Media24Media.com: #ChiragPaswan

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #ChiragPaswan. Show all posts
Showing posts with label #ChiragPaswan. Show all posts

अहमदाबाद में खाद्य प्रसंस्करण पर दक्षिण एशियाई उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ, रोजगार सृजन और सतत विकास पर जोर

No comments Document Thumbnail

अहमदाबाद- भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने विश्व बैंक समूह की अगुवाई वाली SAPLING पहल के सहयोग से अहमदाबाद, गुजरात में “रोजगार सृजन और सतत विकास के लिए खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा: दक्षिण एशिया में मूल्य संवर्धन के नए अवसर” विषय पर दो दिवसीय क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद का शुभारंभ किया।

इस दो दिवसीय सम्मेलन में दक्षिण एशियाई देशों के लगभग 200 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, विकास साझेदार, नवाचारकर्ता, शोधकर्ता, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हैं। सम्मेलन का उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना तथा क्षेत्र में लचीली, समावेशी और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का विकास करना है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवानने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने मूल्य संवर्धन, तकनीकी नवाचार और क्षेत्रीय सहयोग को दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रमुख आधार बताया।

चिराग पासवान ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है, जो रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी, किसानों की आय बढ़ाने तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की नीतिगत पहलें और अवसंरचना विकास के प्रयास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।

गुजरात सरकार के कृषि मंत्री जीतुभाई वघानी ने विभिन्न देशों की भागीदारी का स्वागत करते हुए खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि परिवर्तन का प्रमुख इंजन बताया। उन्होंने गुजरात में राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) का परिसर स्थापित करने की वकालत की, ताकि कृषि और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके।

उद्घाटन सत्र में विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी, गेट्स फाउंडेशन की भारत कंट्री डायरेक्टर अर्चना व्यास तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव अविनाश जोशी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है—

  • दक्षिण एशिया में खाद्य प्रसंस्करण की संभावनाओं को बढ़ावा देना

  • कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना

  • असंगठित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों का औपचारिककरण

  • तकनीक आधारित नवाचार और स्मार्ट प्रोसेसिंग

  • खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता और वैश्विक मानक

  • निवेश जुटाने और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना

  • दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग और नीतिगत समन्वय

कार्यक्रम में नेस्ले, बायर, राबोबैंक, अजीनोमोटो, आईटीसी, सेवा (SEWA), नाबार्ड तथा फूड इंडस्ट्री एशिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन के साथ एक इनोवेशन फेयर का भी आयोजन किया गया है, जिसमें कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, टिकाऊ पैकेजिंग, स्मार्ट प्रोसेसिंग तकनीक और भंडारण प्रणालियों से जुड़ी नवीन तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

इस अवसर पर खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट “भारत में खाद्य प्रसंस्करण के स्तर का आकलन” भी जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार देश में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर वर्ष 2016 में लगभग 10 प्रतिशत से बढ़कर 2023 में करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अध्ययन में फल, सब्जी और डेयरी जैसे शीघ्र नष्ट होने वाले उत्पादों में मूल्य संवर्धन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया गया है।

यह संवाद विश्व बैंक समूह की AgriConnect और SAPLING पहल के अनुरूप आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य नीतिगत सुधारों, निवेश और तकनीकी नवाचार के माध्यम से दक्षिण एशिया में टिकाऊ और पोषण-केंद्रित खाद्य प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम से क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती मिलने, निजी निवेश को प्रोत्साहन, एमएसएमई क्षेत्र के विकास तथा खाद्य प्रसंस्करण आधारित रोजगार सृजन के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।

विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला आयोजित, 5 वर्षों में 30 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य

No comments Document Thumbnail

विशाखापत्तनम- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग तथा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। दो दिवसीय इस कार्यशाला में मूल्य संवर्धन, स्थिरता, बाजार पहुंच, नवाचार और अवसंरचना विकास के माध्यम से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्यशाला में एन. चंद्रबाबू नायडू,पीयूष गोयल,राजीव रंजन सिंह,किंजारापु राममोहन नायडू,चिराग पासवान सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार समन्वित दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात के मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में 30 अरब अमेरिकी डॉलर के समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, गुणवत्ता सुधार, स्थिरता और नए निर्यात बाजारों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

पीयूष गोयल ने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक उत्पादों सहित मूल्य संवर्धित समुद्री खाद्य उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्यातकों से हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में राज्य की अग्रणी भूमिका तथा समुद्री खाद्य निर्यात में उसके महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने आंध्र प्रदेश को सतत जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात लगभग 73,890 करोड़ रुपये (8.46 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया है। फ्रोजन श्रिम्प (झींगा) देश का प्रमुख निर्यात उत्पाद बना हुआ है।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजारापु राममोहन नायडू ने उच्च मूल्य वाले समुद्री खाद्य निर्यात के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो अवसंरचना की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और तकनीकी नवाचार की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिक्खी ने निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अवसंरचना विकास, प्रमाणन, नवाचार, मूल्य संवर्धन और बाजार पहुंच को वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का प्रमुख आधार बताया।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न संस्थानों, समुद्री खाद्य निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग संगठनों, स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं तथा जलीय कृषि किसानों ने भाग लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PMKSSY), किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को भी लाभ वितरित किए गए।

