहयोग को सुव्यवस्थित किया जाएगा, जिससे NCLT में मामलों के प्रवेश और समाधान में देरी को रोका जा सके।

सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुख अधिकारियों को सलाह दी गई कि वे अपने बैंक से संबंधित NCLT में प्रवेश के लिए लंबित शीर्ष 20 मामलों और समाधान के लिए लंबित 10 खातों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें। बैंकों को सलाह दी गई कि CoC के पास लंबित Resolution Plans वाले मामलों का शीघ्र निपटान करें।

अंत में, सचिव ने बैंकों से कहा कि वे IBC पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित और मजबूत करने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाएं, ताकि मूल्य अधिकतमकरण और वसूली में सुधार हो सके।

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