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जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 की तैयारी बैठक आयोजित, मानव और प्रकृति केंद्रित वैश्विक परिवर्तन पर जोर

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महासमुंद- जीवन विद्या अध्ययन आधारित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में देश-विदेश से आने वाले प्रतिभागियों के स्वागत, पर्यावरण संरक्षण, मानवीय शिक्षा और वैश्विक मानव निर्माण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक को संबोधित करते हुए मानवीय शिक्षा शोध केंद्र तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि जीवन विद्या का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि सर्व शुभ और सर्व मंगल के लिए समर्पित मानव का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानव और प्रकृति के संरक्षण, संवर्धन तथा मानवीय मूल्यों की स्थापना पर आधारित है।

उन्होंने मानव मैत्री समिति बोडरा (धमतरी) के टोमन साहू के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए सुझाव दिया कि सम्मेलन में आने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को कॉपी, पेन, बैग, थाली और गिलास उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे भोजन और पेयजल के लिए इन्हीं का उपयोग करें। इससे प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 5 से 6 डिस्पोजेबल कप एवं प्लेटों के उपयोग से होने वाले प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

कोकड़िया ने सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सरकार एवं भारत सरकार के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या आधारित चेतना विकास मूल्य शिक्षा, कार्यशालाओं, पुस्तकों और शिविरों के माध्यम से इस विचारधारा को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर मानवीय मूल्यों से युक्त समाज का निर्माण हो सके।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सम्मेलन की कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्होंने लंदन की नौकरी छोड़कर भारत लौटने का निर्णय इसलिए लिया, ताकि समाधान, समृद्धि और मानवीय मूल्यों पर आधारित जीवन शैली को समाज तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में सरदार मंजीत सिंह ने सभी जनप्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए "सबके साथ, सबका विकास" की भावना को आगे बढ़ाने पर बल दिया। वहीं महावीर अग्रवाल ने उत्पादन कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित करने का सुझाव दिया, जिससे आत्मनिर्भरता और शुद्ध उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

चंद्रशेखर राठौड़ ने अभ्युदय संस्थान अछोटी के इतिहास, उद्देश्यों और वर्षभर किए गए जनहित कार्यों की जानकारी दी। अनिता शाह ने अभिभावक विद्यालय, चेतना विकास मूल्य शिक्षा, संस्कार और उत्सव की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बच्चों में संस्कारों के बीजारोपण की आवश्यकता बताई।

अंकित पोगुला ने सामाजिक परिवर्तन के लिए जीवन विद्या और मानवीय मूल्यों की शिक्षा को देश की अनिवार्य शिक्षा व्यवस्था में शामिल करने की मांग की। वहीं मीना अंजनी अग्रवाल ने जीवन विद्या अध्ययन से समाज में आए सकारात्मक परिवर्तनों पर विशेष मंचीय कार्यक्रम आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की तैयारियों को लेकर प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों, देशभर तथा विदेशों में संचालित जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों में भी तैयारियां तेज की जाएंगी।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा ही सामाजिक नैतिकता को मजबूत कर सकती है। यदि शिक्षा का मानवीकरण नहीं हुआ, तो समाज में अपराध, हिंसा और युद्ध जैसी समस्याएं लगातार बढ़ती रहेंगी। इसलिए जीवन विद्या के माध्यम से मानव, समाज और प्रकृति के बीच संतुलित एवं शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

विकसित भारत-विकसित संसार का आधार है जीवन विद्या अध्ययन : गेंदलाल कोकड़िया

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 महासमुंद- विकसित भारत और विकसित संसार के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा का व्यापक प्रसार आवश्यक है। यह बात शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय कोकड़ी के संचालक गेंदलाल कोकड़िया ने रायपुर स्थित निरंजन धर्मशाला में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन को देश के सभी राज्यों के विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षकों, अभिभावकों तथा शाला प्रबंधन एवं विकास समिति के सदस्यों को चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं से जोड़ा जाना आवश्यक है, ताकि शिक्षा का मानवीयकरण हो सके।