चर्चा सत्रों में रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्धता, कोल्ड चेन अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, प्रमाणन, ट्रेसबिलिटी और सतत मत्स्य पालन जैसे मुद्दों पर विस्तार से विचार किया गया। दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में ट्रेसबिलिटी सिस्टम, सतत प्रमाणन, मूल्य संवर्धन, निर्यात संवर्धन, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन तथा समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए संभावित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) ढांचे पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का समापन समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, ट्रेसबिलिटी, मूल्य संवर्धन, निर्यात अवसंरचना, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। कार्यशाला से प्राप्त सुझावों को भारत के समुद्री खाद्य निर्यात की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्लास्टइंडिया 2026 में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का दौरा, प्लास्टिक इंडस्ट्री स्टेटस रिपोर्ट 2025 जारी

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित विश्व प्रसिद्ध प्लास्टिक प्रदर्शनी PLASTINDIA 2026 का दौरा किया। यह प्रदर्शनी 5 से 10 फरवरी 2026 तक आयोजित हो रही है।

इस अवसर पर मंत्री पासवान ने Plastic Industry Status Report 2025 का विमोचन किया और स्टार्टअप सर्च इनिशिएटिव के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। यह पहल प्लास्टइंडिया फाउंडेशन और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के सहयोग से विकसित की गई है।

उद्योग जगत को संबोधित करते हुए मंत्री चिराग पासवान ने अपशिष्ट कम करने और तकनीक के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने प्लास्टिक उद्योग के सतत उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य में योगदान की सराहना की।

PLASTINDIA 2026 में भारत और विदेशों से उद्योग नेता, वैश्विक खरीदार, नवप्रवर्तक और नीति निर्माता शामिल हुए हैं, जिससे वैश्विक प्लास्टिक मूल्य श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका उजागर हुई है। रिपोर्ट में उद्योग की वृद्धि, निर्यात और स्थिरता की दिशा में परिवर्तन पर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।



मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के साथ अहम मुलाकात, राज्य में खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगी नई दिशा

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री चिराग पासवान से उनके कार्यालय में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ से जुड़े अनेक जनहित विषयों पर रचनात्मक और सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमं त्रीसाय ने विशेष रूप से राज्य में खाद्य सुरक्षा, कृषि-आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी, एंटरप्रेन्योरशिप एंड मैनेजमेंट (NIFTEM) संस्थान की स्थापना छत्तीसगढ़ में की जाए, ताकि राज्य के युवाओं को आधुनिक खाद्य तकनीक, उद्यमिता तथा नए रोजगारों से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि दृष्टि से छत्तीसगढ़ एक मजबूत राज्य है और यहां ऐसे संस्थान से हजारों छात्रों, किसानों तथा खाद्य-आधारित उद्यमों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस प्रस्ताव को अत्यंत सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि वे इस विषय पर हर संभव सहयोग देंगे और इसे गंभीरता से विचार में लेंगे।

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री साय ने यह अनुरोध भी किया कि वर्ल्ड फूड इंडिया के रीजनल समिट का आयोजन रायपुर में किया जाए। उन्होंने कहा कि रायपुर की समृद्ध खाद्य परंपरा, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और विविधता ऐसे आयोजन के लिए आदर्श गंतव्य बनाती है। यह फेस्टिवल क्षेत्रीय पाक-परंपराओं को वैश्विक पहचान देगा और नए खाद्य-आधारित उद्यमों के लिए बड़े अवसर उत्पन्न करेगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह आयोजन दिल्ली के वर्ल्ड फूड इंडिया अथवा गुवाहाटी के नॉर्थ ईस्ट फूड फेस्ट की तर्ज पर हर दो वर्ष में आयोजित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खाद्य वस्तुओं की जांच के लिए फूड टेस्टिंग लैब तथा खाद्य उत्पादों को सुरक्षित रखने के लिए फूड इर्रेडिएशन यूनिट स्थापित की जानी हैं, जिनके लिए राज्य केंद्र से सहयोग चाहता है। उन्होंने कहा कि धान तथा फल–सब्जी आधारित उद्योगों में बड़े निवेशकों की भागीदारी बढ़ने से किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को व्यापक गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को विशेष महत्व दिया गया है और निवेशकों को अनेक अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत Drools कंपनी द्वारा छत्तीसगढ़ में ₹1,000 करोड़ का निवेश किया जा रहा है, जिससे लगभग 3,000 लोगों को रोजगार मिलेगा और इसका लाभ ग्रामीण व आदिवासी समुदायों तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को राइस ब्रान ऑयल हब के रूप में विकसित करना है, जिससे तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को सुदृढ़ समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ और विकसित भारत 2047 का सपना इन्हीं प्रयासों के माध्यम से साकार होगा।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत तथा इन्वेस्टमेंट कमिश्नर रितु सेन उपस्थित थीं।

