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पीपला फाउंडेशन ने रीवा में 5000 लीटर की टंकी स्थापित की,ग्रामीणों को जल संकट से मिली राहत

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आरंग- भीषण गर्मी और गहराते जल संकट के बीच आरंग क्षेत्र के लोरिक नगर (गढ़रीवां) के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर आई है। स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए ग्राम पंचायत के सहयोग से गांव में 5000 लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी स्थापित की है। 

इस पहल से न केवल पानी की बर्बादी रुकी है, बल्कि राहगीरों और पशुओं के लिए भी पेयजल सुलभ हो गया है। दरअसल, गांव के ट्यूबवेल के पास भंडारण की व्यवस्था न होने के कारण रोजाना हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा था। ग्रामीणों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था। समस्या को देखते हुए पीपला फाउंडेशन के सदस्यों ने सरपंच घसियाराम साहू के समक्ष टंकी लगाने का प्रस्ताव रखा। पंचायत ने तत्काल सहमति देते हुए टंकी के लिए पक्का चबूतरा, पाइपलाइन और नलों की व्यवस्था कराई। शनिवार को आयोजित  कार्यक्रम में टंकी का विधिवत शुभारंभ किया गया। अब इस सुविधा का लाभ रीवा के साथ-साथ लखौली और कुकरा के ग्रामीणों को भी मिल रहा है। मुख्य मार्ग पर स्थित होने के कारण यहां से गुजरने वाले राहगीरों के लिए भी यह प्यास बुझाने का केंद्र बन गया है। गांव के सरपंच घसियाराम साहू का कहना है कि गांव में पानी की समस्या गंभीर थी। संस्था और पंचायत के इस तालमेल से अब पानी सहेजने में मदद मिलेगी। हम पीपला फाउंडेशन के इस सेवाभावी कार्य का आभार व्यक्त करते हैं। इस शुभारंभ अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू और फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने इस कार्य को जनहित में मील का पत्थर बताया। इस दौरान कोषाध्यक्ष कोमल लाखोटी, सचिव अभिमन्यु साहू, संयुक्त सचिव संजय मेश्राम सहित सक्रिय सदस्य सीताराम साहू, ईश्वरी साहू, पोखराज साहू, हीराधर धीवर पंच वेदप्रकाश साहू, रमेश चंद्राकर, मीरा चंद्राकर, समाजसेवी अश्वनी चंद्राकर ,पी के चंद्राकर,  सहित ग्रामीण उपस्थित थे।


जल जीवन मिशन 2.0 को गति देने के लिए जिला कलेक्टरों के 8वें पेयजल संवाद का आयोजन

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जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DDWS) ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों का 8वां पेयजल संवाद आयोजित किया। इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर/उपायुक्त तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के जल जीवन मिशन (JJM) के मिशन निदेशक शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के कार्यान्वयन को तेज करना और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।

इस संवाद की अध्यक्षता DDWS के सचिव अशोक के.के. मीना ने की। इस अवसर पर राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (NJJM) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन तथा DDWS के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

सचिव ने अपने संबोधन में बताया कि 2019 में शुरू हुए जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप और सामुदायिक स्रोतों पर निर्भरता को घटाकर घर-घर नल जल आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी प्रगति हुई है। कोविड काल की चुनौतियों के बावजूद मिशन ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और अब इसे दिसंबर 2028 तक बढ़ाया गया है। वर्तमान में लगभग 81% ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन उपलब्ध है।

उन्होंने स्थिरता (Sustainability) पर जोर देते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे का निर्माण केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से हुआ है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक कार्यक्षमता स्थानीय शासन पर निर्भर करती है। JJM 2.0 के तहत गांव के भीतर की जल आपूर्ति व्यवस्था ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी, जबकि बड़े ढांचे राज्य सरकारों के पास रहेंगे। ग्राम पंचायतों को स्थानीय सेवा प्रदाता के रूप में कार्य करना होगा और ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।

उन्होंने जिला स्तर पर सेवा सुधार के लिए DWSM बैठकों के महत्व पर भी जोर दिया और जिला कलेक्टरों से हर महीने नियमित बैठकें करने, पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की समीक्षा करने तथा विवरण डैशबोर्ड पर अपलोड करने का आग्रह किया।

सचिव ने यह भी बताया कि 1 अप्रैल 2024 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के क्रियान्वयन में जिला कलेक्टरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है, जिसकी निगरानी सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की जा रही है।

अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने कहा कि JJM 2.0 और अन्य सुधारों के तहत जिला स्तर के नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जिला कलेक्टर मिशन के लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन, समन्वय और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने आगामी 22 मई 2026 को होने वाली जिला कलेक्टरों की बैठक में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया, जिसमें JJM 2.0 और SBM-G के तहत प्राथमिक कार्यों पर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।

परियोजना निगरानी और सुधार प्रणाली पर प्रस्तुति

बैठक में सुजलम भारत PM गति शक्ति मोबाइल ऐप के प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग मॉड्यूल पर प्रस्तुति दी गई, जिसके माध्यम से जल जीवन मिशन की योजनाओं की निर्माण, परीक्षण, कमीशनिंग और हैंडओवर तक की निगरानी की जा सकती है।

इसके साथ ही व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (CIRP) फ्रेमवर्क पर भी प्रस्तुति दी गई, जिसमें भौतिक प्रगति, वित्तीय प्रबंधन, जल गुणवत्ता, शासन सुधार और डिजिटल निगरानी को शामिल किया गया है।

जिलों द्वारा सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रस्तुति

नागपुर (महाराष्ट्र):

जल संकट वाले क्षेत्र में सोलर आधारित पंप और वर्षा जल संचयन से 24 घंटे जल आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे लागत में भारी कमी आई।

कोरापुट (ओडिशा):

पहाड़ी क्षेत्रों में स्प्रिंग आधारित प्रणाली, सोलर योजनाएं और डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति मजबूत की गई।

कोल्लम (केरल):

100% मीटरिंग, 24 घंटे शिकायत निवारण प्रणाली और 24 घंटे जल आपूर्ति प्रणाली लागू की गई।

मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश):

नदी पुनर्जीवन, तालाब संरक्षण और समुदाय आधारित जल संरक्षण अभियानों के माध्यम से जल स्तर में सुधार किया गया।

पाली (राजस्थान):

जल संकट से निपटने के लिए भूजल और सतही जल के संयोजन, वर्षा जल संचयन और रिचार्ज संरचनाओं को अपनाया गया।

धनबाद (झारखंड):

डिजिटल ऐप के माध्यम से जल संपत्तियों की निगरानी, तालाब पुनर्जीवन और सूखे बोरवेल्स को पुनः सक्रिय किया गया।

निष्कर्ष

इन प्रस्तुतियों ने जल जीवन मिशन के तहत किए जा रहे प्रयासों, चुनौतियों और नवाचारों को उजागर किया। अंत में अतिरिक्त सचिव कमल किशोर सोआन ने जिला कलेक्टरों की सक्रिय भूमिका को मिशन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

मिशन अमृत सरोवर बना खुशहाली का स्रोत

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 20 साल पुराने तालाब का कायाकल्प,  सिंचाई और मछलीपालन से बदल रही है ग्रामीणों की जिंदगी

रायपुर-कोरिया जिले के सोनहत जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम किशोरी में मिशन अमृत सरोवर के तहत नवीनीकृत हुआ तालाब आज ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे रहा है। कभी अनुपयोगी हो चुका यह तालाब अब ग्रामीणों के लिए दैनिक निस्तार, पशुओं के पेयजल, खेती-बाड़ी और आजीविका संवर्धन का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है।

20 साल पुराने तालाब का कायाकल्प

ग्राम पंचायत किशोरी में लगभग 20 वर्ष पुराना तालाब लंबे समय तक उपेक्षा के कारण अनुपयोगी हो गया था। वित्तीय वर्ष 2022- 23 में पंचायत के प्रस्ताव पर इसे मिशन अमृत सरोवर के तहत पुनर्जीवित किया गया। करीब 10 लाख रुपये की लागत से तालाब का जीर्णाेद्धार कर इसकी जलभराव क्षमता को तीन गुना बढ़ाकर 10 हजार घनमीटर कर दिया गया।

18 एकड़ खेतों में पहुंचा पानी

तालाब के पुनरुद्धार से आसपास के किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। किसान मनोज रक्सेल और अरविन्द सिंह की तीन-तीन एकड़, जबकि सुरेन्द्र, लक्ष्मण, वीरेन्द्र और आनंद की दो-दो एकड़ से ज्यादा भूमि अब सिंचित हो रही है। इसके अलावा जगबली यादव की लगभग सवा एकड़ ज़मीन भी इस सरोवर से सींची जा रही है। किसानों ने बताया कि अब वे खरीफ के साथ रबी की फसलें भी लेने लगे हैं, जिससे उनकी आमदनी में सुधार हुआ है।

