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NEtym 2026 में बोले सिंधिया, पूर्वोत्तर भारत को बताया ‘अष्टलक्ष्मी’ और विकास का सेतु

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नई दिल्ली- केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में आयोजित NEtym 2026 सांस्कृतिक उत्सव में भाग लिया। यह कार्यक्रम पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति, प्रतिभा और संभावनाओं का उत्सव है।

मंत्री ने पूर्वोत्तर क्षेत्र को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र भारत के लिए ही नहीं, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया और वैश्विक स्तर पर एक रणनीतिक सेतु के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि यहां की लगभग 93% साक्षरता दर और युवा शक्ति भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

सरकार की प्रमुख पहलें

सिंधिया ने पूर्वोत्तर के युवाओं को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाओं का उल्लेख किया:

 NE SPARKS Programme

  • ISRO के सहयोग से

  • हर साल 800 छात्रों को स्पेस साइंस का अनुभव

 Ashtalakshmi Darshan Programme

  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम

  • देशभर के छात्रों को जोड़ता है

  • 2030 तक 8000 छात्रों तक विस्तार लक्ष्य

Advancing NER Portal

  • अप्रैल 2026 में लॉन्च होगा

  • 1000+ नौकरी अवसर

  • 300+ करियर विकल्प

  • 3000+ कोर्स और 800+ संस्थानों की जानकारी

मुख्य बातें

  • पूर्वोत्तर भारत को आर्थिक और सांस्कृतिक विकास का केंद्र बताया

  • युवाओं को देश की ग्रोथ स्टोरी का नेतृत्व करने का आह्वान

  • “Think about what the Northeast is becoming” पर जोर

  • सांस्कृतिक विरासत को भारत की बड़ी ताकत बताया

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि NEtym केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर की पहचान, आकांक्षा और विकसित भारत की दिशा में उसकी भूमिका का प्रतीक है।


रायपुर साहित्य उत्सव–2026 के लिए आम जनता हेतु सुगम यातायात व्यवस्था : 23 से 25 जनवरी तक पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर में होगा साहित्य, संस्कृति और विचारों का संगम

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय पटल पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करने के उद्देश्य से रायपुर साहित्य उत्सव–2026 का भव्य आयोजन 23 से 25 जनवरी 2026 तक नवा रायपुर अटल नगर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में किया जा रहा है। आम नागरिकों, साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों एवं युवाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा उत्सव स्थल तक सुगम एवं निःशुल्क यातायात की विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग बिना किसी बाधा के इस तीन दिवसीय साहित्यिक महोत्सव में सहभागिता कर सकें।

इस व्यवस्था के अंतर्गत रायपुर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पुरखौती मुक्तांगन, नवा रायपुर तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कुल 6 विशेष बस रूट निर्धारित किए गए हैं। ये बसें तीनों दिन सुबह 9 बजे, 10.30 बजे, दोपहर 12 बजे, 1.30 बजे, 3 बजे तथा शाम 4.30 बजे निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होंगी। 

रूट क्रमांक 1 टाटीबंध से प्रारंभ होकर सरोना, रायपुरा चौक, कुशालपुर, भाठागांव चौक, संतोषी नगर चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा। 

रूट क्रमांक 2 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, डी. नगर, मेकाहारा, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक जाएगा। 

रूट क्रमांक 3 रेलवे स्टेशन से फाफाडीह चौक, मेकाहारा, घड़ी चौक, गांधी उद्यान, भगत सिंह चौक, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के मार्ग से पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

इसी प्रकार रूट क्रमांक 4 यूनिवर्सिटी गेट से साइंस कॉलेज, आयुर्वेदिक कॉलेज, आश्रम, आमापारा, आज़ाद चौक, कालीबाड़ी, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित होगा। 

रूट क्रमांक 5 कचना से मोवा, लोधीपारा, पंडरी, शास्त्री चौक, कालीबाड़ी चौक, सिद्धार्थ चौक, पचपेड़ी नाका, महावीर नगर, तेलीबांधा, अवंतीबाई चौक, पं. दीनदयाल चौक, वीआईपी चौक, कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी, जोरा, नवा रायपुर एवं कैपिटल कॉम्प्लेक्स के रास्ते पुरखौती मुक्तांगन पहुंचेगा।

रूट क्रमांक 6 भाठागांव से पचपेड़ी नाका, एमएमआई, देवपुरी, डूमरतराई, माना मोड़, टेमरी, माना कैंप और नवा रायपुर होते हुए उत्सव स्थल तक संचालित किया जाएगा।

तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव–2026 छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा, लोक परंपराओं और साहित्यिक चेतना को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनेगा। इस अवसर पर देशभर से प्रतिष्ठित साहित्यकार, कवि, कथाकार, विचारक, कलाकार, पत्रकार, रंगकर्मी एवं साहित्य प्रेमी सहभागिता करेंगे। उत्सव के दौरान साहित्यिक संवाद, विचार-मंथन, समकालीन विषयों पर परिचर्चाएँ, कविता पाठ, कथा सत्र, पुस्तक विमोचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं कला-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जो साहित्यिक और वैचारिक विमर्श को नई दिशा देंगे।

