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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे 13 फरवरी को मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ

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भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी और बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर की होगी प्रस्तुति 

एडवेंचर स्पोर्ट्स और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुलजार होगा छत्तीसगढ़ का शिमला

रायपुर- छत्तीसगढ़ के शिमला और छोटा तिब्बत के नाम से प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय मैनपाट महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। यह महोत्सव रोपाखार जलाशय के समीप 13 से 15 फरवरी तक आयोजित किया जाएगा। इस महोत्सव का आयोजन राज्य शासन के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल करेंगे। 

मैनपाट महोत्सव में लोक गीत और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 13 फरवरी को भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी प्रस्तुति देंगे। साथ ही, छत्तीसगढ़ी गायक सुनील सोनी और ओडिशा का प्रसिद्ध छऊ नृत्य की प्रस्तुति होगी। 14 फरवरी को छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक गायिका अलका चंद्राकर और इंडियन आइडल फेम वैशाली रायकवार अपनी सुरीली आवाज से शाम को यादगार बनाएंगी। 15 फरवरी को महोत्सव का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की मशहूर सिंगर कनिका कपूर होंगी। इसके साथ ही रायगढ़ घराने की कत्थक नृत्यांगना ज्योतिश्री वैष्णव और गायक आयुष नामदेव भी अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके साथ ही स्थानीय कलाकार और स्कूली बच्चों के द्वारा भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। 

जिला प्रशासन द्वारा मैनपाट महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस मौके पर  विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जा रही है, जहां शासन की योजनाओं और स्थानीय उत्पादों जैसे टाऊ और तिब्बती हस्तशिल्प का प्रदर्शन होगा। महोत्सव स्थल पर एडवेंचर एक्टिविटी में पर्यटकों के लिए बोटिंग, साहसिक खेल और पारंपरिक दंगल का आयोजन किया जाएगा। महोत्सव स्थल पर सुरक्षा, पार्किंग और पर्यटकों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। फूड ज़ोन में सरगुजा के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जा सकेगा। 

मैनपाट के प्रमुख आकर्षण

अंबिकापुर मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित मैनपाट एक बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है, जोकि समुद्र तल से 3,781 फीट की ऊंचाई पर है। मैनपाट में बड़ा तिब्बती समुदाय बसा है, जहां का थाकपो शेडुप्लिंग मठ मुख्य आकर्षण है। जलजली- यह एक भूगर्भीय आश्चर्य है जहाँ जमीन दलदली है और कूदने पर स्पंज की तरह हिलती है, इसे म्यूजिकल लैंड भी कहते हैं। उल्टा पानी- यहाँ का पानी ढलान के विपरीत दिशा में बहता है, जो एक अनसुलझा रहस्य है। इसके अलावा टाइगर पॉइंट, मछली पॉइंट, मेहता पॉइंट, सरभंजा जलप्रपात जैसे अनेक दर्शनीय स्थान हैं।

छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव: 1 से 5 नवम्बर तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की होगी शानदार प्रस्तुतियां

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मुख्यमंच और शिल्पग्राम मंच में कलाकार बिखेरेंगे मनमोहक छटा

पहले दिन पार्श्व गायक हंशराज रघुवंशी होंगे आकर्षण का केन्द्र

छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कलाकार भी देंगे अपनी प्रस्तुति

रायपुर-छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत महोत्सव में देश एवं प्रदेश के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। एक नवम्बर से 5 नवम्बर तक मुख्यमंच के अलावा शिल्पग्राम मंच पर भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। राज्योत्सव में इस बार छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय कलाकारों के साथ ही देश के जाने-माने कलाकार,हंशराज रघुवंशी,आदित्य नारायण,अंकित तिवारी, कैलाश खेर, भूमि त्रिवेदी अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। 

राज्योत्सव के शुभारंभ अवसर पर नवा रायपुर के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी वाणिज्य एवं व्यापार परिसर में बनाये गए मुख्यमंच से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत सुबह 11 बजे ऐश्वर्या पंडित के गायन से होगी। इसके बाद पीसी लाल यादव, आरू साहू, दुष्यंत हरमुख, निर्मला ठाकुर तथा शाम 8 बजे राष्ट्रीय कलाकार हंशराज रघुवंशी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 2 नवम्बर को सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक आदित्य नारायण प्रमुख आकर्षण के केन्द्र होंगे। उनके द्वारा गीतों की प्रस्तुति रात्रि 9 बजे से दी जाएगी। इस दिन सांस्कृति कार्यक्रमों की शुरूआत शाम 6.30 बजे से होगी। सबसे पहले सुनील तिवारी, जयश्री नायर चिन्हारी द गर्ल बैंड, पद्मश्री डोमार सिंह कंवर नाचा दल का कार्यक्रम होगा। 

इसी प्रकार 3 नवम्बर को पार्श्व गायिका भूमि त्रिवेदी रात्रि 9 बजे से प्रस्तुति देंगी। इस दिन सांस्कृति संध्या में शाम 6 बजे से पद्मश्री उषा बारले पण्डवानी,राकेश शर्मा सूफी-भजन गायन, कुलेश्वर ताम्रकार लोकमंच की प्रस्तुति होगी तथा 4 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक अंकित तिवारी प्रस्तुति देंगे। इस दिन शाम 6 बजे कला केन्द्र रायपुर बैण्ड, रेखा देवार की लोकगीत,प्रकाश अवस्थी की प्रस्तुति होगी। इसी प्रकार 5 नवम्बर को रात्रि 9 बजे पार्श्व गायक कैलाश खेर अपनी प्रस्तुति देंगे। सांस्कृतिक संध्या में शाम 6 बजे से पूनम विराट तिवारी, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ का कार्यक्रम होगा। 

