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नववर्ष पर बीएसएनएल ने देशभर में VoWiFi (वाई-फाई कॉलिंग) सेवा की शुरुआत की

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नववर्ष के अवसर पर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनी, को देशभर में वॉयस ओवर वाई-फाई (VoWiFi), जिसे वाई-फाई कॉलिंग भी कहा जाता है, के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है। यह उन्नत सेवा अब देश के सभी दूरसंचार सर्किलों में बीएसएनएल के सभी ग्राहकों के लिए उपलब्ध है, जिससे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी निर्बाध और उच्च गुणवत्ता की कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

यह सेवा अब देश के सभी दूरसंचार सर्किलों में बीएसएनएल ग्राहकों के लिए उपलब्ध है। VoWiFi के माध्यम से ग्राहक वाई-फाई नेटवर्क पर वॉयस कॉल और संदेश भेज एवं प्राप्त कर सकते हैं, जिससे घरों, कार्यालयों, बेसमेंट तथा दूरदराज़ क्षेत्रों जैसे कमजोर मोबाइल सिग्नल वाले स्थानों में भी स्पष्ट और विश्वसनीय कनेक्टिविटी मिलती है।

VoWiFi एक IMS आधारित सेवा है, जो वाई-फाई और मोबाइल नेटवर्क के बीच निर्बाध हैंडओवर को समर्थ बनाती है। कॉल ग्राहक के मौजूदा मोबाइल नंबर और फोन डायलर के माध्यम से की जाती हैं, इसके लिए किसी भी तृतीय-पक्ष एप्लिकेशन की आवश्यकता नहीं होती।

यह सेवा विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में लाभकारी है, जहाँ मोबाइल कवरेज सीमित हो सकता है, बशर्ते स्थिर वाई-फाई कनेक्शन उपलब्ध हो—चाहे वह बीएसएनएल भारत फाइबर हो या कोई अन्य ब्रॉडबैंड सेवा। VoWiFi नेटवर्क पर भीड़ को कम करने में सहायक है और इसे पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है, यानी वाई-फाई कॉलिंग पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।

VoWiFi का शुभारंभ बीएसएनएल के नेटवर्क आधुनिकीकरण कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है तथा देशभर में, विशेषकर कम सेवा प्राप्त क्षेत्रों में, कनेक्टिविटी सुधारने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

VoWiFi अधिकांश आधुनिक स्मार्टफोनों पर समर्थित है। ग्राहकों को केवल अपने हैंडसेट की सेटिंग्स में जाकर Wi-Fi Calling को सक्षम करना होगा। डिवाइस संगतता और सहायता से संबंधित जानकारी के लिए ग्राहक अपने नज़दीकी बीएसएनएल ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं या बीएसएनएल हेल्पलाइन 1800 1503 पर कॉल कर सकते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

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मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल

भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त 

छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान

रायपुर- डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया।


विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया।

इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा

सोनम त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं।

डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं —  सोनम त्रिपाठी

सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया।

उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं।

डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।

सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है।

डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है।

छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों।त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने WTDC 25 में भारत की डिजिटल नेतृत्व और ITU साझेदारी को रेखांकित किया

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केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने आज बाकू में WTDC 25 के सत्रों के दौरान आयोजित नेटवर्किंग ब्रेकफास्ट को संबोधित किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के साथ भारत की 150 वर्षों से चली आ रही साझेदारी को दोहराया।

अपने संबोधन में मंत्री ने भारत की ठोस उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत ने एक अरब नागरिकों को इंटरनेट से जोड़ा, 1.4 अरब लोगों को सेवा देने वाली दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली बनाई, और अब वैश्विक डिजिटल लेनदेन का 46 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अपने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से संचालित करता है। साथ ही, इन प्रणालियों को खुला, सुलभ और किफायती बनाए रखने का भी ध्यान रखा गया।

