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वाणिज्य विभाग का विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता, कार्यकुशलता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी में सफलता

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भारत सरकार के वाणिज्य विभाग ने लंबित संदर्भों के निपटान के लिए विशेष अभियान 5.0 को सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर, 2025 तक आयोजित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य विभाग, इसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) और संबद्ध संगठनों में स्वच्छता, कार्यकुशलता में सुधार और लंबित शिकायतों का समाधान करना था।

इस पहल के माध्यम से प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना, समय पर मुद्दों का निपटान सुनिश्चित करना, और कार्यालयों में प्रबंधन और स्वच्छता मानकों को बढ़ाना मुख्य लक्ष्य थे।

अभियान की प्रमुख उपलब्धियां

  • 88,385 फाइलों की समीक्षा की गई और 46,255 फाइलें हटाई गईं।

  • 277 स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए।

  • ई-कचरा और स्क्रैप निपटान से लगभग ₹70 लाख का राजस्व उत्पन्न हुआ।

  • 36,005 वर्ग फुट कार्यालय स्थान पुनः प्राप्त किया गया।

अभियान के दौरान अपनाई गई सर्वोत्तम प्रथाएँ

  • ECGC, मुंबई मुख्यालय में बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग पॉइंट्स की स्थापना।

  • छत पर सौर पैनल सिस्टम की स्थापना और ज़ीरो कार्बन ज़ोन का निर्माण।

  • कार्यालय परिसर में हरियाली का विकास, पार्किंग सुविधाओं में सुधार और स्थान का अनुकूलन।

  • Madras Export Processing Zone (MEPZ) परिसर के पास झील का पुनर्जीवन।

  • रिकॉर्ड प्रबंधन और डिजिटलाइजेशन का कार्य।

  • Integrated Solid Waste Management की स्थापना।

  • ई-कचरा जागरूकता अभियान, विद्युत उपकरणों का इन्वेंटरी प्रबंधन और लिफ्ट निरीक्षण।

निष्कर्ष

विशेष अभियान 5.0 के तहत ये सभी प्रयास स्वच्छता, कार्यकुशलता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की मजबूत संस्कृति को वाणिज्य विभाग के कार्यालयों में स्थापित करने में सहायक रहे। नवीनीकरण, रिकॉर्ड प्रबंधन, डिजिटलाइजेशन और ई-कचरा निपटान पर ध्यान केंद्रित करके इस अभियान ने कार्यालयों में स्वच्छता बढ़ाई और सरकार की अच्छे शासन और प्रशासनिक उत्कृष्टता की दृष्टि को आगे बढ़ाया।


स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0: जनसहभागिता से बदले शहरों के चेहरे — अलप्पुझा, मेटपल्ली, माछर्ला और जमशेदपुर बने स्वच्छता के प्रतीक

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स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) ने शहरों के परिदृश्य को बदलते हुए स्वच्छता को जन-आंदोलन (जन आंदोलन) का रूप दे दिया है, जिससे सफाई एक साझा नागरिक जिम्मेदारी बन गई है। स्वच्छता ही सेवा जैसे अभियान और क्लीनलिनेस टारगेट यूनिट्स (CTUs) जैसी पहल ने समुदायों को एकजुट किया है, जिससे उपेक्षित डंपिंग स्थलों को स्वच्छ, सुंदर और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में बदला जा रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत देशभर के शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) अब दृश्य स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत अंधेरे, गंदे और कचरे से भरे इलाकों को क्लीनलिनेस टारगेट यूनिट्स (CTUs) के माध्यम से साफ-सुथरा और आकर्षक बनाया जा रहा है।

केरल के अलप्पुझा नगर पालिका की मिसाल

अलप्पुझा नगर पालिका ने नगर निगम कार्यालय परिसर के सामने स्थित 15 सेंट की अनुपयोगी भूमि को सौंदर्यपूर्ण रूप से परिवर्तित कर शहरी परिवर्तन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। जल प्राधिकरण के स्वामित्व वाली यह भूमि वर्षों से झाड़ियों से घिरी हुई थी और यहां स्थित बड़ा पानी का टैंक भी जर्जर हालत में था। नगर पालिका ने लगभग 5.4 टन कचरा हटाकर इस क्षेत्र को साफ किया और टैंक को रंगीन स्वच्छता संदेशों से सजा दिया।