FCI ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में OMSS (D) योजना के माध्यम से बनाई मजबूत उपस्थिति

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) ने वर्ल्ड फूड इंडिया 2025, भारत मंडपम, नई दिल्ली में अपने प्रमुख बाज़ार हस्तक्षेप कार्यक्रम ओपन मार्केट सेल स्कीम (डोमेस्टिक), OMSS (D) को प्रदर्शित करके मजबूत और केंद्रित प्रभाव डाला। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज मंत्रालय द्वारा किया गया, जिसमें खाद्य और कृषि व्यवसाय क्षेत्रों के वैश्विक हितधारकों ने भाग लिया। इस मंच ने FCI को OMSS (D) के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भागीदारी को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान किया।

FCI के इस कार्यक्रम में भाग लेने का मुख्य उद्देश्य यह दर्शाना था कि OMSS (D) खाद्यान्न की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने, कीमतों को नियंत्रित करने और छोटे/बड़े उपभोक्ताओं और विक्रेताओं को सीधे पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। FCI ने अपने विशेष और जानकारीपूर्ण स्टॉल के माध्यम से योजना की संरचना, प्रभाव और लाभ को सरल और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। आगंतुकों को पंजीकरण प्रक्रिया, ई-नीलामी तंत्र और योजना की पूरी प्रक्रिया के बारे में लाइव डेमो, प्रिंटेड सामग्री और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से समझाया गया।

इस स्टॉल ने व्यापक जनसंपर्क आकर्षित किया और कार्यक्रम में प्रमुख आकर्षण का केंद्र बन गया। विक्रेता, फूड प्रोसेसर, थोक व्यापारी, छात्र और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि FCI टीम के साथ उत्साहपूर्वक जुड़े, जिन्होंने सभी प्रश्नों का उत्तर दिया और योजना की राष्ट्रीय महत्वता समझाई।

एक महत्वपूर्ण क्षण तब आया जब केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, चिराग पासवान ने FCI स्टॉल का दौरा किया और OMSS पर इसके थीमेटिक फोकस की सराहना की। उन्होंने FCI के सार्वजनिक पहुँच प्रयासों और खाद्यान्न मूल्य स्थिरीकरण में योगदान की प्रशंसा की। मंत्री ने FCI द्वारा प्रस्तुत “Food for All, Life for All” विषय को भी सराहा, जो संगठन की खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

FCI स्टॉल की सफलता FCI दिल्ली क्षेत्र की समर्पित टीम के प्रयासों से संभव हुई, जिसका नेतृत्व Smt. K. P. Asha, जनरल मैनेजर (क्षेत्र) ने किया। टीम ने सुनिश्चित किया कि प्रस्तुति पेशेवर, सुगम और FCI के उद्देश्यों के अनुरूप हो।

स्टॉल का महत्व और बढ़ाने के लिए FCI के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी भाग लिया। इसमें प्रमुख विभागों के कार्यकारी निदेशक, जैसे पर्सनल/सेल्स, स्टोरेज & कॉन्ट्रैक्ट/सिक्योरिटी, क्वालिटी कंट्रोल और नॉर्थ जोन, तथा चीफ जनरल मैनेजर और जनरल मैनेजर शामिल थे। उनकी भागीदारी ने संगठन की एकीकृत दृष्टि और सार्वजनिक संपर्क में उच्च स्तर की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

OMSS के अलावा, स्टॉल ने FCI की व्यापक गतिविधियों जैसे MSP पर खरीद, वैज्ञानिक वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और TPDS वितरण की झलक भी प्रस्तुत की। लाइव प्रदर्शन और डिजिटल टूल्स ने FCI की गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और तकनीकी एकीकरण, जैसे AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और Depot Online System (DOS), को प्रदर्शित किया।

FCI की वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 में भागीदारी न केवल जानकारीपूर्ण थी, बल्कि प्रभावशाली भी रही। इसने रचनात्मक संवाद, नए संपर्क और सार्वजनिक समझ को बढ़ाया कि कैसे FCI राष्ट्र की खाद्य अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है। OMSS (D) पर ध्यान केंद्रित करना मूल्य संवेदनशीलता और बाजार स्थिरीकरण के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक संदेश था।

इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति के माध्यम से FCI ने पारदर्शिता, दक्षता और नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्र की सेवा अपने स्थायी आदर्श वाक्य “Food for All, Life for All” के साथ जारी रखी।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.