मंत्री ने भारत के वैश्विक योगदान पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल पहचान, भुगतान और शासन में भारत की नवाचार क्षमताएं अफ्रीका, एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों को समर्थन प्रदान कर रही हैं। यह योगदान केवल वाणिज्यिक हितों के लिए नहीं, बल्कि यह मान्यता देते हुए किया गया है कि डिजिटल क्षमताओं को साझा किया जाना चाहिए। भारत के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने स्पेक्ट्रम प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल शासन में हजारों पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है। साथ ही, भारत ने हमेशा समान स्पेक्ट्रम आवंटन, किफायती सैटेलाइट ब्रॉडबैंड और तकनीकी हस्तांतरण के माध्यम से विकासशील देशों को सशक्त बनाने का समर्थन किया है।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने 2027–2030 के लिए ITU काउंसिल में पुन: चुनाव हेतु भारत की उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारत विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देगा, तकनीकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण जैसे व्यावहारिक समाधानों का समर्थन करेगा और क्षेत्रों के बीच सहमति बनाने में मदद करेगा। मंत्री ने रेडियो कम्यूनिकेशन ब्यूरो के निदेशक के लिए भारत की नामांकन की भी घोषणा की, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत नवाचार-प्रधान, भविष्य-सक्षम स्पेक्ट्रम शासन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देगा।

अंत में मंत्री ने यह दोहराया कि भारत का समर्थन मांगना सतत कार्रवाई, पारदर्शी सहभागिता और डिजिटल परिवर्तन से गुजर रहे देशों के प्रति वास्तविक एकजुटता पर आधारित है। भारत सभी सदस्य देशों के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि कनेक्टिविटी के लाभ हर नागरिक तक पहुँच सकें।

भारत ने लॉन्च किया पहला पूरी तरह स्वदेशी 4G (5G-तैयार) नेटवर्क

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परिचय

भारत ने अपने पहले पूरी तरह स्वदेशी 4G (5G-तैयार) नेटवर्क के लॉन्च और लगभग 98,000 स्वदेशी 4G टावरों के कमीशन के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस नेटवर्क का कोर नेटवर्क C-DOT द्वारा विकसित किया गया है, Tejas Networks का रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) और TCS द्वारा इसका इंटीग्रेशन किया गया है। यह उपलब्धि तकनीकी रूप से बड़ा मील का पत्थर है और सरकार की आत्मनिर्भर भारत प्रतिबद्धता को साकार करती है।

कोविड-19 महामारी से पहले भारत 2G, 3G और 4G जैसी दूरसंचार सेवाओं के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर था। अब भारत ने पूरी तरह से स्वदेशी 4G स्टैक को शून्य से विकसित कर, नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला स्वतंत्रता और डिजिटल स्वायत्तता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह भारत को उन पांच देशों में शामिल करता है, जो पूरी तरह स्वदेशी 4G सेवाएँ लॉन्च कर सकते हैं।

BSNL का क्लाउड-नेटिव, 5G-तैयार 4G स्टैक तुरंत कनेक्टिविटी प्रदान करता है और भविष्य में 5G में सहज अपग्रेड की सुविधा देता है। सरकार की अन्य पहलें जैसे Bharat 6G Alliance, 100 5G/6G लैब्स, और Telecom Technology Development Fund भारत को विकसित भारत 2047 और वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की ओर अग्रसर कर रही हैं।

4G क्या है?

4G, चौथी पीढ़ी की वायरलेस तकनीक है, जो 3G से आगे और 5G से पहले की पीढ़ी है।

  • 4G डाउनलोड गति के साथ यूज़र्स HD वीडियो और ऑडियो स्ट्रीमिंग कर सकते हैं।

  • 4G वायरलेस ब्रॉडबैंड की सुविधा देता है, जिससे ISP से तार वाली कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं होती।

  • LTE, MIMO और OFDM जैसी तकनीकों का उपयोग नेटवर्क दक्षता बढ़ाने और बैंडविड्थ सुधारने के लिए किया जाता है।