आसपास की भूमि को पीले और नारंगी गेंदे (गुलदाउदी) के फूलों से सुसज्जित बगीचे में बदल दिया गया। इन फूलों का उपयोग ओणम उत्सव के दौरान पारंपरिक पुक्कलम सजावट में किया गया, जिससे यह पहल सांस्कृतिक महत्व से भी जुड़ गई। यह स्थल अब अलप्पुझा की स्वच्छता, नागरिक गर्व और सतत कचरा प्रबंधन का प्रतीक बन गया है।

तेलंगाना के मेटपल्ली नगर पालिका की पहल

मेटपल्ली नगर पालिका ने स्वच्छता ही सेवा अभियान के दौरान चेनाकेशवनाथ स्वामी मंदिर के समीप स्थित कोनेरू (पवित्र तालाब) का कायाकल्प किया। तालाब प्लास्टिक और मलबे से भरा हुआ था। नगर पालिका ने लगभग 4 टन कचरा हटाकर इसे स्वच्छ किया।

लगभग 80 प्रतिभागियों — नगर कर्मियों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), युवाओं और मंदिर समिति के सदस्यों — ने मिलकर तालाब की खुदाई और सफाई की। अब कोनेरू साफ और पवित्र जल से भरा हुआ है, जिससे मंदिर परिसर का आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व पुनर्स्थापित हो गया है। यह पहल नागरिक भागीदारी और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का सशक्त उदाहरण है।

आंध्र प्रदेश के माछर्ला नगर पालिका की भागीदारी

माछर्ला नगर पालिका ने स्वच्छता ही सेवा 2025 अभियान के तहत यदवुला बाजार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सफाई और सौंदर्यीकरण अभियान चलाया। यह स्थल पहले पशु अपशिष्ट का डंपिंग स्थल था।

1,500 से अधिक स्वयंसेवकों — जिनमें छात्र, युवा, महिला SHGs और सफाईकर्मी शामिल थे — ने मिलकर 150 मीट्रिक टन कचरा एकत्र किया, जिसे वेस्ट-टू-कंपोस्ट प्लांट में भेजा गया। सफाई के बाद सड़कों को समतल किया गया, रंग-बिरंगी रंगोली और सजावटी सीमाओं से क्षेत्र को सुंदर बनाया गया, और 150 पौधे लगाए गए।

झारखंड के जमशेदपुर नगर निगम की पहल

जमशेदपुर नगर निगम ने कैलाश सरोवर की सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया। 2 टन से अधिक कचरा हटाकर इस जलाशय को स्वच्छ और सुंदर बनाया गया। इस पहल में स्थानीय नागरिकों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और सफाई मित्रों की सक्रिय भागीदारी रही।

नागरिक नेतृत्व से परिवर्तन की दिशा

इन शहरों की ये प्रेरणादायी कहानियाँ बताती हैं कि स्वच्छ भारत मिशन अब केवल सफाई अभियान नहीं रहा, बल्कि यह एक जन-भागीदारी आधारित शहरी पुनर्जागरण आंदोलन बन चुका है, जो सतत विकास, सामुदायिक स्वामित्व और जीवन गुणवत्ता में सुधार की दिशा में अग्रसर है।


NCL विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता, स्क्रैप पुनर्चक्रण और सतत पहल में सक्रिय भूमिका

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प्रधानमंत्री के आह्वान पर, कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में, सिंगरौली आधारित कोल इंडिया कंपनी की शाखा नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) विशेष अभियान 5.0 में सक्रिय रूप से भाग ले रही है इस अभियान में सफाई, रिकॉर्ड प्रबंधन, स्क्रैप निपटान और सतत पहल पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

“वेस्ट टू ब्यूटी” विजन के तहत, खनन कार्यों के दौरान उत्पन्न लोहे के स्क्रैप से राष्ट्रीय पक्षी मोर और बारसिंगा की भव्य मूर्तियाँ बनाई जा रही हैं। यह कला कार्य NCL की पर्यावरण संरक्षण और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

