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जापान से आए एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल ने देखा छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत का वैभव, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर ने किया अभिभूत

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छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन के लिए आयोजित किया विशेष हेरिटेज टूर

लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार सहित प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का किया भ्रमण

 वैश्विक अकादमिक एवं पर्यटन संवाद में सिरपुर को नई पहचान दिलाने की पहल

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड  ने जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया। अकादमिक एवं शोध सहयोग के उद्देश्य से 12 से 14 सितंबर 2026 तक एनआईटी रायपुर द्वारा होस्ट किए गए जापानी डेलीगेशन ने 14 सितंबर को प्राचीन ऐतिहासिक नगरी  सिरपुर का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की उस विरासत को करीब से जाना, जिसमें बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

मुख्य हॉस्पिटैलिटी एवं आयोजन सहयोगी के रूप में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए सिरपुर में विशेष हेरिटेज टूर की व्यवस्था की। डेलीगेशन को सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ स्थानीय गाइड की सेवाएं ली गईं। साथ ही जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष हॉस्पिटैलिटी एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई।

सिरपुर - इतिहास, धर्म और स्थापत्य का अद्भुत संगम

महानदी के तट पर बसा सिरपुर प्राचीन काल में  श्रीपुर  के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। वर्तमान सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विस्तृत संसार सामने आया है। यहां बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े अनेक पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस ऐतिहासिक नगरी के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करते हुए यहां की स्थापत्य परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक जीवन को समझा। उनके लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और विरासत संवाद का एक जीवंत अनुभव रहा।

लक्ष्मण मंदिर - ईंटों में उकेरी अद्भुत स्थापत्य कला

डेलीगेशन के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी सिरपुर की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करती है। मंदिर परिसर में पुरातात्विक महत्व की अनेक प्रतिमाएं और अवशेष भी संरक्षित हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर की संरचना, गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित इसकी स्थापत्य विशेषताओं को देखा तथा स्थानीय गाइड से मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की जानकारी प्राप्त की।

आनंद प्रभु कुटी विहार ने बताया सिरपुर का बौद्ध वैभव

इसके बाद डेलीगेशन ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार की संरचना में केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर कक्षों की व्यवस्था तथा सुंदर नक्काशीदार स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यहां बुद्ध की प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेष इसकी बौद्ध विरासत को विशेष बनाते हैं। उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों के अनुसार यहां 14 कक्षों वाला मठीय परिसर रहा है।

जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने यहां प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी ली। यह स्थल उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि जापान की अपनी सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला का गहरा प्रभाव रहा है। 

स्वास्तिक विहार - प्राचीन वास्तु योजना का अनूठा उदाहरण

डेलीगेशन ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार विन्यास के कारण यह विहार सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में विशेष पहचान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध एवं पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाएं और अन्य बौद्धकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विहार की संरचना और प्राचीन वास्तु योजना को समझा तथा यह जाना कि सदियों पूर्व सिरपुर किस प्रकार धार्मिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।

तीवरदेव महाविहार में दिखा बौद्ध और भारतीय कला का समन्वय

हेरिटेज टूर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तीवरदेव महाविहार रहा। सिरपुर के प्रमुख बौद्ध स्मारकों में शामिल इस परिसर की कला में बौद्ध एवं हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी, पौराणिक एवं अन्य अलंकरणात्मक शिल्प दिखाई देते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस स्थल को भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया और यहां की कलात्मक विशेषताओं को करीब से देखा। यह अनुभव विशेष रूप से अकादमिक एवं शोध पृष्ठभूमि से आए सदस्यों के लिए ज्ञानवर्धक रहा।

पुरातात्विक विरासत के विस्तृत संसार से हुए परिचित

सिरपुर में अब तक हुए उत्खननों से अनेक बौद्ध विहारों, शिव एवं विष्णु मंदिरों तथा जैन परंपरा से जुड़े अवशेषों का पता चला है। यहां 12 बौद्ध विहार, एक जैन विहार, बुद्ध एवं महावीर की प्रतिमाओं के साथ अनेक शिव और विष्णु मंदिरों के अवशेष सामने आए हैं। इसी समृद्ध पुरातात्विक परिदृश्य को जापानी डेलीगेशन ने स्थल पर पहुंचकर अनुभव किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की योजना और मंदिर स्थापत्य को विशेष रुचि के साथ देखा तथा कई स्थलों की जानकारी और दस्तावेजीकरण में भी रुचि दिखाई।

अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने हेरिटेज टूर को केवल स्मारक भ्रमण तक सीमित न रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य से जोड़ने का भी प्रयास किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के खान-पान की पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन व्यवस्था की गई तथा स्थानीय गाइडों ने सरल एवं रोचक तरीके से सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान जापानी विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने सिरपुर की प्राचीनता, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता में विशेष रुचि दिखाई। उनके लिए यह अनुभव भारत की विरासत को अकादमिक अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर बना।

एनआईटी रायपुर ने सराहा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का सहयोग

एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से किए गए समन्वय और आतिथ्य ने जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के लिए इस सांस्कृतिक यात्रा को सहज, यादगार और ज्ञानवर्धक बनाया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इस तरह के हेरिटेज टूर केवल पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से प्रतिनिधिमंडल को सिरपुर की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने और अनुभव करने का अवसर मिला।

वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल का सिरपुर भ्रमण छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक, सांस्कृतिक और पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का यह प्रयास राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को केवल घरेलू पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक यात्रियों, शोधार्थियों और सांस्कृतिक अध्येताओं के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सिरपुर जैसे विरासत स्थलों में इतिहास, धर्म, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की ऐसी कहानी समाहित है, जो भारत की प्राचीन ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा को विश्व के सामने प्रस्तुत करने की व्यापक संभावनाएं रखती है। जापान के विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों का यह भ्रमण इसी वैश्विक सांस्कृतिक संवाद की एक सार्थक कड़ी बना, जिसने छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और जापान की अकादमिक दुनिया के बीच एक नया सेतु तैयार किया।

धनपुर की पुरातात्विक धरोहरों को मिलेगा संरक्षण और संवर्धन का नया आधार

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संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर विशेषज्ञ दल ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर एवं शहरखेरवा का किया व्यापक सर्वेक्षण

रायपुर- संस्कृति मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देशानुसार गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर से पहुंचे चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने जिले के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का व्यापक मैदानी सर्वेक्षण एवं सूक्ष्म निरीक्षण किया।

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर के साथ बेनीबाई, भस्मासुर टापू एवं शहरखेरवा स्थित पुरातात्विक धरोहरों का निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति, ऐतिहासिक महत्व, संरक्षण की आवश्यकता तथा भविष्य में विकसित की जा सकने वाली संभावनाओं का अध्ययन किया।

उल्लेखनीय है कि मंत्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश के बाद संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय, महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइंस रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।

चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने किया मैदानी अध्ययन

रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल में पुरातत्ववेत्ता प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज एवं शोधकर्ता अमर भारद्वाज शामिल रहे। दल ने विभिन्न स्थलों का मौके पर पहुंचकर बारीकी से अध्ययन किया तथा पुरातात्विक अवशेषों, मूर्तियों और स्मारकों की स्थिति का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।

धनपुर की प्राचीन धरोहरों का सूक्ष्म निरीक्षण

विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर में स्थित प्राचीन मंदिर एवं वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने मंदिर की संरचना, परिसर में मौजूद पुरातात्विक अवशेषों तथा उनके संरक्षण की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया।

इसके साथ ही धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों एवं अन्य पुरावशेषों का भी गहन अवलोकन किया गया। दल ने इन पुरावशेषों के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का अध्ययन करते हुए उनके संरक्षण, रखरखाव और प्रभावी प्रबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किया।

प्राचीन मंदिर परिसर का निरीक्षण करते हुए विशेषज्ञों ने संरचना के संरक्षण एवं आवश्यक सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का भी जायजा लिया।

बेनीबाई और भस्मासुर टापू की धरोहरों का भी अध्ययन

सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई एवं भस्मासुर टापू में संरक्षित एवं स्थापित प्राचीन मूर्तियों का भी बारीकी से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने इन धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव तथा संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया। मौके पर उपलब्ध पुरातात्विक सामग्री और स्मारकों की स्थिति को देखते हुए आवश्यक संरक्षण उपायों की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।