4G स्टैक की विशेषताएँ

  • स्वदेशी एंड-टू-एंड स्टैक: रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Tejas), कोर नेटवर्क (C-DOT) और घरेलू इंटीग्रेशन।

  • सॉफ्टवेयर-फर्स्ट / क्लाउड-नेटिव: तेजी से अपग्रेड, स्केलेबिलिटी और 5G में आसान माइग्रेशन।

  • भविष्य-सुरक्षित: “5G-तैयार” वास्तुकला।

  • सामाजिक लाभ: ग्रामीण क्षेत्रों, पहाड़ी और दूरदराज़ गांवों में बच्चों, किसानों और मरीजों के लिए डिजिटल सेवाओं तक पहुँच।

स्वदेशी 4G स्टैक के लाभ और प्रभाव

  1. रणनीतिक स्वायत्तता और डिजिटल संप्रभुता: विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत।

  2. रोजगार और आपूर्ति श्रृंखला विकास: स्थानीय निर्माण और तैनाती से रोजगार और कौशल निर्माण।

  3. आंतरिक मांग और निर्यात क्षमता: भारत की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात की संभावना।

  4. स्वदेशी क्षमता से तेज विकास: केवल 22 महीनों में पूरी 4G वास्तुकला।

  5. स्केल और पहुँच का विस्तार: 92,000+ 4G साइट्स, 2200+ लाख नागरिक जुड़े।

  6. स्वदेशी सिद्धांत की वास्तविकता: घरेलू उत्पादन, कौशल विकास और आर्थिक गरिमा का सशक्त उदाहरण।

  7. वित्तीय सुधार और नागरिक भरोसा: BSNL 17 वर्षों के बाद लगातार लाभ में, आत्मनिर्भर भारत में विश्वास बढ़ा।

4G के आगे: 5G

  • 5G सेवाएँ 1 अक्टूबर 2022 को लॉन्च।

  • 8 महीनों में 2,00,000 साइट्स और 700 जिलों में कवर।

  • 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में 5G।

  • वर्तमान में 4.86 लाख 5G बेस ट्रांसिवर स्टेशन (BTS) स्थापित।

5G उपयोग मामले:

  • कृषि: प्रिसिजन फार्मिंग, IoT, ड्रोन और AI

  • स्वास्थ्य: टेलीमेडिसिन, रिमोट डायग्नोस्टिक्स

  • शिक्षा: वर्चुअल क्लासरूम, AR/VR

  • उद्योग 4.0: स्मार्ट फैक्ट्री और रोबोटिक्स

  • स्मार्ट सिटीज़: ट्रैफिक मैनेजमेंट, ऊर्जा दक्षता

  • ऑटोमोटिव: कनेक्टेड और ऑटोनॉमस वाहन

  • मीडिया और एंटरटेनमेंट: HD स्ट्रीमिंग, गेमिंग

6G की तैयारी: Bharat 6G Mission

  • 2030 तक 6G तकनीक उपलब्ध होने की संभावना।

  • Bharat 6G Vision: सस्ती, सतत और सार्वभौमिक।

  • 100 5G लैब्स और 6G-तैयार शैक्षणिक/स्टार्टअप इकोसिस्टम।

  • Telecom Technology Development Fund (TTDF): 104 परियोजनाएँ, ₹275.88 करोड़ तक।

  • Bharat 6G Alliance: उद्योग, अकादमी, शोध और मानक निकायों के साथ।

ग्लोबल मोबाइल इंटरनेट संदर्भ

  • 2025 में 5G ने दुनिया की आधी आबादी (4.4 बिलियन) को कवर किया।

  • भारत ने 5G कवरेज में 80% आबादी को जोड़ा।

  • 2024 में 5G ट्रैफ़िक तीन गुना बढ़ा, अब भारत के मोबाइल ट्रैफ़िक का 36%।

  • अंतरराष्ट्रीय संदर्भ: 2024 में इंटरनेट उपयोग 68% (5.5 बिलियन लोग)।

निष्कर्ष

स्वदेशी 4G स्टैक का तैनाती भारत के डिजिटल परिवर्तन में मील का पत्थर है। यह तकनीक, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास को जोड़ती है। ग्रामीण बच्चों, किसानों, मरीजों और सेना को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करते हुए रोजगार और कौशल निर्माण करती है। 5G और 6G की पहल के साथ, भारत वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है, और विकसित भारत 2047 की दिशा में मजबूत कदम उठा रहा है।