पर्यावरण अनुकूल पहलें:

  • NCL ने अपने प्रोजेक्ट्स में पाँच बायो-टॉयलेट्स स्थापित किए हैं ताकि कर्मचारियों और आस-पास की समुदायों के लिए स्वच्छ और सतत शौचालय सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।

  • ये बायो-टॉयलेट पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखते हुए स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों का समर्थन करते हैं।

सामुदायिक सहभागिता:

  • 17 अक्टूबर को केंद्रीय विद्यालय, सिंगरौली में “Waste to Art” प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्रों ने स्क्रैप सामग्री के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग पर रचनात्मक विचार प्रस्तुत किए।

  • इस प्रतियोगिता ने सतत कचरा प्रबंधन प्रथाओं में व्यापक भागीदारी और जागरूकता को प्रोत्साहित किया।

NCL विशेष अभियान 5.0:

  • सफाई अभियानों, जन सहभागिता कार्यक्रमों और कुशल रिकॉर्ड प्रबंधन के माध्यम से जागरूकता और कार्रवाई को बढ़ावा दे रहा है।

  • कंपनी स्वच्छता, प्रशासनिक दक्षता और पर्यावरणीय जागरूकता में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सरकार के स्वच्छ और हरित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं।

अभियान के लक्ष्य:

  • 75 स्थानों की सफाई

  • 85,000 वर्ग फीट क्षेत्र में स्वच्छता

  • 2,500 मीट्रिक टन स्क्रैप का निपटान

  • 350 भौतिक फाइलों की समीक्षा

  • 9,000 ई-फाइलों का परीक्षण

NCL की यह पहल न केवल संगठन के भीतर बल्कि समुदाय और पर्यावरण के प्रति सतत जागरूकता और जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ स्वच्छता पहल का नेतृत्व किया

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 25 सितंबर 2025 को 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' स्वच्छता पहल का नेतृत्व किया। यह आयोजन रक्षा मंत्रालय के स्वच्छोत्सव 2025 के हिस्से के रूप में आर्मी मुख्यालय यूनिट रन कैंटीन में हुआ। इस अभियान का उद्देश्य सामूहिक प्रयासों से स्वच्छ, हरित और स्वस्थ वातावरण का निर्माण करना था।

कार्यक्रम के दौरान, राजनाथ सिंह ने 'स्वच्छता संकल्प' लिया और सफाई मित्रों को उनके समर्पण के लिए सम्मानित किया। उन्होंने एक वृक्षारोपण अभियान में भी भाग लिया, जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और शून्य अपशिष्ट वातावरण को बढ़ावा देने का संदेश दिया। साथ ही, उन्होंने 100 NCC कैडेट्स के साथ सफाई दौड़ की शुरुआत की, जो युवा पीढ़ी को स्वच्छ भारत अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का प्रतीक था।

रक्षा मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो अनुशासन और जिम्मेदारी को दर्शाती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख किया कि स्वच्छता एक जन आंदोलन बननी चाहिए, जिसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी हो। रक्षा मंत्रालय इस दिशा में सामूहिक स्वच्छता अभियानों, अपशिष्ट से संपत्ति निर्माण और सैन्य शिविरों को स्वच्छता के आदर्श केंद्रों में बदलने के प्रयास कर रहा है।

उन्होंने यह भी गर्व व्यक्त किया कि सभी सैन्य शिविर अब खुले में शौच से मुक्त हैं, जो सशस्त्र बलों की अनुशासन और नागरिक कर्मचारियों की समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने सभी से स्वच्छता को राष्ट्रीय कर्तव्य के रूप में अपनाने का आह्वान किया, ताकि एक स्वस्थ, स्वच्छ और विकसित भारत का निर्माण हो सके।

इस पहल में रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, जनरल अनिल चौहान (सीडीएस), जनरल उपेंद्र द्विवेदी (सीओएएस), एयर चीफ मार्शल एपी सिंह (सीएएस), डॉ. नितिन चंद्रा (सचिव, ईएसडब्ल्यू), डॉ. समीर वी कामत (सचिव, डीआरडीओ और अध्यक्ष), डॉ. मयंक शर्मा (वित्तीय सलाहकार, रक्षा सेवाएं) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जवान उपस्थित थे।