उत्सव के अंतर्गत ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिकों, युवाओं एवं नवोदित रचनाकारों को कविता, कहानी, गीत, विचार अथवा नाट्य अंश के रूप में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, राज्य के विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में उत्सव की जानकारी व्यापक रूप से साझा की जा रही है, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं में साहित्य, भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि विकसित हो सके। 

आयोजन के दौरान देश के ख्यातिनाम प्रकाशन समूहों की पुस्तक स्टॉल भी लगाई जाएंगी, जहां पाठकों को विविध विषयों, भाषाओं और विधाओं की पुस्तकों से रूबरू होने और उन्हें खरीदने का अवसर मिलेगा।

रायपुर साहित्य उत्सव–2026 में सहभागिता के लिए इच्छुक नागरिक, विद्यार्थी एवं साहित्य प्रेमी आधिकारिक वेबसाइट www.raipursahityautsav.org के माध्यम से पंजीयन कर सकते हैं।

आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव ‘उद्भव 2025’ सफलतापूर्वक संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समिति (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय ने, 3 से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित 6वीं राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव तथा कला उत्सव – उद्भव 2025 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले के वड्देस्वरम स्थित केएल विश्वविद्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह महोत्सव NESTS द्वारा आयोजित और आंध्र प्रदेश जनजातीय कल्याण आवासीय शैक्षणिक संस्थान समिति (APTWREIS–Gurukulam) द्वारा मेज़बानी किया गया, जिसमें केएल विश्वविद्यालय का व्यापक संस्थागत सहयोग मिला।

समापन समारोह में आंध्र प्रदेश सरकार की माननीय जनजातीय कल्याण तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री जी. संध्या रानी; माननीय सामाजिक कल्याण, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सचिवालय एवं गांव वॉलंटियर विभाग के मंत्री डॉ. डी. एस. स्वामी; तथा आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, सिनेमाटोग्राफी एवं गुंटूर जिले के प्रभारी मंत्री कंदुला दुर्गेश उपस्थित रहे। आंध्र प्रदेश सरकार के सामाजिक कल्याण एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक भी समारोह में उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

अपने संबोधन में माननीय अतिथियों ने जनजातीय छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की जनजातीय शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उद्भव जैसे मंच न केवल भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि जनजातीय युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव विकसित करते हैं।

महोत्सव का संचालन NESTS के कमिश्नर अजीत कुमार श्रीवास्तव (IRAS) तथा आंध्र प्रदेश के सामाजिक एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक (IAS) के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन सचिव एम. गौथमी (IAS), सचिव APTWREIS (गुरुकुलम), ने अपनी टीमों और दोनों संस्थानों के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्यक्रम की सुचारू रूप से व्यवस्था सुनिश्चित की।

कुल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,558 छात्र–छात्राओं ने महोत्सव में भाग लिया, जिनमें 524 पुरुष और 1,024 महिला प्रतिभागी शामिल थे। इनके साथ 45 टीम लीडर, 178 एस्कॉर्ट, 22 कंटिंजेंट मैनेजर, 22 लायज़न अधिकारी, 10 अधिकारी, 19 NESTS अधिकारी एवं कर्मचारी, 137 उप-समिति सदस्य, 48 जूरी सदस्य और 60 राज्य अधिकारी/ APTWREIS अधिकारी भी जुड़े। तीन दिनों तक 49 सांस्कृतिक, साहित्यिक, रचनात्मक और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए—पहले दिन 18, दूसरे दिन 22 और तीसरे दिन 9—जिनमें भारत की विविध जनजातीय समुदायों की प्रतिभा, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली।

समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए। कुल पदक तालिका में तेलंगाना प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का स्थान रहा। कुल 105 प्रथम पुरस्कार, 105 द्वितीय पुरस्कार और 105 तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए, साथ ही सर्वश्रेष्ठ राज्य चैम्पियनशिप का पुरस्कार भी दिया गया। सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह और सहभागिता के सम्मान में प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

उद्भव 2025 के 12 चयनित वर्गों के विजेता अब यशदा, पुणे में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कला उत्सव में ईएमआरएस का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसमें देशभर से टीमें भाग लेंगी। जनजातीय हस्तशिल्प, दृश्य कलाएँ, पारंपरिक प्रस्तुतियाँ और स्वदेशी रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने इस महोत्सव में विशेष आकर्षण जोड़ा, जो जनजातीय समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और कलात्मक परंपराओं को दर्शाता है।

उद्भव 2025 ने माननीय प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के दृष्टिकोण को साकार करते हुए जनजातीय छात्रों को राष्ट्रीय मंच, आत्मविश्वास और अपनी सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान किया। इस महोत्सव ने ईएमआरएस की परिवर्तनकारी भूमिका को भी रेखांकित किया, जो विकासात्मक अंतर को पाटने, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षमताओं को मजबूत करने तथा जनजातीय युवाओं में नेतृत्व गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण है।

छठे संस्करण की सफल पूर्णता के साथ, NESTS ने देशभर के जनजातीय छात्रों के लिए समग्र शिक्षा, सांस्कृतिक सशक्तिकरण और रचनात्मक अवसरों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संगठन स्वदेशी प्रतिभा को पहचान देने और सांस्कृतिक तथा साहित्यिक क्षेत्रों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाले मंचों के विस्तार के लिए समर्पित है।


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