भारत में उपग्रह इंटरनेट: डिजिटल इंडिया और दूरदराज़ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का नया युग

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परिचय

भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल देशों में से एक है, और इसकी प्रगति में इंटरनेट कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। अप्रैल–जून 2025 के दौरान 1,002.85 मिलियन इंटरनेट सब्सक्राइबर दर्ज होने से देश की डिजिटल क्रांति की विशालता और प्रभाव स्पष्ट होता है। हालांकि, देश के कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच अभी भी सीमित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उपग्रह इंटरनेट मौजूदा नेटवर्क को पूरक करने के लिए आवश्यक है।

उपग्रह इंटरनेट उस सेवा को कहते हैं जो भू-स्थिर कक्ष (GSO) या गैर-भू-स्थिर कक्ष (NGSO) में स्थापित उपग्रहों के माध्यम से प्रदान की जाती है।

डिजिटल इंडिया के विज़न के अनुसार, उपग्रह इंटरनेट एक उभरती हुई तकनीक है, जो किसी भी स्थान से कनेक्टिविटी प्रदान कर सकती है। यह विशेष रूप से दूरदराज़ के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों, सीमा क्षेत्रों और द्वीपों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां पारंपरिक इंटरनेट सेवाएँ कठिन या आर्थिक रूप से असंभव हैं।

भारत में उपग्रह इंटरनेट के लिए नियामक ढांचा

भारत सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन (Satcom) को नियंत्रित करने के लिए प्रगतिशील नियामक ढांचा पेश किया है, जो नवाचार, सुरक्षा और स्पेक्ट्रम प्रबंधन के बीच संतुलन बनाता है। हाल के नीतिगत उपाय निजी क्षेत्र की भागीदारी, अनुमोदन प्रक्रिया को सरल बनाने और स्पेक्ट्रम के कुशल उपयोग के लिए वातावरण तैयार कर रहे हैं।

स्पेस सेक्टर सुधार (2020) ने निजी क्षेत्र की भागीदारी के द्वार खोले। इसके बाद, इंडियन स्पेस पॉलिसी 2023 ने गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को पूरे स्पेस वैल्यू चेन में भागीदारी के लिए समान अवसर प्रदान किया।

दूरसंचार विभाग (DoT)

DoT उपग्रह आधारित संचार की सुविधा प्रदान करता है और यूनिफाइड लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के तहत वाणिज्यिक VSAT, CUG सेवाएँ, GMPCS जैसी सेवाओं के लिए अनुमति देता है। ये सेवाएँ दूरदराज़ और अविकसित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। टेलिकॉम एक्ट, 2023 उपग्रह सेवाओं के प्रबंधन, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा नियमों को लागू करने की अनुमति देता है।

टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI)

मई 2025 में, TRAI ने उपग्रह आधारित वाणिज्यिक संचार सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन की शर्तों पर सिफारिशें जारी कीं। इनमें मुख्य सिफारिश है कि स्पेक्ट्रम पांच साल के लिए आवंटित किया जाए, जिसे बाजार की स्थिति के अनुसार दो अतिरिक्त वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है।

भारतीय राष्ट्रीय स्पेस प्रमोशन और ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe)

IN-SPACe गैर-सरकारी संस्थाओं के विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, अधिकृत करने और निगरानी करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यह ISRO और निजी खिलाड़ियों के बीच इंटरफ़ेस के रूप में कार्य करता है और उपग्रह संसाधनों के उपयोग सहित ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में विकास को सक्षम बनाता है।