शहरखेरवा में पुरातात्विक संभावनाओं की तलाश

विशेषज्ञ दल ने ऐतिहासिक महत्व के स्थल शहरखेरवा का भी विस्तृत सर्वे किया। यहां उपलब्ध पुरातात्विक अवशेषों एवं संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं का अध्ययन किया गया। विशेषज्ञों ने स्थल की विशेषताओं और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संरक्षण एवं आगे के अध्ययन की संभावनाओं का जायजा लिया।

कलेक्टर ने विशेषज्ञ दल के साथ की बैठक

क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं निरीक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर विजय दयाराम के. ने रायपुर से आए विशेषज्ञ दल के साथ बैठक कर सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली। बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरतों तथा आवश्यक कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों एवं स्मारकों के संरक्षण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित आवश्यक कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र में मौजूद प्राचीन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इन धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए योजनाबद्ध और व्यापक प्रयास किए जाएंगे, ताकि जिले की इस महत्वपूर्ण विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाई जा सके।

संरक्षण के साथ पर्यटन विकास की भी संभावनाएं

धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का यह सर्वेक्षण केवल संरक्षण की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि भविष्य में इन स्थलों को सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी आधार तैयार कर सकता है। व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास से इन ऐतिहासिक स्थलों को जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की संभावनाएं मजबूत होंगी।

पूरे फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन एवं ग्राम पंचायत धनपुर की टीम विशेषज्ञ दल के साथ मौजूद रही और सर्वेक्षण कार्य के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।

शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान, आत्मगौरव, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक - मुख्यमंत्री साय

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नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन, सियान सदन और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने की घोषणा

101 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

मुख्यमंत्री सोनाखान में आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान छत्तीसगढ़ के आत्मगौरव, संघर्ष और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। वे आज सोनाखान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को नमन करने पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद के वंशजों को सम्मानित किया और क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। मुख्यमंत्री ने सोनाखान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण हेतु 75 लाख रुपये, सियान सदन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा मड़ई मेला स्थल में शौचालय निर्माण के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सोनाखान में इको-टूरिज्म विकास और सड़क निर्माण हेतु आवश्यक प्रावधान आगामी बजट में शामिल किए जाएंगे जिससे इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार एवं सुविधाओं में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह अंग्रेजी शासन के अत्याचार के विरुद्ध गरीबों, किसानों और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े हुए एक ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने भीषण अकाल के समय गरीबों में अनाज बांटकर मानवता की ऐतिहासिक मिसाल पेश की। अंग्रेजी हुकूमत ने 10 दिसंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी, किंतु उनका बलिदान सदियों से संघर्ष, स्वाभिमान और अन्याय के प्रतिकार की प्रेरणा देता आया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया है और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर काम कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने रायपुर के जयस्तंभ चौक में वीर नारायण सिंह को फांसी दी थी। वे अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए और उनका बलिदान पीढ़ियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विकास और कल्याण के लिए सरकार सतत् कार्यरत है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 101.44 करोड़ रुपये की लागत के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण के 10 हितग्राहियों को घरों की चाबियाँ सौंपी तथा ‘हम होंगे कामयाब’ कार्यक्रम के अंतर्गत 37 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। आदिवासी समाज के पाँच प्रतिभावान छात्रों को भी मंच पर सम्मानित किया गया। समारोह में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े तथा शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेंद्र दीवान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  द्वारा जिन कार्यों का लोकार्पण किया गया उनमें ग्राम ओड़ान, खरतोरा, सकरी (स) और दतान (ख) में 9.88 करोड़ रुपये की लागत से रेट्रोफिटिंग नल-जल प्रदाय योजनाएँ तथा गोरधा में एकल नल-जल प्रदाय योजना शामिल है। जिन कार्यों का भूमिपूजन किया गया उनमें अर्जुनी में 5.84 करोड़ रुपये की लागत से जोंक शीर्ष जीर्णोद्धार एवं तटबंध निर्माण, लवन शाखा नहर के तिल्दा, करदा लाटा एवं सिरियाडीह माइनर के 3.63 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण, मटिया नाला में 3.36 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण, परसाडीह के खोरसीनाला में 2.99 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण और लाहोद में 2.60 करोड़ रुपये की लागत से निरीक्षण कुटीर एवं आवासीय भवन निर्माण कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं।

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