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कानून मंत्रालय का ‘रिफॉर्म्स उत्सव एवं चिंतन शिविर-2026’ संपन्न, विकसित भारत-2047 के लिए कानूनी सुधारों का तैयार हुआ रोडमैप

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नई दिल्ली- केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग और विधि कार्य विभाग द्वारा 4 और 5 जुलाई 2026 को राजस्थान के माउंट आबू स्थित ज्ञान सरोवर में दो दिवसीय ‘रिफॉर्म्स उत्सव एवं चिंतन शिविर-2026’ का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और नागरिक-केंद्रित कानूनी व्यवस्था विकसित करने के लिए कानूनी, विधायी और संस्थागत सुधारों पर व्यापक मंथन करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने किया। उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को हाल की उपलब्धियों की समीक्षा करने, कानूनी एवं विधायी सुधारों पर विचार-विमर्श करने और भारत की न्यायिक एवं विधायी व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।

विधायी विभाग एवं विधि कार्य विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने मंत्रालय की उस परिकल्पना को साझा किया, जिसके तहत सुशासन को मजबूत करने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक प्रभावी, सुलभ और भविष्य के अनुरूप कानूनी व्यवस्था विकसित की जाएगी।

कार्यक्रम में अतिरिक्त सचिव डॉ. मनोज कुमार ने शिविर की थीम, उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों की जानकारी दी। दो दिनों तक चले मंथन में कानूनी शासन, विधायी सुधार, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग, तकनीक आधारित प्रशासन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

विचार-विमर्श के बाद मंत्रालय के लिए एक व्यापक विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया, जिसमें कानूनी एवं संस्थागत सुधारों से जुड़े ठोस सुझाव और उनके क्रियान्वयन के लिए कार्ययोजना शामिल की गई।

समापन सत्र में सचिव डॉ. राजीव मणि ने ‘संकल्प पत्र’ जारी किया। इसमें अधिकारियों ने संविधान और विधि के शासन के प्रति पूर्ण निष्ठा बनाए रखने, कानूनी प्रक्रियाओं को सरल, स्पष्ट और नागरिक-केंद्रित बनाने, तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने तथा ईमानदारी, नवाचार और उत्कृष्टता के साथ राष्ट्रसेवा का संकल्प लिया।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शिविर के सफल आयोजन पर दोनों विभागों के अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह पहल भारत की कानूनी एवं विधायी व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और नागरिक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिविर में तैयार सुधार एजेंडा विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चिंतन शिविर–2026 का समापन, आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाने पर जोर

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नई दिल्ली: प्रतापराव जाधव, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने दो दिवसीय चिंतन शिविर–2026 के समापन सत्र की अध्यक्षता की। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन का उद्देश्य आयुष क्षेत्र में नीति, शासन और क्रियान्वयन को मजबूत करना था।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा कि आयुष केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि एक समग्र स्वास्थ्य और जीवनशैली का दृष्टिकोण है, जो विशेष रूप से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

उन्होंने आयुष को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एकीकृत करने, साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे आयुष ग्रिड व टेलीमेडिसिन के उपयोग को बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दूसरे दिन नीति समन्वय और मंत्रालयों के बीच सहयोग पर चर्चा हुई। इस दौरान विनोद पॉल,पुण्य सलिला श्रीवास्तवऔर प्रीति सूदन जैसे वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

विनोद पॉल ने आधुनिक चिकित्सा और आयुष के एकीकरण के माध्यम से सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज हासिल करने की बात कही। वहीं, पुन्या सलिला श्रीवास्तव ने आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में शामिल करने और डिजिटल हेल्थ सिस्टम के उपयोग पर जोर दिया।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि यह शिविर भविष्य की रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है, जिससे आयुष क्षेत्र को और सशक्त बनाया जाएगा।

इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण पहलें भी शुरू की गईं, जिनमें आयुष उपचार के लिए बीमा कवरेज बढ़ाने हेतु समझौता, मंत्रालय का व्हाट्सएप चैनल लॉन्च, आयुष बीमा दरों का दस्तावेज जारी करना और हेल्पलाइन नंबर 1800-11-0008 की शुरुआत शामिल है।

कार्यक्रम में उद्यमिता, कौशल विकास, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और मीडिया रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, ताकि आयुष को एक प्रभावी और विश्वसनीय स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में स्थापित किया जा सके।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में नीति निर्धारकों, विशेषज्ञों और हितधारकों ने शिक्षा, अनुसंधान, सेवा वितरण, डिजिटलाइजेशन और जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।

शिविर का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि आयुष क्षेत्र को सशक्त बनाकर 2047 तक स्वस्थ और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।


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