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL)

NSIL, ISRO का वाणिज्यिक arm, वर्तमान में 15 उपग्रहों के माध्यम से संचार सेवाएँ प्रदान कर रहा है। NSIL की भूमिका में प्रमुख हैं:

  • GSAT-N1 (GSAT-24): DTH सेवाओं के लिए

  • GSAT-N2 (GSAT-20): ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए (इन-ऑर्बिट परीक्षण में)

  • GSAT-N3: आगामी S-बैंड संचार आवश्यकताओं के लिए Q1 2026 में प्रस्तावित

NSIL S, C, विस्तारित C, Ka और Ku बैंड में उपग्रह सेवाएँ प्रदान करता है।

LEO/MEO उपग्रह इंटरनेट सेवाओं की ओर संक्रमण

लो-लेर्थ ऑर्बिट (LEO) और मीडियम-लेर्थ ऑर्बिट (MEO) उपग्रहों के माध्यम से कम विलंबता, उच्च बैंडविड्थ और विश्वसनीय कनेक्टिविटी प्राप्त होगी।

  • LEO उपग्रह: 400–2,000 किमी की ऊँचाई पर, कम विलंबता, इंटरनेट सेवाओं के लिए आदर्श।

  • MEO उपग्रह: 8,000–20,000 किमी ऊँचाई पर, बड़े क्षेत्र को कवर करता है।

नीतिगत सुधार और निजी क्षेत्र की भागीदारी

स्पेस सेक्टर सुधारों के तहत अब 100% FDI स्वीकृत है। जून 2025 में Starlink Satellite Communications Pvt. Ltd. (SSCPL) को भारत में उपग्रह इंटरनेट सेवाएँ लॉन्च करने का लाइसेंस मिला। Jio Satellite Communication Limited और OneWeb India Communications Pvt. Ltd. पहले ही लाइसेंसधारक हैं।

सरकारी पहल: समावेशी डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार

  • Digital Bharat Nidhi (DBN): ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में 4G मोबाइल टॉवर और ब्रॉडबैंड विस्तार परियोजनाएँ।

  • द्वीप क्षेत्र (Andaman, Nicobar, Lakshadweep): CTDP और BSNL द्वारा उपग्रह बैंडविथ वृद्धि।

  • उत्तर-पूर्व क्षेत्र: 2,485 मोबाइल टावर, 3,389 स्थानों में कनेक्टिविटी।

  • National Broadband Mission 2.0 (NBM 2.0): 1.7 लाख गाँवों तक ब्रॉडबैंड पहुँचाना।

  • BharatNet प्रोजेक्ट: 2.14 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट।

  • PM-WANI: 3.73 लाख सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट।

  • MoES GIS-based DSS: मौसम और आपदा चेतावनी के लिए इंटरनेट आधारित निर्णय प्रणाली।

भारत के प्रमुख ब्रॉडबैंड उपग्रह

ISRO के उच्च-थ्रूपुट उपग्रह (HTS) जैसे GSAT-19, GSAT-29, GSAT-11 और GSAT-N2 भारत में ब्रॉडबैंड सेवाओं को मजबूत करते हैं। ये दूरदराज़ क्षेत्रों, इन-फ्लाइट कम्युनिकेशन, रक्षा नेटवर्क और आपदा प्रबंधन में सहायक हैं।

निष्कर्ष

विकसित भारत 2047 के विज़न के अनुरूप, उपग्रह इंटरनेट डिजिटल कनेक्टिविटी का प्रमुख साधन बन रहा है। यह दूरदराज़ और अविकसित क्षेत्रों में विश्वसनीय पहुँच प्रदान करता है, रक्षा और आपदा प्रबंधन में सहायता करता है, और डिजिटल विभाजन को कम करता है। भारत अंतरिक्ष तकनीक के माध्यम से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और नेतृत्व को मजबूत कर रहा है, ताकि प्रत्येक नागरिक तक कनेक्टिविटी के लाभ पहुँचे।


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