यह आयोजन स्वच्छता ही सेवा अभियान के तहत 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चल रहे मंत्रालय के व्यापक प्रयासों का हिस्सा था, जो राष्ट्रव्यापी स्वच्छता आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किए जा रहे हैं।


छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्ग बन रहे ग्रीन कॉरिडोर: NHAI ने इस साल लगाए 2.71 लाख पौधे

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'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' अभियान के तहत सड़कों के किनारे और डिवाइडर्स पर पौधरोपण

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग: तरक्की की राह के साथ-साथ हरियाली की छांव भी – मुख्यमंत्री साय

रायपुर-भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) जहां एक ओर देश में सड़कों का जाल बिछा रहा है, वहीं दूसरी ओर राजमार्गों के किनारों और डिवाइडर्स पर पौधे लगाकर ग्रीन कॉरिडोर भी तैयार कर रहा है। 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' अभियान के तहत इस साल छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे और डिवाइडर्स पर 2 लाख 71 हजार से ज्यादा पौधे लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार के साथ-साथ प्राधिकरण उन्हें 'ग्रीन कॉरिडोर' में भी बदल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ अभियान छत्तीसगढ़ में हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की नई दिशा दे रहा है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 2 लाख 71 हजार से अधिक पौधे रोपित होना इस बात का प्रमाण है कि सड़क निर्माण केवल विकास की आधारशिला नहीं, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु और हरित जीवन का भी संकल्प है। राष्ट्रीय राजमार्ग से छत्तीसगढ़ में नागरिकों को तरक्की की राह के साथ ही हरियाली की छांव भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर का यह प्रयास छत्तीसगढ़ को न केवल यातायात सुविधा में बल्कि पर्यावरणीय संतुलन में भी देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों में NHAI ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वाकांक्षी 'एक पेड़ माँ के नाम 2.0' अभियान के अंतर्गत इस साल निर्धारित लक्ष्य से अधिक वृक्षारोपण किया है। रायपुर-विशाखापट्टनम (NH-130CD) परियोजना में सर्वाधिक 97,145 पौधे लगाए गए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र सीमा-दुर्ग-रायपुर-ओडिशा सीमा (NH-53) पर 46,141 पौधे, चांपा-कोरबा-कटघोरा (NH-149B) मार्ग पर 23,020 पौधे, बिलासपुर-कटघोरा (NH-130) मार्ग पर 16,847 पौधे, बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव (NH-130A) मार्ग पर 14,400 पौधे तथा सिमगा-रायपुर-धमतरी (NH-30) परियोजना में 5,406 पौधे रोपे गए हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों के डिवाइडर्स पर मीडियन प्लांटेशन के रूप में पौधे लगाए गए हैं, जबकि किनारों पर एवेन्यू प्लांटेशन के रूप में पौधरोपण किया गया है। इनमें बड़ी संख्या में फलदार और छायादार वृक्ष भी शामिल हैं। नए इलाकों में पौधरोपण के साथ ही पिछले वर्षों में क्षतिग्रस्त हुए पौधों को बदलने के लिए 68,297 जगहों पर रिप्लांटेशन भी किया गया है। इस तरह चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक (15 सितम्बर 2025 तक) कुल 2,71,253 पौधे राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगाए गए हैं।

NHAI, रायपुर के क्षेत्रीय अधिकारी (Regional Officer) प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ सिर्फ एक वृक्षारोपण अभियान नहीं है, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ी के लिए एक निवेश है। हमारा उद्देश्य सिर्फ सड़कों का निर्माण करना नहीं, बल्कि एक स्वस्थ और सुंदर पर्यावरण का भी निर्माण करना है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों में इस साल 2,02,959 नए पौधे लगाए गए हैं, जबकि 68,297 जगहों पर रिप्लांटेशन किया गया है। इस तरह छत्तीसगढ़ के राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस साल (2025-26 में) अब तक कुल 2,71,253 पौधे लगाए जा चुके हैं।


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