बैठक में अभ्युदय संस्थान अछोटी (दुर्ग) में प्रस्तावित जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-2026 की रूपरेखा तैयार की गई। इस अवसर पर भारत के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक, अभिभावक, समाजसेवी एवं जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सात दिवसीय जीवन विद्या अध्ययन बिंदु शिविर का प्रबोधन सोम देव त्यागी भैयाजी ने किया। उन्होंने जीव चेतना और मानव चेतना के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए जीवन विद्या अध्ययन के महत्व पर प्रकाश डाला। शिविर के पश्चात आयोजित संवाद में रंजीत अग्रवाल, अंजनी अग्रवाल एवं अन्य वक्ताओं ने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति और जीवन कौशल को विकसित करता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने भी जीवन विद्या के विभिन्न आयामों पर संवाद किया। शिविर में गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 200 जिज्ञासुओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मंजित चाचाजी, संस्थापक सदस्य अभ्युदय संस्थान अछोटी दुर्ग ने आगामी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियों एवं लगभग 30 हजार प्रतिभागियों के लिए भोजन एवं आवास व्यवस्था संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा की। उन्होंने सभी सहयोगियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

बैठक में अंकित पोगुला (मानव तीर्थ, बेमेतरा) ने जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में बी.आर. अग्रवाल, रजनी, राकेश अग्रवाल, सुचित्रा श्रीवास्तव, मीना अग्रवाल, बसंत, पूनम साहू, गोविंद पटेल, महावीर अग्रवाल, चंद्रशेखर राठौर सहित देशभर से आए जीवन विद्या अध्ययन केंद्रों के प्रभारी एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि निरंतर सुख, मानवीय मूल्यों की स्थापना तथा अपराध एवं संघर्षमुक्त समाज के निर्माण के लिए जीवन विद्या अध्ययन एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हो सकता है। इसी उद्देश्य से प्रदेशभर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया।


जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 : चेतना विकास, मूल्य शिक्षा और ग्राम स्वराज्य पर होगा वैश्विक मंथन

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अभ्युदय संस्थान में वर्ष 2026 में आयोजित होने जा रहे “जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन” को लेकर देश-विदेश के जीवन विद्या कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, किसानों एवं समाज सेवकों में उत्साह बढ़ता जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित चेतना विकास, मूल्य शिक्षा, परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था तथा शिक्षा के मानवीयकरण को बढ़ावा देना है।

सम्मेलन की तैयारी हेतु आयोजित बैठक में अंतर्राष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सभा का संचालन किया, जबकि वरिष्ठ मार्गदर्शक एवं संरक्षक अंबा दीदी ने अध्यक्षता करते हुए हस्तमुक्त विधि से अतिथियों के स्वागत एवं विदाई की अपील की।

बैठक में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र के संचालक एवं शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने सम्मेलन के भोजन प्रबंधन के लिए लगभग 6 क्विंटल “श्रीराम” धान का प्राकृतिक एवं जैविक चावल स्वप्रसन्नता पूर्वक दान देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि अभ्युदय संस्थान दुनिया के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है तथा यहां आयोजित होने वाला यह सम्मेलन मानव केंद्रित शिक्षा और समृद्ध समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

सभा में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को छत्तीसगढ़ सहित भारत सरकार के स्कूली शिक्षा के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग का भी समर्थन किया गया। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, अभिभावक विद्यालय, परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य व्यवस्था, अखंड समाज सार्वभौम व्यवस्था, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, आयुर्वेद, गौपालन, अक्षय एवं सौर ऊर्जा, स्किल इंडिया, निपुण भारत मिशन और सुखी-समृद्ध व्यक्ति से विश्व निर्माण जैसे विषयों पर विशेष चर्चा होगी।

आयोजकों के अनुसार सम्मेलन में भारत के 22 राज्यों तथा विश्व के 11 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन के लिए भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, रक्षा मंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित अनेक जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने की तैयारी की जा रही है।

सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सरकारी शिक्षकों, किसानों, समाज सेवकों, व्यवसायियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा तन-मन-धन से सहयोग देने की घोषणा की गई है। अब तक 50 लाख रुपये से अधिक की सहयोग राशि एवं सामग्री एकत्रित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसी क्रम में मानव जागृति सेवा संस्थान से जुड़े शिक्षकों ने 50 हजार रुपये, मानव मैत्री समिति के शिक्षकों ने 25 हजार रुपये तथा अभ्युदय संस्थान से जुड़े शिक्षकों ने एक लाख रुपये सहयोग देने की घोषणा की है।

आयोजकों का कहना है कि “जीवन विद्या अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 2026” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित मानवीय शिक्षा, समृद्ध परिवार, समृद्ध समाज और समृद्ध विश्व निर्माण का एक वैश्विक अभियान होगा।

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