शिल्पग्राम मंच की प्रस्तुतियां-

शिल्पग्राम मंच में 1 नवम्बर को मोहम्मद अनस पियानो वादन, बासंती वैष्णव द्वारा कत्थक, रमादत्त जोशी और सोनाली सेन का गायन,स्वीटी पगारिया कत्थक,मंगलूराम यादव की बांसगीत, चारूलता देशमुख भारत नाट्य, दुष्यंत द्विवेदी की पण्डवानी, लोकेश साहू की भजन, बॉबी मंडल की लोक संगीत तथा चन्द्रभूषण वर्मा लोकमंच की प्रस्तुति होगी। 

2 नवम्बर को रेखा जलक्षत्रीय की भरथरी, ईकबाल ओबेराय की म्यूजिक ग्रुप, बसंतबीर उपाध्याय मानस बैंड, दीपाली पाण्डेय की कत्थक, लिलेश्वर सिंहा की लोक संगीत,अंविता विश्वकर्मा भारतनाट्यम, आशिका सिंघल कत्थक, प्रांजल राजपूत भरथरी, प्रसिद्धि सिंहा कत्थक,जीवनदास मानिकपुरी लोकमंच एवं जितेन्द्र कुमार साहू सोनहा बादर की प्रस्तुति होगी। 

3 नवम्बर को सुरेश ठाकुर भजन, डॉ. आरती सिंह कत्थक, राखी राय भरतनाट्यम, पुसउराम बंजारे पण्डवानी, इशिका गिरी कत्थक, गिरवर सिंह ध्रुव भंुजिया नृत्य, राधिका शर्मा कत्थक, शांतिबाई चेलक पण्डवानी, दुष्यंतकुमार दुबे सुआ नृत्य, गंगाबाई मानिकपुरी पण्डवानी, संगीता कापसे शास्त्रीय नृत्य,महेन्द्र चौहान की चौहान एव बैंड तथा घनश्याम महानंद फ्यूजन बैंड की प्रस्तुति होगी। 

4 नवम्बर को भुमिसूता मिश्रा ओडिसी, चैतुराम तारक नाचा दल, आशना दिल्लीवार कत्थक, पुष्पा साहू लोक संगीत, महेन्द्र चौहान पण्डवानी, प्रिति गोस्वामी कत्थक, पृथा मिश्रा शास्त्रीय गायन, महेश साहू लोकमंच, विजय चंद्राकर लोक संगीत तथा तिलक राजा साहू लोकधारा की प्रस्तुति होगी। 

5 नवम्बर को दुर्गा साहू पण्डवानी, डाली थरवानी कत्थक, संजय नारंग लोकसंगती, सारिका शर्मा कत्थक, महेश्वरी सिंहा लोकमंच, चंद्रशेखर चकोर की लोक नाट्य,नीतिन अग्रवाल लोकसंगीत, द्वारिकाप्रसाद साहू की डंडा नृत्य, महुआ मजुमदार की लोकसंगीत तथा नरेन्द्र जलक्षत्रीय लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।

छत्तीसगढ़ के संस्कृति में रचा बसा है सुआ नृत्य, अंचल में मची सुआ नृत्य की धूम

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आरंग- इन दिनों अंचल के गांव-गांव में सुआ नृत्य की धूम मची है। दीपावली का पर्व पास आते ही बालिकाएं व महिलाएं घर घर व गली मोहल्ले में समूह में पहुंचकर सुआ गीत के साथ नृत्य करती है। जिसमें अनेक धार्मिक और सामाजिक संदेश परक गीत गाकर गोल घेरा में तालियों की थपोलियों बजाकर नृत्य करती है।यह नृत्य समूह में किया जाता है जिसमें किसी भी प्रकार के वाद्ययंत्रों की आवश्यकता नहीं होती।जिसमें कुछ बालिकाएं व युवतियां गीत गाती है जिसे शेष लोग दोहराती हुए नाचती है। सुआ नृत्य के समापन पर सुआ के लिए अन्न धन मांगती है।अन्न धन मिलने पर आशीर्वाद स्वरुप गीत गाकर आशीष देती है। सुआ नृत्य की परंपरा कब से चली आ रही है इसकी कोई लिखित साक्ष्य नहीं है। सुआ एक शाकाहारी पक्षी है जो हू बहू मनुष्य की आवाज निकाल सकती है। कुछ लोगों का कहना है पहले युवतियां अपनी मन की बातों को सुआ पक्षी के सामने प्रकट करती रही होंगी जो आगे चलकर गीत और बाद में नृत्य का रूप ले ली होंगी।

वहीं संस्कृति प्रेमी शिक्षक महेन्द्र पटेल का कहना है,सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचा बसा है। दीपावली समीप आते ही बालिकाएं सुआ नृत्य के लिए काफी उत्साहित रहती है। बालिकाएं व महिलाएं दीपावली के साथ साथ तीजा,पोला,छेरछेरा,शरद पूर्णिमा में भी यह नृत्य विशेष रूप से की जाती है।आजकल गांव गांव में सुआ नृत्य प्रतियोगिता भी आयोजित होने लगी है। शिक्षक महेन्द्र पटेल ने बताया शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में भी बच्चों ने सुआ नृत्य कर अपने संस्कृति का स्मरण किया।




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