महिलाओं की कमाई 75 हजार रुपए

ग्राम पंचायत ने अमृत सरोवर को आजीविका संवर्धन के रूप में स्थानीय महिला स्व-सहायता समूह को लीज पर उपलब्ध कराया है। जय मां महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य महिलाओं ने इस तालाब से बीते ग्रीष्म में 75 हजार रुपये की मछली बेचकर लाभ कमाया। समूह की अध्यक्ष सोनकुंवर और सचिव जीराबाई ने बताया कि इस साल लगभग तीन लाख रुपए के मछली उत्पादन की उम्मीद है। यह पहल महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का जरिया और पोषण संवर्धन का साधन बन रही है।

खुशहाली का प्रतीक बना अमृत सरोवर

किशोरी ग्राम पंचायत का यह अमृत सरोवर आज केवल जल संरक्षण का साधन नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि और महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन दिखाई दे रहा है।


अब समुद्र से मिलेगा पीने का पानी!

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 नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम : खारे समुद्र के पानी से सस्ता और तेज़ पीने का पानी

एक नया साइफ़न-आधारित थर्मल डीसैलिनेशन सिस्टम अब खारे समुद्री पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदल सकता है—मौजूदा तरीकों की तुलना में तेज़, सस्ता और अधिक भरोसेमंद।

पारंपरिक सोलर स्टिल्स जो प्रकृति के जलचक्र की नकल करते हैं, लंबे समय से जल शोधन के सरल उपकरण माने जाते रहे हैं। लेकिन इनमें दो प्रमुख चुनौतियाँ आती हैं:

  • नमक जमना – वाष्पीकरण सतह पर परत जम जाती है, जिससे जल प्रवाह रुक जाता है।

  • सीमा बाधाएँ – विकिंग (wicking) सामग्री पानी को केवल 10–15 सेमी तक ही खींच सकती है, जिससे उत्पादन सीमित रहता है।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के शोधकर्ताओं ने इन दोनों चुनौतियों को एक सरल सिद्धांत—साइफ़न प्रक्रिया (siphonage)—से हल किया है।

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

सिस्टम के केंद्र में है एक कंपोज़िट साइफ़न:

  • कपड़े की विक सतत रूप से खारे पानी को खींचती है।

  • गुरुत्वाकर्षण पानी को निरंतर प्रवाहित करता है।

  • नमक जमने से पहले ही बहकर निकल जाता है, जिससे सतह साफ़ रहती है।

खारा पानी एक गर्म धातु सतह पर पतली परत में फैलता है, वाष्पित होता है और पास ही ठंडी सतह पर (सिर्फ़ 2 मिमी की दूरी पर) संघनित होकर मीठे पानी में बदल जाता है। यह अत्यंत संकीर्ण एयर-गैप दक्षता को बढ़ाता है और सूर्य की रोशनी में प्रति वर्ग मीटर प्रति घंटे 6 लीटर से अधिक साफ़ पानी उपलब्ध कराता है—जो पारंपरिक सोलर स्टिल्स से कई गुना अधिक है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • बहु-स्तरीय डिज़ाइन: गर्मी का पुन: उपयोग करके अधिकतम उत्पादन।

  • कम लागत और टिकाऊ: केवल एल्युमिनियम और कपड़े जैसे साधारण पदार्थों से निर्मित।

  • ऊर्जा लचीला: सौर ऊर्जा या अपशिष्ट ऊष्मा से संचालित।

  • नमक प्रतिरोधी: 20% तक खारे पानी को भी बिना अवरुद्ध हुए शुद्ध कर सकता है।

संभावित उपयोग

  • दूरदराज़ और ऑफ-ग्रिड समुदाय

  • आपदा प्रभावित क्षेत्र

  • शुष्क तटीय इलाके

  • द्वीप देश

यह शोध पत्रिका Desalination में प्रकाशित हुआ है और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा समर्थित है।

शोधकर्ताओं के शब्दों में, यह तकनीक है—“स्केलेबिलिटी, नमक-प्रतिरोध और सरलता”—एक प्यासे विश्व के लिए समाधान।


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